The Leader of Men Summary in English and Hindi by Siddharth Chowdhury

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The Leader of Men Summary in English and Hindi by Siddharth Chowdhury

The Leader of Men by Siddharth Chowdhury About the Author

Siddharth Chowdhary (b. 1974) occupies a significant place among short writers and novelists of Indo-Anglian school. He was born at Patna in 1974. He is the author of the novel-entitle Patna Roughcut. This book is a spare and heartfelt homage to his homeland. He is also the author of Diksha at St. Martin’s. This book is a maverick collection of short stories based on the lives and loves of young people at Patna and in New Delhi. He has also translated Eliot’s Weinberger’s prose-poem. The stars for the Museum of Modern Art, New York in 2005. Presently Siddhartha Chowdhury lives in New Delhi and works in a publishing house.

The Leader of Men Summary in English

“The Leader of Men” is an interesting story written by siddhartha Chowdhury. It is a tragic story of a poor man’s hardships in a city life with social prejudices. Roop Singh is the hero of this story. It is round his character that the plot of this revolves. Roop Singh works in an apartment as a guard, situated in the city of Patna. He is tall man with well-built body. He has brown moustache and pointed nose. Mr. Kedia, a businessman lives in one flat of the apartment. He is rich and nefarious. Kedia does not like Roop Singh as he did not allow his friend (Kedia’s) to go in the apartment without permission. This becomes a prestige issue for Mr. Kedia. So, he becomes hostile to Roop Singh and tries to take revenge.

The writer first saw Roop at the reception counter in the lobby when he was indulged in hot discussion with Mr. Kedia. Mr. Kedia lives in flat No. 9 of the same apartment. He is in his late thirties.

Mr. Kedia has sundry business interests. He is reputed to be very rich. He has the stupid arrogance that comes with riches. Roop Singh was standing behied the counter and Kedia in fort of him shouting. There was also Mr. Sharma, the friend of Mr. Kedia. They were very angry with Roop Singh for some reason or the other. It was the old habit of Kedia to rebuke workers and servants. But Roop was also self-confident and bold. He was not ready to accept the allegation of not allowing Mr. Sharma. He had done his duty.

Roop Singh knew little English because he had passed intermediate from College of Commerce, Patna. It was with the mediation of the writter that the quarrel was subsided. It was from his servant Munna that the author knew that Roop Singh was Rajput by caste. Munna also told him that other guards did not like him because Roop Singh was of a “forward’ caste, all the others being ‘backwards’. Roop generally after his duties were over, read books in the guard room. It is the view of the author that he was the best security guard that has ever worked in this apartment.

Kedia complained to the author’s father about Roop Singh’s misbehavior. But the author’s father did not take interest in it because he regarded Roop as a dutiful and honest worker. Roop on his part didn’t do anything that was counter reactionary except that he stopped saluting Kedia. Whenever someone else would be with Kedia, he would salute the other person but ignore Kedia. Roop Singh passed Intermediate Examination and started farming. He joined this service only because the income from the farm was not much. At first he got a job as a teacher in a school near Bihta. As he did not get salary for six months, he left the job and started working as security guard in this apartment.

One December morning Roop Singh sent a letter to the writer’s father for and advance of Rs. 100/. He had to send this money to his home. The writer gave Rs. 100/-to Roop Singh as his father was out. He was very sympathetic to Roop. When Kedia came to know, he laughed at the writer and called Roop lazy and unfair person.

A big party was organized in the apartment on the 31st of night on the eve of New Year to celebrate the New Year’s day. After all members had eaten, guards of the apartment were called. Roop Singh, alongwith other guards went to attend the party. Kedia was present there. He passed sarcastic remark at Roop Singh. Kedia also managed to get Roop Singh beaten by hired criminals. Roop Singh had got many fractures in his hands. He was soon sent to the hospital by the author. Doctors took of care for his treatment and he was cured in about month’s time. Kedia was happy with to the sufferings of Roop Singh. He was happy that Roop was beaten by criminals. The hands of Roop Singh was damaged beyond repair. The Security Agency was sued for payment.

