Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 10 तरुण के स्वप्न Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न Question Answer
तरुण के स्वप्न Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 10 Question Answer – Class 8 Hindi तरुण के स्वप्न Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
• सुभाषचंद्र बोस के लिए
• देश के तरुण वर्ग के लिए
• चित्तरंजन दास के लिए
• भारतवासियों के लिए
उत्तर:
• भारतवासियों के लिए
प्रश्न 2.
स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा ?
• आर्थिक असमानता से
• स्त्री-पुरुष के भिन्न धकारों से
• श्रम और कर्म की मर्यादा से
• जातिभेद से
उत्तर:
• श्रम और कर्म की मर्यादा से
प्रश्न 3.
” उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं। ” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
• हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
• उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है।
उत्तर:
• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
प्रश्न 4.
जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब-
• राष्ट्र की श्रम शक्ति बढ़ेगी
• तरुणों का साहस बढ़ेगा
• राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
• राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
उत्तर:
राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
तरुणों का साहस बढ़ेगा
राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव – विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।
स्तंभ 1
स्तंभ 2
1.“ इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं। “
1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो ।
2.“जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”
2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
3.“उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं। “
3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
उत्तर: 1. -2, 2.-3, 3.-1.
स्तंभ 1
स्तंभ 2
1.“ इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं। “
2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
2.“जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”
3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
3.“उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं। “
1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो ।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा । ”
(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो ।”
उत्तर –
अर्थ जो समझ में आया-
(क) सुभाषचंद्र बोस चाहते थे कि एक ऐसा समाज बने, जिसमें सभी के पास पर्याप्त धन हो, ताकि सभी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें।
(ख) महान स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वप्न देखा था उसी से उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति और आनंद मिलता रहा। इसी की प्रेरणा से वे राष्ट्र को स्वतंत्र कराने का कार्य करते रहे।
(ग) नेताजी चाहते थे कि स्वाधीन राष्ट्र में ऐसा समाज होगा, जिसमें व्यक्तियों को समान अधिकार होंगे, किसी प्रकार का जातिभेद नहीं होगा तथा सभी आर्थिक दृष्टि से समान होंगे।
सोच-विचार के लिए
अब आप इस पाठ को पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-
(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
उत्तर:
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने ऐसे राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था, जिसमें पुरुष और महिला के अधिकार समान हों, सभी को समान अधिकार मिलें, जातीय आधार पर कोई छोटा या बड़ा नहीं होगा तथा आर्थिक समानता होगी।
(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा ?
उत्तर-
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देश को गुलामी से मुक्ति दिलाकर स्वाधीनता की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा ।
( ग ) ” आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा ” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर-
“आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” ऐसा इसलिए कहा होगा, क्योंकि ऐसे लोग समाज के उत्थान में अपना योगदान नहीं देते हैं। वे खुद काम नहीं करके दूसरों का मनोबल गिराते हैं। ऐसे लोगों के सहारे देश की स्वाधीनता का सपना पूरा नहीं किया जा सकता है।
(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
उत्तर –
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी कई काम कर सकती है;
जैसे-
जाति-धर्म के नाम पर संप्रदायों में न बँटे ।
लोगों में एकजुटता बनाए रखने का प्रयास करें।
सभी धर्मों का समान आदर करें।
अफवाहों पर ध्यान न दें तथा धर्म के नाम पर गुमराह न हों।
राष्ट्रविरोधी ताकतों के बहकावे में न आएँ।
देश के लिए तन, मन और धन देने के लिए तैयार रहें।
अनुमान और कल्पना से
(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी ?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस ने –
आर्थिक असमानता
अधिकारों में भिन्नता
शिक्षा के अवसरों की असमानता
