Letter to Cork Summary in English and Hindi by Dean Mohammed

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Letter to Cork Summary in English and Hindi by Dean Mohammed

Letter to Cork by Dean Mohammed About the Author

Dean Mohammed was born in 1759 and died in 1851. He was a native of Patna. He is regarded as the first known Indian author in English. He was in the service of The East India Company. During the period of his service, he traveled to different parts of India, Ireland and England.

Letter to Cork Written by Dean Mohammed Introduction to the Chapter

Dean Mohammed wrote his observations and experiences in a series of letters addressed to a friend named Cork. This letter describes the features and the way of selling and purchasing of elephants at that time in India.

Letter to Cork Summary in English

The writer in his letter to his friend describes an animal (Elephant) commonly known as the largest one in the universe. He thinks that the description would be the subject of entertainment as well as excitement and wonder. He gives a lively description of the physical appearance of the elephant. It is from twelve to fifteen feet high and seven feet broad. He describes each and every organ of this huge animal. It is surprising that in comparison with its body and other organs its eyes are very small. So far as its teeth are concerned, they are of two types-one is grinder and the other is to show. Teeth outwardly in male are comparatively stronger and larger than that of female. The teeth of the male sometimes grow to the length of ten feet. This powerful animals is so strong that it can lift a prodigious weight. It is so delicate in the sensation of feeling that it can take the smallest piece of coin from the ground. It delights much in water. It can swim a great way.

Elephants reside near hills and lakes where there food and water are available. The people emloyed to catch them dig deep trenches in their direction and conceal them with reeds covered over with earth and grass. The elephants, on their way to the watering places, unaware of the danger before them, fall into the pits. These men often risk their lives in the execution of such hazardous projects. The old elephants sometimes escape the danger while young ones become an easy prey. For some days, they are kept without food so that they may not resist. Applying technique, they are tamed. They are managed to learn instructions by their masters.

Elephants are commonly sold by measurement. Some of those animals, which are young and well-trained, are purchased at the rate of 150 rupees per cubit. They are measured from the head to the tail.

Next to the elephant, regarding figure, is the rhinoceros. It is called by the modern Indians, abadu. It is like the wild boar but it is much larger than the wild boar.

In the eastern territories, there is another useful animal which is known as the camel, It is useful either for carrying burden or dispatch. It travels at least seven or eight miles an hour.

Letter to Cork Summary in Hindi

लेखक अपने दोस्त को लिखे पत्र में एक ऐसे जानवर (हाथी) का वर्णन करता है, जिसे दुनिया में सबसे विशाल माना जाता है। लेखक समझता है कि यह वर्णन मनोरंजन, जिज्ञासा और आश्चर्य का विषय होगा। वह हाथी के आकार-प्रकार का जीवंत वर्णन करता है। यह लगभग बारह से पन्द्रह फीट ऊँचा और सात फीट चौड़ा होता है। वह इस विशाल जन्तु के एक-एक अंग का वर्णन करता है। यह आश्चर्य की बात है कि इसके शरीर और अन्य अंगों की तुलना में उसकी आँखें बहुत छोटी होती हैं। जहाँ तक उसके दाँतों की बात है, वे दो प्रकार के होते हैं-एक, जिनसे वह खाने का कार्य करता है और दूसरे, जो सिर्फ दिखाने को होते हैं। नर-हाथियों के बाहरी दाँत मादा की तुलना में अधिक बड़े और मजबूत होते हैं। किसी-किसी नर के दाँत दस फीट लम्बे तक होते हैं। यह शक्तिशाली जानवर इतना मजबूत होता है कि वह अत्यधिक भारी वजन उठा सकता है। इसकी संवेदनाएँ इतनी सूक्ष्म होती है वह एक सिक्का को भी जमीन से उठा सकता है। पानी में इसकी गति बड़ा ही मनोरंजन दिखती है। यह लम्बी दूरी तक तैर सकता है।

हाथी ज्यादातर पहाड़ियों एवं झीलों के आस-पास पाये जाते हैं, जहाँ उनके भोजन एवं पानी की व्यवस्था होती है। उन्हें पकड़नेवाले लोग उनके मार्ग में गहरी खाईयाँ खोदकर उन्हें खर-पतवार एवं मिट्टी से ढंक देते हैं। हाथी अपने मार्ग के खतरों से अनभिज्ञ होने के कारण पानी पीने के लिए जाते वक्त उनमें गिर जाते हैं। पकड़नेवाले लोग अपनी योजना को कार्य-रूप देने में अक्सर अपनी जान जोखिम में डाल लेते हैं। प्रौढ़ हाथी कभी-कभी बच निकलते हैं, लेकिन बच्चे आसानी से शिकार बन जाते हैं। कुछ दिनों तक इन्हें भूखे रखे जाते हैं, ताकि वे प्रतिरोध नहीं कर सके। तकनीकों के प्रयोग से ये हाथी पालतू बनाये जाते हैं। उन्हें मालिकों द्वारा आदेशपालन के पाठ पढ़ाए जाते हैं।