The Leader of Men Summary in Hindi

1. He was one of……………………glaring contrast.
अनुवाद-वह उन बदली के चौकीदारों में से था जो नवम्बर के अंत में हमारी अपार्टमेंट बिल्डिंग में आए थे। चार चौकीदार हर समय वहाँ रहते हैं। उनमें से दो दिन के समय और दूसरे दो रात के समय काम करते हैं। वे कारें खड़ी करने वाले स्थान के समीप नौकरों के संकीर्ण क्वार्टरों में रहते हैं और उन्हें अपने परिवार वहाँ रखने की अनुमति नहीं है । इन रक्षक चौकीदारों में से अधिकतम सुस्त दुखी व्यक्ति हैं जो लगता है किसी प्रकार जीवित रहकर की संतुष्ट हैं। उनमें से अधिकतर अनपढ़ और निम्न जाति के होते हैं और कारों के चमचमाते क्रोम में उनकी निर्धनता की विषमता सुस्पष्ट दिखाई देती है।

2. So, I was taken……………………………fit in at all.
अनुवाद-इसलिए जब मैं दिसम्बर में शीतकाल की छुट्टियों में पटना आया तो मैं रूप सिंह . को पहली बार देखकर दंग रह गया। वह अन्य चौकीदारों की भाँति न था । वह 5 फुट 10 इंच लम्बा, हट्टा-कट्टा था। उसकी लम्बी तीखी, कुलीन नाक थी तथा शनदार भूरी मूंछे थीं जो उसके ऊपर के होंठ को पूरी तरह ढके थीं। और सिरों पर घमण्ड से मुड़ी हुई सज रही थीं । वह अपने नाम को सम्मानित कर रहा था। उसकी वर्दी सदा इस्तरी की हुई होती थी। चमकते हुए काले जूते होते थे। बदरंग वर्दी और धूल भरे बकरे की खाल के लाल जूते पहने अपने नाटे साथियों से वह बिल्कुल भिन्न था । वास्तव में वह मेरे लिए सही अर्थों में एक प्राकट्य था। वह वहाँ के अनुरूप न था।

3. So, the first time……. …………..a positive thing.
अनुवाद-जब मैंने उसे पहली बार देखा तो वह लॉबी में स्वागती मेज के पास मि. केडिया से, जो हमारे फ्लैट के समाने एफ-9 में रहता है (और 30 वर्ष से अधिक का है), डाँट खा रहा था। उसकी कई प्रकार के धंधों में रुचि है और कहा जाता है कि वह काफी धनी है। उसमें मूर्खतापूर्ण दम्भ है जो इसके साथ आ जाता है और वह उसके चेहरे पर ऐसे ही दिखाई देता है जैसे उसकी बाईं कलाई पर भद्दी चौड़ी-चौकारे सोने की घड़ी और उसके दाएँ कुल्हे की जेब में मोटोरोला सेल-फोन । वह नाटा-गठीला है और गंजा होने लग पड़ा है। स्ट्रोड्स बीअर अधिक मात्रा में पीने के कारण उसका चेहरा फूलने लग पड़ा है। वह सदा अवसर का लाभ उठाने वाला, उन्नति करने वाला उद्यमी व्यक्ति है, जिसे हम अपने जीवन के चारों ओर खतरनाक फुर्ती से मंडराते हुए देखते हैं, परंतु मरे अनुमान में यह अच्छी बात है।

4. Kedia is the consummate……………………..fold up and die.
अनुवाद-केडिया उत्कृष्ट उपभोक्ता है। अपने युग का सच्चा बालक ! उसे जीवित रहने के लिए चीजें निरुद्देश्य (अंधाधुंध) खरीदनी पड़ती हैं। जब वह उन्हें भोगता है तो वह जीवित रहता है । खरीदना उसके निर्वाण का मार्का है। यदि कोई नई कार अगले छ: मास में बाजार में नहीं आती तो वह सिकुड़कर मर जाएगा।

