Reviewing the Class 9 Hindi MCQ and Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 दो बैलों की कथा MCQ Online Test with Answers before exams can boost your confidence.
Class 9 Hindi Chapter 12 MCQ दो बैलों की कथा
Class 9 Hindi दो बैलों की कथा MCQ
दो बैलों की कथा MCQ Questions – Class 9 Hindi Chapter 12 MCQ Online Test
पद – 1
आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है,
रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है।
अब सवेरा हो गया है, कब सवेरा हो गया है,
ठीक से मैंने न जाना, बहुत सोचकर सिर्फ माना-
क्योंकि बादल की अँधेरी, है अभी तक भी घनेरी,
अभी तक चुपचाप है सब, रातवाली छाप है सब,
गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर – सर, काँपते हैं प्राण थर-थर,
बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है,
घर कि मुझसे दूर है जो, था खुशी का पूर है जो,
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश भवानीप्रसाद मिश्र की रचना ‘घर की याद’ से अवतरित है। 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में कवि को तीन वर्ष के लिए जेल की यातना सहन करनी पड़ी। सावन के लिए जब बहुत वर्षा होती है तब कवि को घर की याद सताने लगती है।
व्याख्या – कवि बताता है कि आज बाहर वर्षा हो रही है। बहुत पानी गिर रहा है अर्थात तेज मूसलाधार वर्षा हो रही है। इस वर्षा ने उसके मन-प्राण पर बहुत प्रभाव डाला है। उसके मन में तरह-तरह की भावनाएँ जन्म ले रही हैं। अब सवेरा हो चुका है, पर कवि को यह ठीक से पता नहीं चला कि सवेरा कब हुआ। वह बहुत देर तक सोता रहा। उसे लगा कि अभी तक बादलों की काली छाया बनी हुई है। अभी तक सभी चुपचाप हैं और रात वाला प्रभाव बाहर वर्षा का पानी तेज गति से गिर रहा है। इसी कारण पेड़ के पत्ते भी हर-हराकर हिल रहे हैं। बाहर तेज हवा चल रही है। और उसी के कारण प्राण थर-थर काँप रहे हैं। आगे कवि बताता है- बाहर बहुत पानी बरस रहा है। इस वातावरण में कवि की आँखों के सम्मुख घर का दृश्य साकार हो उठता है। वह बार-बार घर की यादों में डूब जाता है। उसका घर यहाँ की जेल से बहुत दूर है। घर खुशियों से भरा-पूरा है। वहाँ
अभी तक बना हुआ है। सभी प्रकार की खुशियाँ मौजूद हैं। आज वर्षा के इस मौसम में कवि को अपने घर की बहुत याद आती है।
विशेष :
1. अत्यन्त सीधी-सादी एवं सरल भाषा में कवि अपने मन की बात कहता है।
2. ‘पानी गिरना’ और ‘प्राण मन का घिरना’ लाक्षणिक अर्थ की व्यंजना करते हैं।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
यह काव्यांश किस कविता से अवतरित है?
(क) घर की याद
(ख) जेल यात्रा
(ग) वर्षा युद्ध
(घ) पानी गिरना
उत्तर:
(क) घर की याद
प्रश्न 2.
कवि कहाँ बैठकर या कविता लिख रहा है?
(क) घर में
(ग) खुले मैदान में
(ख) जेल की कोठरी में
(घ) कहीं नहीं
उत्तर:
(ख) जेल की कोठरी में
प्रश्न 3.
पानी गिरने की कवि के मन पर क्या प्रतिक्रिया हो रही है?
(क) उसे घर की याद आ रही है।
(ख) उसे देश की याद आ रही है।
(ग) उसका मन दुखी हो रहा है।
(घ) वह खुश है।
उत्तर:
(क) उसे घर की याद आ रही है।
प्रश्न 4.
कवि का घर कहाँ है?
(क) उसी शहर में
(ख) जेल से बहुत दूर
(ग) दूसरे देश में
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ख) जेल से बहुत दूर
प्रश्न 5.
इस कविता के रचयिता कौन है?
(क) भवानीप्रसाद मिश्र
(ख) सियारामशरण गुप्त
(ग) त्रिलोचन
(घ) दुष्यंत कुमार
उत्तर:
(क) भवानीप्रसाद मिश्र
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पद – 2
घर कि घर में चार भाई, घर कि घर में सब जुड़े हैं,
मायके में बहिन आई, सब कि इतने कब जुड़े हैं,
बहिन आई बाप के घर, चार भाई चार बहिनें,
हाय रे परिताप के घर! भुजा भाई प्यार बहिनें,
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश भवानीप्रसाद मिश्र की लंबी कविता ‘घर की याद’ से अवतरित है। कवि वर्षा के दिन जेल में बैठा हुआ घर के वातावरण का भावुकतापूर्ण वर्णन करता है।
व्याख्या – कवि बताता है कि उसके घर में चार भाई हैं। सावन के महीने में (वर्षा ऋतु) बहन अपने मायके अर्थात् पिता के घर आई हुई होगी। बहन का पिता के घर आना और उसका यहाँ जेल में होना निश्चय ही दुख का कारण बन रहा होगा।
घर के सभी सदस्य एक-दूसरे से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं। सभी में आपस में बहुत प्यार है। घर में चार भाई और चार बहनें हैं। चारों भाई चार भुजाओं के समान हैं और बहनें प्रेम स्नेह की प्रतीक हैं। सभी के बीच प्रेम – प्यार का रिश्ता है।
विशेष :
1. सरल एवं सुबोध भाषा का प्रयोग किया गया है।
2. भाइयों को भुजा और बहनों को प्यार का प्रतीक दर्शाया गया है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कवि के घर में कितने भाई हैं?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) दो
उत्तर:
(ख) चार
प्रश्न 2.
कवि को किस बात का दुख है?
(क) उसकी बहन अपने मायके आई होगी, पर वह न मिल सकेगा।
(ख) बहन अपने बाप के घर आई होगी।
(ग) यह घर परिताप का कारण बन गया होगा।
(घ) कुछ विशेष नहीं।
उत्तर:
(क) उसकी बहन अपने मायके आई होगी, पर वह न मिल सकेगा।
प्रश्न 3.
घर के सदस्य किस रूप में हैं?
(क) अलग-अलग
(ख) आपस में जुड़े हुए
(ग) कब जुड़ते हैं
(घ) भाई-बहन हैं
उत्तर:
(ख) आपस में जुड़े हुए
प्रश्न 4.
भाई किसके समान हैं?