आलस्य और अकर्मण्यता आदि दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी।
(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान ‘अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
उत्तर-
” उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात इसलिए कहनी पड़ी क्योंकि उस समय समाज में पुरुष और महिला के अधिकारों में असमानता थी। महिलाओं को घर की चार दीवारी तक सीमित कर दिया गया था। इससे वे समाज की उन्नति में अपना योगदान नहीं दे पा रही थीं।
(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर:
हमारे समाज में उन लोगों को विशेष अधिकार देने की आवश्यकता है जो-
शिक्षा से वंचित हैं।
आर्थिक अभावों में जी रहे हैं।
समाज में अछूत समझे जाते हैं।
अपमानित जीवन जीने को विवश हैं।
(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं- “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं- “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही इसलिए सीमित रहा होगा, क्योंकि उस भीड़ को जिसे नेताजी संबोधित कर रहे थे, उसमें तरुण वर्ग की संख्या बहुत अधिक रही होगी महिलाओं की संख्या बहुत कम रही होगी।
(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ- स्वीकार करो। ” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं ( युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
उत्तर:
” यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ-स्वीकार करो। ” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही होगी। श्रोताओं की रगों में स्वाधीनता की भावना दौड़ गई होगी। वे जोश, उमंग तथा कर्तव्यनिष्ठा से भर उठे होंगे। वे अपनी स्वाधीनता पाने के लिए लालायित हो गए होंगे।
शीर्षक
(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर-
यह शीर्षक इसलिए दिया गया होगा, क्योंकि तरुण वर्ग इस देश का भविष्य है। वह आजादी में जीने का सपना देखता होगा, जिसे पूरा करने के लिए त्याग और बलिदान करने का जोश आवश्यक था।
नोट- छात्र अपने समूह में इस बारे में स्वयं चर्चा करें।
(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो, तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर:
यदि मुझे भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो, तो मैं नाम दूँगा- ‘जागो युवाओ’। इसका कारण यह है कि युवा वर्ग में जागरूकता बढ़े। वह देश एवं समाज के लोगों की पहली जरूरत (स्वाधीनता) महसूस करे और इसे पाने के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हो जाए ।
(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले, तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो मैं- ऊँची शिक्षा पाने, जाति-धर्म के विवादों से दूर रहने, सपनों की दुनिया में न खोए रहने, देशप्रेम की भावना बनाए रखने, आलस्य और अकर्मण्यता का त्याग करने तथा ऊँच-नीच की भावना त्यागने जैसे विषयों को संबोधित करूँगा।
मैं इसका शीर्षक रखूँगा – ‘देश को युवाओं से अपेक्षा’ ।
भाषा की बात
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए-
उत्तर:
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
उत्तर-
मैं इन शब्दों को निम्नलिखित विशेषताओं के साथ रखना चाहूँगा-
इसका कारण यह है कि ये शब्द भी उक्त शब्दों की विशेषता बता रहे हैं।
विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
(क) “ और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने- सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-
उत्तर:
1. – (iii), 2. – (v), 3. – (vi), 4. – (vii), 5. – (ii), 6. – (i), 7. – (iv).
(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे- “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है। ”
उत्तर:
मुझे तुम्हारी दो बातें स्वीकार हैं, बाकी सब अस्वीकार हैं।
‘पानी-वानी’ शब्द युग्म में पानी सार्थक शब्द है, जबकि ‘वानी’ निरर्थक शब्द है।
पहले समाज में बहुत विषमता थी, पर अब धीरे- धीरे समानता आ रही है।
यह टीला बहुत क्षुद्र है, जबकि वह पर्वत विशाल है।
कुछ संपन्न लोगों ने इन विपन्न लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है।
इस समूह में अकर्मण्य व्यक्ति नहीं रहेंगे, केवल कर्मठ लोग ही रहेंगे।
इस सृष्टि में मरण है, तो जीवन भी है।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
विद्यालय के बारे में मेरे स्वप्न-
हमारा विद्यालय साफ़-सुथरा हो।
किसी छात्र से भेदभाव न किया जाए।
प्रयोगशाला और पुस्तकालय सुसज्जित हों।
हर जगह साफ़-सफ़ाई हो।
पानी की समुचित व्यवस्था हो।
पढ़ाई की उत्तम व्यवस्था हो।
कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
नोट- राज्य और देश के बारे में छात्र स्वयं लिखें।
(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
बड़े संघर्षो के बाद मिली स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए मैं-
देश विरोधी कोई कार्य नहीं करूँगा ।
देश से जुड़ी कोई जानकारी किसी अपरिचित को नहीं दूँगा ।
देश की आन-बान और शान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार रहूँगा ।
लोगों से एकता बनाए रखने की प्रार्थना करूंगा।
मिलान कीजिए
(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
1. – 6, 2. – 4, 3.- 5, 4.- 2, 5.- 1, 6. – 3.