5. Back to the story……………………..a punctured balloon.
अनुवाद-अब कहानी पर लौटते हैं। रूप सिंह मेज के पीछे खड़ा था और केडिया उसके सामने खड़ा चिल्ला रहा था। एक अन्य आदमी जो केडिया के जैसा ही दिखता था, सोने की घड़ी आदि सब कुछ वैसा ही, उत्तेजित होकर हाथ हिलाकर मंकेत कर रहा था और उसी साँस में चीख रहा था। किसी न किसी कारण से वे रूप सिंह से नाराज थे । सामान्यतः मैं न रुकता क्योंकि हर थोड़े दिन के पश्चात् केडिया किसी न किसी कमों पर चीखता था। वह मकान-मालिकों की सभा का प्रधान है और इस कार्य को बड़ी गम्भीरता से करता है। परंतु रूप सिंह के चेहरे पर स्पष्ट आत्मविश्वास और सीधा खड़े होना, स्वयं पर स्वाभाविक गर्व, आँखों में अवज्ञा व घायल सम्मान की भावना के कारण मैं रुक गया और उस दृश्य को एक नई रोशनी में देखने लगा। तब एक बिल्कुल आश्चर्यजनक बात हो गई। रूप ने केडिया से त्रुटिहीन अंग्रेजी में कहा, “लेकिन इसमें मेरा कोई दोष नहीं है सर । मैं तो अपना कर्तव्य पूरा कर रहा था।” .यद्यपि वह कुछ झूमकर देहती लहजे में बोला था । यह अद्भुत बात थी। मैंने सोचा, और मुझे लगा कि दिसम्बर के नीरस वातावरण में एक नाटक होने वाला है। केडिया हक्का-बक्का रह गया और उसे विश्वास न हो रहा था। कि उसने सही सुना था, और न ही उसके मित्र को (क्योंकि वह उसका मित्र ही होगा)। मैं उनके चेहरों पर स्तब्धता के प्रभाव से यह निष्कर्ष निकाल रहा हूँ। दम्भ के अधिकार अचानक उलट गए। मुझे विश्वास है कि रूप भी यह उनकी आँखों में देख सकता है। मेरी उसमें रुचि हो गई, परंतु मुझे बोध होता है कि समस्या कितनी मामूली है। अब केडिया का चेहरा लाल हो गया और उसके गुस्से का तूफान पंचर हुए गुब्बारे में से निकली गर्म वायु की भाँति फूट पड़ा।

6-12. ‘You talk English……………………up to my place.’
अनुवाद-“तुम मुझसे अंग्रेजी में बोलते हो ! तुम में बोलने का साहस कैसे हुआ?”
“मैंने केवल इतना कहा है कि मैंने अपना कर्त्तव्य निभाया है, और मैं बदमाश नहीं हूँ।” रूप ने केडिया को हिन्दी में उत्तर दिया।
“मैं तुम्हें ठुड्डा मार के बाहर फेंक दूंगा।”
रूप इस पर चुप रहा परंतु उसने बड़ी मुश्किल से अपने क्रोध को रोके रखा । लगभग इस समय मैं तटस्थ रूप से उनके बीच में पड़ा, “मि. केडिया, क्या बात है?”
उसने मुड़कर गुझे देखा। सामान्यतः वह मेरी उपस्थिति को स्वीकार भी न करता परंतु मैंने देखा कि उस दिन वह प्रसन्न हुआ कि मैं वहाँ था । उसने वर्ग शत्रु के विरुद्ध मुझे अपना मित्र माना, परंतु शीघ्र ही मैं इसके विपरीत सिद्ध होने वाला था।
“आह ऋतविक; अच्छा हुआ कि आप यहाँ हो ।” वह अंग्रेजी में बोलने लगा परंतु मेरे अनुमान से अच्छी बुद्धि से काम लिया और वह हिन्दी पर आ गया जो उसकी अंग्रेजी से भी बुरी थी। “मेरा मित्र मि. शर्मा (अब वह आदमी मुस्कराया और मैंने भी मुस्कान से उत्तर दिया) पंद्रह मिनट पहले मुझसे मिलने आया था और इस मूर्ख चौकीदार ने उसे मेरे पास न आने दिया।”

13-17. “I come here…………………….I took the stairs.
अनुवाद-“मैं यहाँ प्रति सप्ताह आता हूँ और मेरे साथ पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। वह चाहता था कि मैं मि. केडिया से इन्टरकॉम पर बात करूँ, और जब मैंने इन्कार कर दिया तो उसने मुझे शारीरिक रूप से सीढ़ियों पर चढ़ने से रोक दिया।” मुझे ऐसी मूर्खतापूर्ण बात में उलझने से लज्जा अनुभव हुई, फिर भी मैंने कहा, “वह तो केवल अपना कर्तव्य पूरा कर रहा था और इसके अतिरिक्त वह नया है और आपको नहीं जानता।”
“इनसे मेरे अतिथि का अपमान किया है।” केडिया ने चीखकर कहा परंतु उसकी आवाज में विश्वास न रहा था। “ये नियम हमने की बनाए मैं, मि. केडिया, और मि. सिंह तो वही कर रहा था जो उससे करने के लिए कहा गया है, और यह हमारी अपनी सुरक्षा के लिए है।”
शर्मा और केडिया ने मुझे घूरकर देखा और फिर केडिया बोला, “ऋतविक, मैं तुम्हारे पिता से तुम्हारी शिकायत करूंगा। तुम्हें अपने से बड़ों के साथ बात भी करनी नहीं आती।”
मैं उसे देखकर मुस्कराया और चुप रहा । वह शीघ्रता से लिफ्ट में चला गया और उसका मित्र उसके पीछे-पीछे । मैंने सीढ़ियों का रास्ता लिया ।