हाथियाँ सामान्यतः माप के अनुसार बिकते हैं। कछ यवा एवं प्रशिक्षित हाथियों एक सौ पचास रुपये प्रति क्यूबिट के हिसाब से बिकते हैं। इनकी माप सिर से पूंछ तक ली जाती है। ___हाथी के बाद आकार के हिसाब से राइनोसिरस (गैंडा) को माना जाता है। यह आधुनिक भारतीयों द्वारा ‘अबादु’ कहे जाते हैं। यह देखने में जंगली सूअर की तरह होता है, लेकिन इसका आकार जंगली सूअर से बड़ा होता है।

पूर्वी भू-भाग में एक दूसरा जानवर, जो बहुत उपयोगी मान. जाता है, वह ऊंट है। इसका उपयोग यात्रा एवं सामान ढोने में होता है। यह कम-से-कम सात से आठ मील प्रति घंटा तक का सफर तय करता है।

Word-Meanings: Quadruped-चौपाया। Grinder-हाथी का चबानेवाला दाँत। Grubip-जड़ें, पौधे आद उखाड़ना। Extremity-पराकाष्ठा। Capuchin-जाना लबादा तथा टोपी।

Letter to Cork Hindi Translation

1. of all the………………………….swim a great way.
अनुवादः पूर्व में या कहीं भी विशाल आकार में कोई भी पशु हाथी के तुल्य नहीं है। आपके आश्चर्य को जागृत करने के लिए और साथ ही साथ आपका मनोरंजन करने के लिए मैं आपको इस चौपाए का विशेषतः वर्णन करता हूँ, जो संसार में सब में विशाल है। यह बारह से पन्द्रह फुट ऊंचा होता है, और सात फुट चौड़ा। इसकी त्वचा पेट के समीप इतनी कठोर होती है कि तलवार उसमें घुस नहीं सकती। इसकी आँखें अति छोटी, होती हैं, कान बड़े, शरीर गोल और भरा हुआ और पीठ मेहराब की भांति उठी होती है। यह काले से रंग का होता है और बहुत सिलवटों वाला होता है। इसके जबड़े के दोनों ओर मुंह के अन्दर चार-चार दाँत या दाढ़ें होती हैं। और दो दाँत बाहर निकले हुए होते हैं। नर (हाथी) में वे अधिक मजबूत व मोटे होते हैं। मादा में वे तीखे व छोटे होते हैं। दोनों नर व मादा जो तेज (दाँत) होता है उसे रक्षा हथियार के रूप में प्रयोग करते हैं, और दूसरे को जो कुन्द होता है पेड़ों और पौधों में भोजन खोजने के लिए प्रयोग में लाते हैं। नर के दाँत कभी-कभी दस फुट तक लम्बे हो जाते हैं; और तीन सौ पाउंड तक भारी होने का भी पता चला है। मादा के दाँत यद्यपि कम (भारी) होते हैं, परंतु अति मूल्यवान हैं। वे प्राकृतिक रूप से दस वर्ष में एक बार अपने दाँत गिरा देते हैं और बड़ी सावधानी से धरती में दबा देते हैं, और ऐसा समझा जाता है कि मनुष्य के हाथ न लगने से बचाने के लिए वे ऐसा करते हैं। हाथी. की जीला छोटी परन्तु चौड़ी होती है पाँव गोल व बड़े होते हैं और टांगों में जोड़. होते हैं जो मुड़ सकते हैं। माथा चौड़ा और उठा हुआ होत है। और पूंछ सूअर की पूंछ से मिलती-जुलती है। और इस प्राणी का खून अन्य किसी भी प्राणी से ठंडा होता है। परन्तु जो अंग विशिष्ट रूप से इसे भिन्न बनाता है वह इसकी सुंड है। यह विशेष अंग टेढ़-मेढा, विकट और . वशवर्ति, लगभग सात फुट लम्बी और तीन फुट गोलाई में होती है, और सिरे तक घटती जाती है। नाक के समीप जड़ में मार्ग होते हैं, एक सिर में जाता है, दूसरा मुँह में, पहले के द्वारा या सांस लेत है, और दूसरे के द्वारा भोजन। भोजन खिलाने के लिए सूंड हाथ का काम करती है, और रक्षा के लिए हथियार का। यह पशु इतना बलवान होता है कि यह भारी भार उठा सकता है और स्पर्श करने की इन्द्री इतनी कोमल होती है, कि यह छोटे से छोटा सिक्का धरती से उठा सकता है। उसे पानी में बड़ा आनन्द आता है और बहुत दूर तक तैर लेता है।

