एक राष्ट्र एक कर : जी०एस०टी० ”जी० एस०टी० निबंध – Gst One Nation One Tax Essay In Hindi

एक राष्ट्र एक कर : जी०एस०टी० ”जी० एस०टी० निबंध – Essay On Gst One Nation One Tax In Hindi

सहकारी संघवाद का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।”

–प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी

रूपरेखा

  • प्रस्तावना,
  • सबसे बड़ा कर सुधार,
  • जी०एस०टी० की विशेषताएँ,
  • जी०एस०टी० की श्रेणियाँ,
  • जी०एस०टी० के लाभ,
  • उपसंहार।।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना–
भारत में टैक्स व्यवस्था की जड़ें काफी पुरानी हैं। टैक्स अथवा कर का उल्लेख प्राचीन ग्रन्थ ‘मनुस्मृति’ और चाणक्यरचित ‘अर्थशास्त्र’ में भी मिलता है। विभिन्न ग्रन्थों में उल्लेख है कि कर प्रणाली का अन्तिम उद्देश्य अधिक–से–अधिक सामाजिक कल्याण होना चाहिए। लोक–कल्याणकारी राज्य का उद्देश्य भी यही है।

इसी उद्देश्य की परिपूर्ति के लिए माल एवं सेवा कर (Goods and Service Tax = GST) जो भारत सरकार की नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है, को 01 जुलाई, 2017 से सम्पूर्ण देश के भू–भाग पर लागू कर दिया गया। इसी के साथ राष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़ा कर सुधार एक वास्तविकता के रूप में सामने आया। 1920 के दशक में जर्मनी के एक व्यवसायी विल्हेम वॉन सीमेंस ने जी०एस०टी० का विचार दिया था। आज संसार के 160 से अधिक देशों ने इस कर प्रणाली को अपना लिया है।

सबसे बड़ा कर सुधार–
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत का सबसे बड़ा कर सुधार माल एवं सेवा कर (जी०एस०टी०) का 30 जून, 2017 की मध्यरात्रि को संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित समारोह में शुभारम्भ किया गया। इसमें राष्ट्रपति प्रणव मुकर्जी व प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सहित अधिकांश गणमान्य लोग उपस्थित थे। राष्ट्रपति प्रणव मुकर्जी ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण दिसम्बर 2002 में शुरू हुई लम्बी यात्रा की सुखद परिणति है।

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने जी०एस०टी० को अच्छा व सरल टैक्स बताया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय सरदार पटेल ने 500 से अधिक रियासतों को मिलाकर राष्ट्र का एकीकरण किया था। उसी प्रकार जी०एस०टी० के द्वारा देश का आर्थिक एकीकरण हो रहा है। अब गंगानगर (राजस्थान) से ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश). तक ‘एक टैक्स–एक देश’ का नारा गूंजेगा।

जी०एस०टी० की विशेषताएँ–
देश की स्वतन्त्रता के 70 वर्ष बाद 14 टैक्सों को समाप्त कर एक टैक्स जी०एस०टी० में बदल दिया गया है। जी०एस०टी० लागू होने से अब किसी भी सामान की देशभर में समान कीमत होगी; क्योंकि इस पर पूरे देश में एकसमान कर लग रहा है। इससे उद्योग, सरकार और ग्राहक सभी को लाभ होगा। इससे सरकार के ‘मेक इन इण्डिया’ कार्यक्रम को भी तीव्रता प्राप्त होगी। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं-

  • आसान कर का अनुपालन,
  • घर–परिवार के लिए वरदान,
  • एक सशक्त आर्थिक भारत का निर्माण,
  • सरल कर व्यवस्था,
  • अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक तथा
  • व्यापार और उद्योग के लिए लाभप्रद।

जी०एस०टी० की श्रेणियाँ–
आम उपभोग की अधिकांश वस्तुओं की कीमतों में इस एकल व्यवस्था से कमी आएगी। जी०एस०टी० को वस्तुवार चार श्रेणियों में रखा गया है। निम्न और मध्यम वर्ग के इस्तेमाल की अधिकांश वस्तुओं पर जी०एस०टी० की दर शून्य रखी गयी है। कुछ वस्तुओं और सेवाओं को जी०एस०टी० के दायरे से बाहर रखा गया है। जैसे खुला खाद्य अनाज, ताजी सब्जियाँ, आटा, दूध, अण्डा, नमक, फूल की झाड़, शिक्षा सेवाएँ, स्वास्थ्य सेवाएँ आदि को कर मुक्त किया गया है। चीनी, चायपत्ती, खाद्य तेल, घरेलू एल०पी०जी० आदि पर 5% जी०एस०टी० लगेगा।

