मैं और मेरा देश Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 7

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Class 9 Hindi मैं और मेरा देश Extra Question Answer

Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश Extra Question Answer

प्रश्न 1.
लेखक का बचपन किस प्रकार बीता था?
उत्तरः
लेखक का बचपन बहुत अच्छी प्रकार से बीता था। वह अपने घर में जनमा और वहीं पला-बढ़ा। उसे आस-पड़ोसियों की ममता तथा दुलार भी खूब मिला। थोड़ा बड़ा होकर वह समाज के संपर्क में आया उसने समाज के साथ अच्छा रिश्ता बनाया। तब उसे लगने लगा कि अब पूर्ण हो गया है।

प्रश्न 2.
एक दिन लेखक के आनंद की दीवार में दरार पड़ गई। कैसे?
उत्तर:
लेखक आनंदपूर्वक जीवन जी रहा था। स्वयं में पूर्णता का अनुभव कर रहा था। तभी एक दिन लाला लाजपत राय के अनुभव का एक वाक्य सुनकर उसके आनंद की दीवार में दरार पड़ गई। यह एक प्रकार का मानसिक भूकंप था। लालाजी का यह अनुभव सुनकर -“यदि किसी मनुष्य के पास संसार के ही नहीं; स्वर्ग के भी सभी उपहार और साधन हों, पर उसका देश गुलाम हो या किसी भी दूसरे रूप हीन हों तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नहीं दिला सकते।’ उनका यह वाक्य सुनकर लेखक को अपनी हीनता को अनुभव हुआ। वे जिस जीवन को आनंदपूर्ण मान रहा था, अब उस पर संशय की दरार पड़ गई।

प्रश्न 3.
लाला लाजपत राय को तेजस्वी पुरुष क्यों कहा गया है?
उत्तर:
लाला लाजपतराय को तेजस्वी पुरुष इसलिए कहा गया है क्योंकि उनकी कलम और वाणी दोनों में तेजस्विता झलकती थी। उन्होंने पराधीनता के दिनों में भी देश के लोगों के दिलों में अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए थे। उन्होंने जीवनभर अंग्रेजी शासन के बवंडरों को झेला था। उन्होंने देश-विदेश में घूम-घूमकर स्वतंत्रता की अलख जलाई थी। उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

प्रश्न 4.
क्या आपके विचार में युद्ध में जय बोलने वालों का भी महत्त्व होता है?
उत्तर:
हाँ, हमारे विचार में युद्ध में जय बोलने वालों का भी बहुत महत्व होता है। कभी मैच देखने का अवसर मिला ही होगा। आपने देखा

मैं और मेरा देश (निबंध)
होगा कि दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों के पैरों में बिजली लग जाती है और गिरते खिलाड़ी उभर जाते हैं? कवि-सम्मेलनों और मुशायरों की सारी सफलता दाद देने वालों पर ही निर्भर करती है, इसलिए मैं अपने देश का कितना भी साधारण नागरिक क्यों न हूँ, अपने देश के सम्मान की रक्षा के लिए बहुत कुछ कर सकता हूँ। अकेला चना क्या भाड़ फोड़े यह कहावत अपने अनुभव के आधार पर ही आपसे कह रहा हूँ- कि सौ फीसदी झूठ है। इतिहास साक्षी है, बहुत बार अकेले चने ने ही भाड़ फोड़ा है और ऐसा फोड़ा है कि भाड़ खील-खील ही नहीं हो गया, उसका निशान तक ऐसा छूमंतर हुआ कि कोई यह भी न जान पाया कि वह बेचारा आखिर था कहाँ।

प्रश्न 5.
लालाजी का क्या अनुभव था?
उत्तरः
लालाजी का अनुभव था कि “मैं अमेरिका गया, इंग्लैंड गया, फ्रांस गया और संसार के दूसरे देशों में भी घूमा पर जहाँ भी मैं गया, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।” क्या सचमुच यह अनुभव एक मानसिक भूकंप नहीं है, जो मनुष्य को झकझोर कर कहे कि किसी मनुष्य के पास संसार के ही नहीं, यदि स्वर्ग के भी सब उपहार और साधन हों, पर उसका देश गुलाम हो या किसी भी दूसरे रूप में हीन हो तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नहीं दे सकते हैं।

