संवादहीन Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 3

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Class 9 Hindi संवादहीन Extra Question Answer

Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन Extra Question Answer

प्रश्न 1.
ताई का विगत जीवन कैसा था?
उत्तरः
ताई का विगत जीवन सुख-सुविधाओं से संपन्न था। उसके पति बहुत बड़े जमींदार थे। उनके घर में बहू-बेटियाँ थीं। घर में काम करने के लिए नौकर-चाकर थे। ढोरों में गाय थी। घर में पति के दरबार की बड़ी रौनक बनी रहती थी।

प्रश्न 2.
अचानक ताई अकेली कैसी रह गई?
उत्तर:
पति की असमय मृत्यु हो गई। बेटे-बहू गाँव को छोड़कर शहर में जा बसे। बेटियाँ अपनी-अपनी घर-गृहस्थी में रम गई। धीरे-धीरे सारा कारोबार पराए हाथों में चला गया। खेती-बाड़ी समाप्त हो गई। नौकर-चाकर भला किसके दम पर टिकते, वे भी चले गए। घर बस रह गई ताई, वह भी अकेली।

प्रश्न 3.
गनपत ने ताई के लिए क्या काम किया?
उत्तर:
गनपत ताई के लिए कहीं से एक प्यारा सा तोता ले आया। यह पहाड़ी तोता था। अब ताई की सारी ममता उस तोते पर बरसने लगी। वह उसे मिट्टू कहकर संबोधित करती थीं। वह मिट्टू के लिए नियमपूर्वक दाल-भात बनाने लगीं। उसके वक्त-बेवक्त के लिए रोटी बचाकर रखती । तोते से बात करके ताई के जीवन में उमंग लौट आई थी।

प्रश्न 4.
मिट्ठू क्या-क्या काम करता था?
उत्तर:
मिट्टू भोर होते ही ताई को अपने इस पाठ से जगाता था-
हर हर गंगे, हर-हर गंगे,
सीताराम बोल, सीताराम बोल,
मिट्ठू राम-राम! मिट्टू राम-राम!,
जब ताई मिट्टू से पूछती “मिट्टू अब कैसे कटेगी?”
तब मिट्टू कहता- “कटेगी! कटेगी! कटेगी!’
तब ताई मिट्टू को निहारकर कहती- “जीते जीते रहो! जुग-जुग जिओ!”
तब मिट्टू कहता- “खुश रहो! खुश रहो!”

संवादहीन Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 3

प्रश्न 5.
ताई और मिट्टू का संबंध कैसा था?
उत्तरः
ताई मिट्टू पर जान छिड़कती थी। ताई की घड़ीभर के लिए भी मिट्टू का वियोग सहन नहीं होता था। वह मिट्टू को छोड़कर बाहर जाने में भी हिचकती थी। वह मिट्ठू को दुनिया की नजरों में छिपाकर रखती थी। वह कहीं जाती थीं तो जल्दी लौटे आती थी।

प्रश्न 6.
एक बार क्या संयोग पड़ा?
उत्तर:
एक बार प्रयागराज में कुंभ स्नान का संयोग पड़ा। गाँव के कई लोग कुंभ – स्नान के लिए जा रहे थे। अच्छा साथ बन रहा था। ताई का मन भी कुंभ-स्नान के लिए ललचा रहा था, पर मिट्ठू की समस्या थी। किसी ने उसे साथ ले चलने की सलाह दी। अंत में जगन मास्टर की घरवाली उसे अपने यहाँ रखने और देखभाल को तैयार हो गई और ताई कुंभ स्नान के लिए चल पड़ी।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
उपसर्ग-प्रत्यय
नीचे लिखे शब्दों में से उपसर्ग-प्रत्यय अलग-अलग करके लिखिए-
सूनापन, नियमपवूक, वृद्धा, नौजवान, अतल, सुरक्षा, स्वतंत्रता, फड़फड़ाहट, अनहोनी, मास्टराइन
उत्तर:

  • सूनापन – पन (प्रत्यय)
  • नियमपूर्वक – पूर्वक (प्रत्यय)
  • नौजवान – नौ (उपसर्ग)
  • अतल – अ (उपसर्ग)
  • सुरक्षा – सु (उपसर्ग)
  • स्वतंत्रता – स्व (उपसर्ग) + तंत्र (मूलशब्द) ता (प्रत्यय)
  • फड़फड़ाहट – आहट (प्रत्यय)
  • अनहोनी – अन (उपसर्ग)
  • मास्टराइन – आइन (प्रत्यय)

