Daily practice of Class 9 Hindi Important Questions and Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 Extra Question Answer रीढ़ की हड्डी builds a strong language foundation over time.
Class 9 Hindi रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer
प्रश्न 1.
रामस्वरूप और गोपालप्रसाद बात-बात पर ‘एक हमारा जमाना था……..’ कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहाँ तक तर्कसंगत है?
उत्तर:
रामस्वरूप और गोपालप्रसाद पुरानी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें अपना पुराना जमाना ही अच्छा प्रतीत होता है। यही कारण है कि वे बात-बात पर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। हमारी दृष्टि में यह तुलना कतई भी ठीक नहीं है। समय परिवर्तनशील है। अतः कभी एक बात या स्थिति स्थिर नहीं रहती। उसमें निरंतर परिवर्तन होता रहता है। हमें इस परिवर्तन को स्वीकार करना चाहिए।
प्रश्न 2.
रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
उत्तर:
रामस्वरूप ने बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाई, पर विवाह के लिए उसे छिपाना उसकी मजबूरी है। लड़के के पिता को लड़के और उसके पिता की इच्छा के अनुसार चलना पड़ता है। गोपाल प्रसाद उच्च शिक्षित बहू नहीं चाहते और रामस्वरूप उनके लड़के से अपनी बेटी का रिश्ता तय करना चाहता है। अतः वह बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाता है। वह विवशतावश के कारण ऐसा करता है।
प्रश्न 3.
अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं वह उचित क्यों नहीं है?
उत्तर:
अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप अपनी बेटी उमा से इस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे थे कि वह सीधी-सादी, चुप रहने वाली कम पढ़ी-लिखी लगने वाली लड़की की तरह व्यवहार करे। उनका ऐसा सोचना उचित नहीं है। लड़की कोई भेड़-बकरी या मेज कुर्सी नहीं है। उसके भी दिल होता है। उसका उच्च शिक्षा पाना कोई अपराध नहीं है। वह पढ़ी-लिखी लड़की जैसा ही व्यवहार करेगी।
प्रश्न 4.
गोपालप्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।
उत्तर:
हाँ, दोनों समान रूप से अपराधी हैं। गोपालप्रसाद विवाह की पवित्रता को नहीं समझते। वे इसे बिजनेस की तरह लेते हैं और सौदा तय करने से पहले तरह-तरह की जाँच-पड़ताल करते हैं।
रामस्वरूप अपनी बेटी को उच्च शिक्षा तो दिलवाते हैं पर उसे छिपाते हैं। बेशक यह उनकी मजबूरी है। हमारी दृष्टि में उन्हें ऐसी जगह रिश्ता तय करने का प्रयास ही नहीं करना चाहिए था, जहाँ लड़की की शिक्षा की कद्र न हो। जब किसी बात को छिपाया जाता है, तब वह गलत हो जाती है। शिक्षा दिलाकर उन्होंने कोई अपराध नहीं किया। रामस्वरूप व्यर्थ ही अपराध भावना से ग्रस्त हैं।
प्रश्न 5.
‘………… आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं……..’ उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
उत्तर:
उमा के इस कथन के माध्यम से शंकर की दो प्रकार की कमियों की ओर संकेत होता है-
- शंकर चरित्रहीन युवक है। उसमें चारित्रिक दृढ़ता का न होना उसे रीढ़हीन सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।
- शंकर शारीरिक दृष्टि से भी अत्यंत कमजोर है वह तनकर सीधा नहीं बैठ सकता है। वह बीमार रहता है।
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प्रश्न 6.
शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की, समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है, तर्क सहित उत्तर दीजिए।
रीढ़ की हड्डी (एकांकी नाटक)
उत्तर:
समाज को उमा जैसे व्यक्तित्व की जरूरत है। उमा के व्यक्तित्व में साहस है। वह स्पष्टवक्ता है। वह समाज के तथाकथित ठेकेदारों की कलई खोल सकती है और उन्हें ‘आइना दिखा सकती है। वह पढ़ी-लिखी समझदार लड़की है।
शंकर चरित्रहीन प्रवृत्ति का दब्बू व्यक्तित्व वाला एवं शारीरिक रूप से अक्षम है। उसका व्यक्तित्व उपेक्षणीय है। समाज को उसकी कोई आवश्यकता नहीं है।
प्रश्न 7.
‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस एकांकी का शीर्षक सर्वथा उपयुक्त है। यह सार्थक भी है। शरीर में रीढ़ की हड्डी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह उसे सीधा रखती है। यही दशा समाज की भी है। शंकर जैसे युवक रीढ़-विहीन हैं। उनका अपना कुछ भी व्यक्तित्व नहीं है। वे चरित्रहीन हैं तथा दूसरों के इशारों पर चलते हैं। ऐसा लगता है कि उनकी रीढ़ की हड्डी है। ही नहीं। तभी उसे बैकबोन बिना कहा जाता है। यह शीर्षक एकांकी की भावना को व्यक्त करने में पूर्णतः समर्थ है, अतः सार्थक है।
प्रश्न 8.
कथावस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों?
उत्तर:
कथावस्तु के आधार पर हम उमा को इस एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं। इसका कारण यह है कि इसी पात्र के माध्यम से लेखक अपनी बात कहता है। उमा द्वारा व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। उमा अपने सशक्त व्यक्तित्व का परिचय देकर अन्य सभी पात्रों पर भारी पड़ती है। कथावस्तु का सारा आयोजन उसी के लिए होता है। यही वह कथा की वह केन्द्रीय धुरी है जिसके इर्द-गिर्द समस्त कथाचक्र घूमता है।
प्रश्न 9.
एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपालप्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एकांकी के आधार पर दोनों की चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
रामस्वरूप : यह लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा दिलाने का पक्षपाती है। वह अपनी पत्नी के विरोध के बावजूद अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाता है, पर उसे छिपाना उसकी विवशता है।
रामस्वरूप दब्बू स्वभाव का व्यक्ति है। उसमें साहस की कमी है। वह गोपालप्रसाद की हाँ में हाँ मिलाता है।
गोपालप्रसाद : यह घाघ किस्म का व्यक्ति है। इसकी कथनी और करनी में भारी अंतर है। यह विवाह को बिजनेस मानता है वह पुत्र की कमी पर पर्दा डालने का प्रयास करता है। वह सच्चाई सुन नहीं पाता है और वह पुरानी मान्यताओं में विश्वास रखता है। हाँ, वह तर्कशील अवश्य है तभी तो वह कहता है- “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं। शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।”
प्रश्न 10.
इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।
उत्तर:
इस एकांकी का उद्देश्य विवाह योग्य लड़कियों की आवाज को बुलंद करना है। यह उन लोगों की कलई खोलती है जो लड़कियों को भेड़-बकरियाँ या मेज़-कुर्सी मानते हैं। यह एकांकी लड़कियों के स्वतंत्र व्यक्तित्व की रक्षा करती जान पड़ती है। यह एकांकी दोमुँही व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों का पर्दाफाश करती है चरित्रहीन युवकों को यह रीढ़हीन बताती है।
प्रश्न 11.
समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं?
उत्तर:
समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु हम निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं-
- समाज के सभी क्षेत्रों में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर सकते हैं।
- घर-परिवार तथा समाज में महिलाओं को सम्मान दिला सकते हैं।
- उन्हें संपत्ति में उनका हक दिलाकर उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
- लड़कियों का विवाह बिना दहेज लिए दिए कर सकते हैं।
प्रश्न 12.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में कई स्थलों पर करारे व्यंग्य किए गए हैं।’- कुछ उदाहरण चुनकर इस कथन का समर्थन कीजिए।
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ में निम्नलिखित स्थलों पर करारे व्यंग्य किए गए हैं –
उमा जब बोलती नहीं है, लेकिन जब गोपालप्रसाद बार-बार मुँह खोलने पर जोर देते हैं तब वह व्यंग्यात्मक लहजे में कहती है-
उमा – (हलकी लेकिन मजबूत आवाज़ में) क्या जवाब दूँ बाबू जी! जब कुर्सी मेज़ बिकती है तब दुकानदार कुर्सी मेज़ से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीददार को दिखला देता है। पसंद आ गई तो अच्छा है, वरना ……………….
रामस्वरूप – (चौंककर खड़े हो जाते हैं) उमा, उमा!
उमा – अब मुझे कह लेने दीजिए बाबूजी……. ये जो महाशय मेरे खरीददार बनकर आए हैं, इनसे जरा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देखभाल कर……..?
- उमा, बाबू गोपालप्रसाद की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करते हुए कहती है-
(तेज़ आवाज़ में) जी हाँ और हमारी बेइज्जती नहीं होती, जो आप इतनी देर से नाप-तोल कर रहे हैं? और जरा अपने इन साहबजादे से पूछिए कि अभी पिछली फरवरी में ये लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहे थे और वहाँ से कैसे भगाए गए थे! - वह जले पर नमक छिड़कते हुए कहती है-
“जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं- यानी बैकबोन बैकबोन।”
प्रश्न 13.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में कई स्थलों पर हास्य की सृष्टि हुई है। ऐसे कुछ स्थलों को चुनकर लिखिए।
उत्तर:
हास्य के कुछ स्थल इस प्रकार हैं-
गोपाल : खूबसूरती पर टैक्स! (रामस्वरूप और शंकर हँस पड़ते हैं) मगर नहीं साहब, यह ऐसा टैक्स है जनाब कि देने वाले चूँ भी न करें। बस शर्त यह है कि हर एक औरत पर यहछोड़ दिया जाए कि वह अपनी खूबसूरती के ‘स्टैण्डर्ड’ के माफिक अपने ऊपर टैक्स तय कर ले फिर देखिए सरकार की कैसी आमदनी बढ़ती है।
गोपाल : “भला पूछिए, इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है। अरे मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेजी अखबार पढ़ाने लगीं और ‘पालिटिक्स’ वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी। जनाब, मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं, शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।”
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प्रश्न 14.
रामस्वरूप और प्रेमा में किस बात को लेकर नोंक-झोंक हो जाती है?
उत्तर:
रामस्वरूप नौकर रतन से धोबी से आई चादर लाने को कहता है तो वह प्रेमासे धोती माँगता है।
प्रेमा रामस्वरूप से धोती को लेकर उलझ पड़ती है- “तुम्हें इस वक्त धोती की क्या जरूरत पड़ गई?”
रामस्वरूप उत्तर देता है- “लेकिन तुमसे धोती माँगी किसने?”
प्रश्न 15.
रामस्वरूप अपनी पत्नी के बहुत बोलने की उपमा किसके साथ देते हैं?
उत्तर:
रामस्वरूप अपनी पत्नी प्रेमा की उपमा ग्रामोफोन बाजे से देते हैं। वे व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहते हैं-
“यह दो तरह का होता है। एक तो आदमी का बनाया हुआ। उसे एक बार चलाकर जब चाहे तब रोक लो और दूसरा परमात्मा का बनाया हुआ। रिकार्ड एक बार चढ़ा तो रुकने का नाम नहीं।”
प्रश्न 16.
प्रेमा ने अपनी बेटी उमा के बारे में पति रामस्वरूप को क्या बताया?
