The Scientific Point of View Summary in English and Hindi by J.B.S. Haldane

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The Scientific Point of View Summary in English and Hindi by J.B.S. Haldane

The Scientific Point of View by J.B.S. Haldane About the Author

John Burdon Sanderson Haldane (J.B.S. Haldane) (1892–1964) was a versatile genius. He studied Greek and Latin at Oxford and then went to London to do research in Zoology. He was interested in a variety of subjects and at different times held such posts as Reader in Biochemistry in Cambridge, Professor of Genetics in London University, Professor of Physiology at the Royal Institute and Professor of Statistics at the Indian Statistical Institute in Calcutta. In an autobiographical sketch, he once said that he knew eleven languages. Haldane was a Marxist and used to contribute articles to the Marxist Daily worker and scientific topics, written in a style which even a person with average education could understand. His works include Deadalus or Science and the Future, Possible Worlds, Science and Ethics and The Inequality of Man from which the present essay is taken.

The Scientific Point of View Summary in English

The impact of science on an ordinary man and woman is at present two fold. We are benefitted by scientific discoveries and inventions. Science gives us many convenient things like railway, motor car, aeroplane and electricity. It has made our lives comfortable. Secondly, science effects a common man’s opinions, too. Our ideas of universe, the beginning of life and man on earth are based more on scientific explanation than on anything else. Now science is believed more than religion. Thus science has given a new shape to our ideas and opinions.

According to the author, science can do us still greater service and benefit. At present scientific method is used only by the scientists in research and laboratories but scientific method can be used in our daily affairs too. It can solve our personal problems as well as social problems. It can provide a correct approach to life.

The main features of scientific point of view are truthfulness, impartiality and rationality. Scientific standpoint means search of truth. A scientist is impartial like a judge. He does not differentiate between man and the other but between man and worm. He does not bring into the studies his personal likes and dislikes.

Secondly, the scientific standpoint is based on reasons. It is not emotional. It is rational. It cares for facts and figures. It considers arguments and ideas and does not allow personal feelings to interfere with study or conclusions.

Further scientific point of view is also ethically neutral. A scientist does not read anything ethically. He is not like a judge to decide what is right and what is wrong. But, for a scientist, the important thing is what is true and what is not true. He has to give facts and arguments, not moral judgment.

The scientific point of view at present is very different from an average man’s point of view as an average man always puts his personal feelings, likes and dislikes into the study or discussion of any problem. He always calls it either good or bad. He does not care for facts and figures. To compare and contrast the scientific standpoint with popular kind of thinking the writer gives us a few examples. He takes up the question of American Negroes and the problem of disease among them.

Many white Americans argue that Negros inferior human beings as compared to white men. They are said to be the carrier of diseases. Therefore, they should be kept apart from the white population.

This is a belief of common Americans. Scientifc thinking is different from this. It does not take into account, personal likes and dislikes, interests and morality. A biologist would simply state that there are a few differences in the physical make up between a Negro and a White man. These do not prove the latter’s superiority. Further, he will point out that the problem of disease among Negroes is very much related to the climatic conditions and living habits. To live in the field or in south region suits the Negroes. They are diseased only in north or in factories. They die there more quickly. This conclusion is based on facts and arguments not on personal likes and interest.

Again the writer compares the two views-popular and scientific. Popular views regarding diseases are this that it is the punishment given by God or the result of committing sin but scientific view says that the diseases are due to disobedience of physical or natural laws.

At last the author says that the scientific inventions have no meaning for us unless we adopt scientific point of view or thinking.

