क्या लिखूँ? Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 2

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Class 9 Hindi क्या लिखूँ? Extra Question Answer

Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? Extra Question Answer

प्रश्न 1.
अंग्रेजी लेखक ए. जी. गार्डिनर का क्या कथन है?
उत्तर:
गार्डिनर का कथन यह है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। उस समय मन में एक उमंग-सी उठती है तथा हृदय में स्फूर्ति-सी आ जाती है। तब ऐसा आवेग सा उठता कि हमें लिखने के लिए विवश होना ही पड़ता है। उस समय विषय की चिंता नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 2.
लेखक की कठिनाई क्या है?
उत्तर:
लेखक की कठिनाई यह है कि उसने कभी ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं कर पाता कि उसके भाव स्वयं उभर कर बाहर निकल आएँ। उसे तो लिखने के लिए सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है, उसे परिश्रम भी करना पड़ता है।

प्रश्न 3.
एक विद्वान निबंध के विषय में क्या कहना है?
उत्तर:
एक विद्वान का निबंध के विषय में यह कहना है कि निबंध छोटा होना चाहिए। बड़ा निबंध अपेक्षित प्रभाव उत्पन्न नहीं कर पाता है। ‘बड़े निबंध में सुंदरता भी नहीं आ पाती है।

प्रश्न 4.
निबंध के प्रधान अंग कौन-कौन से है?
उत्तर:
निबंध के दो प्रधान अंग हैं-

  1. सामग्री
  2. शैली सामग्री एकत्रित करनी पड़ती है। शैली के बारे में विद्वानों का कहना है कि निबंध लिखने से पूर्व उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए। भाषा में प्रवाह होना चाहिए। वाक्य छोटे-छोटे होने चाहिए।

प्रश्न 5.
अंग्रेजी निबंधकारों ने कौन-सी पद्धति को अपनाया है?
उत्तरः
इनकी पद्धति के जन्मदाता मानटेन का कहना है कि मैंने जो कुछ देखा, जो कुछ सुना और अनुभव किया उसी को लिपिबद्ध कर दिया। ऐसे निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मन की स्वच्छंद रचनाएँ होती हैं। उनमें न तो कवि की उदात्त कल्पना रहती है और न आख्यायिका (क्रमबद्ध वृतांत)।

क्या लिखूँ? Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 2

भाषा की बात

प्रश्न 1.
उपसर्ग-प्रत्यय
नीचे लिखे शब्दों में से उपसर्ग प्रत्यय अलग करके लिखिए-
दुर्बोध, कठिनाई, अनादि, लज्जाशील, सुखद
उत्तर:
दुर्बोध = दुर् (उपसर्ग) + बोध
कठिनाई = कठिन + आई (प्रत्यय)
अनादि = अन् (उपसर्ग) + आदि
लज्जाशील = लज्जा + शील (प्रत्यय)
सुखद = सुख + द (प्रत्यय)

प्रश्न 2.
संज्ञा
संज्ञा छाँटो और भेद बताइए-
(क) गार्डिनर का कथन है।
(ख) मैं परिश्रम करता हूँ।
(ग) दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
उत्तर :
(क) गार्डिनर – व्यक्तिवाचक संज्ञा,
(ख) परिश्रम – भाववाचक संज्ञा,
(ग) ढोल – जातिवाचक संज्ञा

प्रश्न 3.
स्त्रीलिंग बनाओ-
कवि, लेखक
उत्तरः
कवि = कवयित्री
लेखक = लेखिका

प्रश्न 4.
रेखांकित शब्द में क्या है?
प्यास लगने पर वे एक कुएँ पर पहुँचे।
उत्तर:
प्यास = भाववाचक संज्ञा
एक = संख्यावाचक विशेषण
पहुँचे = क्रिया
वे = पुरुषवाचक सर्वनाम
कुएँ = जातिवाचक संज्ञा

प्रश्न 5.
अर्थ के आधार पर वाक्य भेद बताइए-
(क) मुझे खुसरो की एक कहानी याद आई।
(ख) मुझमें खुसरो की प्रतिभा नहीं है।
(ग) वे क्या चाहते हैं?
उत्तर:
(क) सरल वाक्य
(ख) निषेधवाचक वाक्य
(ग) प्रश्नवाचक वाक्य

Class 9 Ganga Chapter 2 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

गद्यांश (1)

गार्डिनर साहब के इस कथन की यथार्थता में मुझे संदेह नहीं, पर मेरे लिए कठिनता यह है कि मैंने उस मानसिक स्थिति का अनुभव ही नहीं किया है, जिसमें भाव अपने आप उत्थित हो जाते हैं। मुझे तो सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है, परिश्रम करना पड़ता है, तब कहीं मैं एक निबंध लिख सकता हूँ। आज तो मुझे विशेष परिश्रम करना पड़ेगा, क्योंकि मुझे कोई साधारण निबंध नहीं लिखना है। आज मुझे नमिता और अमिता के लिए आदर्श निबंध लिखना होगा। नमिता का आदेश है कि मैं ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ इस विषय पर लिखूँ । अमिता का आग्रह है कि मैं समाज-सुधार पर लिखूं, ये दोनों ही विषय परीक्षा में आ चुके हैं और उन दोनों पर आदर्श निबंध लिखकर मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक को गार्डिनर साहब के विचार अपनाने में क्या कठिनाई आ रही है?
उत्तर:
गार्डिनर साहब का कहना है कि एक विशेष मानसिक स्थिति में मन में उमंग-सी उठती है और मस्तिष्क में विचारों का आवेग आ जाता है; जबकि लेखक कभी भी ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव ही नहीं कर पाता है। उसे तो परिश्रमपूर्वक काफी सोचना पड़ता है, विषय की चिंता करनी पड़ती है। यही उसकी कठिनाई है।