उत्तर:
प्रेमा ने बताया- “तुम्हीं ने तो कहा था कि जरा ठीक-ठाक करके नीचे लाना। आजकल तो लड़की कितनी ही सुंदर हो, बिना टीमटाम के भला कौन पूछता है? इसी मारे मैंने तो पौडर – वौडर उसके सामने रखा था, पर उसे तो इन चीजों से न जाने किस जन्म की नफरत है। मेरा कहना था कि आँचल में मुँह लपेटकर लेट गई। भई. मैं बाज आई तुम्हारी इस लड़की से।”
प्रश्न 17.
रामस्वरूप ने गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर के बारे में प्रेमा को क्या बताया?
उत्तर:
रामस्वरूप ने प्रेमा को बताया- “ये लोग जरा ऐसे ही हैं……. गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी ख़्यालों पर। खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं, सभा – सोसाइटियों में जाते हैं, मगर लड़की चाहते हैं। ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो।”
प्रेमा ने पूछा – और लड़का?
रामस्वरूप – बताया तो था तुम्हें। बाप सेर है तो लड़का सवा सेर | बी.एस.सी. के बाद लखनऊ में ही तो पढ़ाता है, मेडिकल कॉलेज में। कहता है कि शादी का सवाल दूसरा है, तालीम का दूसरा क्या करूँ मजबूरी है। मतलब अपना है वरना इन लड़कों और इनके बापों को ऐसी कोरी कोरी सुनाता कि ये भी
प्रश्न 18.
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप पुराने जमाने के खाने के बारे में क्या बताते हैं?
उत्तर:
गोपाल : एक हमारा जमाना था कि स्कूल से आकर दर्जनों कचौड़ियाँ उड़ा जाते थे, मगर फिर जो खाना खाने बैठते तो वैसी-की-वैसी ही भूख!
राम : कचौड़ियाँ भी तो उसके जमाने में पैसे की दो आती थीं।
गोपाल : जनाब यह हाल था कि चार पैसे में ढेर-सी मलाई आती थी और अकेले दो आने की हजम करने की ताकत थी, अकेले!
प्रश्न 19.
‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ का उद्देश्य क्या है? ‘रीढ़ की हड्डी’ का प्रतीकार्थ क्या है?.
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी का उद्देश्य है- विवाह योग्य लड़कियों के पक्ष में उनकी आवाज को बुलंद करना। यह एकांकी उन लोगों की कलई खोलती है जो लड़कियों को भेड़-बकरी अथवा मेज-कुर्सी समझते हैं। यह एकांकी लड़की के स्वतंत्र अस्तित्व का अहसास कराती है। लड़कियों को भी अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा-पूरा हक है। चरित्रहीन युवकों को यह एकांकी रीढ़हीन बताती है।
शरीर को सीधा रखने में रीढ़ की हड्डी का बहुत महत्त्व है। यही स्थिति चरित्र की है। यहाँ रीढ़ की हड्डी चरित्र की प्रतीक है। इस प्रकार रीढ़ की हड्डी का प्रतीकार्थ है- चरित्रवान होना।
प्रश्न 20.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर बताइए कि रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए उसकी उच्च शिक्षा को छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
उत्तर:
रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना तथा विवाह के लिए उसकी उच्च शिक्षा को छिपाना यह विरोधाभास उनका एक बेटी के पिता होने की विवशता को प्रकट करता है। सामाजिक प्रथानुसार वधू पक्ष को वर पक्ष की इच्छानुसार चलना पड़ता है। गोपालप्रसाद शिक्षित बहू नहीं चाहते थे और रामस्वरूप उनके बेटे से रिश्ता करना चाहते थे। अतः वे यह सब मजबूरी वश करते हैं।
इस बात को छिपाने के लिए रामस्वरूप अपनी पत्नी प्रेमा को भी आगाह करते हैं। जब प्रेमा कहती है कि ‘बेटी को इंट्रेन्स ही पास करा देते लड़की अपने हाथ रहती और इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती’ – तब रामस्वरूप पत्नी को चुप कराते हुए कहते हैं- “तुम्हें कतई अपनी जबान पर काबू नहीं है। कल ही बता दिया था कि उन लोगों के सामने जिक्र और ढंग से होगा।” रामस्वरूप अपने होने वाले दामाद के पिता बाबू गोपालप्रसाद के बारे में बताते हुए . कहते हैं- “खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं, सभा-सोसायटियों में जाते हैं, मगर लड़की चाहते हैं ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो।”
रामस्वरूप की विवशता इन पंक्तियों में अभिव्यक्त होती है- “… क्या करूँ मजबूरी है। मतलब अपना है वरना इन लड़कों और इनके बापों को ऐसी कोरी कोरी सुनाता कि ये भी….।”
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प्रश्न 21.
“आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” – इस कथन के माध्यम से उमा शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
रीढ़ की हड्डी (एकांकी नाटक)
उत्तर:
उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की चारित्रिक कमियों की ओर संकेत करना चाहती है। यह वही शंकर है जो कॉलेज में लड़कियों के हॉस्टल के आस-पास घूमते हुए और लड़कियों से छेड़खानी करते हुए पकड़ा गया था। तब उसने नौकरानी के पैरों पर गिरकर माफी माँगी थी और भाग निकला था। उसकी वहाँ पिटाई भी हुई। थी। वह कहती है-” … जरा अपने इन साहबजादे से पूछिए कि अभी पिछली फरवरी में ये लड़कियों के हॉस्टल के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहे थे और वहाँ से कैसे भगाए गए थे?”
गोपाल प्रसाद और उनके बेटे से चलते-चलते उमा व्यंग्य भी कर देती है- “जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं, अर्थात् बैकबोन बैकबोन।”
इस कथन के माध्यम से उमा शंकर की चरित्रहीनता को उखाड़ कर रख देती है। इसमें उसकी शारीरिक कमी भी उभरकर सामने आती है।
प्रश्न 22.
उमा का अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उठाया गया कदम कहाँ तक उचित है?