(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए ।
उत्तर:
देशबंधु चित्तरंजन दास
सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन’ की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए किए गए उल्लेखनीय प्रयास –
कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए योजनाएँ बनाई गईं।
शिक्षा प्रसार के लिए विद्यालय खोले गए ।
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया।
रोजगार हेतु कार्यक्रम चलाए गए।
स्त्री सशक्तीकरण
(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधि कार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर:
स्त्रियों को मिले कुछ विशेषाधिकार हैं-
मातृत्व लाभ
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से मुक्ति
घरेलू हिंसा से सुरक्षा
समान काम के लिए समान वेतन
पैतृक संपत्ति में अधिकार
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए ।
उत्तर:
1943 में सुभाषचंद्र बोस द्वारा झाँसी की रानी रेजिमेंट बनाई गई। यह आजाद हिंद फौज की महिला टुकड़ी थी। इसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध किया गया। इस युद्ध में इस महिला टुकड़ी ने बर्मा के मोर्चों पर जापानी सेना के साथ मिलकर युद्ध किया था।
आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी
आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय ( रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर:
मैं अमर शहीद भगत सिंह से प्रभावित हूँ। वे अपने आप में अनूठे स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने असेंबली में बम फेंका। उनको जॉन सांडर्स की हत्या का दोषी ठहराया गया। उन्हें 23 मार्च, 1931 को लाहौर षडयंत्र में फाँसी दे दी गई।
नोट- छात्र स्वयं बताएँ कि वे किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं।
छात्र स्वयं अभिनय करें।
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ नारे के माध्यम से आह्वान किया था। स्वाधीनता संग्राम के दौरान और भी बहुत से नारे दिए गए। ये नारे स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, निर्भीकता और देश-प्रेम को दर्शाते हैं। नीचे स्तंभ 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
नारा
स्वतंत्रता सेनानी
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।
बाल गंगाधर तिलक
करो या मरो
महात्मा गांधी
मैं आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा और आज़ाद ही मरूँगा
चंद्रशेखर आज़ाद
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
भगतसिंह
पूर्ण स्वराज
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रस्ताव जो जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पारित हुआ।
परियोजना कार्य
आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक- – दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुने।
उत्तर: नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 149 पर दी गई गतिविधि स्वयं पढ़ें तथा करें।
झरोखे से
आपने जो पाठ पढ़ा है उसमें सुभाषचंद्र बोस तरुणों से अपने सपनों की बात करते हैं। अब आप नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा लिखित पत्र पढ़िए जिसमें उन्होंने गृह एवं कुटीर उद्योग पर अपने विचार व्यक्त किए हैं-
गृहउद्योग के विषय में नेताजी का एक पत्र
मुझे जहाँ तक याद है (मैं मात्र एक बार ‘पॉलिटेकनीक’ में गया था), पॉलिटेकनीक के सभी कामों में एकमात्र बेंत का काम अथवा मिट्टी के खिलौने बनाने का काम हमें गृह उद्योग के रूप में चलाना होगा। अब यदि अंत में मिट्टी के खिलौने बनाने का काम चलाने का प्रस्ताव हो तो कोई भी कुछ दिनों में ही यह काम सीख सकता है। खर्च कुछ भी नहीं लगेगा और हम जब गृह उद्योग प्रारंभ करेंगे तब मात्र रंगों के लिए कुछ नकद रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा बहुत कम खर्च होगा।
एक बात मेरे मन में बार-बार उठती रहती है- पहले भी शायद इस विषय में मैंने लिखा है- सीप के बटन तैयार करना। बंगाल के बहुत-से गाँवों में यह काम घर-घर में हो रहा है। गरीब गृहस्थों के घरों में स्त्री-पुरुष अपनी फुरसत के समय में यह काम करते रहते हैं। किसी एक कार्यकर्ता को बहुत कम समय में यह काम सिखाया जा सकता है। अथवा यह काम जानने और सिखाने वाले एक नए कार्यकर्ता को आप लोग नियुक्त कर सकते हैं। मुझे लगता है कि पत्थरों के ऊपर घिसकर बटन बनाया जा सकता है— हम चाहें तो बना सकते हैं। सिर्फ पतला कोई यंत्र हो जिससे छेद किया जा सके। इसके अलावा गोल काटने के लिए एक धारदार यंत्र की आवश्यकता पड़ सकती है। समिति की ओर से कुछ यंत्र और एक बोरा सीप मँगाकर ही यह काम प्रारंभ किया जा सकता है। काम सहायता प्रार्थियों में आबद्ध रहेगा, किंतु एक बार कारगर होने पर आप देखेंगे कि गरीब परिवार अपनी आय बढ़ाने के लिए यह काम स्वयं आरंभ कर देगा। समिति सिर्फ सस्ते दामों में रॉ मैटीरियल आदि जुटा देगी और तैयार वस्तुओं को अधिक दामों में बेचने की व्यवस्था करेगी। यह काम आरंभ करना पड़ा तो पहले-पहल इसके लिए बहुत अधिक समय देना होगा।