(क) भुजाओं के समान
(ख) प्यार के प्रतीक
(ग) मेल-मिलाप
(घ) सामान्य
उत्तर:
(क) भुजाओं के समान
प्रश्न 5.
कविता का शीर्षक क्या है?
(क) मेरा घर
(ख) भाई-बहन
(ग) घर की याद
(घ) जेल में
उत्तर:
(ग) घर की याद
पद – 3
और माँ बिन- पढ़ी मेरी, दुःख में वह गढ़ी मेरी
माँ कि जिसकी गोद में सिर रख लिया तो दुख नहीं फिर,
माँ कि जिसकी स्नेह धारा, का यहाँ तक भी पसारा,
उसे लिखना नहीं आता, जो कि उसका पत्र पाता।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता ‘घर की याद’ से उद्धृत है। कवि अपने जेल- प्रवास में घर को बहुत याद करता है। उसे रह-रहकर घर के सभी सदस्य याद आते हैं। यहाँ वह अपनी माँ के बारे में बता रहा है।
व्याख्या – कवि बताता है कि उसकी माँ पढ़ी-लिखी नहीं है। वह तो दुख में गढ़ी हुई है। उसके जीवन में दुख रहे हैं। वह ऐसी प्यारी माँ है कि उसकी गोद में सिर रखने के पश्चात् किसी प्रकार का दुख नहीं रह जाता। माँ सभी प्रकार के दुखों कष्टों का हरण कर लेती है।
माँ के प्रेम स्नेह का प्रसार बहुत दूर दूर तक है। उसका स्नेह यहाँ जेल तक भी पसरा हुआ है अर्थात् यहाँ जेल में भी मैं उसके स्नेह का अनुभव करता हूँ। मेरी माँ को लिखना पढ़ना नहीं आता, अतः वह पत्र नहीं लिख सकती। मैं उसका कोई पत्र नहीं पा सकता, क्योंकि वह पत्र लिखना जानती ही नहीं।
विशेष:
1. यहाँ कवि ने माँ की सहजता एवं स्नेहिल छाया का मार्मिक अंकन किया है।
2. भाषा अलंकारों के प्रयोग से सर्वथा मुक्त है। यह सीधी सरल है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कवि की माँ कैसी है?
(क) अनपढ़
(ख) पुत्र के वियोग में दु:खी
(ग) (क)-(ख) दोनों
(घ) सामान्य
उत्तर:
(ग) (क)-(ख) दोनों
प्रश्न 2.
माँ का स्नेह कैसा है?
(क) दुख मिटाने वाला
(ख) जेल तक पसरा
(ग) (क) (ख) दोनों
(घ) सामान्य
उत्तर:
(ग) (क) (ख) दोनों
प्रश्न 3.
कवि माँ का पत्र जेल में क्यों नहीं पा पाता?
(क) क्योंकि माँ लिखना नहीं जानती।
(ख) वह लिखना नहीं चाहती।
(ग) जेल में पत्र पाने की सुविधा नहीं है।
(घ) काम की व्यस्तता
उत्तर:
(क) क्योंकि माँ लिखना नहीं जानती।
प्रश्न 4.
इस कविता के रचयिता कौन है?
(क) सियारामशरण
(ख) भवानीप्रसाद मिश्र
(ग) दयाशंकर मिश्र
(घ) प्रभाकर मिश्र
उत्तर:
(ख) भवानीप्रसाद मिश्र
प्रश्न 5.
इस कविता की भाषा कैसी है?
(क) सीधी सरल
(ख) अलंकृत
(ग) विलष्ट
(घ) ब्रज
उत्तर:
(क) सीधी सरल
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पद – 4
पिता जी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा,
जो अभी भी दौड़ जाएँ, जो अभी भी खिलखिलाएँ
मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें,
बोल में बादल गरजता, काम में झंझा लरजता,
आज गीता-पाठ करके, आज गीता-पाठ करके,
दंड दो सौ साठ करके, खूब मुगदर हिला लेकर,
मूठ उनकी मिला लेकर।
प्रसंग – भवानी प्रसाद मिश्र सरल और सहज कविता के प्रतिनिधि कवि हैं। यह कविता मिश्र जी की कविता ‘घर की याद’ से अवतरित है, जो हमारी पाठ्य पुस्तक ‘गंगा’ में संकलित है। 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में कवि को तीन वर्ष जेल यातना सहन करनी पड़ी थी।
व्याख्या – कवि बताता है कि पिताजी का स्वभाव इतना हँसमुख है कि अभी तक उन्हें वृद्धावस्था ने स्पर्श नहीं किया। वे अपने सरल और हँसमुख स्वभाव के कारण बुढ़ापे को नहीं आने देते। वे आज बड़े होकर भी दौड़-भाग कर सकते हैं और सबके साथ खिलखिलाकर हँस सकते हैं। पिता जी का स्वभाव सरल, सहज और हँसमुख है जिन पर अभी बुढ़ापे का कोई असर नहीं है। पिता जी इतने निडर और निर्भीक हैं कि मृत्यु से भी नहीं डरते। वे शेर के सामने जाने से भी नहीं डरते। वे बड़े ही शक्तिशाली हैं। जब वे बोलते हैं तो ऐसा लगता है कि बादल गरज रहे हों, उनकी वाणी गंभीर है। जब वे काम करते हैं तो तूफान सा मच जाता है और उनके काम के समक्ष तूफान भी शान्त हो जाता है। इस प्रकार की उनकी कार्यशैली है। पिताजी नित्य श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करते हैं। वे वृद्धावस्था में भी व्यायाम करने के अभ्यासी हैं और प्रतिदिन दो सौ साठ दण्ड लगाते हैं। इस अवस्था में इतना व्यायाम मुश्किल है, फिर भी वे रोज करते हैं। जब वे व्यायाम करके नीचे आए होंगे, मुझे न पाकर मेरे प्रेम के कारण उनकी आँखों में आँसू भर आए होंगे।
विशेष :
1. प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में कवि मिश्र जी ने खड़ी बोली की छन्दमुक्त कविता का प्रयोग किया है। संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ स्थानीय और विदेशी भाषाओं को सहज रूप से प्रयोग किया है। बोल, हिचकना, बिचकना, लरजना स्थानीय शब्दों के साथ मौत, शेर आदि विदेशी शब्दों का प्रयोग किया है।
2. पिता के स्वाभाविक शब्दचित्र वर्णन से चित्रात्मकता झलकती है।
3. भाषा मुहावरेदार है। पिता के निर्भीक, सशक्त, गंभीर, परिश्रमी स्वभाव के साथ-साथ उनके नियम से गीता पाठ करना तथा प्रतिदिन व्यायाम करने का वर्णन किया है। साथ ही पुत्र प्रेम से पिता की आँखों में आँसुओं के आने से उनकी भावुकता का वर्णन भी किया है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
काव्यांश में किसकी विशेषताओं का उल्लेख हुआ है?