उत्तर:
उमा ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए शंकर और उसके पिता को खरी-खरी सुनाई। उसने अपने कदम से यह जता दिया कि लड़कियाँ भेड़-बकरियाँ नहीं हैं। उनकी भी अपनी इज्जत है, उनका भी आत्मसम्मान है।
उमा ने उस अन्याय का विरोध किया जो उसके माध्यम से विवाहयोग्य कन्याओं के प्रति किया जा रहा था। प्रत्येक आत्मसम्मानी व्यक्ति इसी तरह का व्यवहार करेगा। अपनी योग्यतानुसार अपने लिए वर का चयन करना प्रत्येक लड़की का अधिकार है। विवाह के अवसर पर लड़के के साथ-साथ लड़की की इच्छा अनिच्छा को जानना भी आवश्यक है।
हम उमा के द्वारा उठाए गए कदम को पूर्णतः उचित मानते हैं।
प्रश्न 23.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के माध्यम से लेखक समाज में किस प्रकार के परिवर्तन की आशा करता है?
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी एक उद्देश्यपूर्ण रचना है। लेखक इसके माध्यम से निम्नलिखित परिवर्तनों की आशा करता है-
- इससे पुरातनपंथी एवं पुरुषवादी मानसिकता पर अंकुश लग सकेगा।
- इस एकांकी से लड़कियों को समान अधिकार मिल सकेगा।
- लिंग भेद की भावना से त्रस्त समाज को बाहर निकाला जा सकेगा।
- समाज का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
प्रश्न 24.
“यदि लड़कियाँ पढ़-लिख गईं और अंग्रेजी अखबार पढ़कर ‘पॉलिटिक्स’ की बातें करना शुरू हो गईं तो हो चुकी गृहस्थी।” इस कथन के अनुसार गोपाल प्रसाद जैसे व्यक्ति लड़कियों की शिक्षा का विरोध किस भय से करते हैं?
उत्तर:
गोपाल प्रसाद जैसे व्यक्ति एक प्रकार के मानसिक रोगी हैं। लड़कियों के पढ़ने-लिखने से उन्हें यह भय सताने लगता है कि इससे पुरुषों के वर्चस्व में कमी आ जाएगी। नारी अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हो जाएगी। गोपाल प्रसाद उन पुरुष वर्ग का प्रतीक है जो शिक्षा पर केवल पुरुषों का अधिकार मानता है। लड़कियों के पढ़ने से उनका एकाधिकार टूट जाएगा। शिक्षा प्राप्त लड़कियों में साहस का भाव आ जाएगा और तब वे किसी अन्याय के सम्मुख झुकेंगी नहीं।
प्रश्न 25.
‘क्या लड़कियों के दिल नहीं होते, क्या उनको चोट नहीं लगती, क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह से देखभाल कर…..’ -उमा के इस कथन के द्वारा लड़कियों की कौन-सी पीड़ा उजागर होती है?
उत्तर:
उमा के इस कथन से लड़कियों की यह पीड़ा उजागर होती है-
- लड़कियों की जाँच-पड़ताल का तरीका अनुचित है। उन्हें यह अपमानजनक प्रतीत होता है।
- लड़कियों की खरीद-फरोख्त की बात करना पीड़ादायक है।
- लड़कियों के दिल की बात भी सुनी जानी चाहिए। इसकी उपेक्षा करना कष्टकारक है।
- लड़कों की शिक्षा पर गर्व और लड़की की शिक्षा को पाप समझना भेद-भावपूर्ण बात है।
प्रश्न 26.
‘लड़की की माता का यह कथन कि आजकल लड़की तो कितनी भी सुंदर क्यों न हो, बिना टीम-टाम के कौन पूछता है?’ समाज के लोगों की किस मानसिकता को दर्शाता है?
उत्तर:
यह कथन समाज के लोगों की इस मानसिकता को दर्शाता है कि स्त्री का मूल्यांकन केवल बाह्य सौंदर्य के आधार पर किया जाता है। भले ही यह सौंदर्य दिखावटी ही क्यों न हो। समाज लड़की के गुणों को अधिक महत्त्व नहीं देता। समाज लड़की को सजावट की वस्तु मानता है। समाज का विचार लड़की के बारे में दोषपूर्ण है।
प्रश्न 27.
क्या इस समाज में सम्मान और अधिकार का एकमात्र हकदार पुरुष ही है? एकांकी के आधार पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
हम ऐसा नहीं मानते कि समाज में सम्मान और अधिकार का एकमात्र हकदार केवल पुरुष ही है। आज की नारी शिक्षित और सशक्त है। वह भी सम्मान व अधिकार की पूरी-पूरी हकदार है। संवैधानिक रूप से भी नारी पुरुष के समकक्ष है। वह बराबरी का हक रखती है। नारी घर में और घर के बाहरी क्षेत्र में भी सक्षम है। वह दोनों जगह जिम्मेदारी का निर्वाह करती है। अतः अधिकार की भी हकदार है। आज की नारी अपने कर्तव्यों के साथ-साथ अधिकारों के प्रति भी पूर्णरूपेण सजग है और उसे ऐसा होना भी चाहिए।
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प्रश्न 28.
क्या सचमुच विवाह व्यापार (बिजनेस) बनता जा रहा है? आप इसे कैसे रोकोगे?
उत्तर:
लगता तो ऐसा ही है कि विवाह एक व्यापार (बिजनेस) का रूप लेता जा रहा है। कई बार लोभ के कारण दहेज लिया जाता है तो कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर दहेज की माँग की जाती है। विवाह के समय लड़की के परिवार की आर्थिक हैसियत देखी जाती है।
यह स्थिति चिंताजनक है। हम इसे रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय करेंगे-
- लड़की को उच्च शिक्षा दिलवाकर उसे आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाएँगे।
- स्वयं अपने विवाह पर किसी भी प्रकार का दहेज लेन-देन नहीं होने देंगे।
- दहेज माँगने वालों की पुलिस में रिपोर्ट करेंगे।
- दहेज लोभियों का सामाजिक बहिष्कार करेंगे।
- लड़की को साहसी बनाएँगे ताकि वह स्वार्थी लोगों का सशक्त विरोध कर सके।
प्रश्न 29.
