Youth Essay in Hindi

युवा पर निबंध – Youth Essay in Hindi

युवा पर छोटा व बड़ा निबंध (Essay on Youth in Hindi)

नवीन समाज-रचना और युवा शक्ति – New Society and Youth Power

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • सामाजिक पुनर्निर्माण क्या और क्यों,
  • आज का भारतीय समाज,
  • सामाजिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता,
  • युवा वर्ग ही आशा का केन्द्र,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
पुरानी कहावत है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। बिना समाज के मानव का जीवनयापन भी अत्यन्त कठिन है। उसके सद्गुण, दुर्गुण, सफलता-असफलता, विकास और उपलब्धियों का महत्त्व समाज में रहते हुए ही आँका जा सकता है। व्यक्ति और समाज एक-दूसरे पर आश्रित हैं।

दोनों में सहयोग और सामंजस्य बना रहना दोनों के हित में रहता है। समाज को व्यक्ति की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप ढलना पड़ता है और व्यक्ति को अपनी बुद्धि, कौशल और परिश्रम से समाज का निरन्तर परिष्कार करना होता है।

सामाजिक पुनर्निर्माण क्या और क्यों-
समाज का उद्देश्य मानव जीवन को सुखी बनाना है। समाज सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर बना है। इसके लिए धर्म, नीति, कानून आदि बनाए गए हैं। देशकाल के अनुसार इन आचारों और नियमों का संशोधन और विकास आवश्यक होता है।

जब ये नियम मानव जीवन की उन्नति और विकास में बाधक होने लगते हैं, स्वार्थी और अहंकारी लोग इनका प्रयोग अपने हित में करने लगते हैं तो सामाजिक व्यवस्था बिखरने लगती है।

शोषण, अन्याय, उत्पीड़न और अराजकता का वातावरण सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने लगता है तब सामाजिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता होती. है। समाज की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए किसी व्यक्ति या वर्ग को आगे आना पड़ता है।

आज का भारतीय समाज-
आज के भारतीय समाज पर दृष्टि डालें तो मन में बड़ी निराशा और घुटन होने लगती है। बड़ी विचित्र और विरोधाभासी स्थिति है हमारे समाज की। भोगवादी जीवन शैली के उन्माद, पूँजीवादी अर्थव्यवस्था और अदूरदर्शी नेतृत्व ने इस देश को दो भागों में बाँट दिया है। एक है-इण्डिया और दूसरा है-भारत।

इण्डिया में बसते हैं मुट्ठीभर धन-कुबेर, विश्व की धनवान-सूची में स्थान पाने वाले अरब-खरबपति महानगरों के निवासी. बेतहाशा वेतन पाने वाले सौभाग्यशाली, देश को महाशक्ति बनाने के प्रपंच रचने वाले राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री, विलास सामग्रियों के विज्ञापनों से मीडिया को लक-दक सजाने-सँवारने वाले देशी-विदेशी उद्योगपति, लग्जरी कारों, मॉल और गगनचुम्बी अट्टालिकाओं की बस्तियाँ सजाकर देश को विकास का तमाशा दिखाने वाले जादूगर।

और भारत में रहने को मजबूर हैं-
गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने वाले करोड़ों लोग, महँगाई की मार और भ्रष्टाचार के प्रहार से अधमरे, निम्न मध्यम वर्ग के प्राणी, आत्महत्या करने वाले किसान, टूटी-फूटी सड़कों, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के अभावों से जूझने वाले आम लोग।

सामाजिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता-
आज भारत के इस दयनीय समाज को पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। यह कोई साधारण काम नहीं है। अब साधारण दवा-दारू से काम नहीं चलने वाला। अब तो शल्य-क्रिया की आवश्यकता है। नई सोच, अट संकल्प और व्यापक आन्दोलन होने चाहिए। इसके लिए हजारों-लाखों देशभक्त चाहिए। कुटिल शक्तियों के षड्यन्त्रों को विफल करने वाले चाणक्य चाहिए और चाहिए चरित्रवान राजनीतिक नेतृत्व, पारदर्शी शासन-व्यवस्था। इस भूमिका को कौन निभाएगा ?

युवावर्ग ही आशा का केन्द्र-
आज देश की युवा शक्ति ही समाज के पुनर्निर्माण के महासंकल्प को साकार कर सकती है। हर देश और हर काल में युवावर्ग ने ही शोषण, अन्याय, भ्रष्टाचार और मदांध सत्ताओं के सामने अपना सीना अड़ाया है। अपने दृढ़ संकल्प, संघर्ष और बलिदान से समाज का कायाकल्प किया है।

आज भारत के युवावर्ग को अपने और करोड़ों देशवासियों के उत्थान के लिए आगे आना होगा। अपने सही लक्ष्य को पहचानना होगा। तुच्छ लाभ और लोभ से बचकर, पाश्चात्य भोगवादी संस्कृति का दीवानापन छोड़कर, समाज का सही नेतृत्व करना होगा। विकास के मार्ग पर बढ़ रहा नया भारत अपने युवाओं की ओर आशाभरी दृष्टि से देख रहा है।

एक्सीलेण्ट हिन्दी अनिवार्यकक्षा-
12443 उपसंहार-हमारी वर्तमान पीढ़ी को भ्रमित करने के लिए इतने तमाशे खड़े कर दिए गए हैं कि उसे समाज के पुनर्निर्माण से जोड़ना आसान काम नहीं है। लेकिन इसके अलावा कोई अन्य उपाय नहीं है। यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन मिले तो वे सही अर्थों में देश को एक महाशक्ति बना सकते हैं।

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