18. Later on I learnt……………………….but it was true.
अनुवाद-बाद में मुझे अपने नौकर मुन्ना से पता चला कि उसका नाम रूप था और वह राजपूत था। मुन्ना ने मुझे यह भी बताया कि दूसरे चौकीदार उसे अधिक पसंद न करते थे और समझते थे कि वह घमण्डी और दम्भी है। उसके विचार में ऐसा इसलिए था क्योंकि रूप उन्नत जाति का था और दूसरे पिछड़ी जाति के थे। वह प्रायः अलग-अलग रहता था और ड्यूटी समाप्त होने के पश्चात् चौकी र कक्ष में पुस्तकें पढ़ता रहता था । मुन्ना को यह सब कुछ उद्देण्ड व्यवहार प्रतीत होता था परंतु उसने भी अनिच्छा से स्वीकार किया कि आज तक जितने चौकीदारों ने हमारी बिल्डिंग में काम किया था, वह उन सब में उत्तम था। वह चुस्त व कार्यकुशल था और अपना काम चुपचाप और सक्षमता से करता था और इसके लिए उसे छ: सौ रुपए मासिक का शाही वेतन मिलता था, और अन्य चौकीदारों की भाँति वह उबले चावल व आलुओं पर निर्वाह करता था। यह सब केवल छ: सौ रुपए मासिक के लिए । मेरी कमीज का मूल्य भी उससे कहीं अधिक था-यह राशि हास्यास्पद थी, परंतु बात सच थी।

19. Kedia did complain……………………………so Roop stayed.
अनुवाद-केडिया ने मेरे पिताजी से शिकायत तो की, परंतु मेरे पिताजी ने जैसा कि मुझे पता था मुझसे कुछ न कहा । पतु इस घटना के पश्चात् आहत घमण्ड के कारण वह रूप सिंह से कठोरता का व्यवहार करने लगा। पह रूप की हर बात पर आलोचना करता था। वह उसे . अयोग्य और उद्देण्ड बताता था और उसने यह दावा किया कि उसने उसे एक बार ड्यूटी पर सोते पाया था। वह उसे नौकरी से निकालने पर तुला हुआ था। परंतु अन्य आवासियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और इसलिए रूप टिका रहा।

20. Kedia just couldn’t………………… English’ part.
अनुवाद-केडिया इस बात को सहन न कर सका कि उस निर्धन तुच्छ चौकीदार ने उसे उत्तर दिया था और वह भी अंग्रेजी में। उसे विश्वास था कि उसने ऐसा उसके मित्र के सामने उसे शर्मिन्दा करने के लिए किया था, और इससे भी बुरी बात यह थी कि मेरे सामने (शर्मिन्दा किया था)। वह अंग्रेजी वाली बात पर नाराज था।

21. In his blind……………………galled him no end.
अनुवाद-केडिया को अपने मिथ्याभिमान में सम्भवतः कभी अपनी गलती का बोध न हुआ। वह सदा धनी रहा था और धनी सदा सही होते हैं। उसके अनुसार इस बारे में कोई दो बात न थीं । रूप ने स्वयं कोई विरोधात्मक प्रतिक्रिया न की सिवाय इसके कि उसने केडिया को सलाम करना छोड़ दिया। जब कभी केडिया के साथ अन्य कोई व्यक्ति होता, वह उसे सलाम करता था और केडिया की उपेक्षा करता था और इससे केडिया को अनन्त चिढ़ होती थी।