लड़कियों का उच्च शिक्षित होना आज के युग में भी क्यों अभिशाप समझा जाता है? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लड़कियों का उच्च शिक्षित होना, आज के युग में भी इसलिए अभिशाप समझा जाता है क्योंकि ऐसे लोगों पर पुरातनपंथी मानसिकता हावी है।
- ये लोग लड़कियों को दूसरे घर की संपत्ति समझते हैं।
- वे लड़कियों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे मूलभूत अधिकारों से वंचित रखना चाहते हैं।
- यह उनकी पुरुषवादी मानसिकता का जीवंत प्रमाण है।
प्रश्न 30.
लड़की की माँ का लड़कियों की उच्च शिक्षा का विरोध करना स्त्रियों की पुरानी पीढ़ी की सोच को प्रकट करता है। आधुनिक समय में यह कहाँ तक तर्कसंगत है?
उत्तर:
लड़की की माँ का लड़कियों की उच्च शिक्षा का विरोध करना, उसके दकियानूसी विचारधारा का प्रतीक है। आधुनिक समय में यह सोच तर्कसंगत नहीं है। हमें यह समझना होगा कि लड़कियों की शिक्षा के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं है। स्त्रियों को केवल गृहस्थी के दायरे में बाँधना उचित नहीं है। उन्हें हर क्षेत्र में काम करने का पूरा हक है। नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुष से कम नहीं है।
प्रश्न 31.
वर्तमान परिवेश में ‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ कहाँ तक प्रासंगिक है?
उत्तर:
वर्तमान परिवेश में ‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ पूर्णत: प्रासंगिक है। हम देखते हैं कि वर्तमान समय में भी दहेज का लालच बना हुआ है, बल्कि बढ़ता जा रहा है। अभी भी कुछ लोग लड़की की उच्च शिक्षा का विरोध इसलिए करते हैं कि उन्हें उसकी शिक्षा के अनुरूप वर तलाशने में भारी मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
आज के समाज में भी लड़का लड़की में भेदभाव किया जाता है। लड़के के जन्म पर खुशी मनाई जाती है और लड़की के जन्म पर मातम छा जाता है। अभी भी समाज में रूढ़िवादी मानसिकता बनी हुई है। अत: हम कह सकते हैं कि वर्तमान परिवेश में भी इस एकांकी की प्रासंगिकता बनी हुई है।
प्रश्न 32.
‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ के आधार पर बताइए कि समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के लिए आप क्या सहयोग दे सकते हैं? साथ ही स्त्री शिक्षा के पक्ष में अपने विचार प्रकट करते हुए लिखिए कि इस पाठ से आपको क्या प्रेरणा मिली है?
उत्तर:
समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु हम निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं-
- समाज के सभी क्षेत्रों में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर सकते हैं।
- घर-परिवार तथा समाज में महिलाओं को सम्मान दिला सकते हैं।
- उन्हें संपत्ति में उनका हक दिलाकर उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
- लड़कियों का विवाह बिना दहेज लिए दिए कर सकते हैं।
लड़की की माता का लड़कियों की उच्च शिक्षा का विरोध करना उसके दकियानूसी विचारधारा का प्रतीक है। आधुनिक समय में यह सोच तर्कसंगत नहीं है। हमें यह समझना होगा कि लड़कियों की शिक्षा के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं है। स्त्रियों को केवल गृहस्थी के दायरे में बाँधना उचित नहीं है। उन्हें हर क्षेत्र में काम करने का पूरा हक है। नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुष से कम नहीं है। लेकिन समाज को आदर्श व्यक्तित्वं की अपेक्षा रहती है। शंकर जैसे युवक तो समाज के लिए कलंक हैं। इनको हर हाल में हतोत्साहित किया जाना चाहिए। उमा जैसे व्यक्तित्व वाली लड़कियाँ ही समाज को नई दिशा दे सकती हैं।
प्रश्न 33.
‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ में अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?
उत्तर:
रामस्वरूप अपनी बेटी का रिश्ता तय करते समय उससे अति विनम्र एवं दब्बू स्वभाव की अपेक्षा कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उमा कम पढ़ी-लिखी, सीधी-सादी सरल और शांत – गंभीर स्वभाव की दिखाई दे। उसे उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की की तरह कतई व्यवहार नहीं करना चाहिए। हमारी दृष्टि में रामस्वरूप का ऐसा सोचना और अपनी बेटी से ऐसे व्यवहार की अपेक्षा करना सर्वथा अनुचित है, क्योंकि लड़की कोई भेड़-बकरी या मेज़ – कुर्सी नहीं है जो अपने प्रति अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त करती चली जाए। सब्र की भी एक सीमा होती है। उमा उच्च शिक्षित लड़की है तो उसे उसी के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए।
प्रश्न 34.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर बताइए कि रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए उसकी उच्च शिक्षा को छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
उत्तर:
रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना तथा विवाह के लिए उसकी उच्च शिक्षा को छिपाना, यह विरोधाभास उनका एक बेटी के पिता होने की विवशता को प्रकट करता है। सामाजिक प्रथानुसार वधू पक्ष को वर पक्ष की इच्छानुसार चलना पड़ता है। गोपाल प्रसाद शिक्षित बहू नहीं चाहते थे और रामस्वरूप उनके बेटे से रिश्ता करना चाहते थे। अतः वे यह सब मजबूरी वश करते हैं। इस बात को छिपाने के लिए रामस्वरूप अपनी पत्नी प्रेमा से भी आगाह करते हैं। तब प्रेमा कहती है कि ‘बेटी को इंट्रेन्स ही पास करा देते लड़की अपने हाथ रहती और इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती’ – तब रामस्वरूप पत्नी को चुप कराते हुए कहते हैं- “तुम्हें कतई अपनी जबान पर काबू नहीं है। कल ही बता दिया था कि रीढ़ की हड्डी (एकांकी नाटक)
उन लोगों के सामने जिक्र और ढंग से होगा।” रामस्वरूप अपने होने वाले दामाद के पिता बाबू गोपाल प्रसाद के बारे में बताते हुए कहते हैं- “खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं, सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, मगर लड़की चाहते हैं ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो। “रामस्वरूप की विवशता इन पंक्तियों में अभिव्यक्त होती है- “… क्या करूँ मजबूरी है। मतलब अपना है वरना इन लड़कों और इनके बापों को ऐसी कोरी कोरी सुनाता कि ये भी….।”
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प्रश्न 35.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किन सामाजिक समस्याओं को उठाया गया है? इन समस्याओं के बारे में आपका क्या दृष्टिकोण है?