The Scientific Point of View Summary in Hindi

1. Science affects the …………………………. biological methods.
अनुवाद : विज्ञान सामान्य नर-नारियों को पहले ही दो ढंगों से प्रभावित करने लगा है। वे इसके उपयोग से लाभ उठाते हैं-घोड़ागाड़ी की बजाए मोटरकार या बस से यात्रा करते हैं, किस जादूगर से उपचार कराने की बजाए किसी डॉक्टर या सर्जन से उपचार कराते हैं; और खंजर या फरसे से कत्ल होने के बजाय ऑटोमेटिक पिस्तौल या गोली से मारे जाते हैं। यह (विज्ञान) उनके मतों को भी प्रभावित करता है। लगभग सभी मानते हैं कि धरती गोल है और आकाश ठोस होने के बजाए लगभग खाली है। और हम अपने को पशुओं का वंशज मानने लगे हैं और जीव विज्ञान के द्वारा मानव स्वभाव में सुधार होने की सम्भावना में भी विश्वास करने लगे हैं।

2. But science can do……………………or the human race.
अनुवाद : परन्तु विज्ञान मानव मन के लिए एक प्रकार की मान्यताओं के स्थान पर दूसरी प्रकार की मान्यताओं का प्रतिस्थापन करने या मान्य विचारों के बारे में संशय उत्पन्न करने से भी कहीं बड़ा कार्य कर सकता है । यह धीरे-धीरे समस्त मानव जाति में वह दृष्टिकोण फैला सकता है जो अनुसंधानकर्ताओं के बीच विद्यमान है, और जिसके कारण कुछ हजार पुरुषों और कुछ दर्जन महिलाओं ने उस विज्ञान की रचना में सहायता की है जिस पर आधुनिक सभ्यता आधारित है। क्योंकि यदि हम अपने व एक-दूसरे के कर्मों को उसी प्रकार नियंत्रित करना चाहते हैं जिस प्रकार हम प्रकृति को नियन्त्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रयोगशाला से ही आना चाहिए और दैनिक जीवन पर लागू होना चाहिए। यह सोचना मूर्खता होगी कि जिस दृष्टिकोण ने उद्योग, कृषि, युद्ध और औषधि में पहले ही क्रांति पैदा कर दी है, जब उसे परिवार, राष्ट्र या मानव जाति पर लागू किया जाएगा तो वह निरर्थक सिद्ध होगा।

3. Unfortunately, the………………………….human comprehension.
अनुवाद : दुर्भाग्यवश इस तथ्य के बढ़ते हुए बोध ने अनेक पाखण्डियों के लिए मार्ग खोल दिया है जो सामाजिक विज्ञान में अपने मन-पसन्द सिद्धान्तों को वैज्ञानिक बताने का प्रचार कर रहे हैं। उनके मुख से विज्ञान हमें लगातार बता रहा है कि जब तक हम तम्बाकू पीना न छोड़ेंगे, परिवार नियोजन नहीं करेंगे या समाप्त न करेंगे आदि हमारा विनाश हो जाएगा । मेरा उद्देश्य किसी वैज्ञानिक सिद्धांत का समर्थन करना नहीं है, बल्कि केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण है । उस दृष्टिकोण की क्या विशेषताएँ हैं ? प्रथम तो यह कि वह सत्य होने का प्रयास करता है, और इसलिए निष्पक्ष होने का। और यह निष्पक्षता को कानूनी दृष्टिकोण से कहीं आगे ले जाता है। एक अच्छा न्यायाधीश मि. जॉन स्मिथ व मि. चैंग सिंग में निष्पक्ष होने का प्रयास करता है। एक अच्छा वैज्ञानिक मि. जॉन स्मिथ, टेपवर्म व सौरमण्डल के बीच निष्पक्ष होगा। वह टेपवर्म के प्रति अपनी स्वाभाविक घृणा को छोड़ देता है जिससे उसे फेंक देने की अपेक्षा उसे ऐसे ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के लिए प्रेरित करती है जैसे किसी मूर्ति को या राग को और सौरमण्डल को, जिसे उसके पूर्वज उसके अंगों की या तो पूजा करते थे, या कम से कम उन्हें सर्वशक्तिमान सेवकों के रूप में अबोधगम्य मानते थे, जो इतने उच्च थे कि मानव के समझ में म आ सकते थे।