बंगाल में बटन-निर्माण गृह-उद्योग के रूप में ही चल रहा है। बहुतों का खयाल है कि बंगाल के बटन फैक्टरी में बनते हैं किंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। गाँव-देहात के घर-घर में, फुरसत के समय, यहाँ तक कि रसोई के समय में से बचे खाली समय में भी, स्त्रियाँ यह काम करती रहती हैं इसीलिए इतने सस्ते में यह बटन मिलते हैं।
– दक्षिण कलकत्ता सेवक-समिति के उप-मंत्री, श्री अनिलचंद्र विश्वास को मांडले जेल से लिखे गए सुभाषचंद्र बोस के पत्र से। उत्तर: नोट- छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 149 पर दिया गया सुभाषचंद्र बोस द्वारा लिखित पत्र स्वयं पढ़ें तथा चर्चा करें।
साझी समझ
उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए। उत्तर:
नोट- छात्र पत्र पढ़कर स्वयं चर्चा करें।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके आप सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म देख सकते हैं। https://www.youtube.com/watch?v=u_zmDD54dU4 ‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए । उत्तर: नोट- इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके छात्र स्वयं फिल्म देखें।
Class 8 Malhar Chapter 1 Question Answer – Class 8 Hindi स्वदेश Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“ वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-
• सामाजिकता से
• संवेदनहीनता से
• कठोरता से
• नैतिकता से
उत्तर:
• संवेदनहीनता से*
प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
• देश की प्रगति
• देश के प्रति प्रेम
• देश की सुरक्षा
• देश की स्वतंत्रता
उत्तर:
• देश के प्रति प्रेम * • देश की स्वतंत्रता *
प्रश्न 3.
“हम हैं जिसके राजा-रानी” – इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
• देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
• देश की शासन व्यवस्था के लिए
• देश के समस्त नागरिकों के लिए
• देश के सभी प्राणियों के लिए
उत्तर:
• देश के समस्त नागरिकों के लिए *
प्रश्न 4.
कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
• जिसमें साहस की कमी है।
• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है।
• जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है।
• जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है।
उत्तर:
• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है * • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है। *
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
उत्तर चुनने के कारण-
हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि-
संवेदनहीन हृदय किसी प्रकार के सुख-दुख या भावना का अनुभव नहीं कर पाता है। उसमें प्रेम, सद्भाव, लगाव, अपनापन आदि भावनाएँ न जन्म लेती हैं और न विकसित होती हैं। अतः ‘वह हृदय नहीं है पत्थर है’ में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य न होकर संवेदनहीनता है।
‘देशप्रेम’ कविता का मुख्य विषय ‘देश के प्रति प्रेम’ और ‘देश की स्वतंत्रता’ है। कविता के शीर्षक से भी यह बात स्पष्ट हो जाती है। इसके अलावा पूरी कविता में इन्हीं भावों की अभिव्यक्ति है न कि देश की प्रगति और उसकी सुरक्षा की।
हम हैं जिसके राजा-रानी – पंक्ति में ‘हम’ शब्द देश के समस्त देशवासियों के लिए आया है। इसका कारण है कि देश ने यहाँ रहने वालों को अनेकानेक सुख-सुविधाएँ प्रदान की हैं। देशवासी इनका उपभोग कर रहे हैं। इसका प्रयोग प्राकृतिक संसाधनों, शासन व्यवस्था या प्राणियों के लिए नहीं हुआ है।
कविता के अनुसार वह हृदय पत्थर के समान है जिसमें स्नेह और देशप्रेम का भाव नहीं है, क्योंकि इन भावनाओं के अभाव में संवेदनशील होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसके अलावा ऐसा हृदय अपने देश से प्रेम नहीं कर सकता है। नोट – छात्र इन उत्तरों पर स्वयं चर्चा करें।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।
स्तंभ 1
स्तंभ 2
1. जिसने साहस को छोड़ दिया. वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
1. जिस देश की ज्ञान संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।
2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।
3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
उत्तर:
1 – 3; 2 – 4; 3 – 1; 4 – 2.