2. They are taken ……………………………………………… in Europe.
अनुवादः भारत के विभिन्न भागों में, जब ये पर्वतों से जहाँ वे चरते हैं, नदियों व.झीलों पर पानी पीने नीचे आते हैं तो इन्हें बड़ी चालाकी से पकड़ा जाता है। होती-वाली अर्थात् वे लोग जो इन्हें पकड़ने के लिए लगाए जाते हैं उनके रास्ते में गहरी खाइयाँ खोद देते हैं जिन्हें वे सरकण्डों. पर मिट्टी व घास डालकर छुपा देते हैं। पानी पीने के स्थान पर जाते समय, और अपने सम्मुख खतरे से अनभिज्ञ हाथी इन चालाक लोगों द्वारा बनाए गडदों में गिर पड़ते हैं, ये आदमी भी इस खतरनाक कार्य को पूरा करने में अपनी जान भारी जोखिम में डालते हैं। बड़े हाथी किसी साधन से निकल जाते हैं और बचकर जंगल में भाग जाते हैं। परन्तु छोटे हाथी जो अपने पकड़ने वालों का आसान शिकार बन जाते हैं उन्हें इसी दशा में कई दिन तक बिना भोजन के रहना पड़ता है। जब त५. वे दुर्बल हो जाते हैं और कोई विरोध करने के योग्य नहीं रहते। फ़िर उन गड्ढ़ों या खाइयों में से बाहर आने का सुगम नीचे जाने का मार्ग खोल दिया जाता है और उनके गले में पट्टा डाल दिया जाता है। उसके पश्चात् उन पर सवार बैठ जाता है, और एक पालतू हाथी के नेतृत्व में उन्हीं बड़ी कौशलता से समीप के नगर या गाँव में ले जाया जाता है। जब इस प्रकार वे काफी संख्या में इकट्ठे हो जाते हैं तो नवाबों व बड़े आदमियों के प्रयोग के लिए होतीवालियों द्वारा उन्हें नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। और बूढ़े होने पर जब वे उनके मनोरंजन के योग्य नहीं रहते, तो उन्हें कैम्पों का सामान और अन्य बोझ ढोने के कार्य में प्रयोग किया जाता है। उनके सिखाने वालों की निगरानी में उन्हें कोई भी कार्य करना सिखा दिया जाता है और अल्प समय में यूरोप में सबसे प्रसिद्ध घुड़सवारों के घोड़ों की भाँति विनीत बन जाते हैं।

3. It is related of ……………………….of its keeper.
अनुवादः उनमें से एक के बारे में कहा जाता है कि जब उसके मालिक का बच्चा माता-पिता की अनुपस्थिति में कुछ समय तक भोजन न मिलने के कारण पालने में पड़ा रोता रहा, तो इस विशाल परन्तु उदार पशु ने उसे धीरे से उठा कर अपना दूध चुंघाया, और उसके पश्चात् बड़े ध्यान से उसे पालने में लिटा दिया। यह प्यार जो कि हमारी प्रजाति में कृतज्ञता के समान है, महावत के द्वारा दयावान बर्ताव करने के कारण उत्पन्न होता है।

4. An elephant is ………………………………………….each.
अनुवादः हाथी सामान्यतः माप के बेचे जाते हैं और उन पशुओं में से कुछ, जो युवा व सुप्रशिक्षित होते हैं 150 रु० प्रति हाथ (लगभग बीस इंच) की दर से मोल लिए जाते हैं। उन्हें सरि से पूँछ तक मापा जाता है, जो कि लगभग सात हाथ लम्बा होता है, और इस हिसाब से प्रत्येक की राशि एक सौ स्टर्लिं पाऊंड से ऊपर बैठती है।

5. Next to the elephant ……………………. cover the belly.
अनुवादः हाथी के पश्चात् आकार व रूप में गेंडा होता है जिसे आधुनिक भारतीय अबदू कहते हैं। यह जंगली सुअर से भिन्न नहीं होता, परन्तु बहुत बड़ा होता है, मोटे पैर होते हैं और शरीर अधिक भारी-भरकम होता है। उस पर बड़ी-बड़ी कठोर काली परतें होती हैं जो त्वचा से थोड़ी उभरी हुई होती हैं और छोटे वर्गों से बंटी होती हैं और लगभग मगर की परतों के समान होती हैं। उसका सिर बड़ा होता है और पीछे एक हुड की भांति लिपट होता है। उसका मुँह छोटा होता है और उसकी थूथन दूर तक बड़ी हुई होती है और एक बड़े मोटे सींग से लैस होता है जिसके कारण वह दूसरे पशुओं के लिए भयानक बन जाता है। उसकी जिह्वा रेती की भाँति खुरदरी होती है और उसका पेट चमगादड़ जैसे पंखों से आच्छादित होता है।

6. In the eastern …………………… patient under fatigue.
अनुवादः पूर्वी प्रदेशों में बोझ ढोने या शीघ्र जाने के लिए ऊंट से बढ़कर कोई पशु उपयोगी नहीं है। उनमें से कुछ लगभग एक हजार किग्रा० भार तक उठा लेते हैं सात-आठ मील प्रति घंटा से चल सकते हैं। उनके निचले जबड़े के अतिरिक्त दाँत नहीं होते हैं और कमर पर एक कोहान होता है। इतने विशाल पशु संसार में कोई भी पशु इससे कम भुक्कड़ नहीं होता। वे अपना बोझ लदवाने के लिए अपने पेट पर लेट जाते हैं और अपने चालक की आवाज से नियन्त्रित होते हैं। जो उनको पीट कर उन्हें तेज नहीं चला सकते। वे प्राकृतिक रूप से डरपोक होते हैं और थकावट में बहुत धीरज रखते हैं।

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