A Snake in The Grass Summary in English and Hindi by R.K. Narayan

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A Snake in The Grass Summary in English and Hindi by R.K. Narayan

A Snake in The Grass by R.K. Narayan About the Author

Rasipuram Krishnaswami Narayan (1906-2001) was one of the most accomplished and well known Indian writers in English. He was awarded with the Sahitya Academy Award in 1960. We find realism, irony and humor, in his works. He paints the foolish acts of people in the most artistic and psychological way, hitting mercilessly on it. His expression very well touches the sentiments of the reader. He wrote a number of books. His literary production includes— ‘The Guide (Novel), ‘Next Sunday’ (Collection of essays) and ‘Lawley Road’ (collection of short stories.) “A snake in the Grass” is a satirical story taken from “An Astrologer’s Day and Other Stories.”

A Snake in The Grass Summary in English

One afternoon the members of a family were taking rest inside the hosue. A cyclist rang the bell of his cycle and announced that he had seen a snake entering the compound of the house. Making announcement, he followed his way.

The family consisting of the mother and her four sons assembled at the gate after listening it. They found their old servant Dasa sleeping in the shed. They woke him up and made him known about the entry of the snake in the compound of their bunglow. The servant tried to ignore the matter. They forced him to search the cobra. They threatened him to dismiss if he failed to trace the snake out. Some neighbours, too gathered there and charged the servant with being lazy. The servant defended himself saying his regular demand of a grass-cutter machine. They talked over it and its price for a while. In the meantime, a college-boy of the family came in. He read out the statical data, he had collected about the death of people due to snake-biting.

The boys of the family brought in bamboo-sticks and pressed one into the hands of the servant also. They worked with creepers, bushes and everything in the garden but they could not find the snake. When there was nothing more he done, the servant asked triumphantly where the snake was.

In the meantime, an old she-beggar cried at the gate for alms. They asked her not to disturb as they wee hunting a snake. Hearing this, the old woman announced it to be G Subramanya ang forbade its killing. Mother agreed to her statement remembering her promised ‘Abhishekam’. She gave a coin to the old woman.

Shortly an old man appeared at the gate and announced himself as a snake-charmer. They gathered around him. He narrated the story of his victories over snakes. They asked him to catch the cobra but helplessly, he said to them that he could do nothing unless they show him where the cobra was. He gave them his name and address and asked to call him if they saw the snake.

At five in the evening, they threw sticks and started talking about their strategy to meet the critical situation. In the meantime the old servant appeared with a pot in his hand and declared that he caught the snake. The servant bragged about his bravery and asked them not to blame him calling a dull and idle. He talked to hand over the snake to the snake-charmer who was living nearby. The mother appreciated him and he went away.

It was five minutes since Dasa had gone when the youngest son cried, “See there ! a cobra came out of a hole in the compound” It paused for a moment to look at the gathering and then crawled under the gate and disappeared along a drain. A mystery remained whether there were two snakes there or not. If not, what was in the pot, the servant had gone out with. Had they checked the pot, it would have been cleared.

A Snake in The Grass Summary in Hindi

1. On a sunny afternoon …………… his journey.
अनुवाद : एक धूप भरी दोपहर को जब बंगले में रहने वाले दोपहर को आराम कर रहे थे, एक साइकिल वाले ने बड़ी उत्तेजना से गेट पर अपनी घंटी बजाई और कहा, “एक. बड़ा नाग आपके आंगन में घुस गया है । वह मेरे पहिए को पार करके गया था।” उसने गेट के नीचे (सांप । के जाने के रास्ते की ओर संकेत किया, और उसने अपनी यात्रा फिर जारी कर दी।