(क) कवि के पिता की
(ख) कवि के भाई की
(ग) कवि की माँ की
(घ) सभी की
उत्तर:
(क) कवि के पिता की
प्रश्न 2.
कवि के पिता में क्या नहीं है?
(क) साहस
(ख) निडरता
(ग) धार्मिकता
(घ) आलस्य
उत्तर:
(घ) आलस्य
प्रश्न 3.
पिता के साहस का पता किस बात से चलता है?
(क) मौत से भी नहीं हिचकते
(ख) शेर के आगे भी न बिदकते
(ग) (क)-(ख) दोनों
(घ) बादलों से
उत्तर:
(ग) (क)-(ख) दोनों
प्रश्न 4.
पिता ने कितने दंड लगाए होंगे?
(क) 200
(ख) 240
(ग) 250
(घ) 260
उत्तर:
(घ) 260
प्रश्न 5.
उन्होंने व्यायाम कैसे किया होगा?
(क) मुगदर चलाकर
(ख) कुश्ती करके
(ग) दौड़ लगाकर
(घ) आसन करके
उत्तर:
(क) मुगदर चलाकर
पद – 5
जब कि नीचे आए होंगे, नैन जल से छाए होंगे,
हाय, पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है,
चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें,
खेलते या खड़े होंगे नजर उनको पड़े होंगे।
पिता जी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा,
रो पड़े होंगे बराबर, पाँचवें का नाम लेकर
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता ‘घर की याद’ से अवतरित है। कवि जेल में बैठकर घर के सदस्यों को याद करता है। यहाँ वह अपने पिता की विशेषताओं का उल्लेख कर रहा है।
व्याख्या – कवि याद करता है कि जब उसके पिताजी घर में ऊपर से नीचे आए होंगे तब उनकी आँखों में आँसू अवश्य आए होंगे। जब उन्हें उनका बेटा (भवानी) दिखाई नहीं पड़ा होगा। तो उसे याद करके उनकी आँखें भर आई होंगी। कवि जेल में बैठकर देखता है कि बाहर काफी वर्षा जल बरस रहा है और इस वातावरण में उसकी नजरों में घर की झलक उभर रही है। उसे घर की याद सताती है। घर में चार भाई और चार बहनें हैं। भाई भुजाओं के समान हैं तो बहनें प्रेम प्यार का प्रतीक हैं। वे सभी घर में खेलते होंगे या वहीं खड़े होंगे। इस अवस्था में पिता की नजर उन पर अवश्य पड़ी होगी। यद्यपि पिताजी की आयु काफी है, पर बुढ़ापा उनके पास अभी तक नहीं फटका है। वे एक क्षण को भी बुढ़ापे का अनुभव नहीं करते। जब उन्हें अपने पाँचवें बेटे (भवानी प्रसाद) की याद आई होगी, तब वे रो पड़े होंगे। मेरी स्मृति ने उन्हें रुला दिया होगा।
विशेष:
1. कवि घर के वातावरण की सहज कल्पना करता है तथा पिताजी के स्वभाव पर प्रकाश डालता है।
2. ‘भुजा भाई’ में अनुप्रास अलंकार सहज रूप से आ गया है।
बहुविकल्पी प्रान
प्रश्न 1.
पिता की आँखों में आँसू क्यों आए होंगे?
(क) उन्हें भवानी (कवि) के न दिखने पर।
(ख) तेज वर्षा में भीगने के कारण
(ग) पत्नी के न दिखने के कारण
(घ) कोई अन्य कारण
उत्तर:
(क) उन्हें भवानी (कवि) के न दिखने पर।
प्रश्न 2.
कवि की नजर में क्या तैर रहा है?
(क) जेल
(ख) अपना घर
(ग) भाई
(घ) बहन
उत्तर:
(ख) अपना घर
प्रश्न 3.
पिता कब रो पड़े होंगे?
(क) भाइयों को बुलाकर
(ख) भवानी का नाम लेकर
(ग) बहनों को पुकार कर
(घ) सामान्य रूप में
उत्तर:
(ख) भवानी का नाम लेकर
प्रश्न 4.
पाँचवा पुत्र कहाँ है?
(क) जेल में
(ख) घर मे
(ग) विदेश में
(घ) बाहर
उत्तर:
(क) जेल में
प्रश्न 5.
पिता की क्या विशेषता बताई गई है?
(क) वे खुश हैं।
(ख) वे बुढ़ापे का अनुभव नहीं करते।
(ग) वे प्रसन्न हैं।
(घ) वे भावुक हैं।
उत्तर:
(घ) वे भावुक हैं।
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पद – 6
पाँचवाँ मैं हूँ अभागा, जिसे सोने पर सुहागा
पिता जी कहते रहे हैं, प्यार में बहते रहे हैं,
आज उनके स्वर्ण बेटे, लगे होंगे उन्हें हेटे
क्योंकि मैं उनपर सुहागा बँधा बैठा हूँ अभागा,
शब्दार्थ – स्वर्ण – सोना, हेटे – छोटे, सुहागा – एक पदार्थ।
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता ‘घर की याद’ से अवतरित हैं। कवि जेल प्रवास के दौरान अपने घर की याद करके भाव-विह्वल हो उठता है।
व्याख्या – कवि घर में अपने पिता की भावुक स्थिति की कल्पना करते हुए कहता है कि यद्यपि घर में चार बेटे और हैं, पर वे अपने पाँचवें बेटे (भवानी प्रसाद) को याद करके अवश्य दुखी होते होंगे। मैं पाँचवाँ बेटा ही अभागा हूँ जो उनसे दूर हूँ। मुझे वे ‘सोने पर सुहागा’ कहते रहे हैं अर्थात् उन चारों बेटों में अधिक अच्छा कहते रहे हैं। ऐसा कहकर वे प्यार की रौ में बह जाते थे अर्थात् मुझे अन्य बेटों से विशेष मानकर अधिक स्नेह देते थे। यद्यपि उनके अन्य चार बेटे भी सोने की तरह खरे हैं, पर मेरे अभाव में उन्हें वे छोटे प्रतीत हो रहे होंगे। इसका कारण यही है कि वे मुझे ‘सोने पर सुहागा’ कहते थे अर्थात् अच्छों में अधिक अच्छा और आज स्थिति यह है कि मैं यहाँ जेल में बँधकर बैठा हुआ हूँ। मैं पिताजी के सान्निध्य से दूर हूँ।
विशेष:
1. कवि घर में अपनी स्थिति के बारे में बताता है।
2. ‘सोने पर सुहागा’ कहावत का सटीक प्रयोग हुआ है।
3. सरल एवं सुबोध भाषा का प्रयोग किया गया है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
यह पाँचवा कौन है?