प्रश्न 2.
संज्ञा- रेखांकित शब्द व्याकरण में क्या है?
(क) ताई लौट आई।
(ख) जगन मास्टर था।
(ग) तोता बुढ़ापे का सहारा था।
उत्तरः
(क) ताई – जातिवाचक संज्ञा
(ख) जगन – व्यक्तिवाचक संज्ञा
(ग) बुढ़ापा – भाववाचक संज्ञा

प्रश्न 3.
रेखांकित सर्वनाम का भेद बताइए।
(क) ताई किसके लिए दाल भात बनाती थी।
(ख) कोई कुंभ – स्नान के लिए जा रहा है।
(ग) मैं भी चलूँगा।
उत्तर:
(क) किसके – प्रश्नवाचक सर्वनाम,
(ख) कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(ग) मैं – उत्तमपुरुषवाचक सर्वनाम।

प्रश्न 4.
रेखांकित विशेषण के भेद बताओ।
(क) हरा तोता मिर्च खा रहा था।
(ख) ताई दो रोटियाँ बनाती थीं।
(ग) जगन ने थोड़ा दाना बिखेर दिया।
उत्तर:
(क) गुणवाचक विशेषण,
(ख) संख्यावाचक विशेषण,
(ग) परिमाणवाचक सर्वनाम।

प्रश्न 5.
रेखांकित क्रिया के भेद बताओ।
(क) तोते ने दाना खाया।
(ख) तोता उड़ गया।
(ग) ताई ने जगन के द्वारा तोते की रक्षा करवाई।
उत्तर:
(क) खाया – सकर्मक क्रिया,
(ख) अकर्मक क्रिया, संयुक्त क्रिया,
(ग) करवाई – प्रेरणार्थक क्रिया।

संवादहीन Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 3

प्रश्न 6.
वाक्य भेद बताइए।
(क) तोता बातें कर रहा है।
(ख) क्या ताई गंगा स्नान को गई?
(ग) तुम भी कुंभ- स्नान को चलो?
(घ) तोता नहीं जाएगा।
उत्तर:
(क) विधानवाचक वाक्य
(ख) प्रश्नवाचक वाक्य
(ग) आज्ञावाचक वाक्य,
(घ) निषेधवाचक वाक्य

Class 9 Ganga Chapter 3 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

गद्यांश (1)

अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक- दूसरे सहारा देने के लिए रह गए थे। ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन भी देखे थे। पूत परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय ढोर, क्या नहीं था बड़े घर में! देखते ही देखते क्या से क्या हो गया! बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए। बेटियाँ अपने – अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं, किसके भरोसे कारबार संभलता। धीरे-धीरे सब पराए हाथों में चला गया। जब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं, पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही, पर सूने घर की भाँय – भाँय जैसे उन्हें काटने को दौड़ती थी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
ताई के जीवन में क्या परिवर्तन आ गया था?
उत्तर:
पहले ताई का जीवन घर के बेटे-बहुओं, बेटियों के साथ अच्छा बीतता था, बाद में सभी बच्चे उसे अकेली छोड़कर शहर में जा बसे।

प्रश्न 2.
अकेलेपन में ताई अपना पेट कैसे भरती थी?
उत्तरः
अकेलेपन में ताई दो जून का खाना एक ही बार में चूल्हे पर बना लेती थी। कभी-कभी वह व्रत उपवास कर लेती थी। वे पेट की समस्या को कोई समस्या नहीं मानती थीं।

गद्यांश (2)

ताई के थके शरीर में प्राण लौट आते और तब उस अलस दोपहरी में ताई मिट्टू को अपनी राम कहानी सुनाने लगतीं। वैभव और सत्ता के बीते दिनों की गाथा। काल की अतल गहराइयों से झाँकता एक-एक चेहरा ताई को नए नए प्रसंगों की याद दिला देता- जमींदार साहब का रोबीला चेहरा, उनके उपकारों से दबी प्रजा के अनगिनत चेहरे, वे हाथी, वे घोड़े, वे खेल-तमाशे, वे ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, जन्म और मृत्यु-पर्व, वे भोज, वे दावतें, जमींदार साहब के दरबार की रौनक, उनकी गुणग्राहकता, उनकी तुनकमिजाजी, उनका गुस्सा, उनके इशारे पर मर मिटने वाले लोग… ताई घंटों तक मिट्टू को अपनी जीवन-गाथा सुनाती रहतीं और वह अपनी गर्दन टेढ़ी कर कभी धैर्यवान श्रोता बना रहता और कभी अपनी समझ के अनुसार बीच-बीच में कुछ टीका-टिप्प्णी कर देता।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
ताई के प्रति कैसे थे?
उत्तरः
ताई के पति बड़े जमींदार थे। उनके दरबार की रौनक विशिष्ट थी।