मैं और मेरा देश Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 7

प्रश्न 6.
लालाजी के अनुभव की छाया में लेखक क्या सोचता है?
उत्तर:
इस अनुभव की छाया में मैं सोचता हूँ कि मेरा कर्तव्य है कि मुझे निजी रूप में सारे संसार का राज्य भी क्यों न मिलता हो, मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे, उसकी किसी भी प्रकार की शक्ति में कमी आए; साथ ही उसके एक नागरिक के रूप में मेरा यह अधिकार भी है कि अपने देश के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मिले और उसकी शक्तियों से अपने सम्मान की रक्षा का मुझे, जहाँ भी मैं हूँ, भरोसा रहे।

प्रश्न 7.
स्वामी रामतीर्थ में क्या सुखद अनुभव हुआ?
उत्तर:
एक बार भारत के महान संत स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान गए। वे रेल से यात्रा कर रहे थे कि एक दिन ऐसा हुआ कि उन्हें खाने को फल न मिले और उन दिनों फल ही उनका भोजन था। गाड़ी एक स्टेशन पर ठहरी तो वहाँ भी उन्होंने फलों की खोज की, पर वे उन्हें फल न सके। उनके मुँह से निकला- जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते!

एक जापानी युवक प्लेटफार्म पर खड़ा था। वह अपनी पत्नी को रेल में बैठाने आया था, उसने यह शब्द सुन लिए । सुनते ही वह अपनी बात बीच में छोड़कर भागा और कहीं दूर से एक टोकरी ताजे फल लाया। वे फल उसने स्वामी रामतीर्थ को भेंट करते हुए कहा- लीजिए, आपको ताजे फलों की ज़रूरत थी।

स्वामी जी ने समझा कि यह कोई फल बेचने वाला है और उनके दाम पूछे, पर उसने दाम लेने से इन्कार कर दिया। बहुत आग्रह करने पर उसने कहा- आप इनका मूल्य देना ही चाहते हैं तो वह यह है कि “आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।”

युवक का यह उत्तर सुनकर स्वामीजी मंत्रमुग्ध हो गए।

प्रश्न 8.
कमालपाशा के साथ घटी घटना का वर्णन अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महान कमालपाशा उन दिनों अपने देश तुर्की के राष्ट्रपति थे। राजधानी में अपनी वर्षगाँठ का उत्सव समाप्त कर जब वे अपने भवन में ऊपर चले गए, तो एक देहाती बूढ़ा उन्हें वर्षगाँठ का उपहार भेंट करने आया। सेक्रेटरी ने कहा- अब तो समय बीत गया है। बूढ़े ने कहा- मैं तीस मील से पैदल चलकर आ रहा हूँ, इसलिए मुझे देर हो गई।

राष्ट्रपति तक उसकी सूचना भेजी गई, कमालपाशा विश्राम के वस्त्र बदल चुके थे, वे उन्हीं कपड़ों में नीचे चले आए और उन्होंने बूढ़े किसान का उपहार स्वीकार किया। यह उपहार मिट्टी की छोटी हँडिया में पाव भर शहद था, जिसे बूढ़ा स्वयं तोड़कर लाया था। कमालपाशा ने हडिया को स्वयं खोला और उसमें से दो उँगलियाँ भरकर चाटने के बाद तीसरी उँगली शहद में भरकर बूढ़े के मुँह में दे दी, बूढ़ा निहाल हो गया।

राष्ट्रपति ने कहा- दादा, आज सर्वोत्तम उपहार तुमने ही मुझे भेंट किया, क्योंकि इसमें तुम्हारे हृदय का शुद्ध प्यार है। उन्होंने आदेश दिया कि राष्ट्रपति की शाही कार में शाही सम्मान के साथ उनके दादा को गाँव तक पहुँचाया जाए।

प्रश्न 9.
शक्ति-बोध और सौंदर्य बोध से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
शक्तिबोध – यदि आप देश के शक्ति-बोध को भयंकर चोट पहुँचा रहे हैं और आपके हाथों देश के सामूहिक मानसिक बल का ह्रास हो रहा है। सुनी है आपने शल्य की बात? वह महाबली कर्ण का सारथी था। जब भी कर्ण अपने पक्ष के विजय की घोषणा करता, हुंकार भरता, वह अर्जुन की अजेयता का एक हल्का-सा उल्लेख कर देता। बार-बार के इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ डाल देता, जो उसके मन में भावी पराजय की नींव रखने में सफल हो गई।