(क) पिता
(ख) कवि
(ग) भाई
(घ) पुत्र
उत्तर:
(ख) कवि
प्रश्न 2.
पाँचवाँ को अभागा क्यों कहा गया है?
(क) क्योंकि वह जेल में है।
(ख) क्योंकि वह घर से बाहर है।
(ग) (क)-(ख) दोनों
(घ) कमजोर है।
उत्तर:
(ग) (क)-(ख) दोनों
प्रश्न 3.
पिताजी उस पाँचवें बेटे को क्या कहते रहे हैं?
(क) सोने पर सुहागा
(ख) प्यारा बेटा
(ग) शेर बेटा
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) सोने पर सुहागा
प्रश्न 4.
पिता को अन्य चार बेटे कैसे लग रहे होंगे?
(क) अच्छे
(ख) ह्वेटे
(ग) बड़े
(घ) प्यारे
उत्तर:
(ख) ह्वेटे
प्रश्न 5.
‘बँधा बैठा’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) उपमा
उत्तर:
(क) अनुप्रास
पद – 7
और माँ ने कहा होगा, दुःख कितना बहा होगा,
आँख में किस लिए पानी, वहाँ अच्छा है भवानी
वह तुम्हारा मन समझकर, और अपनापन समझकर,
गया है सो ठीक ही है, यह तुम्हारी लीक ही है,
पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता,
इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे,
पिता जी ने कहा होगा, हाय, कितना सहा होगा,
कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता कहाँ हूँ,
शब्दार्थ – लीक – परंपरा, कोख लजाना – शर्मिदंगी का कारण बनना।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता ‘घर की याद’ से अवतरित है। कवि अपने जेल प्रवास में घर के एक-एक सदस्य का स्मरण करता है। यहाँ वह अपनी माँ के स्वभाव का उल्लेख कर रहा है।
व्याख्या – कवि बताता है कि जब उसके पिताजी अपने पाँचवें बेटे भवानी (कवि) को याद करके दुखी हुए होंगे तब माँ ने उन्हें ढाढस बँधाया होगा। उस समय माँ ने उनसे कहा होगा कि आप अपनी आँखों में आँसू लाकर क्यों दुखी होते हैं। वहाँ जेल में हमारा बेटा भवानी कुशलतापूर्वक है। वह वहाँ अच्छा है।
कवि की माँ ने पिताजी को यह कहकर समझाया होगा कि भवानी ने तुम्हारे मन की बात को समझा और अपनेपन का अनुभव करके ही वह भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेकर जेल गया है अर्थात् मन से तुम भी ऐसा चाहते थे। उसने बिल्कुल ठीक काम किया है। यह तो तुम्हारी बनाई परंपरा का ही अनुसरण है। उसने हमारे खानदान की मर्यादा का ही पालन किया है।
हाँ, यदि वह अपना पाँव पीछे हटाता अर्थात् इस लक्ष्य से हटता तो निश्चय ही मुझे दुख होता। तब वह मेरी कोख को लजाने का काम करता अर्थात् तब मुझे शर्मिंदा होना पड़ता। वह पिताजी को समझा रही होगी कि तुम अपना दिल कच्चा मत करो। तुम्हें रोता देखकर घर के अन्य बच्चे भी रो पड़ेंगे। तब पिताजी ने माँ की बात सुनकर यह उत्तर दिया होगा कि मैं भला कहाँ रो रहा हूँ। मैं अपना धीरज भी नहीं खो रहा हूँ। यह सब कहते हुए उन्हें अपने आपको बहुत सख्त करना पड़ा होगा। उनकी सहनशक्ति गजब की है।
विशेष:
1. इस काव्यांश में कवि ने अपनी माँ की धैर्यशीलता पर प्रकाश डाला है।
2. ‘कोख लजाना’ मुहावरे का सटीक प्रयोग है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
माँ ने पिता को क्या कहकर सांत्वना दी होगी?
(क) जेल में भवानी अच्छा होगा।
(ख) मन को समझा लो।
(ग) वह कष्ट में है।
(घ) वह कर्तव्य पालन कर रहा है।
उत्तर:
(क) जेल में भवानी अच्छा होगा।
प्रश्न 2.
भवानी किसकी लीक पर चला है?
(क) अपने गुरू की
(ख) पिता की
(ग) भाई की
(घ) गाँधी जी की
उत्तर:
(ख) पिता की
प्रश्न 3.
माँ की कोख कब लज्जित होती?
(क) यदि पुत्र भवानी अपने पाँव पीछे हटाता।
(ख) यदि पुत्र जेल में दुखी होता।
(ग) यदि वह माता-पिता को याद न करता।
(घ) जब वह माफी माँगता।
उत्तर:
(क) यदि पुत्र भवानी अपने पाँव पीछे हटाता।
प्रश्न 4.
‘कच्चे होने’ से क्या तात्पर्य है?
(क) दिल को दुखी करना
(ख) दुख प्रकट करना
(ग) आते भावुक हो जाना
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 5.
पिता ने क्या कहा होगा?
(क) उसने कितना सहन किया होगा।
(ख) मैंने बहुत सहन कर लिया।
(ग) अब सहा नहीं जाता।
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) उसने कितना सहन किया होगा।
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पद – 8
गिर रहा है आज पानी, याद आता है भवानी,
उसे थी बरसात प्यारी, रात दिन की झड़ी झारी,
खुले सिर नंगे बदन वह धूमता फिरता मगन वह,
बड़े-बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता,
तुझे बतलाता कि बेला, ने फलानी फूल झेला,
तू कि उसके साथ जाती, आज इससे याद आती,
मैं न रोऊँगा-कहा होगा, और फिर पानी बहा होगा,
दृश्य उसके बाद का रे, पाँचवें की याद का रे,
शब्दार्थ – प्यारी – प्रिय बदन – शरीर, दृश्य – नज़ारा।
प्रसंग – कवि जेल में बैठा बता रहा है कि आज वर्षा बहुत हो रही है। कवि याद करता है कि ऐसे मौसम में पिताजी को अपना बेटा भवानी (कवि का नाम) बहुत याद आता होगा, क्योंकि उसको (भवानी को) बरसात बहुत अच्छी लगती थी। इसमें रात-दिन पानी की झड़ी लग जाती है।
कवि कल्पना करता है कि मेरे पिताजी सोच रहे होंगे कि ऐसी बरसात में मेरा बेटा नंगे शरीर इधर-उधर घूमता फिरता होगा। इस समय वह बड़े अहाते में जाकर लौकी के बीज बो रहा होता और वह अपनी माँ को बताता कि बेला में अमुक फूल आ गया है और माँ उसके साथ चली जाती। पिताजी तब कहते कि जेल में मेरे बेटे ने कहा होगा कि मैं रोऊँगा नहीं। इसके बाद भी आँखों से पानी (और) बह निकले होंगे। यह दृश्य उसके बाद का ही है। पिता अपने पाँचवे बेटे भवानी को याद कर रहा है।
विशेष:
1. फलानी फूल, बड़े बाड़े में अनुप्राय अलंकार का प्रयोग है।
2. घटनाओं का प्रत्यास्मरण किया गया है
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
किसकी याद आती है?