4. Suchan attitude leads ………………………… hardly at all.
अनुवाद : इस प्रकार के दृष्टिकोण के कारण वैज्ञानिक में गर्व व विनम्रता की विचित्र भावना आती है। सौरमण्डल केवल पिंडों का समूह निकलता है जो कि अपने कई पड़ोसियों की अपेक्षा बहुत छोटे हैं, और वे अपनी गति का पालन कुछ सरल व बोधगम्य नियमों के अनुसार कर रहे हैं। परन्तु वह स्वयं उन्हीं वर्गों का सदस्य है जिनके बन्दर हैं। जबकि उसका मस्तिष्क उसके शरीर में होने वाले कई रासायनिक क्रियाओं की दया पर निर्भर करता है जिन्हें वह बहुत कम समझ सकता है और जो उसके नियन्त्रण से परे हैं।

5. In so far as ………………………… cannot be right.
अनुवाद : जहाँ तक यह (वैज्ञानिक दृष्टिकोण) सभी प्राकृतिक घटनाओं को समान भावात्मक स्तर पर रखता है, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को हम ईश्वर का दृष्टिकोण कह सकते हैं। परन्तु धर्मों ने ईश्वर को जो नैतिक रूप से निष्पक्ष माना है, उस दृष्टिकोण से यह बहुत भिन्न है। विज्ञान यह निश्चित नहीं कर सकता कि क्या ठीक है और क्या गलत और न ही उसे करना चाहिए । यह विभिन्न कार्यों के परिणाम का हिसाब लगा सकता है, परन्तु यह उन पर अपना मत नहीं दे सकता। कीटाणु विशेषज्ञ केवल इतना बता सकता है कि सार्वजनिक जलापूर्ति में गन्दगी से उतने ही लोगों के मरने की सम्भावना है जितना कि सार्वजनिक जगह पर बम गिरने से । परन्तु उसने अन्य किसी व्यक्ति से अधिक यह ज्ञान प्राप्त नहीं किया कि ये दोनों कार्य समान रूप से गलत हैं। विज्ञान के शत्रु इसके व्याख्याताओं को बारी-बारी से इसलिए बुरा बताते हैं कि वै नैतिक विचारों की ओर ध्यान नहीं देते, और दूसरी ओर इसलिए कि वे उन नैतिक समस्याओं में हस्तक्षेप करते हैं, जिनसे उनका कोई सरोकार नहीं। ये दोनों आलोचनाएँ सही नहीं हो सकती।

6. Now the tendency ……………………….Negro’s original home.
अनुवाद : सामान्य आदमी की प्रवृत्ति सदा मामले के भावनात्मक व नैतिक पक्ष पर विचार मग्न रहने की है न कि नीरस प्रकार के तथ्यों पर, जिनमें वैज्ञानिक की रुचि रहती है। मैं दो उदाहरण लेता हूँ, अमेरिकी नीग्रो की समस्या व बीमारी की समस्या। बड़ी संख्या में अमेरिकी लोग मानते हैं कि नीग्रो लोग गोरे लोगों से निश्चित रूप से निम्न हैं और जहाँ तक हो सके उन्हें पृथक् रखा जाए । अन्य लोगों का विश्वास है कि उन्हें समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए। जीव वैज्ञानिक इन दोनों बातों के बीच निर्णय नहीं दे सकता। वह यह कह सकता है कि नीग्रो की खोपड़ी गोरे आदमी की खोपड़ी की अपेक्षा वनमानुष की खोपड़ी जैसी है परन्तु उसकी बालरहित त्वचा कम समान है आदि । परन्तु नीग्रो के बारे में ये दो विपरीत राजनैतिक दृष्टिकोणों के परिणाम के बारे में कुछ नहीं जान सकता है। दक्षिणी राज्यों के देहाती इलाकों में नीग्रो को जन्म दर मृत्यु दरं से अधिक है। दक्षिणी नगरों में व समस्त उत्तर में जितने नीग्रो पैदा होते हैं, उससे अधिक मरते हैं। उनकी ऊँची मृत्यु दा का कारण यह है कि जो पर्यावरण गोरे लोगों के अनुकूल है, वे क्षय रोग व अन्य रोगों से मर जाते हैं, बिल्कुल उसी प्रकार जैसे गोरे लोग अफ्रीका के पश्चिमी तट पर मरते हैं-जो कि नीग्रो का मूल स्थान है।

