Mother India Summary in English and Hindi by Subhash Chandra Bose

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Mother India Summary in English and Hindi by Subhash Chandra Bose

Mother India by Subhash Chandra Bose About the Author

The author piece of the letter “Mother India” is Netaji Subhash Chandra Bose (1897-1945). He was a great nationalist and patriot. He was a great political leader of the first half of the 20th century. He led the Revolutionary Indian National Army during world war II to liberate India. He resigned from civil services. He did so because he was of the opinion the best way to end a government is to withdraw from it. “On August 18, 1945, he was going to the Soviet Union in a Japanese plane when it crashed in Taipeh. He is believed to have died in the crash. Netaji was religious and spent much time in meditation.

Mother India Summary in English

The present piece of letter “Mother India” is written to his mother. In this letter he has described how our motherland was in trouble during those days. This letter indicates the concern of a sensitive son of the soil.

Subhash Chandra Bose has narrated the condition of pre-Independence India. He had a deep feeling for the welfare to the country. He was highly pained to see our country under British rule.

Puja celebration had been performed. It had entered its final day. Venue of the pooja pandal was highly decorated. There was pomp and show throughout in the celebration. Subhash did not like such unnecessary wastage of money and energy. He was aggrieved to see the pathetic condition of his Mother-India. He was of the opinion that India had a glorious past. He had expressed his view that India is God’s beloved land and He (God) had been born in this holy land many a times in every aga in the form of saviour for the enlightenment of the people. He has blessed with this earth to get rid of their son and to establish righteousness and truth in the heart of every Indian.

There are sacred rivers like Ganga and Godavari. The yogis have gathered on the banks of those rivers and find it a suitable place for them. They perform worship with flowers, sandal wood and incense, People from different places come for a holy darshan and dip in the water.

Subhash was highly disturbed mentally to see the distressed condition of his Mother India. He asked from his mother why such a situation had arisen. Why there is no any sincere and selfless son to serve his mother. He did not see a single person, who was ready to sacrifice his desire and selfishness. Everybody was suffering from hunger, jealousy, selfishness and lack of love.

At the end, Subhash has offered himself of his abilities and sacrifices. He also expected the same from the people of the country. By doing this they would be able to fight for their Mother India, with new vigour and strength. That was the only way out to get rid of British rule and the beginning of a golden chapter.

Mother India Summary in Hindi

1. Revered mother, Today is…….not an ordinary one.
अनुवाद : पूज्यनीय माताजी आज पूजा का अंतिम दिन है। आप हमारे गाँव के घर में देवी की पूजा करने में तल्लीन होंगी। मुझे आशा है कि इस वर्ष पूजा बड़ी धूम-धाम व श्रद्धा से की जाएगी। परंतु, माँ, क्या धूमधाम व अनुष्ठान की कोई आवश्यकता है ? जिसे हम प्राप्त करना चाहते हैं, उसका अपने मन व निष्ठा से आह्वान करना पर्याप्त है। इससे अधिक और क्या चाहिए? जब चंदन की लकड़ी व फूलों का स्थान श्रद्धा व प्रेम ले लेते हैं, तो हमारी पूजा संसार में सबसे भव्य चीज बन जाती है। धूम-धाम व श्रद्धा आपस में विरोधी हैं। इस वर्ष मेरे मन में कसक है। यह बड़ा दुख है-कोई साधारण दुख नहीं।

2. I shall be pining away……………from here.
अनुवाद-देवी के जल विसर्जन के दिन मैं यहाँ तड़प रहा हूँगा। परंतु मेरा दिल आप सब के साथ होगा। ऐसे पवित्र दिन मेरे लिए कोई प्रसन्नता न होगी। परंतु इसका अब कोई चारा . नहीं है। कल सायं हम आपको अपना प्रणाम यहाँ से भेजेंगे।

3. India is God’s……………..holy river indeed!
अनुवाद-भारत ईश्वर की प्रिय भूमि है। वह इस महान देश में हर युग में मुक्तिदाता के रूप में पैदा हुआ है। लोगों को ज्ञान देने के लिए, संसार को पाप से मुक्ति दिलाने और हर भारतीय के दिल में सदाचार व सत्य की स्थापना करने के लिए वह मानव रूप में कई देशों में आया है, परंतु अन्य किसी देश में इतनी बार नहीं । इसलिए मैं कहता हूँ कि हमारी मातृभूमि ईश्वर की प्रिय भूमि है। देखो माँ, भारत में आपको जो चाहो मिल सकता हैं-गर्म से गर्म ग्रीष्म ऋतु, कड़ाके का शीतकाल, भारी से भारी वर्षा, और मनों को अच्छे लगने वाले वसंत व हेमंत । दक्कन में मैं गोदावरी देखता हूँ, जिसका निर्मल व पवित्र जल उनके किनारों तक पहुँचता है, और वह धीरे-धीरे सदा सागर की ओर बहती है में वह एक पवित्र नदी है।

