Anniversary Of The School Essay Hindi

विद्यालय का वार्षिकोत्सव पर निबंध – Anniversary Of The School Essay Hindi

विद्यालय का वार्षिकोत्सव पर निबंध Essay On Anniversary Of The School Hindi

संकेत-बिंदु –

  • भूमिका
  • आयोजन का समय
  • कार्यक्रम की तैयारी
  • कार्यक्रम का आरंभ
  • वार्षिकोत्सव का मुख्य कार्यक्रम
  • उपसंहार

आँखों देखे किसी रंगारंग कार्यक्रम का वर्णन – Aankhon Dekha Kisi Rangarang Karyakram Ka Varnan

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

भूमिका – वर्तमान समय में विद्यालय में केवल पठन-पाठन संबंधी गतिविधियों का आयोजन ही नहीं होता वरन् छात्रों के बहुमुखी विकास के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यालय में आयोजित किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इसी की एक कड़ी हैं। इनमें विद्यालय का वार्षिकोत्सव अपना विशेष महत्त्व रखता है।

आयोजन का समय – हमारे विद्यालय की स्थापना 15 नवंबर 1960 को हुई थी। विद्यालय के लिए इस दिन का उतना ही महत्त्व है जितना कि किसी व्यक्ति के जन्मदिन का। विद्यालय का स्थापना दिवस होने के कारण प्रतिवर्ष 15 नवंबर को विद्यालय का वार्षिकोत्सव मनाया जाता है।

कार्यक्रम की तैयारी – विद्यालय का वार्षिकोत्सव सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपना विशेष महत्त्व रखता है। ऐसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की तैयारी भी कार्यक्रम से 20 – 25 दिन पहले से शुरू कर दी जाती है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सभी छात्रों के विभिन्न कार्यक्रमों की जाँच-परख की जाती है। यह काम दो-तीन दिन में कर लिया जाता है।

फिर भाषाध्यापक, कला शिक्षक एवं योगा के अध्यापक कार्यक्रमों के हिसाब से तैयारी करवाते हैं। बगल के विद्यालय के संगीत शिक्षक की सेवाएँ लेकर गीत गाने वाले छात्रों की तैयारी करवाई जाती है। इसके अलावा छात्र अपने ढंग से व्यक्तिगत स्तर पर भी तैयारी करते हैं, ताकि कार्यक्रम ज़्यादा से ज़्यादा अच्छा बन सके।

कार्यक्रम का आरंभ – कार्यक्रम के आरंभ होने का समय प्रातः नौ बजे रखा गया। इसके लिए आवश्यक तैयारियाँ 14 तारीख को ही पूरी कर ली गई थी। छात्रों एवं अतिथियों को बैठने के लिए पांडाल सजा दिया गया। 15 नवंबर को प्रात: आठ बजे तक दरियाँ बिछाकर कुरसियाँ लगवा दी गईं। विद्यालय का मुख्य द्वार सजा दिया गया।

मेहमानों के आने के रास्ते के आसपास चूना छिड़कवाकर रास्ते के पास रंगोली बनाई गई और फूलों की पंखुड़ियों से स्वागतम लिखा गया। विद्यालय में सवेरे से ही देशभक्ति पूर्ण गीत बजाकर वातावरण में संगीत घोलने का काम किया जा रहा था। तभी ठीक नौ बजे मुख्य अतिथि का आगमन हुआ और कार्यक्रम शुरू हो गया।

वार्षिकोत्सव का मुख्य कार्यक्रम – मुख्य अतिथि के आने की घोषणा की गई। विद्यालय के प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य उन्हें लेकर मंच पर आए और पुष्पमालाओं द्वारा उनका स्वागत किया। मुख्य अतिथि द्वारा आसन ग्रहण करने के बाद छात्रों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि ने सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्ज्वलित किया।

अब छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। बाद में ‘आओ मिलकर दीये जलाएँ’ शीर्षक वाला समूह ज्ञान प्रस्तुत किया गया। इसकी समाप्ति के उपरांत प्रधानाचार्य ने गतवर्ष की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।

इस प्रस्तुति के बाद ‘जलाओ धरा पर दीप इतने’ गीत की प्रस्तुति की गई। इस गीत पर श्रोताओं ने करतल ध्वनि से उत्साहवर्धन किया। इसके बाद बारी थी- अंधेर नगरी’ नाटक के मंचन की। इसे देखकर दर्शक हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। इसके बाद ‘आओ मिलकर राष्ट्र सँवारे’ गीत का गायन हुआ।

अब बारी थी एक देशभक्ति पूर्ण नाटक। यह नाटक मन में देशभक्ति का भाव जगा गया। इसके बाद मुख्य अतिथि ने आशीर्वाद वचन कहकर छात्रों का उत्साहवर्धन किया। इसके बाद प्रधानाचार्य द्वारा धन्यवाद भाषण दिया गया। अंत में मिष्ठान्न वितरण हुआ। इस तरह वार्षिकोत्सव का यह रंगारंग कार्यक्रम समाप्त हुआ।

उपसंहार – विद्यालय का वार्षिकोत्सव अत्यंत मनोरंजक एवं उत्साहवर्धक रहा। इस कार्यक्रम की यादें अब भी ताज़ा है।

Leave a Comment