22. It was during………………………..but who knows?
अनुवाद-उन दिनों घर लौटकर हर सायं को रूप से दस-पंद्रह मिनट बात करके मैंने उसके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। उसे मेरे प्रति आभार अनुभव हुआ और उसने उस दिन हस्तक्षेप करने पर मेरा धन्यवाद किया। उस समय तक दूसरे चौकीदार भी सही रास्ते पर आने लग पड़े थे। रूप उनको समाचारपत्र पढ़कर सुनाता था और उन्हें बताता था कि दुनिया में क्या हो रहा है। इसलिए नहीं कि उनकी उसमें बहुत रुचि थी। उन्होंने उसे अनौपचारिक रूप से अपना नेता चुन लिया था, और मैं समझता था कि यह उचित था, क्योंकि उसका सम्बन्ध ऐसी जाति से था जो कभी लोगों के नेता थे, योद्धा थे। उसके पुरखों ने अवश्य ही ब्रिटिश व मुगलों के विरुद्ध युद्ध किए होंगे और मेवाड़ के सुनहरे रेत के टीलों के बीच शानदार लड़ाइयाँ लड़ी होगी। मेरे विचार में मैं अनावश्यक ही उसको रोमांटिक बना रहा हूँ, सम्भवतः उसके पुरखे भी उसकी भाँति निर्धन थे और किसान थे, जो अपनी जीविका कमाने के लिए खेतों में परिश्रम करते थे, परंतु कौन जानता है ?

23. He was an educated…………………….deeply melancholic.
अनुवाद-वह शिक्षित व्यक्ति था। वह पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स में इन्टरमीडिएट तक . पढ़ा था। उसी कॉलेज में मैं गया था यद्यपि केवल अल्प काल के लिए और उससे बहुत समय पश्चात् । मैंने यह बात उसे न बताई थी क्योंकि मैंने सोचा कि शायद इससे उसे लज्जा अनुभव.. हो । उसका पिता, जो किसान था, वह लगभग उन्हीं दिनों मर गया और रूप को पढ़ाई छोड़कर नौकरी खोजनी पड़ी। जब उसे कोई नौकरी जो उसे पसंद थी न मिली तो वह फिर खेती करने लगा। उनके पास अधिक धरती न थी और कुछ अपनी बहन के विवाह के लिए बेचनी पड़ी। उसका अपना विवाह तब हुआ था जब वह पन्द्रह वर्ष का था, और गाँव में घर पर उसकी पत्नी व एक बेटा था। खेत से आय अधिक न थी, इसलिए उसने खेती अपने छोटे भाई को दे दी, जिसे वैसे ही पढ़ाई में कोई रुचि न थी और फिर से नौकरी खोजने लगा। अंत में उसे बीहटा के समीप एक स्कूल में अध्यापक की नौकरी मिल गई, परंतु छः मास पश्चात् वेतन न मिलने और परिस्थिति में सुधार की कोई आशा न होने के कारण उसने नौकरी छोड़ दी और कभी किराने की दुकान में नौकर बनकर, कभी भवन-निर्माण में मजदूरी करके, वह नौकरियों में धक्के खाता हुआ पटना आ गया । अंत में लगभग चार मास पूर्व उसे एक सुरक्षा एजेन्सी में नौकरी मिल थी। वह मुझे यह सब बातें बताता था परंतु उसमें लेशमात्र भी आत्म-करुणा न होती थी। फिर भी उसके दुख-सुख की अपेक्षा के नीचे मैं उसकी विवशाता अनुभव कर सकता था। वह छ: मास से अपने परिवार से न मिला था, और इससे वह कभी-कभी बहुत उदास हो जाता था।

24. For a man of his……………………..comprehensive on.
अनुवाद-यह अचम्भे की बात थी कि उसकी पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति इतना सचेत व भली-भाँति पढ़ा हुआ था। उसे पढ़ने में रुचि थी और वह प्रायः जो पुस्तकें उसने पढ़ी थीं और उनके बारे में उसे कैसा लगता था, इस बारे में मुझसे बातें करता था। उसकी समझ तीखी थी। मैंने अनुभव किया कि उसकी समालोचनात्मक बुद्धि मुझसे अधिक तीखी थी, यद्यपि मैं साहित्य का विद्यार्थी हूँ। सम्भवतः जीवन का मेरा अनुभव दूसरों से प्राप्त हुआ था जबकि उसका, मुझे विश्वास है, उसके अपने जीवन से विस्तृत रूप में प्राप्त हुआ था।