सौंदर्य-बोध – अच्छा, आप इस तरह की चर्चा कभी नहीं करते! तो मैं आपसे दूसरा प्रश्न पूछता हूँ। क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं, अपने घर का कूड़ा बाहर फेंकते हैं; मुँह से गंदे शब्दों में गंदे भाव प्रकट करते हैं, इधर की उधर, उधर की इधर लगाते हैं; अपना घर, दफ्तर, गली गंदा रखते हैं, होटलों- धर्मशालाओं में या ऐसे ही दूसरे स्थानों में जीनों में कोनों में पीक थूकते हैं? उत्सवों, मेलों, रेलों और खेलों में ठेलमठेल करते हैं और इसी तरह किसी भी रूप में क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?

यदि आपका उत्तर हाँ है, तो आपके द्वारा देश के सौंदर्य-बोध को भयंकर आघात लग रहा है और आपके द्वारा देश की संस्कृति को गहरी चोट पहुँच रही है।

प्रश्न 10.
कौन-सा नागरिक देश के लिए अच्छा है?
उत्तर:
जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि चुनाव में किसे अपना मत देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है; जहाँ के नागरिक गलत लोगों के उत्तेजक नारों या व्यक्तियों के गलत प्रभाव में आकर मत देते हैं, वह हीन है।

इसलिए मैं कह रहा हूँ कि मेरा यानी हरेक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें और मेरा अधिकार है कि मेरा मत लिए बिना कोई भी आदमी, वह संसार का सर्वश्रेष्ठ महापुरुष ही क्यों न हो, किसी अधिकार की कुर्सी पर न बैठ सके।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
उपसर्ग-प्रत्यय
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग-प्रत्यय अलग करके लिखिए-
• सम्मान
• मनुष्यता
• अपूर्णता
• अपराधी
• अपूर्व
• स्वतंत्रता
• वैज्ञानिक
• शास्त्री
• जापानी
• नागरिक
उत्तरः
• सम्मान – सम् (उपसर्ग), मान (प्रत्यय)
• मनुष्यता – ता (प्रत्यय)
• अपूर्णता – अ (उपसर्ग), ता (प्रत्यय)
• अपराधी – ई (प्रत्यय)
• अपूर्व – अ (उपसर्ग)
• स्वतंत्रता – स्व (उपसर्ग), ता (प्रत्यय)
• वैज्ञानिक – इक (प्रत्यय)
• शास्त्री – ई (प्रत्यय)
• जापानी – ई (प्रत्यय)
• नागरिक – इक (प्रत्यय)

मैं और मेरा देश Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 7

प्रश्न 2.
संज्ञा
रेखांकित का संज्ञा-भेद बताइए-
(क) कमालपाशा विश्राम कर रहे थे।
(ख) एक किसान उपहार लेकर आया था।
(ग) जापानी युवक ने देश को गौरव दिया।
(घ) हाँडी में शहद था।
उत्तर:
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा,
(ख) जातिवाचक संज्ञा,
(ग) भाववाचक संज्ञा,
(घ) द्रव्यवाचक संज्ञा।

प्रश्न 3.
सर्वनाम छाँटो और भेद बताओ-
(क) कोई प्रवेश नहीं कर सकता।
(ख) वह एक पुस्तक ले आया था।
(ग) किसने देश का सम्मान बढ़ाया?
उत्तर:
(क) कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(ख) वह – अन्यपुरुषवाचक सर्वनाम
(ग) किसने – प्रश्नवाचक सर्वनाम

प्रश्न 4.
विशेषण छाँटो और भेद बताओ-
(क) जापान में ताजे फल नहीं मिलते।
(ख) मैं छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देता हूँ।
(ग) स्टेशन पर एक युवक आया था।
उत्तर :
(क) ताजे – गुणवाचक विशेषण
(ख) छोटी-छोटी – अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
(ग) एक – संख्यावाचक विशेषण

प्रश्न 5.
क्रिया
निम्नलिखित वाक्यों में से क्रिया छाँटो और भेद बताओ-
(क) मुझे फल नहीं मिलता।
(ख) युवक चला गया।
(ग) युवक ने स्वामीजी को फल दिए।
(घ) मैंने नौकर द्वारा राष्ट्रपति को सूचना भिजवाई।
उत्तरः
(क) मिलता – सकर्मक क्रिया
(ख) चला गया – अकर्मक क्रिया
(ग) दिए – द्विकर्मक क्रिया
(घ) भिजवाई – प्रेरणार्थक क्रिया

