Daily practice of Class 9 Hindi Important Questions and Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 Extra Question Answer आखिरी चट्टान तक builds a strong language foundation over time.
Class 9 Hindi आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer
प्रश्न 1.
लेखक इस पाठ में कहाँ का और किसका वर्णन करता है?
उत्तर:
‘आखिरी चट्टान तक’ पाठ में लेखक मोहन राकेश अपनी कन्याकुमारी यात्रा का वर्णन करते हैं। कन्याकुमारी बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर के मिलन स्थल पर स्थित है। यहाँ एक चट्टान है जिस पर बैठकर स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी।
प्रश्न 2.
सैंड हिल कहाँ है? वहाँ यात्री क्यों जा रहे थे?
उत्तरः
कन्याकुमारी में एक चट्टान पर सैंड हिल है। यहाँ से पर्यटक सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य देखते हैं। इसे देखने नवयुवक और नवयुवतियाँ बड़ी संख्या में आते हैं। पर्यटकों को गेस्ट हाउस के बेरे कॉफी पिलाते हैं।
प्रश्न 3.
लेखक सैंड हिल पर कुछ देर रुका, फिर वह वहाँ से कहाँ चला जाता है?
उत्तर:
लेखक कुछ देर सैंड हिल पर रुका रहकर आगे उस टीले की तरफ चला जाता है, जहाँ पर वह रेत पर अपने अकेले कदमों को घसीटता वहाँ पहुँचा तो देखा कि उससे आगे उससे भी ऊँचा एक और टीला है। जल्दी-जल्दी चलते हुए उसने एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था। हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है, उस पर पहुँचकर पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार अवश्य नजर आएगा और सचमुच एक टीले पर पहुँचकर वह खुला विस्तार सामने फैला दिखाई दे गया वहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी, जैसे वह टीले से समुद्र में उतरने का रास्ता हो। सूर्य तक पानी से थोड़ा ही ऊपर था। अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर वह टीले पर बैठ गया ऐसे जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो और उसने सिर्फ उसने उस चोटी को पहली बार सर (देखा हो) किया हो।
प्रश्न 4.
सूर्य के गोले की क्या स्थिति थी?
उत्तर:
लगता था कि सूर्य का गोला पानी की सतह से दूर हो गया है। लगने लगा है जैसे पानी पर दूर तक सोना ही सोना दुलक गया हो। सूरज जल्दी-जल्दी रंग बदल रहा था। सूर्य का गोला जैसे एक बेबसी में पानी के लावे में डूबता जा रहा था और धीरे-धीरे वह पूरा डूब ही गया। कुछ क्षण पहले जहाँ सोना बह रहा था, अब वहाँ लहू बहता नज़र आने लगा। कुछ क्षण बीतने पर वह लहू भी धीरे-धीरे बैंजनी और बैंजनी से काला पड़ गया।
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आखिरी चट्टान (यात्रा – वृत्तांत)
प्रश्न 5.
सूर्योदय के समय कौन-कौन विवेकानंद चट्टान पर बैठे थे?
उत्तर:

सूर्योदय के समय कल आठ आदमी ‘विवेकानंद चट्टान’ पर बैठे थे। चट्टान तक से सौ- सवा सौ गज आगे समुद्र के बीच जाकर है- वहाँ, जहाँ बंगाल की खाड़ी की भौगोलिक सीमा समाप्त होती है। मेरे अलावा कन्याकुमारी के तीन
नवयुवक थे जिनमें से एक ग्रेजुएट था। चार मल्लाह थे जो एक छोटी-सी मछुआ नाव में हमें वहाँ लाए थे। नाव क्या थी, रबड़ पेड़ के तीन तनों को साथ-साथ जोड़ लिया गया था, बस नीचे की नुकीली चट्टानों और ऊपर की ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को उस तरफ ला रहे थे, तो लेखक ने आसमान की तरफ देखते हुए उतनी देर अपनी चेतना को स्थगित रखने की चेष्टा की थी, अपने अंदर के डर को दिखावटी उदासीनता से ढककर रखना चाहा था। पर जब चट्टान पर पहुँच गए, तो डर लेखक की टाँगों में उतर गया क्योंकि वहाँ बैठे हुए थी वे हल्के-हल्के काँप रही थीं।
भाषा की बात
प्रश्न 1.
उपसर्ग-प्रत्यय
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग-प्रत्यय अलग करके लिखिए-
• जीवित
• सुरक्षित
• उदासीनता
• बेकारी
• गूँजती
उत्तर:
• जीवित = इत (प्रत्यय)
• सुरक्षित = सु (उपसर्ग), इत (प्रत्यय)
• उदासीनता = ईनता (प्रत्यय)
• बेकारी = बे (उपसर्ग), ई (प्रत्यय)
• गूँजती = ती (प्रत्यय)
प्रश्न 2.