25. Though I am……………………….very next day.
अनुवाद-यद्यपि मैं हिन्दी साहित्य इतना नहीं पढ़ा है जितना मैं चाहता हूँ, मेरे पास कुछ पुस्तकें हैं जो मैंने उसे उधार दे दी थीं। उन पुस्तकों में मुक्तिबोध की कविताओं का संग्रह, रेनु की सकल लघु कथाएँ, और दिनकर की रशमीराठी सम्मिलित थीं। मुक्तिबोध तो उसने अगले ही दिन लौटा दी।

26. In the evening……… …………..home upstairs.
अनुवाद-सायं को जब लॉबी में कोई न होता था, हम वहाँ बैंच पर बैठ जाते थे और पुस्तकों, कहानियों व सामान्य जीवन के बारे में गपशप करते थे जब तक मेरी सिगरेट समाप्त न हो जाती
और मैं सीढ़ियों से घर न लौट जाता।

27-28. Around that time…………………..his grey uniform. . अनुवाद-लगभग उस समय उसने मुझे सलाम करना छोड़ दिया था, और मैं प्रसन्न था कि उसने बंद कर दिया था। इससे सदा अनिश्चित कारण से बेचैनी अनुभव करता था। आखिर हम सेना में तो न थे। उसके पास एक स्वंटर था जो सदा वह पहन कर रखता था। एक चमकीला मेरून रंग का, जो उसकी पत्नी ने भेजा था और जिसे वह अपनी सुरमई वर्दी पर गर्व से पहनता था।

29. In the last week………. …………….official letter.
अनुवाद-दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह में उसने 100 रुपए पेशगी मांगने के लिए मेरे पिताजी को एक पत्र भेजा, जो धन अगले मास के वेतन से काट लिया जाए क्योंकि उसे जीवित रहने के लिए धन की भीषण आवश्यकता थी। उसने लिखा था कि उसने दो दिन से कुछ न खाया था और अब उसे अपनी शिफ्ट करने में भी कठिनाई हो रही थी। वह छोटा-सा औपचारिक पत्र प्रा।

30. Father had………………………….other guards.
अनुवाद-पिताजी बाहर गए हुए थे, इसलिए मैं धन लेकर नीचे गया और उसे दे दिया और मुन्ना के हाथ उसके लिए व अन्य चौकीदारों के लिए भोजन भेजा।

31. When Kedia came………………………..I kept quiet.
अनुवाद-जब केडिया को पता चला तो वह मेरे भोलेपन पर हँसा और उसने रूप का निखटू मुफ्तखोरा बताया। उसने ऊँचे स्वर में सोचते हुए कहा कि सम्भवतः रूप व अन्य चौकीदार रात को शराब पीते हैं, क्योंकि उसने कभी-कभी शोर सुना है और उसी में सारा धन जाता है। मैं चुप रहा ।

32. Kedia is a……………………..small things.
अनुवाद-केडिया श्रद्धालु आदमी है। वह मंदिरों में दान देता है, नियमित रूप से जागरण कराता और स्वयं प्रतिदिन सवेरे एक घण्टा पूजा करता है, परंतु आश्चर्य की बात यह है कि उसे अन्य मनुष्यों में विश्वास नहीं है। कई बार मैं सोचता हूँ कि उसे कैसे ईश्वर में विश्वास है। वह छोटी-मोटी बातों का ईश्वर होगा।

33. On 31st night……………………let alone eat.
अनुवाद-हमारी अपार्टमेंट बिल्डिंग की छत पर 31 की रात को भारी दावत व उत्सवाग्नि का आयोजन किया गया। क्योंकि मैं सामाजिक तरह का व्यक्ति नहीं हूँ, मैं पार्टी में भाग लेने न गया। इसकी बजाए मैंने माइकलएंजलो एन्जेनिओनि की अद्भुत फिल्म ‘ब्लोअप’ केवल टीवी . पर देखी। मेरे माता-पिता 11 बजे रात तक घर लौट आए थे, और इससे पहले कि पुराना वर्ष समाप्त होता और नए वर्ष का आगमन होता, पार्टी धीरे-धीरे समाप्त हो गई थी। कई परिवार पार्टी में न आ सके थे, और जैसा इन अवसरों पर सदा होता है, आवश्यकता से अधिक भोजन का ऑर्डर दिया गया था और अब वह मेजों पर अछूता पड़ा था । मुर्गी और माँस और बिरयानी व पनीर और कोफ्ता कढ़ी, गुलाब जामुन के बड़े-बड़े ढेर लगे पड़े थे और उन्हें खाने वाला कोई न था । महिलाएँ 11.30 बजे तक नीचे आईं और शेष शराब पिए पुरुष खड़े होने की स्थिति में भी न थे, खाने की तो बात ही क्या।