प्रश्न 2.
लेखक को किसके लिए कैसा निबंध लिखना है?
उत्तरः
लेखक को नमिता और अमिता के लिए निबंध लिखने हैं। नमिता द्वारा दिया गया विषय है-‘दूर के ढोल सुहावने’ और अमिता का दिया विषय है- ‘समाज-सुधार’ उन्होंने ये ही विषय इसलिए चुने हैं कि ये दोनों विषय परीक्षा में आ चुके हैं, अतः महत्त्वपूर्ण हैं।

क्या लिखूँ? Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 2

गद्यांश (2)

एक विद्वान का कथन है कि निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है, क्योंकि बड़े निबंध में रचना की सुंदरता नहीं बनी रह सकती। इस कथन को मान लेने में ही मेरा लाभ है। मुझे छोटा ही निबंध लिखना है, बड़ा नहीं। पर लिखूँ कैसे? निबंधशास्त्र के उन्हीं आचार्य महोदय का कथन है कि निबंध के दो प्रधान अंग हैं- सामग्री और शैली। पहले तो मुझे सामग्री एकत्र करनी होगी, विचार समूह संचित करना होगा। इसके लिए मुझे मनन करना चाहिए। यह तो सच है कि जिसने जिस विषय का अच्छा अध्ययन किया है, उसके मस्तिष्क में उस विषय के विचार आते हैं। पर यह कौन जानता था कि ‘दूर के ढोल सुहावने’ पर भी निबंध लिखने की आवश्यकता होगी। यदि यह बात पहले से ज्ञात होती तो पुस्तकालय में जाकर इस विषय का अनुसंधान कर लेता; पर अब समय नहीं है। मुझे तो यहीं बैठकर दो ही घंटों में दो निबंध तैयार कर देने होंगे। यहाँ न तो विश्वकोश है और न कोई ऐसा ग्रंथ जिसमें इन विषयों की सामग्री उपलब्ध हो सके। अब तो मुझे अपने ही ज्ञान पर विश्वास कर लिखना होगा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
निबंध के बारे में एक विद्वान का क्या कथन है?
उत्तर:
निबंध के बारे में एक विद्वान का कथन है कि निबंध छोटा ही होना चाहिए। बड़े निबंध में रचना की सुंदरता बनी नहीं रहती है।

प्रश्न 2.
निबंध के प्रधान अंग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
निबंध के दो प्रधान अंग हैं- सामग्री और शैली सामग्री को हम विषय-वस्तु कह सकते हैं और शैली को हम विषय को प्रस्तुत करने का ढंग कह सकते हैं। लेखक को सामग्री एकत्रित करना कठिन प्रतीत हो रहा है।

गद्यांश (3)

मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो। तभी तो आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं, पर सुधारों का अंत कब हुआ है ? भारत के इतिहास में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी में ही सुधारकों की गणना समाप्त नहीं होती। सुधारकों का दल नगर-नगर और गाँव-गाँव में होता है। यह सच है कि जीवन में नए-नए दोष उत्पन्न होते जाते हैं और नए-नए सुधार हो जाते हैं। न दोषों का अंत है और न सुधारों का। जो कभी सुधार थे, वही आज दोष हो गए हैं और उन सुधारों का फिर नव सुधार किया जाता है। तभी तो यह जीवन प्रगतिशील माना गया है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
जीवन प्रगतिशील क्यों है?
उत्तर:
जीवन में निरंतर सुधार होते रहते हैं तथा दोष दूर होते रहते हैं। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। अतः जीवन प्रगतिशील है।

प्रश्न 2.
क्या किसी सुधार को स्थाई कहा जा सकता है?
उत्तरः
नहीं, आज जो सुधार किया गया है, वही आगे चलकर दोष भी बन सकता है। दोष आते-जाते रहते हैं तो सुधार भी होते रहते हैं। दोनों स्थाई नहीं हैं।

Class 9 Hindi Chapter 2 Extra Question Answer for Practice

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1.
गार्डिनर साहब का कथन लेखक को कैसा लगा?

प्रश्न 2.
दूर के ढोल कैसे होते हैं? क्यों?

प्रश्न 3.
निबंध कैसा होना चाहिए?

प्रश्न 4.
अमीर खुसरो ने क्या करिश्मा कर दिखाया?

प्रश्न 5.
तरुणों और वृक्षों के स्वभाव में क्या अंतर होता है?

क्या लिखूँ? Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 2

भाषा की बात

क) वाक्य को बहुवचन में लिखिए-
1. सुधारक की गणना समाप्त नहीं होती।
2. पेड़ पर पक्षी बैठा है।

(ख) वाक्य भेद बताइए –
मुझे कठोरता का अनुभव नहीं है।

चित्र वर्णन करो

प्रश्न 1.
क्या लिखूँ Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 2 1
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