(क) भवानी की
(ख) पाँचवे बेटे की
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) जेल की
उत्तर:
(क) भवानी की
प्रश्न 2.
बरसात में भवानी क्या काम किया करता था?
(क) नंगे बदन घूमता फिरता था
(ख) लौकी के बीज लगाता था
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) फूल लगाता था
उत्तर:
(ग) (क) और (ख) दोनों
प्रश्न 3.
‘फलानी फूल में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास का
(ख) यमक का
(ग) श्लेष का
(घ) उपमा का
उत्तर:
(क) अनुप्रास का
प्रश्न 4.
‘तुझे बतलाता’ में तुझे- सर्वनाम किसके लिए आया है?
(क) पिताजी के लिए
(ख) माँ के लिए
(ग) बेटे के लिए
(घ) अन्य के लिए
उत्तर:
(ख) माँ के लिए
प्रश्न 5.
‘मैं ना रोऊँगा’ किसने कहा होगा?
(क) बेटे भवानी ने
(ख) पिताजी ने
(ग) माँ ने
(घ) बहिन ने
उत्तर:
(क) बेटे भवानी ने
पद – 9
भाई पागल, बहिन पागल, और अम्मा ठीक बादल,
और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला,
शर्म से रो भी न पाएँ, खूब भीतर छटपटाएँ,
आज ऐसा कुछ हुआ होगा, आज सबका मन चुआ होगा।
अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है,
एक-से बादल जमे हैं, गगन-भर फैले रमे हैं,
ढेर है उनका, न फाँकें, जो कि किरनें झुकें-झाँकें,
लग रहे हैं वे मुझे यों, माँ कि आँगन लीप दे ज्यों;
शब्दार्थ – अम्मा – माँ, भौजी – भाभी, सहज – सामान्य, मन चुआ होना – मन भारी होना, निहायत – बिल्कुल, नम – गीला, गगन – आसमान।
प्रसंग – पूर्ववत
व्याख्या- जेल में बैठा कवि बरसात के मौसम में अपने घर के लोगों को याद करते हुए कहता है कि भाई और बहनें पागल हैं अर्थात् मस्त हैं। इसके विपरीत उसकी माँ ठीक बादल की तरह है जो अपने आँसुओं को अपने अंदर ही समेटे रहती है, वह कभी बरसती नहीं, रोती नहीं। घर में भाभी और सरला सहज बनी रहती हैं। वे सहज-सरल पानी की तरह की हैं।
उन्हें रोने में भी शर्म आती है अतः वे रो भी नहीं पातीं, लेकिन उनमें गहरी छटपटाहट अवश्य रहती है, आज बरसात को देखकर कुछ ऐसा अवश्य हुआ होगा कि उनका मन भर आया होगा। मन में दुख बहा होगा।
अभी-अभी वर्षा रूक गई है लेकिन कवि का मन अभी भी भीगा (दुखी) है। आकाश में छाए बादल, उसके मन की उदासी को दर्शाते हैं। यहाँ प्रकृति और मन की स्थिति का गहरा सामंजस्य दिखाया गया है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
अम्मा को कैसी बताया गया है?
(क) पागल
(ख) बादल के समान
(ग) सहजं
(घ) सरल
उत्तर:
(ख) बादल के समान
प्रश्न 2.
भौजी की क्या दशा हो रही होगी?
(क) वह शर्म के मारे रो भी नहीं पा रही होगी
(ख) वह शांत बनी होगी
(ग) वह पागल हो गई होगी
(घ) कुछ विशेष नहीं
उत्तर:
(क) वह शर्म के मारे रो भी नहीं पा रही होगी
प्रश्न 3.
आज क्या विशेष बात हुई होगी?
(क) सभी बहुत खुश होंगे
(ख) सभी मन से दुखी होंगे
(ग) सभी रो रहे होंगे
(घ) सभी सामान्य होंगे
उत्तर:
(ख) सभी मन से दुखी होंगे
प्रश्न 4.
अभी क्या स्थिति है?
(क) वर्षा थम गई है
(ख) पानी अभी भी गिर रहा है
(ग) सभी रो रहे होंगे
(घ) वातावरण में शांति है
उत्तर:
(क) वर्षा थम गई है
प्रश्न 5.
‘झुके-झाँके’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) उपमा
(ख) रूपक
(ग) अनुप्रास
(घ) यमक
उत्तर:
(ग) अनुप्रास
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पद – 10
गगन-आँगन की लुनाई, दिशा के मन में समाई
दश दिशा चुपचाप हैं रे, स्वस्थ की लय छाप है रे
झाड़ आँखें बंद करके, साँस सुस्थिर मंद करके,
हिले बिन चुपके खड़े हैं, क्षितिज पर जैसे जड़े हैं
एक पंछी बोलता है, घाव उर के खोलता है,
आदमी के उर बिचारे, किसलिए इतनी तृषा रे,
शब्दार्थ – लुनाई – सुंदरता, सलोनापन, सुस्थिर – चित्र स्थिर (एकाग्र करके, पंछी – पक्षी, उर – हृदय, तृषा – प्यास, तीव्र इच्छा।
प्रसंग – पूर्ववत
व्याख्या – कवि सवतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल में बंद है और जेल में बैठे-बैठे अपने घर के वातावरण का स्मरण करता है। उसके मन में घर का आंगन गगन (आंसमान) के समान प्रतीत होता है। उसकी सुंदरता, सलोनापन उसके मन मे तैर रहा होता है। लगता है यह सलोनापन दिशाओं में समा गया है। इस समय दसों दिशाएँ चुप हैं अर्थात् सर्वत्र शांति व्याप्त है। यह स्वस्थ की छाप सी लगती है। वातावरण में व्याप्त शांति को चित्रित करते हुए कवि कहता है कि झाड़ियां भी मानो अपनी आँखें बंद करके, साँस रोककर उसे धीमा करके चुपचाप है। झाड़-झंखाड़ों में कोई हरकत नहीं है। वे चुप खड़े है। लगता है उन्होंने साँस रोक रखी है। ऐसा लगता है कि क्षितिज पर जड़ दिए गए हों क्योंकि उनमें कोई हरकत नहीं है।
तभी एक पक्षी बोल उठता है। उसकी बोली सुनकर कवि के हृदय में छिपे घाव खुल जाते हैं अर्थात् पुराना छिपा दुख उभर आता है। तब कवि सोचता है कि बेचारे आदमी के मन में इतनी प्यास (तीव्र इच्छा) किस लिये है?