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में पढ़ी-लिखी लड़की के विवाह की समस्या को उठाया गया है। समाज में लड़के से अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को अच्छा नहीं समझा जाता है। विवाह तय करते समय लड़की की इस तरह से जाँच-पड़ताल की जाती है जैसे वह क्रय-विक्रय की वस्तु हो। उसकी इच्छा, भावनाओं का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। लड़का कैसा भी हो, चाहे चरित्रहीन ही क्यों न हो, उसे ठीक समझा जाता है। इस एकांकी में बनावटीपन की समस्या को भी उभरा गया है। हम उमा के विचारों से पूर्णत: सहमत हैं। वह तथाकथित समाज के ठेकेदारों को सही आइना दिखाती है। हमें तो लड़की की उच्च शिक्षा पर गर्व करना चाहिए। हमारे विचार में लड़का-लड़की एक समान हैं।
प्रश्न 36.
“कुछ बातें दुनिया में ऐसी हैं, जो सिर्फ मर्दों के लिए हैं और ऊँची तालीम भी ऐसी चीजों में एक है।” -इस कथन से समाज की किस मानसिकता का परिचय मिलता है?
उत्तर:
इस कथन से समाज की दकियानूसी मानसिकता का परिचय मिलता है। अब दुनिया में सभी प्रकार के काम पुरुषों और स्त्रियों दोनों के लिए हैं। उच्च शिक्षा भी दोनों के लिए है। इसे सिर्फ मर्दों के लिए सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। आज लड़कियाँ उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकलती दिखाई दे रही हैं। समाज को अपनी पुरानी मानसिकता को बदलना होगा। अब यह सोच समाज को पीछे की ओर ले जाएगी।
प्रश्न 37.
स्त्री शिक्षा के बारे में प्रेमा के क्या विचार हैं? वह अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा का विरोध करते समय क्या क्या तर्क देती है?
उत्तर:
प्रेमा स्त्रियों को उच्च शिक्षा दिलाने का विरोध करती है। अपने विचार के समर्थन में वह निम्नलिखित तर्क देती है-
- उसका मानना है कि लड़कियों को केवल अक्षर ज्ञान गिनती तथा ‘स्त्री सुबोधिनी’ पढ़ना ही पर्याप्त है।
- उसका यह भी कहना है कि उच्च शिक्षा दिलाने के कारण ही उमा सिर चढ़ी हुई है। वह सब काम अपनी इच्छानुसार करती है।
- वह समझती है कि आजकल की लड़कियों में जो अनोखापन आता जा रहा है, वह उनकी उच्च शिक्षा का ही दुष्परिणाम है।
- वह कहती है कि यदि उमा को केवल इंट्रेंस ही पास करा देते तो लड़की अपने हाथ में रहती।
प्रश्न 38.
‘रीढ़ की हड्डी’ में दो पिता हैं- एक लड़की का दूसरा लड़के का। दोनों के गुणों-अवगुणों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
रामस्वरूप उमा के पिता हैं तो गोपालप्रसाद शंकर के पिता हैं। दोनों के स्वभाव एवं आदतों में भारी अंतर है-
रामस्वरूप – एक विवश पिता हैं। वे हर कीमत पर अपनी बेटी उमा का विवाह तय कर देना चाहते हैं, यहाँ तक कि शंकर जैसे रीढ़हीन युवक से भी। वे अपनी बेटी की उच्च शिक्षा की बात छुपा जाते हैं। वे अपनी बेटी को झूठ बोलने को कहते हैं। वे लड़के के पिता की हर गलत-सही बात की हाँ में हाँ मिलाते हैं। वे एक डरपोक, विवश तथा दकियानूसी विचारों वाले पिता हैं।
गोपालप्रसाद – को लड़के के पिता होने का घमंड है। वे अपने बेटे की कमजोरी को जानते हैं फिर भी उसे छिपाते हैं। वे लड़की को उच्च शिक्षा दिलाने के विरोधी हैं। वे तो शादी को भी एक व्यापार मानते हैं। उन्हें ऐसी बहू चाहिए जो कम पढ़ी-लिखी हो, जिस पर अपनी मनमानी कर सकें। उन्हें सुंदर लड़की चाहिए, पर न बोलने वाली गूंगी गुड़िया की तरह हो। वे दकियानूसी विचारों वाले हैं। वे लालची प्रवृत्ति के हैं।
प्रश्न 39.
आपको उमा का कौन सा रूप अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर:
हमें उमा का वह रूप अच्छा लगा जब वह एकांकी के अंत में मुखर होकर लड़के के पिता को खरी-खरी सुनाती है। जब शंकर के पिता गोपाल प्रसाद गुस्से में लौट जाने की बात कहते हैं तब उमा का विद्रोह फूट पड़ता है और वह कहती है कि- “जी हाँ जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर जरा यह तो पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं यानी बैकबोन ….”