स्तंभ 1
स्तंभ 2
1. जिसने साहस को छोड़ दिया. वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।
4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।
1. जिस देश की ज्ञान संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “ निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।।”.
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”.
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं हैं, पत्थर है.
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”
उत्तर:
– अर्थ जो समझ में आया-
(क) शरीर की नश्वरता की ओर संकेत करते हुए कवि का कहना है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि मृत्यु निश्चित है। एक न एक दिन सभी को मरना है। काल रूपी दीपक हर समय जल रहा है। मनुष्य को इसी लौ में एक दिन जल जाना है। अतः मौका मिलने पर देश के लिए प्राणों का त्याग करके सुमृत्यु का अवसर नहीं खोना चाहिए।
(ख) कवि मनुष्य से कहता है कि अपने हाथों में तोप भी है, तलवार भी है; बस देश के लिए कुछ कर जाने का साहस और उत्साह होना चाहिए, जिससे देश के लिए हम काम आ सकें। जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह पत्थर के समान है।
(ग) जिस हृदय में देशप्रेम, देशभक्ति, त्याग, बलिदान आदि भाव नहीं हैं और देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना की धार नहीं बहती है, वह हृदय पत्थर के समान संवेदनहीन है।.
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) “हम हैं जिसके राजा- -रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर:
“हम हैं जिसके राजा-रानी” हम समस्त भारतवासियों को कहा गया है। इसका कारण यह है कि वे देश द्वारा दी गई सुख-सुविधाओं का लाभ उठाते हुए सुखमय जीवन जी रहे हैं।
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर:
संसार-संग चलने का अर्थ है- दुनिया के अन्य देशों के समान ही प्रगति पथ पर अग्रसर रहना तथा विभिन्न क्षेत्रों में नई उपलब्धि हासिल करते रहना। जो व्यक्ति संसार के साथ नहीं चलता, वह पिछड़ जाता है, जबकि संसार के अन्य देश आगे निकल जाते हैं। ऐसे में वह संसार से अलग पड़ जाता है।
(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
“उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से मैं यह समझता हूँ कि जो भी व्यक्ति अपने देश से प्रेम नहीं करता, देश के लिए त्याग और बलिदान के लिए तैयार नहीं रहता है, वह पृथ्वी पर बोझ के समान है।
(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
मैं देश-प्रेम से निम्नलिखित भाव समझता हूँ-
देश को सर्वोपरि समझना।
देश के मान-सम्मान का सदैव ध्यान रखना।
देश के प्रति प्रेम अपना समझना, त्याग आदि भाव बनाए रखना।
देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहना।
(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर:
‘स्वदेश’ नामक आह्वान गीत की अन्य विशेषताएँ-
देश के गौरव का ज्ञान कराना।
देशप्रेम रखने की प्रेरणा देना।
संसार के साथ चलने की प्रेरणा देना।
मृत्यु की निश्चितता बताकर देश के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने का भाव जगाना।
देश द्वारा दिए गए सुखों का ज्ञान कराकर कृतज्ञता का भाव जगाना।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।
(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
उत्तर:
“जिसने कि खजाने खोले हैं” इस पंक्ति में देश द्वारा उस खजाने को खोलने की बात कही गई है, जिसमें तरह-तरह के रत्न, धन-दौलत और सुख-सुविधाएँ भरी हैं। इसका लाभ भारतवासी उठाकर सुखमय जीवन जी रहे हैं।
(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर-