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
गगन-आंगन में किस अलंकार का प्रतीक है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) अनुप्रास
(घ) यमक
उत्तर:
(क) रूपक
प्रश्न 2.
दश-दिशा में कौन सा अलंकार है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) अनुप्रास
(घ) यमक
उत्तर:
(ख) उपमा
प्रश्न 3.
वातावरण में व्याप्त शांति का किससे पता चल रहा है?
(क) झाड़ ने आँखें बंद कर रखी हैं।
(ख) झाड़ (स्थिर) सा खड़ा है
(ग) सांस मंद कर रखा है
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 4.
झाड़ क्षितिज पर कैसे प्रतीत हो रहा है?
(क) मानो उन्हें जड़ दिया गया हो
(ख) वे शांत खड़े प्रतीत हो रहे हैं।
(ग) वे हिलडुल रहे हैं
(घ) वे सुस्थिर हैं
उत्तर:
(क) मानो उन्हें जड़ दिया गया हो
प्रश्न 5.
एक पक्षी के बोलते ही क्या हो जाता है?
(क) हृदय के घाव उभर आते हैं
(ख) उसकी बोली मीठी लगती है
(ग) पुरानी यादें ताजा हो उठती हैं
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) हृदय के घाव उभर आते हैं
पद – 11
तू जरा-सा दुख कितना, सह सकेगा क्या कि इतना,
और इस पर बस नहीं है, बस बिना कुछ रस नहीं है,
हवा आई उड़ चला तू, लहर आई मुड़ चला तू,
लगा झटका टूट बैठा, गिरा नीचे फूट बैठा,
तू कि प्रिय से दूर होकर, वह चला रे पूर होकर,
दुख भर क्या पास तेरे, अश्रु सिंचित हास तेरे!
शब्दार्थ – अश्रु – आँसू
प्रसंग – पूर्ववत
व्याख्या – कवि जेल में बैठा सोचता है कि तू (कवि) तो जरा सा है अर्थात् छोटा है पर यह दुख कितना बड़ा है। कवि स्वयं से प्रश्न करता है कि क्या तू इस दुख को सहनकर पाएगा। इतना सहने पर भी रूकने का नाम तम नहीं है। कहीं तो रूकना ही पड़ेगा। कवि अपनी स्थिति पर विचार करते हुए कहता है कि मेरी स्थिति तो ऐसी है कि थोड़ी-सी हवा आने पर ही उड़ जाता हूँ और लहर आने पर मुड़ जाता हूँ। मुझे इतना बड़ा झटका लगता है कि मैं बुरी तरह इट गया हूँ। नीचे का गिरा फूट गया। तू अपने प्रिंय से दूर हो गया है। तू तो पर ही कर बह चुका है। तेरे पास तो दुख ही है और हँसी में भी आँसू मिले हुए हैं। हँसी पर भी दुख की छाया तैर रही है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
दुख कैसा है?
(क) छोटा
(ख) बड़ा
(ग) अनोखा
(घ) अनजान
उत्तर:
(ख) बड़ा
प्रश्न 2.
‘सह सकेगा क्या’ यह प्रश्न किससे है?
(क) स्वयं कवि से
(ख) दर्शक से
(ग) दुख से
(घ) सभी से
उत्तर:
(क) स्वयं कवि से
प्रश्न 3.
काव्यांश से कवि कैसा प्रतीत होता है?
(क) अस्थिर
(ख) स्थिर
(ग) चिंतक
(घ) दुखी
उत्तर:
(क) अस्थिर
प्रश्न 4.
झटके का कवि पर क्या असर हुआ?
(क) वह टूट गया
(ख) उड़ चला
(ग) बह गया
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) वह टूट गया
प्रश्न 5.
कवि के पास क्या है?
(क) दुख
(ख) अश्रु सिंचित घाव
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(ग) (क) और (ख) दोनों
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पद – 12
पिताजी का वेश मुझको, दे रहा है क्लेश मुझको,
देह एक पहाड़ जैसे, मन कि बड़ का झाड़ जैसे,
एक पता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए,
एक हल्की चोट लग ले, दूध की नदी उमंग ले,
एक टहनी कम न हो ले, कम कहाँ कि खम न हो ले,
ध्यान कितना फिक्र कितनी, डाल जितनी जड़े उतनी!
इस तरह का हाल उनका इस तरह का ख्याल उनका,
हवा, उनको धीर देना, यह नहीं जी चीर देना,
शब्दार्थ – वेश – वेशभूषा, देह – शरीर, उमंग ले – बह ले, खम – झुका हुआ, टेढ़ा, फिक्र – चिंता, धीर – धैर्य, जी – दिल।
प्रसंग – पूर्ववत
व्याख्या – जब कवि पिताजी की साधारण व्यक्तित्व को देखता है तब-तब उसके हृदय में क्लेश उत्पन्न हो जाता है अर्थात् उसका जी दुखी हो जाता है। कवि के पिताजी का शरीर तो पहाड़ जैसा विशाल है और उनका मन बरगद के पेड़ जैसा स्थिर और विशाल है।
यदि उस पेड़ से एक भी पत्ता टूट जाता है अर्थात् पिताजी की कोई एक भी बेटा अलग हो जाता है तो उनकी आँखों से आसुओं की धारा फूट निकलती है। यदि किसी संतान को हल्की-सी भी चोट लग जाए तो उससे रस (दूध जैसा द्रव) बहने लगता है अर्थात् उनका वात्सल्य बह निकलता है। उनकी यही इच्छा रहती है कि उनके परिवार रूपी वृक्ष की एक भी टहनी कम न हो। कम होना तो दूर की बात है, टेड़ी या झुकी न होने पाए।
उन्हें अपने परिवार का पूरा-पूरा ख्याल रहता है। वे जड़ का भी ख्याल रखते हैं तो टहनियों का भी अर्थात् परिवार के हर छोटे सदस्य का। उनका स्वभाव ही ऐसा है। कवि हवा से प्रार्थना करता है कि तुम मेरे पिताजी को धैर्य देना, क्योंकि उनके पेड़ की एक डाल (कवि) उनसे दूर है। वे इस कष्ट को सह पाएँ, इसलिए उन्हें धैर्य बँधाने की आवश्यकता है। इसके अभाव में उनके दिल को चोट पहुँचेगी।
बहुविकल्पी प्रान
प्रश्न 1.