इससे पहले वह झूठ पर से परदा उठाते हुए यह कह चुकी थी कि “जी हाँ, कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है। कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की और न आपके पुत्र की तरह ताक-झाँक कर कायरता दिखाई है। मुझे अपनी इज्जत अपने मान-सम्मान का ख्याल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि किस तरह नौकरानी के पैरों पड़कर अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
यही रूप उमा का असली रूप है और अच्छा भी लगता है।
प्रश्न 40.
गोपाल प्रसाद क्या तर्क देकर लड़कियों की शिक्षा का विरोध करते हैं?
उत्तर:
गोपाल प्रसाद तर्क देते हैं-
- क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है?
- मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वहीं काम करने लगीं, अंग्रेजी अखबार पढ़ने लगीं और ‘पालिटिक्स’ वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।
- जनाब मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं। शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।
भाषा की बात
प्रश्न 1.
उपसर्ग-प्रत्यय
एकांकी में से लिए गए निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग-प्रत्यय अलग करके लिखिए-
• सुबोधिनी
• परेशानी
• ताँगेवाला
• रंगीन
• आमदनी
• खरीददार
• कायरता
• बेइज्जती
उत्तरः
• सुबोधिनी = सु (उपसर्ग) इनी (प्रत्यय)
• परेशानी = ई (प्रत्यय)
• ताँगेवाला = वाला (प्रत्यय)
• रंगीन = ईन (प्रत्यय)
• आमदनी = आ (उपसर्ग), ई (प्रत्यय)
• खरीददार = दार (प्रत्यय)
• कायरता = ता (प्रत्यय)
• बेइज्जती = बे (उपसर्ग) ती (प्रत्यय)
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प्रश्न 2.
एकांकी में से अंग्रेजी व उर्दू के शब्द छाँटकर लिखिए-
• ग्रामोफन
• कसरत
• तशरीफ
• टैक्स
• बैकबोन
• तालीम
• इंट्रेस
• नफरत
• खासी
• टोस्ट
• मार्जिन
• जनाब
• मुश्किल
• काबिल
उत्तर:
अंग्रेजी के शब्द – बैकबोन टैक्स, ग्रामोफोन, इंट्रेस, मार्जिन, टोस्ट
उर्दू के शब्द – कसरत, नफरत, तालीम, तशरीफ़, खासी, जनाब, मुश्किल, काबिल
प्रश्न 3.
वचन परिवर्तित कीजिए-
कलसो, लोटों, दरी, चादर, तख़्त कसरतें
उत्तरः
कलसो – कलस
लोटों – लोटा
कसरतें – कसरत
दरी – दरियाँ
चादर – चादरें
तख़्त – तख्तों
प्रश्न 4.
रेखांकित संज्ञा का भेद बताइए।
(क) कलसों से नहाता था।
(ख) तुम्हारी लाडली बेटी नहीं आ रही।
(ग) बेटा शंकर सीधे बैठो।
उत्तर :
(क) कलसो – जातिवाचक (द्रव्यवाचक) संज्ञा
(ख) बेटी – जातिवाचक संज्ञा
(ग) शंकर – व्यक्तिवाचक संज्ञा
प्रश्न 5.
सर्वनाम छाँटिए और भेद बताइए-
(क) हमने भी जवानी में कसरतें की हैं।
(ख) मैंने कहा था।
(ग) तुमने कहा था।
(घ) कोई आया है।
उत्तर:
(क) हमने – पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष)
(ख) मैंने – पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष)
(ग) तुमने – पुरुषवाचक सर्वनाम (मध्यम पुरुष)
(घ) कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम (तृतीय पुरुष)
प्रश्न 6.
विशेषण छाँटिए और भेद बताओ-
(क) दूसरा लड़का है।
(ख) मुझे विलायती चाय पसंद है।
(ग) थोड़ी चीनी डालिए।
उत्तर:
(क) दूसरा – संख्यावाचक विशेषण (क्रम सूचक)
(ख) विलायती – गुणवाचक विशेषण
(ग) थोड़ी – परिमाणवाचक विशेषण (अनिश्चित परिमाण)
प्रश्न 7.
रेखांकित क्रिया का भेद बताइए-
(क) खूबसूरती पर टैक्स लगाना चाहिए।
(ख) रतन मक्खन ले आया।
(ग) मैं रतन से मक्खन मँगवाता हूँ।
उत्तर:
(क) सकर्मक क्रिया,
(ख) सकर्मक क्रिया
(ग) प्रेरणार्थक क्रिया
प्रश्न 8.
वाक्य
अर्थ के आधार पर वाक्य भेद बताइए-
(क) आपकी बात सही है।
(ख) मुझे पढ़ी-लिखी लड़की पसंद नहीं है।
(ग) क्या आपकी लड़की ज्यादा पढ़ी है?
(घ) बीच में कौन बोला?
(ङ) तुम यहाँ से चले जाओ।
उत्तर:
(क) विधानवाचक,
(ख) निषेधवाचक,
(ग) प्रश्नवाचक,
(घ) श्नवाचक
(ङ) आज्ञावाचक।
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Class 9 Ganga Chapter 6 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
संवाद (1)
प्रेमा : तुम्हीं ने तो कहा था कि जरा ठीक-ठाक करके नीचे लाना। आजकल तो लड़की कितनी ही सुंदर हो, बिना टीम-टाम के भला कौन पूछता है? इसी मारे मैंने तो पौडर- वौडर उसके सामने रखा था। पर उसे तो इन चीजों से न जाने किस जनम की नफ़रत है। मेरा कहना था कि आँचल में मुँह लपेटकर लेट गई। भई, मैं तो बाज आई तुम्हारी इस लड़की से।
रामस्वरूप : न जाने कैसा इसका दिमाग है। वरना आजकल की लड़कियों के सहारे तो पौडर का कारोबार चलता है।
प्रेमा : अरे, मैंने तो पहले ही कहा था। इंट्रेंस ही पास करा लेते- लड़की अपने हाथ रहती और इतनी परेशानी न उठानी पड़ती। पर तुम तो….