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ भारत में रहने वालों के लिए कहा गया होगा, क्योंकि हम भारतीय यहाँ की मिट्टी पर जन्म लेकर बड़े होते हैं। इसी मिट्टी में उपजे अनाज का सेवन करके हम बड़े होते हैं और हृष्ट-पुष्ट होते हैं।
(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
“वह हृदय नहीं है पत्थर है” का प्रयोग इसलिए किया गया होगा, क्योंकि देश की मिट्टी पर जन्म लेकर, यहाँ के अन्न, जल, वायु का सेवन करके पलने-बढ़ने के बाद भी व्यक्ति यदि अपने देश से लगाव नहीं रखता है और देश के प्रति प्रेम नहीं करता, तो वह हृदय पत्थर के समान ही होता है।
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत – पत्थर- जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।… )
उत्तर:
पत्थर द्वारा बताई गई बातें-
किसी समय मैं भी एक बड़े पहाड़ का भाग हुआ करता था। एक बार बादल फटे और मैं अपने सैकड़ों छोटे-बड़े साथियों के साथ नीचे लुढ़कने लगा। नदी की गोद में आते-आते मैं पत्थर की शिलाओं से टकराकर सुडौल बन गया । पर कितना दर्द हुआ, यह बता नहीं सकता। अपने घर से अलग होने और घिसने पिटने का दर्द। ये छोटे-बड़े जो तुम देख रहे हो, वे हमारे ही पूर्वज और भाई-बंधु हैं।
मैं- अच्छी-बुरी परिस्थितियाँ तो सभी के साथ आती रहती हैं। तुमने सुना होगा –
‘सुखरू होता है इंसा ठोकरें खाने के बाद।’ तुम्हारी यह सुडौलता और सुंदरता उन्हीं कष्टों को झेलने का परिणाम है।
(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
देश की अनेक वस्तुओं और संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता है; जैसे-
जल के स्रोत ; जैसे नदी कुएँ, तालाब आदि।
पेड़-पौधे और वनस्पतियाँ
वन्य जीव
देश की कृषि योग्य भूमि
इनके संरक्षण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इनके बिना धरती पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।
कविता की रचना
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें हम हैं जिसके राजा-रानी।।”
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
शब्दों के तुक मिलाने से-
कविता में गेयता आ जाती है।
कविता में सरसता आ जाती है।
सरलता से याद हो जाती है।
कविता रुचिकर हो जाती है।
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर:
कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए-
शब्द चयन
सरल भाषा
देश काल के अनुरूप विषय का चयन
संदेशयुक्त होना
काल्पनिकता के साथ-साथ चित्रमयता
बिंबों का प्रयोग आदि होने चाहिए।
नोट- समूह बनाकर छात्र स्वयं चर्चा करें।
आपकी कविता
देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
__________________________
__________________________
उत्तर:
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें भाव – विचार नहीं।
जो डूबा रहता सदा स्वार्थ में,
जिसमें त्याग और उपकार नहीं।
जो सुख लेता इसी देश का,
पर कुछ करने को तैयार नहीं।
देशप्रेम का भाव जगा लो,
इतने तो लाचार नहीं।
नोट – छात्र स्वयं कविता की पंक्तियाँ जोड़ने का प्रयास करें।
भाषा की बात
(क) शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर
अपनी सूची बढ़ाइए-
उत्तर:
(ख) विराम चिह्नों को समझें
“जो चल न सका संसार-संग”
“बहती जिसमें रस धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी”
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी”
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत- ‘जो चल न सका संसार के संग’)
उत्तर:
“बहती जिसमें रस की धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना और पानी”