2. The family …………………………. ‘Where is the snake?’
‘अनुवाद : माँ और उसके चार बेटों का परिवार बड़ी घबराहट में गेट पर इकट्ठे हो गएं । बूढ़ा नौकर दास छप्पर में सो रहा था। उन्होंने उसे हिलाकर जगाया और नाग के आने का समाचार सुनाया। “कोई नाग नहीं है,” उसने उत्तर दिया और मामला वहीं समाप्त करने का प्रयत्न किया। उन्होंने उसे डांटा और उस नाग में रुचि लेने के लिए विवश किया।” बात यह है कि जन्तु (नाम) यहीं है और यदि सायं तक उसका पता न चला तो हम तुम्हें नौकरी से निकाल देंगे । तुम्हारे द्वारा बगीचे व लॉन की ओर ध्यान न देने के कारण यह भयानक चीजें यहाँ आती रहती हैं। कुछ पड़ोसी आ गए। उन्होंने दास पर दोष की दृष्टि डाली। “तुम्हारा नौकर धरती पर सबसे सुस्त नौकर है,” वे बोले । “उसे आस-पास का स्थान संवारकर रखना चाहिए।” “मैं कई मास से घास काटने वाला यंत्र मांग रहा हूँ” दास बोला। एक स्वर से उन्होंने उस आदेश दिया कि जो कुछ है उसे उससे काम चलाना चाहिए ओर मांग करना नहीं सीखना चाहिए । वह अपनी बात । पर डटा रहा। वे अनुमान लगाने लगे कि घास काटने के यंत्र खरीदने पर कितना खर्च आएगा। एक पड़ोसी ने कहा कि युद्ध की समाप्ति से पहले आप लोहे की कोई चीज खरीदने की बात नहीं सोच सकते । वह चहककर युद्ध के दिनों की कीमतों की घिसी-पिटी बातें करने लगा। के दूसरे बेटे ने घोषणा की कि वह जो चीज चाहे कन्ट्रोल्ड (सरकार द्वारा निर्धारित) कीमत पर खरीद सकता है। पड़ोसी ने चोर बाजार के बारे में धाराप्रवाह बोलना आरम्भ कर दिया । गर्मागर्म बहस शुरू हो गई। शेष लोग अरुचि से देखते रहे। इस अवसर र घर के कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के ने दखल दिया, “मैंने एक अमेरिकन समाचार-पत्र में पढ़ा है कि हर वर्ष तीस हजार लोग सांप के काटने से मरते हैं।” माँ ने भयभीत होकर बरतन फेंके और दास को दोषी माना। लड़के ने आंकड़ों का हिसाब खोलकर बताया, “मैंने हिसाब लगाया है, 83 व्यक्ति प्रतिदिन । इसका अर्थ यह हुआ कि हर 20 मिनट में कोई-न-कोई व्यक्ति कहीं पर अपनी जान गँवा रहा है।” यह सुनकर माँ ने लगभग चीख मारी । प्रांगण भयानक प्रतीत होने लगा। लड़के लाठियाँ ले आए और एक लाठी नौकर के हाथ में भी थमा दी । वह अविश्वास से इधर-उधर पत्तों में .. लाठी घोंपने लगा। कोई प्रयुक्त रूप से बोला, “यह तो इधर-उधर घूम रहा है।” उन्होंने अपनी धोतियाँ चढ़ा लीं, और चाकू, फाली जो भी मिला, उसे ले लिया, और बगीचे को काटने-पीटने लगे । बेलें, झाड़ियाँ, लॉन सब लिटा दिए । जिसे छांटा न जा सका उसे जड़ से काट दिया । रोशनी के बे-रोकटोक आने से घर के अन्दर की दीवारें चमक उठीं। जब करने को कुछ न रहा तो दास ने विजय भाव से पूछा, “कहाँ है सांप?”