प्रश्न 6.
अर्थ के आधार पर वाक्य भेद बताइए-
(क) मैं अपने देश का नागरिक हूँ।
(ख) क्या युद्ध में जय बोलने वालों का महत्त्व है?
(ग) मेरा उत्तर स्पष्ट नहीं था।
(घ) अरे! तुमने तो कमाल कर दिया।
उत्तर:
(क) विधानवाचक
(ख) प्रश्नवाचक
(ग) निषेधवाचक
(घ) विस्मयवाचक

Class 9 Ganga Chapter 7 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

गद्यांश (1)

मैं अपने घर में जनमा था, पला था।
अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों का ममता- दुलार पा, बड़ा हुआ था।
अपने नगर में घूम-फिरकर, वहाँ के विशाल समाज का संपर्क पा, वहाँ के संचित ज्ञान भंडार का उपयोग कर, उसे अपनी सेवाओं का दान दे, उसकी सेवाओं का सहारा पा और इस तरह एक मनुष्यों से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।
मैं अपने नगर के लोगों का सम्मान करता था, वे भी मेरा सम्मान करते थे।
मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।
इस तरह मैं समझ रहा था कि मैं अपने में अब पूरा हो गया हूँ, पूरा फैल गया हूँ, पूरा मनुष्य हो गया हूँ।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक को ऐसा क्यों लगने लगा कि अब मैं एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर खड़ा हो गया हूँ?
उत्तरः
लेखक ऐसा तब लगने लगा जब वह पास-पड़ोसियों की ममता और दुलार पाकर, समाज के बीच घुल-मिल गया। वह समाज से कुछ लेकर तथा समाज को कुछ देकर बड़ा हो गया। तब उसे लगने लगा कि अब वह एक सामान्य मनुष्य से एक भरा-पूरा नगर बनकर खड़ा हो गया है।

प्रश्न 2.
क्या लेखक की सोच सही थी?
उत्तरः
नहीं, लेखक की सोच सही नहीं थी। वह अभी भी एक गुलाम देश का नागरिक था। गुलाम देश का नागरिक कभी भी, कहीं भी सम्मान का पात्र नहीं बन सकता है। अतः वह अभी भी पूर्ण व्यक्ति नहीं बन पाया था।

मैं और मेरा देश Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 7

गद्यांश (2)

एक दिन आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई और तब मुझे सोचना पड़ा कि अपने घर, अपने पड़ोस, अपने नगर की सीमाओं में ममता, सहारा, ज्ञान और आनंद के उपहार पाकर भी मेरी स्थिति एकदम हीन है और हीन भी इतनी कि मेरा कहीं भी और कोई भी अपमान कर सकता है- एक मामूली अपराधी की तरह और मुझे यह भी अधिकार नहीं कि मैं उस अपमान का बदला लेना तो दूर रहा, उसके लिए कहीं अपील या दया- प्रार्थना ही कर सकूँ।

क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?

बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अर्थ में भी कि यह बात को खुलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और इस अर्थ में भी कि ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है, तो उत्तर यह है आपके प्रश्न का-

जी हाँ, एक भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई और लीजिए आपको कोई नया प्रश्न न पूछना पड़े, इसलिए मैं अपनी ओर से ही कह रहा हूँ कि यह दीवार थी मानसिक विचारों की; इसलिए यह भूकंप भी किसी प्रांत या प्रदेश में नहीं उठा, मेरे मानस में ही उठा था।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लालाजी का अनुभव सुनकर लेखक की क्या स्थिति हो गई?
उत्तरः
लालाजी का अनुभव सुनकर लेखक की स्थिति एकदम दीन हो गई। उसे लगने लगा कि कोई भी, कहीं भी उसका अपमानकर सकता है। वह इस अपमान का बदला तो लेना दूर उसके लिए कहीं कोई अपील तक नहीं कर सकता है।

प्रश्न 2.
कैसे प्रश्न का महत्त्व है और क्यों?
उत्तर:
बड़े प्रश्न का महत्त्व है। इसका कारण यह है कि बड़े प्रश्न की बात को रखने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है उसे ठीक समय पर पूछा जाना चाहिए। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में बहुत आनंद आता है।

गद्यांश (3)