“हैं माता और पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा और रानी”
“जिससे न जाति का उद्धार हुआ”
(ग) शब्द – मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल – दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है।’
‘काल – दीप हरदम जलता है।’
• अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।
उत्तर:
• जो भरा नहीं है भावों से
जो भावों से नहीं भरा है।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
माता-पिता बंधु जिनमें हैं।
हम हैं जिसके राजा-रानी,
हम जिसके राजा-रानी हैं।
नवरत्न दिए हैं लासानी,
लासानी नवरत्न दिए हैं।
जिस पर है दुनिया दीवानी,
जिस पर दुनिया दीवानी है।
उस पर है नहीं पसीजा जो,
जो उस पर पसीजा नहीं है।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
निस्संशय निश्चित हैं।
सब कुछ है अपने हाथों में,
अपने हाथों में सब कुछ है।
• अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।
“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।।”
उत्तर:
• हैं जिस पर ज्ञानी भी मरते,
है जिस पर दुनिया दीवानी।
• इन पंक्तियों में क्रियापद पहले आ गया है।
• लयात्मकता में अंतर आ गया है।
नोट – छात्र अपने साथियों से स्वयं चर्चा करें।
(घ) समानार्थी शब्द
कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
भू, दीप, हृदय, तलवार, दुनिया, पत्थर ।
उत्तर:
भू-धरा, पृथ्वी दीप-दीपक, प्रदीप; हृदय-दिल, जी; तलवार-असि कृपाण दुनिया-संसार, जग; पत्थर-पाहन, पाषाण।
कविता का शीर्षक
“वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
उत्तर:
कविता के शीर्षक के लिए पंक्ति-
जिस पर है दुनिया दीवानी ।
इसका कारण यह है कि भारत की प्राकृतिक सुंदरता, यहाँ की समृद्धि, इसकी संस्कृति, अतिथि सत्कार की भावना आदि के कारण विश्व के लोग भारत के दीवाने हैं।
पाठ से आगे
आपकी बात
(कं) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए, जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?
उत्तर:
(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
उत्तर:
जिन चित्रों पर (✓) का चिह्न लगा है, उन्हें हम स्वदेश प्रेम की श्रेणी में रखना चाहेंगे, क्योंकि इन कार्यों से देश के प्रति प्रेम प्रकट होता है। इसके अलावा
रेलगाड़ी में कूड़ा फेंकना
इमारतों को गंदा करना
बिना कारण बिजली का अपव्यय करना
पानी बर्बाद होने देना आदि को स्वदेश प्रेम की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।
हमारे अस्त्र-शस्त्र
“सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।
आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
• विद्यार्थी- _________________________________
• अध्यापक- _________________________________
• कृषक- _________________________________
• चिकित्सक – _________________________________
• वैज्ञानिक- _________________________________
• श्रमिक – _________________________________
• पत्रकार- _________________________________
उत्तर:
• विद्यार्थी- पुस्तकें, कॉपियाँ, कलम, पेंसिलें, ज्योमेट्री बॉक्स आदि।
• अध्यापक- कलम, पुस्तक, डस्टर, मानचित्र आदि।
• कृषक- खुरपा, फावड़ा, कुदाल, ट्रैक्टर, स्प्रेयर आदि।
• चिकित्सक – दवाएँ, इंजेक्शन, थर्मामीटर, कैंची, पट्टी, स्टेथोस्कोप आदि।
• वैज्ञानिक- उपकरणों से प्रयोगशाला तथा रसायन आदि।
• श्रमिक – फावड़ा, टोकरी, कस्सी करनी, बसूली आदि।
• पत्रकार- कैमरा, कलम, मोबाइल फोन, रिकॉर्डर आदि।
अपनी भाषा अपने गीत
(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
उत्तर:
पुष्प की अभिलाषा
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ देना वनमाली !