3. Anold beggar cried………………………….and departed.
अनुवाद : गेट पर एक भिखारिन भिक्षा मांगने के लिए जोर से बोली। उन्होंने उससे कहा कि वह तंग न करे क्योंकि वे साँप खोजने में लगे हैं। यह सुनकर बुढ़िया प्रसन्न हो गई । “आप भाग्यशाली हो। वह भगवान सुब्रमनिया है जो आपके घर आया है। सांप को न मारना ।” माँ पूरे मन से उससे सहमत थी। “तुम ठीक कहती हो । मैं अभिषेकम के वचन के बारे में बिल्कुल भूल गई थी। यह याद कराने के लिए है।” उसने भिखारिन को एक सिक्का दिया, उसने जाते-जाते एक सपेरे को भेजने का वचन दिया । थोड़ी ही देर में एक बूढ़ा आदमी गेट पर आया
और कहा कि वह सपेरा है। वे उसे घेरकर खड़े हो गए। उसने उन्हें अपने जीवन, अपनी गतिविधियों व सांपों पर अपनी शक्ति के बारे में बताया। उन्होंने उसकी प्रशंसा करते हुए पूछा, “तुम उन्हें कैसे पकड़ते हो?” वह धरती पर एक परिकाल्पनिक सांप पर झपटकर बोला, “इस प्रकार ।” उन्होंने उस ओर संकेत किया जिस ओर नाग गया था, और उसे आगे चलने के लिए कहा। उसने बेबसी से इधर-उधर देखा और बोला, “यदि आप मुझे सांप दिखा दो तो मैं उसे तुरंत पकड़ लूँगा। नहीं तो मैं क्या कर सकता हूँ? जिस क्षण आप उसे फिर देखो, मुझे बुला लेना। मैं समीप ही रहता हूँ।” वह अपना नाम व पता देकर चला गया।

4. At fire in the………………………….reward him adequately.
अनुवाद : सायं पाँच बजे उन्होंने अपने औजार रख दिए और आराम करने बरामदे में चले गए। उन्होंने बाग में हर पत्थर को उलट दिया था और हर घास के तिनके व जड़ी-बूटियों को काट डाला था, ताकि बाग में छोटे-से कीड़े को भी छुपने का स्थान न मिले । वे जोर-जोर से इस पर चर्चा कर रहे थे कि भविष्य में वे रेपटाइल्ज से स्वयं को कैसे सुरक्षित रखेंगे, तब दास एक घड़ा उठाए आया जिसका मुँह एक पत्थर की शिला से बन्द कर रखा था। उसने घड़ा नीचे रख दिया और बोला, “मैंने उसे इसमें पकड़ लिया है। मैंने उसे इसमें से झाँकते देखा था। इससे पहले कि वह मुझे देखता मैंने उसे देख लिया ।” उसने विस्तार से उस योजना का वर्णन किया जिसे उसने उसे पकड़ने और घड़े का मुँह बन्द करने के लिए प्रयोग किया था। वे सुरक्षित – दुर्ग पर खड़े हुए घड़े को देख रहे थे। दास के चेहरे पर नायक की चमक थी। “अब से मुझे ला न कहना” यह बोला । गों ने उसकी चतुराई की प्रशंसा की। वह चाहती थी कि धर्म 7 से वह घड़े में दूध डाल देती । दास ने सावधानी से घड़ा उठाया और यह कहते हुए दिया कि वह बड़ा व उसके अन्दर (सांप) को सपेरे को दे आएगा । वह उस दिन का नायक या था। उन्होंने उसे बड़ी प्रशंसा से देखा और उसे उचित इनाम देने का निश्चय किया ।

5. It was five minutes …………………………..what it contained.
अनुवाद : दास को गए पाँच ही मिनट हुए थे, जब सबसे छोटा बेटा चीख पड़ा, “वह ” प्राँगण की चारदीवारी में एक सुराख में से एक नाग बाहर आया। वह गेट की ओर रेंगने लगा, और अपना फन आधा खोलकर बरामदे में खड़ी भीड़ को देखने के लिए एक क्षण के.. लिए रुका। वह गेट के नीचे सरका. और नाले के साथ-साथ जाता हुआ गायब हो गया। जब वे इस दहशत से उबरे तो उन्होंने पूछा, “तो क्या इसका अर्थ है कि यहाँ दो सांप है?” कॉलिज में पढ़ने वाला लड़का बुदबुदाया ? “काश कि मुझ में दास के हाथ से घड़ा नीचे गिराने का साहस होता तो हम जान जाते कि उसके अन्दर क्या था।”

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