रामस्वरूप : (बात काटकर) चुप चुप!… (दरवाज़े में झाँकते हुए) तुम्हें कतई अपनी जबान पर काबू नहीं है। कल ही यह
बात बता दी थी कि उन सब लोगों के सामने जिक्र और ढंग से होगा। मगर तुम तो अभी से सब कुछ उगले देती हो। उनके आने तक तो न जाने क्या हाल करोगी।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
इस संवाद से उमा के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर:
इस संवाद से उमा के बारे में यह पता चलता है कि उमा सीधी-सादी लड़की है। वह पाउडर आदि सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग नहीं करती है। वह कुछ-कुछ जिद्दी भी है।
प्रश्न 2.
प्रेमा किस प्रकार की महिला है?
उत्तर:
प्रेमा पुराने ख़्यालों वाली एक सामान्य घरेलू किस्म की महिला है। वह लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने में विश्वास नहीं करती। वह लड़की के स्वभाव की जिम्मेदारी अपने पति पर डाल देती है।
संवाद (2)
गोपालप्रसाद : एक हमारा जमाना था कि स्कूल से आकर दर्जनों कचौड़ियाँ उड़ा जाते थे, मगर फिर जो खाना खाने बैठते तो वैसी-की-वैसी ही भूख!
रामस्वरूप : कचौड़ियाँ भी तो उस जमाने में पैसे की दो आती थीं।
गोपालप्रसाद : जनाब यह हाल था कि चार पैसे में ढेर-सी बालाई आती थी और अकेले दो आने की हजम करने की ताकत थी, अकेले! और अब तो बहुतेरे खेल वगैरह भी होते है, स्कूलो में तब न कोई वालीबॉल जानता था, न टेनिस, न बैडमिंटन। बस कभी हॉकी या कभी क्रिकेट कुछ लोग खेला करते थे। मगर क्या मजाल कि कोई कह जाए कि यह लड़का कमजोर हैं (शंकर और रामस्वरूप खीस निपोरते हैं।)
रामस्वरूप : जी हाँ जी हाँ! उस जमाने की बात ही दूसरी थी। हँ-हँ!
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
पुराने जमाने में खाने-पीने की चीजें इतनी सस्ती क्यों थी?
उत्तरः
पुराने जमाने में महँगाई नहीं थी। खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता अधिक थी। लोग खाने-पीने के शौकीन थे।
प्रश्न 2.
अब स्कूलों में खेलों की क्या स्थिति है?
उत्तर:
अब स्कूलों में खेलों की बहुत अच्छी स्थिति है। अब स्कूलों में क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, टेनिस आदि अनेक खेल खिलाए जाते हैं। इनके खेलने से बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
संवाद (3)
रामस्वरूप : मकान ढूँढ़ने में कुछ तकलीफ तो नहीं हुई?
गोपालप्रसाद : (खखारकर) नहीं ताँगेवाला जानता था।… और फिर हमें तो यहाँ आना ही था। रास्ता मिलता कैसे नहीं?
रामस्वरूप : हँ-हँ-हँ। यह तो आपकी बड़ी मेहरबानी है। मैंने आपको तकलीफ तो दी….
गोपालप्रसाद : अरे नहीं साहब! जैसा मेरा काम वैसा आपका काम। आखिर लड़के की शादी तो करनी ही है। बल्कि यों कहिए कि मैंने आपके लिए खासी परेशानी कर दी।
रामस्वरूप : हँ-हँ-हँ! यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे। हम तो आपके हैं हैं…सेवक हैं। हैं हैं! (थोड़ी देर बाद लड़के की तरफ मुखातिब होकर) और कहिए, शंकर बाबू, कितने दिनों की और छुट्टियाँ हैं?
शंकर : जी कॉलेज की तो छुट्टियाँ नहीं हैं। ‘वीक-एंड’ में चला आया था।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
मकान ढूँढ़कर कौन और क्यों, कहाँ आया था?
उत्तर:
मकान ढूँढ़कर गोपालप्रसाद और शंकर रामस्वरूप के घर लड़के के विवाह के लिए लड़की देखने आए थे।
प्रश्न 2.
रामस्वरूप और गोपालप्रसाद का व्यवहार आपको कैसा लगा?
उत्तरः
हमें दोनों का आपसी व्यवहार ताकल्लपनभरी और बनावटी लगा। दोनों एक-दूसरे से अधिक शिष्ट और सभ्य दिखाने की चेष्टा करते जान पड़ रहे थे।
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Class 9 Hindi Chapter 6 Extra Question Answer for Practice
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
स्त्री शिक्षा के बारे में प्रेमा के क्या विचार हैं? वह अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा का विरोध करते समय क्या क्या तर्क देती है?
प्रश्न 2.
‘रीढ़ की हड्डी’ में दो पिता हैं-एक लड़की का दूसरा लड़के का दोनों के गुणों-अवगुणों की तुलना कीजिए।
प्रश्न 3.
लड़कियों का उच्च शिक्षित होना आज के युग में भी क्यों अभिशाप समझा जाता है? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 4.
वर्तमान परिवेश में ‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ कहाँ तक प्रासंगिक है?
प्रश्न 5.
‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ में अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?
रचनात्मक कार्य
प्रश्न 1.
इस एकांकी का बाल सभा में मंचन कीजिए। आवश्यक सामग्री की सूची बनाइए।
प्रश्न 2.
‘दहेज प्रथा’ पर अपने विचार 100 शब्दों में लिखते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।