हाँ जी, युद्ध में जय बोलने वालों का भी बहुत महत्व है। कभी मैच देखने का अवसर मिला ही होगा आपको; देखा नहीं आपने कि दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों के पैरों में बिजली लग जाती है और गिरते खिलाड़ी उभर जाते हैं? कवि-सम्मेलनों और मुशायरों की सारी सफलता दाद देने वालों पर ही निर्भर करती है, इसलिए मैं अपने देश का कितना भी साधारण नागरिक क्यों न हूँ, अपने देश के सम्मान की रक्षा के लिए बहुत कुछ कर सकता हूँ। अकेला चना क्या भाड़ फोड़े यह कहावत, अपने अनुभव के आधार पर ही आपसे कह रहा हूँ कि सौ फीसदी झूठ है। इतिहास साक्षी है, बहुत बार अकेले चने ने ही भाड़ फोड़ा है और ऐसा फोड़ा है कि भाड़ खील खील ही नहीं हो गया, उसका निशान तक ऐसा छूमंतर हुआ कि कोई यह भी न जान पाया कि वह बेचारा आखिर था कहाँ।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
दर्शकों की तालियाँ कहाँ-कहाँ असर सिखाती है?
उत्तरः
दर्शकों और श्रोताओं की तालियाँ सीमा पर लड़ रहे फौजियों का उत्साह बढ़ाती हैं। मैच के दौरान दर्शकों की तालियाँ उनके पैरों में पंख लगा देती हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों में श्रोताओं की दाद उनका उत्साह बढ़ा देती है।

प्रश्न 2.
इतिहास किस बात का साक्षी है?
उत्तर:
इतिहास इस बात का साक्षी है कि कई बार अकेले व्यक्ति ने ही बहुत बड़ा करिश्मा करके दिखाया है। यह कहावत झूठ है कि अकेला चना फाड़ नहीं फोड़ सकता है। बहुत बार अकेले चने ने भाड़ को इतनी बुरी तरह फोड़ा है कि उसका नामोनिशान तक मिट गया है।

गद्यांश (4)

मैं अपने देश का नागरिक हूँ और मानता हूँ कि मैं अपना देश हूँ। जैसे मैं अपने लाभ और सम्मान के लिए हरेक छोटी-छोटी बात पर ध्यान देता हूँ, वैसे ही मैं अपने देश के लाभ और सम्मान के लिए भी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दूँ, यह मेरा कर्तव्य है और जैसे मैं अपने सम्मान और साधनों से अपने जीवन में सहारा पाता हूँ, वैसे ही देश के सम्मान और साधनों से भी सहारा पाऊँ, यह मेरा अधिकार है। बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।

मैंने जो कुछ जीवन में अध्ययन और अनुभव से सीखा है, वह यही है कि महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है, उस कार्य के करने की भावना में है। बड़े से बड़ा कार्य हीन है, यदि उसके पीछे अच्छी भावना नहीं है और छोटे से छोटा कार्य भी महान है, यदि उसके पीछे अच्छी भावना है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
देश का नागरिक होने के नाते नागरिक का क्या कर्तव्य हो जाता है?
उत्तरः
देश का नागरिक होने के नाते नागरिक का यह कर्तव्य हो जाता है कि जैसे मैं अपनी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देता हूँ, वैसे ही मैं अपने देश के लाभ और सम्मान की छोटी-से-छोटी बातों पर भी ध्यान देता हूँ।

प्रश्न 2.
नागरिक का क्या कर्त्तव्य बन जाता है?
उत्तरः
नागरिक का यह कर्त्तव्य बन जाता है कि वह जिन साधनों से अपने लिए सम्मान पाता है, उसी प्रकार देश के सम्मान की भी रक्षा करूँ। देश के लिए सभी कार्य अच्छी भावना से करूँ।

Class 9 Hindi Chapter 7 Extra Question Answer for Practice

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1.
‘मैं और मेरा देश’ निबंध के लेखक कौन हैं?

प्रश्न 2.
लेखक के मानस में ‘भूकंप (मानसिक हलचल) क्यों उठा था?

प्रश्न 3.
‘मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं’ – इस कथन का क्या आशय है?

प्रश्न 4.
जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को अपने देश के बारे में क्या संदेश दिया?

प्रश्न 5.
लेखक ने किस घटना को देश के माथे पर ‘कलंक’ कहा है?

मैं और मेरा देश Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 7

चित्र-वर्णन करो

प्रश्न 1.
मैं और मेरा देश Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 7 1
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