यातायात के नियम पर निबंध – Traffic Safety Essay In Hindi

यातायात के नियम पर निबंध – Essay On Traffic Safety In Hindi

“चलो एक आदत अपनाएँ और इनका पालन करें ….. क्योंकि सुरक्षा के लिए एक कदम, सही दिशा में एक विशाल प्रगति है।

–अज्ञात

रूपरेखा–

  1. प्रस्तावना,
  2. सुरक्षित यातायात के नियम,
  3. सुरक्षित यातायात हेतु रखी जानेवाली सावधानियाँ,
  4. यातायात दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण,
  5. यातायात दुर्घटनाओं के प्रति हमारे दायित्व,
  6. यातायात दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय,
  7. उपसंहार!

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

यातायात के नियम पर निबंध – Yaataayaat Ke Niyam Par Nibandh

प्रस्तावना–
सामाजिक एवं औद्योगिक विकास के साथ–साथ हमने परिवहन के भी अनेक साधन विकसित किए, जिनमें से सड़क यातायात सबसे प्रमुख साधन है। इस महत्त्वपूर्ण साधन को सुचारु और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए विभिन्न नियम बनाए गए हैं। इन नियमों का पालन करना सभी नागरिकों का कर्तव्य है; क्योंकि ये नियम सभी नागरिकों की भलाई के उद्देश्य से बनाए गए हैं। यातायात के नियम पालन करने से यात्रा सुखद और सुरक्षित हो जाती है।

यदि हम इनका उल्लंघन करते हैं तो किसी दुर्घटना का शिकार हम स्वयं भी हो सकते हैं और हमारे कारण कोई दूसरा भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। वर्तमान में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ निरन्तर बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन समाचार–पत्रों के पृष्ठ ऐसी दुर्घटनाओं की सूचनाओं से भरे रहते हैं। जो हृदय को द्रवित कर जाते हैं। ऐसे में सुरक्षित यातायात के विषय में जानना एवं उसके नियमों का पालन करना अनिवार्य हो जाता है।

सुरक्षित यातायात के नियम–भारत में सुरक्षित यातायात के मुख्य नियम निम्नलिखित हैं-
(i) बायीं ओर चलें–देश के यातायात का प्रमुख नियम है–बायीं ओर चलना। बायीं ओर चलने से व्यक्ति सुरक्षित अपने गन्तव्य तक पहुँच जाता है। पाकिस्तान, इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, बाँग्लादेश, श्रीलंका आदि अनेक देशों में भारत की तरह बायीं ओर चलने का नियम है, जबकि जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, रूस तथा चीन आदि देशों में दायीं ओर चलने का नियम है।

(ii) हैलमेट का प्रयोग करें–दो पहिया वाहनों–स्कूटर, मोटर साइकिल आदि को चलाते समय तथा उस पर पीछे बैठते समय हैलमेट का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। हैलमेट द्वारा दुर्घटना के समय सिर की सुरक्षा होती है, यह सिर को गम्भीर चोट से बचाता है।

(iii) निर्धारित गतिसीमा का पालन–सड़क पर सुरक्षित यातायात के लिए वाहनों की अधिकतम गति–सीमा का निर्धारण किया गया है। साधारणत: सड़क पर वाहनों की 40 किमी प्रति घण्टे की गति को आदर्श माना जाता है। गति–सीमा का यह निर्धारण मार्गों की दशा के अनुसार अलग–अलग होता है। प्रायः राजमार्गों पर साधारण से अधिक गति–सीमा निर्धारित होती है, जबकि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गति–सीमा साधारण गति से भी कम हो जाती है। अधिकतर दुर्घटनाएँ तीव्रगति से वाहन चलाने के कारण ही होती हैं। इसलिए सभी को निर्धारित गति–सीमा का पालन करना चाहिए।

(iv) सीट बेल्ट बाँधना–कार आदि चार पहिया वाहन सड़क पर तेज गति से चलते हैं। इस कारण इनके दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी अधिक रहता है। चार पहिया वाहनों की दुर्घटना में अधिकांश लोगों की मृत्यु सामने सिर टकराने से होती है। सीट बेल्ट दुर्घटना के समय व्यक्ति को आगे की ओर झुकने से रोकती है, जिससे उसका सिर सामने गाड़ी के डेस्क–बोर्ड अथवा दूसरी सीट से नहीं टकराता है और व्यक्ति सुरक्षित बच जाता है। दुर्भाग्यवश होने वाली ऐसी किसी भी दुर्घटना में हानि को कम करने के लिए वाहन के चालकसहित सभी यात्रियों को सुरक्षा हेतु सीट बेल्ट अवश्य बाँधनी चाहिए।