34. Anyway……………………….damn things.
अनुवाद-नशे में एक भद्र पुरुष के मन में अचानक दया भाव जागृत हो गया और उसने मुन्ना से कहा, जो वहाँ खड़ा लोगां की हरकतें देख रहा था और शराब मिला रहा था, और मुझे विश्वास है कि कुछ पैग स्वयं भी पी रहा था, “मुन्ना बेटा, नीचे जाओ और चौकीदारों को खाने के लिए बुला लाओ । इन बेकार चीजों को कोई तो खाएगा ही।”

35. So Munna went…………………………to the full.
अनुवाद-इसलिए मुन्ना नीचे गया और चौकीदार ऊपर आ गए । रूप सिंह के अतिरिक्त सबने भोजन खूब खाया और संतुष्ट होकर नीचे चले गए। उनमें दो को पेट अगले दिन गड़बड़ा गया था। जब रूप प्लेट उठाकर अपने लिए भोजन परोसने लगा केडिया लुढ़कता हुआ उसके पास गया और जोर से बोला, “मि. सिंह, अब आपको भूख नहीं है। आपने इतना शानदार भोजन सम्भवतः जीवन में कभी न खाया होगा इसलिए ध्यान से खाना, अधिक न खा लेना।” और फिर वह हँसा और बड़प्पन की भावना से रूप की कमर थपथपाई। रूप को लगा जैसे किसी ने उसके शरीर में बड़ी देर से पड़े पलीते को जला दिया हो और यह धीरे-धीरे उसके मस्तिष्क की ओर रेंग रहा हो। उसने चुपचाप प्लेट रख दी और चल पड़ा, इस बात का बोध लिए कि सबकी दृष्टि उसकी पीठ में छिद्र कर रही थी। दूसरे चौकीदारों ने उसकी प्रतिक्रिया की ओर ध्यान न देना ही ठीक समझा। उन्होंने पूरा आनन्द उठाया।