7. So if you keep……… ………………..disease germs.
अनुवाद : इसलिए यदि आ नोग्रो को कारों, कारखानों आदि से बाहर रखो, या कभी-कभी उसे पीटकर मारकर गोरों के सम्पर्क में आने से डरा दो, तो आप उसे वापस कपास के खेतों में भगा दोगे जहाँ वह स्वस्थ रहता है और तेजी से परिवार बढ़ा कर नीग्रो की भावी पीढ़ियों के लिए समस्याएँ पैदा करता है। परन्तु यदि आप उसकी ओर मित्रता का हाथ बढ़ाते हो तो आप उसे संक्रमित कर देते हो और इसके अतिरिक्त आप अपने अपने समुदाय में रोग कीटाणुओं का भण्डार स्थापित करते हो।

8. These results are………………………….of biological facts.
अनुवाद : ये परिणाम उनके प्रारूप हैं जो तब प्राप्त होते हैं जब हमारे कार्य वैज्ञानिक विचारों की बजाए या तो कठोर भावनाओं से या राजनैतिक गलत सिद्धान्तों से निर्देशित होते हैं। अमेरिकी गृहयुद्ध का मुख्य जैविक प्रभाव नीग्रो की मृत्यु दर का बढ़ना और जन्म दर का गिरना इतना भारी हुआ था कि 1910 और 1920 के बीच अमेरिका में ही नीग्रो की जनसंख्या बढ़कर उतनी हुई जितनी गृहयुद्ध से पहले दशक में थी। .इस प्रकार जितने नीग्रो मारे गए उनकी संख्या गृहयुद्ध में मरने वालों की सूची से कहीं अधिक थी। यदि कल, दक्षिणी राज्यों में अश्वेत लोगों, परन्तु गोरों को नहीं, सस्ती व्हिस्की व जन्म रोकने के ढंग आसानी से प्राप्त करा दिए जाएँ, तो सम्भवतः नीग्रो की जनसंख्या कम होनी आरम्भ हो जाएगी। मेरा विश्वास है कि कई अन्य राजनैतिक प्रश्न हैं, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय, जिनका हल इस प्रकार के जैविक तथ्यों पर विचार करके निकाला जा सकता है।

9. Our approach to ……………………….law in question.
अनुवाद : रोगों की समस्याओं के प्रति हमारे विचार और भी कम तर्कसंगत हैं। मैं क्रिश्चियन वैज्ञानिकों या आध्यात्मिक उपचार करने वालों के बारे में नहीं कर रहा हूँ, बल्कि सामान्य नर-नारियों की बात कर रहा हूँ जिनका आधुनिक औषधियों के परिणामों, बल्कि डॉक्टरों के व्यवसाय के कुछ भाग के बारे में कुछ धारणाएँ हैं। हमें स्वयं को या हमारे मित्रों को जब कोई गम्भीर रोग होता है तो बहुत अधिक मनोवेग पैदा हो जाता है। जब हम भावुक होते हैं किसी विषय के बारे में तो हम उसके बारे में कुछ मानने को आवश्यकता अनुभव करते हैं, और हम इसकी परवाह नहीं करते कि हमारी धारणाएँ विवेकपूर्ण हैं या नहीं। ईसा से पहले रोगों के बारे में यह माना जाता था कि यह किसी देवता के द्वारा उस व्यक्ति के, या उसके परिवार के, या पूरे समुदाय के पाप का दण्ड है। यीशु का यह दृष्टिकोण न था। जब उससे एक आदमी के बारे में पूछा जो अंधा पैदा हुआ था, “पाप किसने किया था, इस आदमी ने, या उसके माँ-बाप ने कि यह अंधा पैदा हुआ?” उन्होंने उत्तर दिया, “न तो इस आदमी ने पाप किया था, न इसके .माँ-बाप ने, बल्कि इसलिए कि ईश्वर. की माया उस पर प्रकट हो सके।” यह वैज्ञानिक के दृष्टिकोण से भिन्न नहीं है, जो रोग को प्राकृतिक नियम का परिणाम मानता है, जिसका उपचार या रोकथाम तब ही की जा सकती है जब अनुसंधान द्वारा उस नियम के कार्य करने के ढंग का पता चल जाएगा।