(v) अन्य वाहन से आगे निकलना (ऑवरटेकिंग)–आगे चलनेवाले वाहन से संकेत मिलने पर ही हमें उस वाहन के दायीं ओर से आगे निकलना अर्थात् ऑवरटेक करना चाहिए। भूलकर या जल्दीबाजी में गलत दिशा से ऑवरटेक करना जानलेवा हो सकता है। ऑवरटेक करते समय यह भी ध्यान रखें कि सामने से कोई वाहन न आ रहा हो।
(vi) यातायात के अन्य नियम–उपर्युक्त नियमों के अतिरिक्त अन्य कुछ महत्त्वपूर्ण नियम इस प्रकार हैं, जिनका पालन करना भी आवश्यक है

  • किसी भी प्रकार के नशे की अवस्था में वाहन न चलाएँ।
  • वाहन सदैव अपनी पंक्ति में चलाएँ।
  • वाहन मोड़ते समय आवश्यक संकेत (इण्डीकेटर) दें और हॉर्न बजाएँ।
  • रुकते समय उपयुक्त संकेत अवश्य दें।
  • वाहन में निर्धारित संख्या से अधिक व्यक्तियों को न बैठाएँ।
  • स्कूल, अस्पताल, चौराहों आदि के समीप पैदल यात्रियों का ध्यान रखते हुए अपने वाहन की गति धीमी रखें।
  • चकाचौंध करनेवाली हैडलाइटों का प्रयोग न करें।
  • हैडलाइट का ऊपरी आधा हिस्सा काले रंग से रँगा होना चहिए।
  • रात में डिपर का प्रयोग करें।
  • नम्बर प्लेट साफ एवं सही मानकों के अनुरूप ही लिखवाएँ।
  • निजी वाहनों के नम्बर सफेद प्लेट पर काली स्याही व व्यावसायिक वाहनों के नम्बर पीली प्लेट पर काली स्याही से लिखे होने चाहिए।
  • वाहन की नम्बर प्लेट पर नम्बर के अलावा अन्य कुछ नहीं लिख होना चाहिए।
  • 18 वर्ष से कम आयुवर्ग के लिए गियरवाली गाड़ी प्रतिबन्धित है; अत: इससे कम आयु के लोग उनका प्रयोग न करें।
  • यातायात के संकेतों का पालन करें।
  • सड़क पर वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। बिना इनके हमें वाहन नहीं चलाने चाहिए।
  • वाहन के आगे एवं पीछे उचित लाइट रिफ्लेक्टर अवश्य लगे होने चाहिए। ल हमें अधिक प्रदूषण फैलानेवाले वाहनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • वाहनों में अत्यधिक तेज ध्वनिवाले प्रेशर हॉर्न, अजीब ध्वनियोंवाले होने एवं प्रतिबन्धित हूटरों एवं लाइटों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • सड़क पर पैदल चलते हुए या वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात न करें और ईयर फोन लगाकर गाने आदि न सुनें।
  • बिना फाटकवाले रेलवे क्रॉसिंग को पार करते समय इधर–उधर अवश्य देखें।
  • यदि रेलगाड़ी आती दिखाई दे तो उसके फाटक से गुजर जाने की प्रतीक्षा करें।
  • रेलवे फाटक यदि बन्द है तो वैरियर के नीचे से निकलकर रेललाइन पार न करें।
  • पैदल सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग, ऑवर ब्रिज, भूमिगत पारपथ का प्रयोग करें।
  • सड़क पर पैदल चलते समय फुटपाथ और साइकिल से चलते समय साइकिल ट्रैक का प्रयोग करें।

सुरक्षित यातायात हेतु रखी जानेवाली सावधानियाँ–यातायात की सावधानियों को दो श्रेणियों में बाँटा गया है-
(अ) पैदल चलनेवाले यात्रियों द्वारा रखी जानेवाली सावधानियाँ–पैदल चलनेवाले यात्रियों को निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना चाहिए

  • बायीं ओर बने फुटपाथ पर चलें।
  • जेब्रा क्रॉसिंग का प्रयोग करें।

(ब) वाहनचालकों द्वारा रखी जानेवाली सावधानियाँ–वाहनचालकों को सुरक्षित यातायात हेतु निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए

  • पूरे होश एवं सामान्य अवस्था में ही वाहन चलाएँ।
  • जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन–गति धीमी करें।
  • वाहन की स्थिति ठीक रखें।

यातायात दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण–
जल्दबाजी और लापरवाही (असावधानी) सड़क दुर्घटना के दो प्रमुख कारण हैं। इसीलिए आपको सड़क पर जगह–जगह “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी” और “दुर्घटना से देर भली” के बोर्ड लगे हुए मिल जाएंगे। इस जल्दबाजी और लापरवाही के कारण न जाने कितने मासूम एवं बहुमूल्य जीवन मृत्यु की भेंट चढ़ जाते हैं। असावधानी केवल वाहनचालक से ही नहीं होती, अपितु पैदल चलने वाले यात्रियों से भी होती है; अत: यात्रा करते समय हमें जल्दबाजी और असावधानी दोनों से ही बचना चाहिए।