प्रश्न 2.
जमींदार साहब का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर:
जमींदार साहब का चेहरा रोबीला था। वे प्रजा का उपकार करते रहते थे। प्रजा के लोग उन पर मर मिटते थे। उनके पास हाथी, घोड़े भी थे। वे खेल-तमाशों के शौकीन थे। वे गुण ग्राहक थे।

गद्यांश (3)

ताई को घड़ी-भर के लिए भी मिट्टू का वियोग सहन नहीं हो सकता था। कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए न्यौते बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवातों की साँकलें टोहकर देखतीं, कंजूस के धन की तरह मिट्टू को छिपाकर रखतीं और जल्दी लौट आने की दिलासा देकर देहरी से पाँव बाहर निकालतीं। लेकिन एक संयोग आ पड़ा कि ताई धर्म-संकट में पड़ गई। इस लोक में ताई ने बहुत ऊँच-नीच देख लिए थे, अब कभी-कभी परलोक की चिंता भी मन में घर कर जाती। गाँव के कई लोग कुंभ- स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे, अच्छा साथ बन रहा था, वहीं मिट्टू की चिंता अपनी ओर खींच रही थी। हँसी-हँसी में किसी ने सलाह दी, “ताई, मिट्ठू को भी साथ ले चलो, उसे भी गंगा स्नान करा देना।” किसी दूसरे ने टोक दिया कि रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता – बतियाता प्राणी है। ताई पशोपेश में पड़ गईं। टिकट का पैसा भी वह मिट्टू की खातिर खर्च कर देतीं लेकिन मेले ठेले, भीड़-भाड़ में उसकी सुरक्षा के बारे में उन्हें पूरा भरोसा नहीं था, अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी। वह ताई के लौटने तक मिट्टू को अपने पास रखने के लिए सहमत हो गई थी। विदा के दिन ताई की आँसुओं की धार रुके नहीं रुकती थी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लोगों ने मिट्टू के बारे में क्या-क्या सलाह दी?
उत्तर:
(क) मिट्टू को साथ ले जाओ पर टिकट लेना पड़ेगा।
(ख) उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
(ग) किसी परिचित के पास छोड़ जाइए।

गद्यांश (4)

जगन मास्टर के लिए जब मिट्टू की यातना असह्य हो गई, तो उन्होंने एक दिन कमरा बंदकर मिट्टू के पिजरें को जमीन पर रखा और उसका दरवाजा खोल दिया, ताकि उसे कुछ देर के लिए ही सही, खुली हवा में आने का मौका देकर अपने पाप का थोड़ा प्रायश्चित कर ले। मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की। जगन मास्टर भी अपनी धुन के पक्के थे। निकट ही अनाज का थैला पड़ा हुआ था। उन्होंने मुट्ठी में थोड़ा अनाज लेकर बाहर तक बिखेर दिया और स्वयं अलग हटकर उसे देखते रहे। मिट्टू धीरे-धीरे दाना चुगते हुए बाहर आ गए तो जगन मास्टर ने संतोष की साँस ली। मिट्टू फिर पिंजरे की छत पर बैठ गए। एक दो घंटे बाद जगन मास्टर ने उन्हें पकड़कर फिर पिंजरे में बंद कर दिया और चैन की साँस लेकर पिंजरे को बरामद में टाँग दिया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
जगन मास्टर ने मिट्ठू की यातना को कैसे दूर करना चाहा?
उत्तर:
जगन मास्टर ने मिट्ठू के पिंजरे को खोलकर उसे बाहर निकाला,
उसे खाने को अनाज के दाने दिए। इस प्रकार उसे यातना दूर किया, परन्तु बाद में उसे पिंजरे में ही बंद कर दिया।

संवादहीन Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 3

Class 9 Hindi Chapter 3 Extra Question Answer for Practice

प्रश्न 1.
‘संवादहीनता’ से आप क्या समझते हैं?

प्रश्न 2.
आधुनिक जीवन में संवादहीनता के मुख्य कारण क्या हैं?

प्रश्न 3.
‘संवादहीन’ पाठ के अनुसार, तकनीक का हमारे रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ा है?

प्रश्न 4.
‘संवादहीनता’ का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

प्रश्न 5.
आप ‘संवादहीनता’ को कैसे दूर कर सकते हैं?

प्रश्न 6.
‘घर में सब थे, पर कोई किसी से बोल नहीं रहा था।’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 7.
‘संवादहीन’ कहानी का सौंदर्य क्या है? यह हमारे जीवन की किस सच्चाई को उजागर करती है?

चित्र वर्णन करो

प्रश्न 1.
संवादहीन Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 3 1
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