36. What happened next………………….damages, I guess.
अनुवाद-इसके पश्चात् जो हुआ उसे दुर्भाग्यपूर्ण कहा जा सकता है, हो सकता है त्रासदीजनक भी कह दें, परंतु त्रासदी रे साथ एक प्रकार का वैभव जुड़ा होता है जिसमें आवश्यकता नहीं कि इस दुनिया के लघु पात्र सम्मिलित होते हों। 31 दिसम्बर की रात रूप की ड्यूटी लॉबी में थी। जब पार्टी समाप्त हो गई और लोग सो गए, रूप लॉबी में बैठा जो कुछ हुआ था उस पर सोच रहा था। यह केवल मेरा अनुमान है क्योंकि प्रमाण तो सब भौतिक हैं और वास्तव में उसके मन के बारे में वह कुछ नहीं बताता, सिवाए इसके कि वह निराशा भरी उदासी, दुख व चोट से भरपूर था । सम्भवतः वह अपने परिवार के बारे में सोच रहा था । अपने बेकार भाई के बारे में जो फिर भी वफादार था, अपनी सुन्दर पत्नी के बारे में जो यह सब कुछ होने पर भी युवा प्रतीत होती थी और अपनी प्यारी धन्ती के बारे में, अपने खोए हुए सपनों के खेत के बारे में जिसके एक भाग पर हथौड़ी व दरांत। वाला चमकीला लाल झण्डा एक दिन अचानक प्रकट हुआ था, और उसकी धरती का छोटा-सा टुकड़ा सदा के लिए उसरे छिन गया था, ऐसे जैसे कोई सपना हो। उसे याद था कि उस रात अपनी पत्नी को जोर से पकड़कर वह बहुत रोया था और वह भी चुपचाप रोई थी और उनका बेटा उनके पास लेटा शांत सो रहा था। अपने बेटे के सुंदर, शांत चेहरे के कारण वह सवेरे गाँव छोड़कर चला गया था। अपने पुत्र के चेहरे के कारण ही उस रात, लगभग चार बजे सवेरे, अंत में उसके मन का नाजुक संतुलन बिगड़ गया था। अपने खाली हाथों से उसने लॉबी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। अपने मुक्के से उसने शीशे का घूमने वाला दरवाजा, लकड़ी का बेंच जिस पर हम बैठकर बातें करते थे, लाल प्लास्टिक की कुर्सियाँ, और इन्टरकॉम सिस्टम, सब तोड़ दिए थे। उसके हाथों में से खून बुरी तरह बह रहा था, उंगलियाँ कई जगह से टूट गई थीं, और जब उस रात के दूसरे चौकीदार हरीपाल ने उसे रोकने का प्रयास किया, तो उसने उसके मुँह पर मुक्का मारा । वह अपनी पीड़ा से पूर्णतः अनजान था, और जब हरीपाल अन्य दो चौकीदारों के साथ लौटा और उन्होंने उसे पीटा, तब वह शांत हुआ। परंतु उस समय तक लॉबी पूरी तरह से टूट-फूट चुकी थी। हरीपाल हमें सूचना देने आया, और मेरे पिताजी ने मुझे जगाया और हम नीचे गए । अन्य कुछ वासी भी कुछ समय पश्चात् हमारे बाद आ गए थे। रूप चौकीदार के कमरे में था। उन्होंने उसे रबड़ की होज (मोटी ट्यूब) से बाँध रखा था। उसका चेहरा सूजा हुआ था और उसके हाथ बुरी तरह कटे-फटे थे। आँखें खाली-खाली भाव रहित थीं। उस तरह जैसे बी.बी.सी. के वृत्तचित्रों में हम दुनिया के सुदूर प्रदेश में प्राकृतिक आपदा-भूचाल, अकाल या तूफान से पीड़ित लोगों की आँखें देखते हैं। मैंने उसके हाथ व टाँगें खोल दी परंतु वह फर्श पर निश्चल बैठा रहा । केडिया नीचे न आया। बाद में मुझे पता चला था कि वह क्यों न आया था। मेरे पिताजी व अन्य कुछ वासी रूप को समीप के नर्सिंग होग में ले गए। उसके हाथों की कई हड्डियाँ टूटी थीं। शायद वह अपने हाथों से फिर कभी काम न कर पाएगा। ठीक होने की सम्भावना नहीं। हमने सिक्योरिटी एजेंसी पर मुकदमा कर दिया है। मेरे विचार में किसी को तो टूट-फूट का मूल्य चुकाना होगा।

Word-Meanings:
poky(adj) – small = तग, संकीर्ण, patrician(n) : of high social order = कुलीन, defiant(Adj) : insolent = अवज्ञाकारी, दम्भी, flourish(n) : show = सजधज, hideous(Adj) : ugly, repulsive= कुरूप, घिनावना, chunky(Adj) : thick and square = मोटी व चौकोर. stocky(Adj) : strong but not tall = नाटा व गठीला, enterprising(Adj) : thinking of new ideas = उद्यमी, alacrity(n): alertness = फुर्ती, consummate(Adj): excellent = उत्कृष्ट, randomly(Adj): haphazardly = निरुद्देश्य से, gesticulating(pp): making movements with hands and arms = संकेत करना, bearing(n) : manner, ari arms = ठवन, innate(adj) : inborn = सहज, स्वाभाविक, impeccable(adj) : . iaultless = त्रुटिहीन, albeit(conj) : even though = यद्यपि, lilt(n): rhythmical = गीत, rustic(adj): rural = गाँव की, accent(n): pronunciation = उच्चारण, snobbery(n): pride = दंम्भ, trivial(Adj) : insignificant = मामूली, ally(n) : friend = साथी, मित्र, . elevator(n) : lift = लिफ्ट, in tow(idm) : following = पीछे-पीछे चलना, haughty(adj) : pround = घमण्डी, stuck up (Adj) : arrogant = दंम्भी, subversive(adj) : rebellious = विद्रोही, उद्देण्ड,competently(Adj) : skilfully = सक्षमता से, subsisted(v) : lived on = निर्वाह करता था, bent on(idm): determined = तुला हुआ, kicked out(idm): dismissed = नौकरी से निकालना, sore(adj) : angry = नाराज, vanity(n) : egotism = मिथ्याभिमान, galled(v) : annoyed = चिढ़ गया, toiling(pp) : working hard = परिश्रम करना, stoicism(n) : accepting sufferings without complaining = सुख-दुख अपेक्षी

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