अनियन्त्रित गति सड़क दुर्घटना का दूसरा बड़ा कारण है। आज तेज रफ्तार का शौक, शक्ति व कला के मिथ्या प्रदर्शन के नाम पर होती स्टंट ड्राइविंग यातायात दुर्घटनाओं को जन्म दे रही है। युवावर्ग भूल रहा है कि उसका जीवन कितना अनमोल है, उसके परिवार, माता–पिता, समाज और देश के लिए। इसके अतिरिक्त असुरक्षित पार्किंग, अवयस्क बच्चों द्वारा वाहन चलाना, बढ़ती भीड़, जाम, अनियन्त्रित यातायात, टूटी–फूटी सड़कें आदि सभी यातायात दुर्घटनाओं के अन्य महत्त्वपूर्ण कारण हैं।

यातायात दुर्घटनाओं के प्रति हमारे दायित्व–
यातायात दुर्घटनाओं के सन्दर्भ में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि हम दुर्घटनाएँ हो जाने के पश्चात् उसके प्रति अपने दायित्व का निर्वाह किस प्रकार करते हैं। यदि सभी लोग दुर्घटनाओं के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह भली–भाँति करें तो इन दुर्घटनाओं में मरनेवाले लोगों की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है। दुर्घटना हो जाने पर हमारा सबसे बड़ा दायित्व यह है कि हम सबसे पहले दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को यथासम्भव प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराएँ। यदि वह गम्भीररूप से घायल है तो उसे तुरन्त नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराएँ।

यदि कोई अस्पताल अथवा डॉक्टर उसे भर्ती करने अथवा उपचार करने में देरी करे या ऐसा करने से मना करे तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अवश्य करें, जिससे भविष्य में वह अस्पताल अथवा डॉक्टर इस प्रकार का अमानवीय आचरण करने का साहस न करे। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का उपचार करने से मना करना दण्डनीय अपराध है।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को किसी अस्पताल में भर्ती कराने अथवा उसको किसी प्रकार की चिकित्सासुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसी पुलिस रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती और न ही भर्ती करानेवाले अथवा सहायता करनेवाले किसी व्यक्ति को अपना नाम–पता लिखाने की आवश्यकता होती है। इसलिए हमें नि:संकोच और निडर होकर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के प्राण बचाने के सभी प्रयास करने चाहिए।

दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को उपचार दिलाने के पश्चात् आप पुलिस रिपोर्ट आदि की कार्रवाई कर सकते हैं। दुर्घटना के समय हमारा एक बड़ा दायित्व यह भी है कि हम दुर्घटना स्थल पर अनावश्यक भीड़ न जुटाएँ और जितना शीघ्र हो सके यातायात को सुचारु करने में शासन–प्रशासन की सहायता करें।

यातायात दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय–यातायात दुर्घटनाओं से बचने के लिए निम्नलिखित मुख्य उपाय किए जा सकते हैं
(क) यातायात के नियमों का पालन–यातायात के नियम सुरक्षित रहने के लिए ही बने हैं। इसलिए दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन नियमों का पालन किया जाना आवश्यक हो जाता है।
(ख) सावधानी–यातायात दुर्घटनाओं से सुरक्षित रहने के लिए सावधानी और सतर्कता का पालन करना चाहिए।
(ग) सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग सुरक्षित यातायात हेतु सुरक्षा उपकरणों का उचित प्रयोग अवश्य करना चाहिए; जैसे–हैलमेट को साथ में रखना नहीं, लगाना आवश्यक है। इसी प्रकार गाड़ी में सीट बेल्ट होना ही पर्याप्त नहीं है, उसका प्रयोग करना भी आवश्यक है।
(घ) गति–सीमा का पालन–यातायात दुर्घटनाओं से बचने के लिए गति–सीमा का पालन अवश्य करें। तेजगति के समय वाहन को अचानक रोकना भी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
(ङ) मोड़, पुल, पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सावधानी–पुल पार करते समय अथवा पहाड़ी क्षेत्र में चलते समय हमें विशेष सावधानी रखनी चाहिए। प्रत्येक मोड़ पर हॉर्न, ब्रेक का प्रयोग करते हुए स्टेयरिंग पर पूरा नियन्त्रण रहना चाहिए।

उपसंहार–
इस प्रकार यातायात सम्बन्धी नियमों का पालन करके और सावधानी रखकर हम स्वयं भी सुरक्षित रह सकते हैं और दूसरों को भी सुरक्षित रख सकते हैं। हमें सदैव यह बात ध्यान रखनी चाहिए सड़क सुरक्षा अभियान का व्यापक हो संज्ञान, बाकी सबकुछ बाद में सर्वप्रथम हैं प्राण।