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक। – माखनलाल चतुर्वेदी
नोट – छात्र ऐसे ही गीतों और कविताओं का संकलन स्वयं करें।
(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
नोट – छात्र किसी एक गीत की प्रस्तुति स्वयं भी दें।
तिरंगा झंडा – कब प्रसन्न और कब उदास
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा ) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
उत्तर:
जब तिरंगा प्रसन्न हुआ होगा-
टिकट लेकर बस द्वारा स्कूल पहुँचना
सावधान मुद्रा में राष्ट्रगान में शामिल होना
भारतमाता की जय बोलना
अनुशासन में रहकर पढ़ाई करना
साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना
कूड़ा-करकट न फैलाना
अन्य भाषा-भाषी भिन्न प्रांतों के सहपाठियों तथा अन्य धर्मावलंबी छात्रों के साथ मिल-जुलकर रहना।
जब तिरंगा उदास हुआ होगा-
राष्ट्रगान के समय सावधान न खड़ा होना
तिरंगे झंडे को सलूट न करना
धर्म के नाम पर लड़ना-झगड़ना
अपने देश की बुराई करना
झरोखे से
आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए। उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 12 पर दिया गया गीत स्वयं पढ़ें।
साझ समझ
आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए। उत्तर:
नोट – छात्र ‘खादी गीत’ नामक कविता इंटरनेट से ढूँढ़कर स्वयं पढ़ें।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं-
• सारे जहाँ से अच्छा
• दीवानों की हस्ती
• झाँसी की रानी
उत्तर:
नीचे ( पाठ्यपुस्तक में) दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ स्वयं पढ़ें।
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Class 8 Science Chapter 1 Notes – Exploring the Investigative World of Science Notes Class 8
Introduction to Scientific Investigation
Scientific investigation means more than just looking at something and asking only simple questions. We can now ask more focused questions, design ways to perhaps do simple experiments to answer them, and use observations to improve our understanding.
The Foundation of Scientific Thinking
Just as roots anchor a tree firmly to the ground, careful observation keeps scientific thinking grounded in reality. Similarly, like a kite soaring in the sky, curiosity drives us to explore new ideas and possibilities. Scientific investigation is most effective when grounded observation is balanced with freedom of creative thinking.
Our Scientific Journey This Year
The Microscopic World
Our scientific journey begins with something as small as a drop of water, revealing invisible organisms all around us. Some help us, like those aiding digestion or making medicines, while others can be harmful and may causes infections. We learn how nutritious food, exercise, medicines, and vaccines protect our health and fight infections.
Forces and Electricity
Science plays a major role in improving our daily lives. We use electric current in many ways to help make our lives easier. The heating effect of electric current keeps us warm, while the magnetic effect helps motors run and machines function.
These electrical phenomena depend on fundamental forces. Forces are what make objects speed up, slow down, or change direction. Understanding forces helps explain why a ball thrown up in the air falls back to the ground, or why a car stops when brakes are applied.
Weather and Air Movement
Force and pressure concepts also determine how air moves. Small pressure differences create gentle breezes, while stronger differences lead to strong winds and sometimes cyclones.
These forces are connected to powerful weather events like storms that affect our daily lives, agriculture, and even our safety.
The Particle World
To truly understand how air can exerts pressure or why water boils at a certain temperature, we need to examine what kind of particles they are made up of, and how they move around. Everything around us consists of tiny particles. In solids, these particles cannot move much, while in gases they can move around freely.
Classifying things is an important feature of science. We can also classify materials present around us into elements (pure substances), compounds (two or more elements bonded together), and mixtures (combinations that can be separated physically). Understanding how particles combine or mix helps explain how sugar dissolves in tea to make it sweet.
Light and Vision
From the particle world, we move into the world of light. Light rays reflect off flat and curved mirrors and bends when passing through lenses. This bending of light explains what happens when we see an image in a shiny metal spoon or how corrective glasses help many people see clearly.
Light reflection is not limited to polished mirrors. Rough surfaces also reflect light, and so does the Moon. The relative positions of Earth, Moon, and Sun determine which part of the Moon is illuminated each night, creating the beautiful phases of the Moon we see in the sky.
Calendars and Celestial Movements
By observing the Moon’s phases and the Sun’s movements, early humans created calendars.
These helped track time and plan daily life. It’s amazing that our routines on Earth are guided by objects far away in space.
Ecosystems and Life Connections
Beyond calendars and celestial movements, Earth contains complex patterns of relationships between living organisms and their environments. Every living being – from tiny insects to large whales, from grass blades to tall trees – depends on and responds to air, water, sunlight, and other organisms around them, forming ecosystems that support life on our planet.
Earth-A Unique Life Sustaining Planet
Earth is located at just the right distance from the Sun, allowing water to exist in liquid form. Its atmosphere provides us with oxygen and protects us from harmful UV rays.
However, human activities are causing small but harmful changes in Earth’s temperature, disrupting climate patterns. These changes can have serious consequences for life on our planet. The key to solving this problem lies with us-by using science, we can understand these changes and take action to protect our environment.
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MCQ Questions for Class 6 Science with Answers
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Chapter 1 The Wonderful World of Science Class 6 MCQ
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