कवि को कौन सी बात क्लेश दे रही है?
(क) पिताजी का वेश
(ख) पिताजी का शरीर
(ग) पिताजी की याद
(घ) पिताजी की बातें
उत्तर:
(क) पिताजी का वेश
प्रश्न 2.
पिताजी का स्वभाव कैसा है?
(क) कोमल
(ख) स्नेह से भरा
(ग) संवेदनशील
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 3.
पेड़ अपने किस अंग का ख्याल रखता है?
(क) जड़ों का
(ख) डालियों का
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) अपना
उत्तर:
(ग) (क) और (ख) दोनों
प्रश्न 4.
कवि पिताजी को धैर्य दिलाने की प्रार्थना किससे करता है?
(क) हवा से
(ख) पानी से
(ग) पेड़ से
(घ) सभी से
उत्तर:
(क) हवा से
प्रश्न 5.
‘फिक्र’ शब्द किस भाषा का है?
(क) हिंदी का
(ख) उर्दू का
(ग) संस्कृत का
(घ) अवधी का
उत्तर:
(ख) उर्दू का
पद 13
हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें,
मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है,
शब्दार्थ – सजीले – सज्जायुक्त, सावन – सावन का महीना,
पुण्यपावन – श्रेष्ठ कर्मों से पवित्र, मजे में – आनन्द में, बस – केवल, बस – समाप्त विरस – आनंदहीन
प्रसंग – प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र रचित कविता ‘घर की याद’ के ‘पिता’ शीर्षक से अवतरित हैं। इन पंक्तियों में कवि सावन से कहता है कि तुम तो खूब बरसो, पर मेरे पिता की अश्रुधारा न बरसे।
व्याख्या – हे सजीले हरे-भरे सावन! हे पुण्यशाली! हे परमपावन! तुम चाहे कितना ही बरस लो जी भरकर बरस लो, परन्तु मेरे पिता के पास जाकर कोई ऐसा संदेश मत देना कि वे मेरे अभाव में अश्रुधारा बरसाएँ और अपने पाँचवें बेटे भवानी के लिए न तरसें मैं यहाँ जेल में हूँ यह बात ठीक है, परन्तु मैं यहाँ बिल्कुल ठीक हूँ। अन्तर इतना है कि मैं घर पर पिता जी के पास नहीं हूँ, इसी बेबसी ने सारे परिवार को आनंदहीन और नीरस कर रखा है। मेरे अभाव में घर के सारे परिवारीजन दुखी हैं।
विशेष : प्रस्तुत पंक्तियों में भवानीप्रसाद मिश्र ने खड़ी बोली की छन्दमुक्त कविता का प्रयोग किया है। तत्सम-तद्भव शब्दावली युक्त भाषा मुहावरों से परिपूर्ण है। ‘पुण्य पावन’ में अनुप्रास अलंकार है। सावन को सन्देशवाहक बनाकर भेजा गया है। यमक अलंकार का भी प्रयोग है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
‘सावन’ को कैसा बताया गया है?
(क) सजीला
(ख) हरा
(ग) पुण्य-पावन
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 2.
‘वे न बरसे’ – किसके लिए कहा गया है?
(क) पिता के अश्रु
(ख) भाई
(ग) माँ
(घ) बादल
उत्तर:
(क) पिता के अश्रु
प्रश्न 3.
कवि स्वयं को किस स्थिति में बताता है?
(क) कष्ट में
(ख) मजे में
(ग) आनन्द में
(घ) चिंता में
उत्तर:
(ख) मजे में
प्रश्न 4.
‘पुण्य-पावन’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) उपमा
उत्तर:
(क) अनुप्रास
प्रश्न 5.
‘सावन’ के पूर्व ‘हे’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है?
(क) संबोधन के लिए
(ख) दूत के रूप में चित्रण
(ग) (क)-(ख) दोनों
(घ) सामान्य रूप में
उत्तर:
(ग) (क)-(ख) दोनों
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पद – 14
किंतु उनसे यह न कहना, उन्हें देते धीर रहना,
उन्हें कहना लिख रहा हूँ, उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ।
काम करता हूँ कि कहना, नाम करता हूँ कि कहना,
चाहते हैं लोग कहना, मत करो कुछ शोक कहना,
शब्दार्थ – किन्तु – लेकिन, परन्तु, धीर – धैय
प्रसंग – प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र रचित कविता ‘घर की याद’ से अवतरित हैं। इन पंक्तियों में कवि सावन को सन्देशवाहक बनाकर अपने पिता को सन्देश भेज रहा है-
व्याख्या – हे सजीले सावन! तुम घर जाकर पिता जी से यह मत कह देना कि मैं जेल में दुखी और नीरस जीवन बिता रहा हूँ। अपितु मेरी कुशलता बताकर उन्हें धीरज प्रदान करना। उनसे यह कहना कि मैं जेल में अपनी कविताएँ लिखता रहता हूँ और पत्रिकाओं के साथ अन्य प्रकार के साहित्य का भी अध्ययन कर रहा हूँ। मैं यहाँ व्यर्थ समय नहीं गँवा रहा हूँ, हर समय व्यस्त रहता हूँ। मैं यहाँ आनंदित हूँ- खेलकूद में भी अपना समय व्यतीत करता हूँ। मैं यहाँ इतना आनन्दित और मस्त हूँ कि दुखों को दूर धकेल देता हूँ। यहाँ किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं है। हे सावन ! वहाँ जाकर पिताजी से यह मत कहना कि मैं यहाँ दुखी और उदास हूँ।
विशेष : खड़ी बोली की छंदमुक्त कविता का प्रयोग किया है। भाषा सरल और जनसाधारण योग्य है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कवि बादल से क्या न कहने का आग्रह कर रहा है?
(क) पिता से पुत्र के कष्ट को
(ख) जेल का
(ग) वर्षा का
(घ) कुछ भी नहीं
उत्तर:
(क) पिता से पुत्र के कष्ट को
प्रश्न 2.