संज्ञा
रेखांकित संज्ञा का भेद बताइए-
(क) सूर्य चमक रहा था।
(ख) सूखी पहाड़ियाँ नज़र आ रही थीं।
(ग) सोना बुलक गया था।
उत्तर:
(क) सूर्य – व्यक्तिवाचक संज्ञा
(ख) पहाड़ियाँ – जातिवाचक संज्ञा
(ग) सोना – द्रव्यवाचक संज्ञा।
प्रश्न 3.
सर्वनाम छाँटो और भेद बताओ-
(क) मैं टीले पर चढ़ता जा रहा था।
(ख) वहाँ कोई आ गया।
(ग) कौन माला बेच रहा है?
उत्तर:
(क) मैं – उत्तमपुरुषवाचक सर्वनाम
(ख) कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(ग) कौन – प्रश्नवाचक सर्वनाम
प्रश्न 4.
विशेषण
रेखांकित विशेषण का भेद बताइए-
(क) सूर्य बैजनी हो रहा था।
(ख) तीन व्यक्ति वहाँ आ गए।
(ग) मैंने थोड़ा पानी पिया।
उत्तर:
(क) बैजनी – गुणवाचक विशेषण
(ख) तीन – संख्यावाचक विशेषण
(ग) थोड़ा – अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
प्रश्न 5.
क्रिया
निम्नलिखित वाक्यों की रेखांकित क्रिया का भेद बताइए-
(क) मैंने कॉफी पी।
(ख) युवती चिल्लाई।
(ग) गाइड ने मुझे युवती से माला दिलवाई।
उत्तरः
(क) पी – सकर्मक क्रिया
(ख) चिल्लाई – अकर्मक क्रिया
(ग) दिलवाई – प्रेरणार्थक क्रिया
प्रश्न 6.
वाक्य
अर्थ के आधार पर वाक्य भेद बताइए-
(क) मैं चट्टान पर बैठा हुआ था।
(ख) अरे! आप कब आए?
(ग) वह कोई काम नहीं कर रहा है।
उत्तरः
(क) विधानवाचक
(ख) विस्मयवाचक एवं प्रश्नवाचक
(ग) निषेधवाचक
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Class 9 Ganga Chapter 5 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
गद्यांश (1)
सूर्य का गोला पानी की सतह से छू गया। पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना बुल आया। पर वह रंग इतनी जल्दी-जल्दी बदल रहा था कि किसी भी एक क्षण के लिए उसे एक नाम दे सकना असंभव था। सूर्य का गोला जैसे एक बैसाखी से पानी के लावे में डूबता जा रहा था। धीरे-धीरे वह पूरा डूब गया और कुछ क्षण पहले जहाँ सोना बह रहा था, वहाँ अब लहू बहता नजर आने लगा। कुछ और क्षण बीतने पर वह लहू भी धीरे-धीरे बैजनी और बैजनी से काला पड़ गया। मैंने फिर एक बार मुड़कर दाईं तरफ पीछे देख लिया। नारियल की टहनियाँ उसी तरह हवा में ऊपर उठी थीं। हवा उसी तरह गूँज रही थी, पर पूरे दृश्यपट पर स्याही फैल गई थी। एक-दूसरे से दूर खड़े झुरमुट छाया पड़कर, जैसे लगातार सिर धुन रहे थे और हाथ-पैर पटक रहे थे। मैं अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और अपनी मुट्टियाँ भींचता – खोलता कभी उस तरफ और कभी समुद्र की तरफ देखता रहा।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
सूर्यास्त के समय पानी के रंग में क्या-क्या परिवर्तन आ रहे थे?
उत्तर:
सूर्यास्त के समय पानी में पहले सुनहरी रंग दिखाई दे रहा था फिर पानी का रंग लहू जैसा हो गया। कुछ क्षण बीतने पर बैजनी और फिर बैजनी से काला रंग दिखाई देने लगा।
आखिरी, चट्टान (यात्रा-वृत्तांत)
प्रश्न 2.
एक-दूसरे से दूर खड़े झुरमुट क्या कर रहे थे?