मक्खन, घी, सब्जी, फलों से निर्मित खाद्य पदार्थ, मोबाइल आदि पर 12% जी०एस०टी० लगाया गया है। केश तेल, टूथपेस्ट, साबुन, आइसक्रीम, कम्प्यूटर, प्रिंटर आदि पर 18% जी०एस०टी० लगाया गया है। विलासिता वाली कुछ विशेष वस्तुओं के साथ ही कुछ अन्य वस्तुओं पर 28% की सर्वाधिक दर लागू की गयी है। इस श्रेणी की वस्तुओं पर 5 वर्षों तक उपकर भी लागू रहेगा ताकि जी०एस०टी० को लागू करने से राज्यों को होनेवाले किसी भी तरह के राजस्व नुकसान की भरपाई की जा सके।

लगभग 81 प्रतिशत वस्तुओं पर जी०एस०टी० की दर 18% या इससे कम है।

केन्द्र सरकार द्वारा केन्द्रीय जी०एस०टी० (CGST) लागू किया गया है जबकि राज्यों द्वारा राज्य जी०एस०टी० (SGST) लगाया गया है। विधायिका वाले केन्द्रप्रशासित प्रदेशों में भी राज्य जी०एस०टी० लागू होगा। बिना विधायिकावाले केन्द्रप्रशासित प्रदेशों में केन्द्रप्रशासित प्रदेश जी०एस०टी० (UGST) लागू होगा।

अन्तर्राज्य आपूर्ति पर एकीकृत जी०एस०टी० (IGST) लगाया गया है।

जी०एस०टी० में शामिल केन्द्रीय कर हैं–

  • केन्द्रीय उत्पाद शुल्क,
  • सीमा शुल्क,
  • सेवा कर,
  • उपकर और अधिभार।

जी०एस०टी० में शामिल राज्य कर हैं–

  • राज्य वैट,
  • बिक्री कर,
  • विलासिता कर,
  • चुंगी,
  • मनोरंजन कर,
  • विज्ञापनों/लाटरियों/सट्टे व जुए पर कर।

जी०एस०टी० के लाभ–कर की इस एकल प्रणाली के बहुआयामी लाभ हैं

  • इस प्रणाली के लागू होने पर एकीकृत सामान राष्ट्रीय बाजार का सृजन हो सकेगा, जिससे विदेशी निवेश और ‘मेक इन इण्डिया’ जैसे अभियानों को गति प्राप्त होगी।
  • इससे आम जनता पर करों का बोझ कम होगा।
  • इससे रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे जिससे घरेलू उत्पाद जीडीपी में वृद्धि होगी।
  • देश के उत्पाद अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
  • IGST और SGST की दरें समान होने के कारण अन्तर्राज्य कर चोरी की घटनाएँ समाप्तप्राय हो जाएँगी।
  • कम्पनियों का औसत कर भाग घटेगा तो वस्तुओं की कीमत भी घटेगी और उपभोग बढ़ेगा। इससे भारत एक ‘औद्योगिक केन्द्र’ के रूप में उभरकर सामने आएगा।
  • कानूनी प्रक्रियाओं और कर दरों में एकरूपता आएगी।

उपसंहार–
इस प्रकार यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि जी०एस०टी० हर परिवार के लिए सौगात लेकर आएगा और राष्ट्र आर्थिक रूप से अधिक सबल व प्रगतिगामी होकर उभरेगा। शुरूआत में इसे लागू करने के दौरान कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं लेकिन ‘एक देश एक टैक्स प्रणाली’ देश के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। इस सरल कर प्रणाली से व्यापार जगत का भी हित होगा।

वास्तव में जी०एस०टी० का प्रभाव देश की सीमाओं से परे भी दिखाई देगा। विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अन्तर्गत सम्बन्धित देश इसका लाभ उठा सकते हैं कि वे अपने यहाँ से निर्यात होनेवाली वस्तुओं को अप्रत्यक्ष करों में रियायत देकर उन्हें आयात से सम्बद्ध कर लें। देश के विकास की दूरगामी सोच को ध्यान में रखते हुए विलासिता की महँगी वस्तुओं पर अधिक कर लगाकर कर ढाँचे को प्रगतिशील रूप दिया गया है।

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