10. But many religious………………………….than uncivilized.
अनुवाद : परन्तु बहुत से धार्मिक लोगों का अब भी वही दृष्टिकोण है जिसका यीशु ने विरोध किया था और वे भी जो स्वयं को प्रबुद्ध मानते हैं वे भी प्रायः बेहतर नहीं है। कई लोग मानते हैं कि रोगों की रोकथाम प्रकृति की ओर लौटने से की जा सकती है। मेरे विचार में प्रकृति की ओर जाने का प्रथम कदम कपड़े उतारना होगा, जिसके कारण. निमोनिया से मरने वालों की संख्या तुरन्त सौ गुना हो जाएगी। निस्संदेह ‘प्राकृतिक ढंग से जीयो’ वाक्य निरर्थक है। सभ्य और बर्बर, स्वास्थ्य और बीमारी प्रकृति के समान भाग हैं । सभ्यता के कुछ लक्षण स्वास्थ्य के लिए खराब हैं, परन्तु इसके बावजूद जो आँकड़े उपलब्ध हैं उनसे स्पष्ट है कि सभ्य लोग असम्रा लोगों से अधिक समय तक जीवित रहते हैं।

11. The greatest………………………….results in practice.
अनुवाद : इसका सबसे बड़ा कारण हैजा जैसे जल-संक्रामक रोगों का उन्मूलन और सार्वजनिक समृद्धि है जिसने खराब स्वास्थ्य के कारण अल्प-पोषण को लगभग समाप्त कर दिया है। आज चिकित्सा विज्ञान अब भी अग्रसर है परन्तु उसके परिणामों को व्यवहार में लागू करना कठिन से कठिन होता जा रहा है।

12. The worst sufferers …………………………., but that is all.
अनुवाद : मधुमेह से बुरी तरह पीड़ित लोग प्रतिदिन दो-तीन इन्जेक्शन लेकर अनिश्चित समय तक पूरा स्वास्थ्य पुनः प्राप्त कर सकते हैं। परन्तु उनको यह बात समझाई नहीं जा स.ती क्योंकि उनको कभी यह बताया नहीं गया कि उनके शरीर बिल्कुल नियमों का पालन करते हैं, और मधुमेह के रोगी बिना इन्सुलिन के ऐसे ही काम नहीं कर सकते जैसे कि कोई मोटरकार पिना चिकनाई के तेल के। मेरे एक डॉक्टर मित्र को अभी कुछ समय पहले जिस अस्पताल में या काम करता है, वहाँ मधुमेह से मरती हुई स्त्रियों से वास्ता पड़ा। दोनों का उपचार पहले किया गया था, और उन्हें प्रत्येक दिन स्वयं को दो बार इन्जेक्शन देना सिखाया गया था। उनमें से एक की सीरिंज टूट गई थी और उसने उसके स्थान पर तुरन्त दूसरी लाने का कष्ट न किया जबकि दूसरी महिला ने दो दिन इन्जेक्शन लेने की परवाह नहीं की क्योंकि उसने एक अन्य बीमारी के कारण दो दिन पश्चात् अस्पताल में तो आना ही था। ऐसे दृष्टिकोण इतने सामान्य हैं कि इन्सुतिन की खोज से इंग्लैंड में मधुमेह से मरने वालों की संख्या में कोई विशेष अन्तर नहीं पड़ा । इससे केवल कुछ ही समझदार लोग बचे हैं, बस!