उत्तर:
एक-दूसरे से दूर खड़े झुरमुट स्याह पड़कर लगातार सिर धुन रहे थे और हाथ-पैर पटक रहे थे।
गद्यांश (2)
अचानक ख्याल आया कि मुझे वहाँ से लौटकर भी जाना है। इस ख्याल से ही शरीर में कँपकँपी भर गई। दूर सैंड हिल की तरफ देखा। वहाँ स्याही में डूबे कुछ धुंधले रंग हिलते नजर आ रहे थे। मैंने रंगों को पहचानने की कोशिश की, पर उतनी दूर से आकृतियों को अलग-अलग कर सकना संभव नहीं था। मेरे और उन रंगों के बीच शायद पड़ती रेत के कितने ही टीले थे। मन में डर समाने लगा कि क्या अँधेरा होने से पहले मैं उन सब टीलों को पार करके जा सकूँगा? कुछ कदम उस तरफ बढ़ा भी पर लगा कि नहीं! उस रास्ते से जाऊँगा, तो शायद रेत में ही भटकता रह जाऊँगा। इसलिए सोचा बेहतर है नीचे समुद्र तट पर उतर जाऊँ – तट का रास्ता निश्चित रूप से केप होटल के सामने तक ले जाएगा।
निर्णय तुरंत करना था, इसलिए बिना और सोचे मैं रेत पर बैठकर नीचे तट की तरफ फिसल गया। पर तट पर पहुँचकर फिर कुछ क्षण चलते अँधेरे की बात भूला रहा। कारण था तट की रेत । मैं पहले भी समुद्र तट पर कई-कई रंग की रेत देखी थी- सुरमई, खाकी, पीली और लाल। मगर जैसे रंग उस रेत में थे, वैसे मैंने पहले कभी कहीं की रेत में नहीं देखे थे। कितने ही अनाम रंग थे वो। एक-एक इंच पर एक-दूसरे से अलग और एक-एक रंग कई-कई रंगों की झलक लिए हुए। काली घटा और घनी लाल आँधी को मिलाकर रेत के आकार में ढाल देने से रंगों के जितनी तरह के अलग-अलग सम्मिश्रण पाए जा सकते थे, वे सब वहाँ थे।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक के मन में डर क्यों समाने लगा?
उत्तरः
लेखक ने जब सैंडहिल की तरफ देखा तब उसे स्याही में डूबे कुछ धुँधले रंग दिखाई देने लगे। लेखक ने उन रंगों को पहचानने की कोशिश की, पर वे आकृतियाँ अलग-अलग नहीं हो पा रही थीं। बीच में स्याह पड़ती रेत के टीले भी थे। इनसे लेखक के मन में डर समाने लगा।
प्रश्न 2.
लेखक ने किस रास्ते से जाने का निश्चय किया और क्यों?
उत्तर:
लेखक समुद्र तट पर उतरकर तट के रास्ते से जाने का निश्चय किया, क्योंकि ये रास्ता केप होटल तक ले जा सकता था।
गद्यांश (3)
यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। हम लोग टीले पर पहुँच गए। यह वही ‘सैंड हिल’ थी जिसकी चर्चा में वहाँ पहुँचने के बाद से ही सुन रहा था। सैंड हिल पर बहुत से लोग थे। आठ-दस नवयुवतियाँ, छह-सात नवयुवक और दो-तीन गाँधी टोपी वाले व्यक्ति। वे शायद सूर्यास्त देख रहे थे। गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के बैरे उन्हें सूर्यास्त के समय की कॉफी पिला रहे थे। उन लोगों के वहाँ होने से सैंड हिल बहुत रंगीन हो उठी थी । कन्याकुमारी का सूर्यास्त देखने के लिए उन्होंने विशेष रुचि के साथ सुंदर रंगों का रेशम पहना था । हवा समुद्र की तरफ से उस रेशम में भी लहरें पैदा कर रही थीं। कुछ युवतियाँ वहाँ आकर थकी-सी एक तरफ बैठ गई उस पूरे कैनवास में एक तरफ छिटके हुए कुछ बिंदुओं की तरह।
उनसे कुछ दूर पर एक रंगहीन बिंदु, मैं, ज्यादा देर अपनी जगह स्थिर नहीं रह सका। सैंड हिल से सामने का पूरा विस्तार तो दिखाई दे रहा था, पर अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था जो ऊपर के विस्तार को ओट में लिए था। सूर्यास्त पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखा जा सके, इसके लिए मैं कुछ देर सैंड हिल पर रुका रहकर आगे उस टीले की तरफ चल दिया। पर रेत पर अपने अकेले कदमों को घसीटता वहाँ पहुँचा, तो देखा उससे आगे उससे भी ऊँचा एक और टीला है। जल्दी-जल्दी चलते हुए मैंने एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक रही थीं, पर मन थकने को तैयार नहीं था। हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है, उस पर पहुँचकर पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार अवश्य नज़र आएगा।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
सूर्यास्त देखने के लिए लोगों ने क्या पहना था?
उत्तर:
सूर्यास्त देखने के लिए लोगों ने विशेष रूचि के साथ सुंदर रंगों का रेशम पहना था।
प्रश्न 2.
लेखक सैंड हिल पर कुछ देर रूककर आगे क्यों चल पड़ा?
उत्तर:
लेखक सैंड हिल पर कुछ देर ही रूका फिर वह आगे चल पड़ा ताकि सूर्यास्त को पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखा जा सके।
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Class 9 Hindi Chapter 5 Extra Question Answer for Practice
प्रश्न 1.
लेखक भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को कहाँ खड़े होकर देख रहा था?
प्रश्न 2.
कन्याकुमारी में किन सागरों का संगम है?
प्रश्न 3.
विवेकानंद चट्टान का संबंध किससे है?
प्रश्न 4.
लेखक ने कन्याकुमारी के सूर्यास्त का वर्णन कैसे किया है?
प्रश्न 5.
‘आखिरी चट्टान’ पर खड़े होकर लेखक को कैसा महसूस हुआ?
चित्र वर्णन करो (रचनात्मक कार्य)
प्रश्न 1.

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