4. I am reminded……………..and save us!
अनुवाद-मुझे एक और दृश्य की याद आती है। गंगा संसार की मैल लिए अपने रास्ते पर चल रही है। योगी उसके किनारे पर इकट्ठे हो गए हैं-कुछ आधी मींची आँखों से प्रातः की प्रार्थना में तल्लीन हैं। कुछ ने मूर्तियाँ बना ली हैं और जंगल से सुगंधित पुष्प इकट्ठे करके संदल और अगर जलाकर उनकी पूजा कर रहे हैं, उनमें से कुछ द्वारा किया गया मंत्रों का उच्चारण वातावरण में गूंज रहा है, कुछ स्वयं को गंगा के पवित्र जल से स्वच्छ कर रहे हैं-कुछ पूजा के फूल इकट्ठा करते हुए गुनगुना रहे हैं । यह सब कुछ इतना श्रेष्ठ है और आँखों व मन को प्यारा लगता है। परंतु वे महात्मा ऋषि कहाँ हैं ? हे दयालु प्रभु, हम पर सदा दया करो और हमारी रक्षा करो।

5. Mother, when I sit……. ……..our hoary past ?
अनुवाद-माँ, जब मैं पत्र लिखने बैठता हूँ मुझे ज्ञात नहीं रहता कि क्या उचित है। मैं नहीं जानता कि मैं क्या लिखने का रहा हूँ, और मैं क्या लिखने में सक्षम हूँ। माँ, मैं नहीं समझता कि भारत माता के पास एक भी निस्वाथ बेटा है-क्या हमारी मातृभूमि इतनी अभागी है ? उफ, हमारे पुरातन काल को क्या हो गया है?

6. You are a mother……………..also selfish ?
अनुवाद-आप भी माँ हो, परंतु क्या आपका सम्बन्ध केवल हम से ही है ? नहीं, आप सभी भारतीयों की माँ हो-यदि सभी भारतीय आपके बेटे हैं, तो आप बेटों के दुख से कष्ट से चीख ,क्यों नहीं उठतीं? क्या कोई माँ इतनी निर्दयी हो सकती है ? नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता-क्योंकि कोई माँ निर्दयी नहीं हो सकती । तो फिर यह क्या बात है कि अपने बेटों की ऐसी दुर्दशा के सामने माँ पर कोई प्रभाव नहीं होता ? माँ, आपने भारत के सभी भागों का भ्रमण किया है तो क्या भारतीयों की ऐसी शोचनीय स्थिति को देखकर आपका दिल आहत नहीं होता? हम अज्ञानी हैं और इसलिए हम स्वार्थी हो सकते हैं। परंतु माँ कभी स्वार्थी नहीं हो सकती, क्योंकि माँ अपने बच्चों के लिए जीवित रहती है। यदि यह ठीक है, तो क्या बात है कि माँ का मन नहीं पिघलता जबकि उसके बच्चे कष्ट भोग रहे हैं। तो क्या माँ भी स्थार्थी है?

7. Faith and bigotry………………cry out in pain ?
अनुवाद-धर्म व धर्मान्धता फैल गए हैं, जिससे पाप बढ़ गए हैं और लोगों के लिए कष्टदायक बन गए हैं। माँ क्या इस सब से, व इसके विचार से आप दुखी होकर आँसू नहीं बहातीं? क्या आपको वास्तव में ऐसा नहीं लगता? ऐसा कभी नहीं हो सकता। कोई माँ ऐसी कठोर हृदय नहीं हो सकती। माँ, अपने बच्चों की दुर्दशा पर ध्यान से दृष्टि डालो। पाप, सभी प्रकार के कष्ट, भूख, प्रेम से वंचित, ईर्ष्या, स्वार्थ-इन सबने उनके जीवन को वास्तविक नर्क बना दिया है।
उफ हमारी क्या दशा हो गई है। माँ, जब आप ऐसी बातों के बारे में सोचती हो, तो क्या आप बेचैन नहीं होती ? क्या आप का दिल पीड़ा से रो नहीं पड़ता ?

8. Will the condition of…………….of our nation?
अनुवाद-क्या हमारे देश की परिस्थितियाँ बुरी से बुरी होती जाएँगी ? क्या भारत माता का कोई बेटा दुखी होकर, और अपने स्वार्थों की परवाह न करके, माँ के कार्य में अपना जीवन समर्पित नहीं करेगा?
माँ, हम कब तक और सोते रहेंगे? हम कब तक अनावश्यक चीजों से खेलते रहेंगे ? क्या हम अपने राष्ट्र के विलाप को न सुनेंगे?

9. How long can………………yours yet ready?
अनुवाद-कब तक कोई बाहें मोड़कर अपने देश की इस परिस्थिति को देखता रहेगा? कोई और अधिक प्रतीक्षा नहीं कर सकता। और अधिक नहीं सो सकता । अब हमें अपने भाव-शून्यता व तन्द्रा को उतार फेंकना और कार्य में कूदना होगा । परंतु, अफसोस, इस स्वार्थी युग में माँ के कितने निस्वार्थ बेटे हैं जो अपने हितों को पूर्णत: त्यागकर माँ के लिए कार्य करने में जुट जाएँगे?
माँ, क्या आपका यह बेटा अभी तैयार है या नहीं?
आपका स्नेही
प्रकाश

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