13. If a definite cure …………………………. rather than scientists
अनुवाद : यदि अगले कुछ वर्षों में कैन्सर के उपचार की खोज हो जाए, यह सम्भावना कम है कि यह मधुमेह से सरल व सुरक्षित मामला होगा। यदि हुआ, तो कई पीढ़ियों तदा दर पर अधिक अन्तर न पड़ेगा । ऐसी अवस्था में कोई व्यक्ति स्वयं को शाबाशी दे सकेगा. वह उन समझदार लोगों की अल्प संख्या का सदस्य है जो बच जाएंगे। परन्तु यदि विज्ञान उपर के बजाए परहेज का पता चलाएगा तो मामला और भी कन आशाजनक होगा। अनुपम रे. दर गया है कि ऐसे देश में जहाँ टाइफाइड सामान्य है, सदा बीयर या शराब पीना कठिन है, या बात का ध्यान रखना कि पीने का पानी उबला हुआ है, और वार्षिक पैफिदेश में केवल एं दिन का हल्का-सा बुखार होता है। टाइफाइड के संक्रमण से सार्वजनिक जलपति पनि करने से ही भली-भाँति निपटा जा सकता है, जिसमें नागरिकों के व्यक्तिगत रूप से कोई.. की आवश्यकता नहीं पड़ती। डिपथीरिया, चेचक, खसरा और वायु से फैलने वाली अन्य बीमारित को जनता के प्रयास से समाप्त किया जा सकता है, परन्तु ऐसे प्रयास में व्यक्तिगत राहायाः । बीमार लोगों व उनके सम्बन्दियों के त्याग की आवश्यकता है, और अन्तर्राक्ष यह तब तक असम्भव है जब तक लोग यह नहीं समझ लेते कि जीवाणु बिल्कुल विदेशियों की भाँति हैं, और वे किसी को भी मार सकते हैं। वे (लोग) रोगों के प्रति समझदारी का दृष्टिकोण वैज्ञानिक ढंग से शिक्षा दिए जाने के फलस्वरूप ही अपनाएँगे । चिकित्सा का अध्ययन वैज्ञानिक ढंग के अतिरिक्त किसी और ढंग पर आधारित करने से वैज्ञानिकों की बजाए तंत्रिका रोगी (पागल) बनेंगे।

14. Preventive medicine………………………….not beconquered.
अनुवाद : निरोधक औषधि को युद्ध का नैतिक तुल्य बनाया जा सकता है। कुछ लोगों के लिए यह अब भी है। कुछ समय पहले मेरा एक सहकर्मी कीमोथेरैपी पर फ्रांसीसी भाषा के एक लेख का अनुवाद कर रहा था, तब एक शब्द समूह, “शत्रु ने उसे मार दिया” उसके सामने आया जो एक स्वर्गीय औषधि विशेषज्ञ के संदर्भ में था। वह बोला, “मेरे विचार में वह संयोग से संक्रामक रोग से मर गया था।” मैंने उसकी गलती दूर की। इस मामले में शत्रु जर्मन देश का था । परन्तु उसका दृष्टिकोण बिल्कुल आज के वैज्ञानिक जैसा था । “क्योंकि हम माँस-रक्त से नहीं जूझते, बल्कि राज्यों, शक्ति, अंधेरे के शासकों के विरुद्ध युद्ध करते हैं।” संत पॉल के विचार में दुनिया पर अधिकतर पिशाच राज्य करते हैं। आज हमें इसका अधिक ज्ञान है और हम सामान्य रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अपनाए जाने की मांग करते हैं, क्योंकि इसके बिना मनुष्य की शक्ति दूसरे मनुष्यों से झगड़ने में लग रही है, जिसमें यदि दोनों नहीं, एक विवादी को तो अवश्य हानि उठानी पड़ती है। केवल विनाश के समय जन-साधारण अपने वास्तविक शत्रुओं के बारे में क्षणभर सोचता है, इस संसार के बुरे शासक’-जीवाणुओं से लेकर चक्रवात तक। जब तक मानवजाति वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं अपनाती, वे शत्रु पराजित नहीं होंगे।

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