बादल से क्या संदेश देने को कवि कह रहा है?
(क) पुत्र पढ़ने-लिखने का काम कर रहा है।
(ख) वह मजे में है।
(ग) वह कष्ट में है।
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) पुत्र पढ़ने-लिखने का काम कर रहा है।
प्रश्न 3.
कवि और क्या संदेश भिजवाता है?
(क) वहाँ उनका बेटा काम करता है।
(ख) वहाँ वह उनका नाम रोशन कर रहा है।
(ग) शोक मत करना।
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 4.
‘काम करता’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) उपमा
उत्तर:
(क) अनुप्रास
प्रश्न 5.
कविता का शीर्षक क्या है?
(क) जेल-जीवन
(ख) घर की याद
(ग) सजीले सावन
(घ) पिता
उत्तर:
(ख) घर की याद
पद – 15
और कहना मस्त हूँ मैं, कातने में व्यस्त हूँ मैं,
वजन सत्तर सेर मेरा, और भोजन ढेर मेरा,
कूदता हूँ, खेलता हूँ, दुख डटकर ठेलता हूँ,
और कहना मस्त हूँ मैं, यों न कहना अस्त हूँ मैं।
शब्दार्थ – व्यस्त – काम में लगे, ढेलना – धकेलना, अस्त – दुखी।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता ‘घर की याद’ से अवतरित है। कवि सावन के माध्यम से अपने घर संदेश भिजवाता है।
व्याख्या – कवि सावन से कहता है कि तुम मेरे घर जाकर यह कहना कि तुम्हारा बेटा भवानी जेल में मजे में है। वहाँ उसे कोई कष्ट नहीं है। वह वहाँ सूत कातने में व्यस्त रहता है। इस समय उसका वजन बढ़कर 70 सेर (लगभग 63 किलो) हो गया है। वह वहाँ ढेर सारा भोजन करता है अर्थात् तुम्हारा बेटा वहाँ मजे में है, उसे कोई कष्ट नहीं है। (इससे उन्हें तसल्ली हो जाएगी।) कवि सावन से घर जाकर यह भी कहने को कहता है कि वहाँ जाकर बताना कि तुम्हारा बेटा जेल में भी खूब खेलता-कूदता है और दुखों को आगे धकेल भगा देता है। वह वहाँ पूरी तरह मस्ती से रह रहा है। उसे वहाँ कोई दुख नहीं है। (यह सब कहलवाकर कवि अपने परिवारजनों को दुखी होने से बचाना चाहता है।) कवि सावन को सावधान करते हुए कहता है कि तुम मेरे घर जाकर कुछ ऐसा-वैसा मत कह देना। उन्हें यह मत बता देना कि मैं रात भर जागता रहता हूँ और आदमियों से दूर भागता रहता हूँ अर्थात् वहाँ मेरी वास्तविक स्थिति का बखान मत कर देना।
विशेष:
1. कवि अपने दुख तकलीफ को छिपाना चाहता है, ताकि उसके परिवारजनों को कष्ट न हो।
2. सरल एवं सुबोध भाषा का प्रयोग किया गया है।
बहुविकल्पी] प्रश्न
प्रश्न 1.
कवि जेल में क्या काम करता है?
(क) सूत कातने का
(ख) खुदाई करने का
(ग) बागवानी का
(घ) हल चलाने का
उत्तर:
(क) सूत कातने का
प्रश्न 2.
वहाँ कवि का वजन कितना हो गया है?
(क) 50 सेर
(ख) 60 सेर
(ग) 70 सेर
(घ) 80 सेर
उत्तर:
(ग) 70 सेर
प्रश्न 3.
जेल में कवि दुख कैसे झेलता है?
(क) कूदकर
(ख) खेलकर
(ग) मस्त रहकर
(घ) उपर्युक्त सभी काम
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी काम
प्रश्न 4.
कवि सावन से क्या बात पिता को न कहने के लिए कहता है?
(क) तुम्हारा पुत्र सुस्त रहता है।
(ख) आपका बेटा दुखी है।
(ग) (क)-(ख) दोनों
(घ) सही बात
उत्तर:
(घ) सही बात
प्रश्न 5.
सावन को किस रूप में चित्रित किया गया है?
(क) दूत के रूप में
(ख) सुख के रूप में
(ग) प्रकृति के रूप में
(घ) सभी
उत्तर:
(क) दूत के रूप में
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पद – 16
कह न देना मौन हूँ मैं, खुद ना समझैं कौन हूँ मैं,
देखना कुछ बक न देना, उन्हें कोई शक न देना,
हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें।
शब्दार्थ – मौन – चुपचाप, शांत, बक न देना – कह न देना, शक – संदेह।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र रचित कविता ‘घर की याद’ के ‘पिता’ शीर्षक से अवतरित हैं। कवि जेल में घर की याद करके सावन को दूत बनाकर अपने पिता को संदेश भेजता है-
व्याख्या – हे सावन! वहाँ जाकर पिताजी से यह मत कह देना कि मैं यहाँ जेल में चुपचाप और शान्त रहता हूँ। यह भी मत कह देना कि मैं यहाँ स्वयं को भी नहीं पहचान पाता कि मैं कौन हूँ। वहाँ जाकर पिताजी से उल्टा-पुल्टा मत कह देना कि उन्हें मेरे बारे में कोई संदेह न हो जाए। तुम वहाँ ऐसा कहना कि उन्हें कोई कष्ट न हो। यदि तुम यहाँ की वास्तविकता का वर्णन कर दोगे तो वे वहाँ दुखी होंगे। हे सजीले हरे-भरे सावन! हे पुण्यात्मा ! हे परम पावन! तुम तो जी चाहे बरस लो पर वहाँ जाकर ऐसा कोई दुखपूर्ण वर्णन मत कर देना कि पिताजी की अश्रुधारा बरसने लगे। वहाँ जाकर पिताजी से ऐसा मत कहना कि पिताजी अपने पाँचवें पुत्र भवानी के लिए तड़पने लगें या मिलने के लिए तरसने लगें। यहाँ कवि का त्याग, प्रेम और अपने दुःख को छिपाने का भाव चरम पर दिखाई देता है।
विशेष : खड़ी बोली की छंदमुक्त कविता का प्रयोग किया है। तत्सम-तद्भव शब्दावली युक्त भाषा मुहावरों से परिपूर्ण है। ‘पुण्य पावन’ में अनुप्रास अलंकार है। यमक अलंकार का भी प्रयोग है। भाषा सरल और जनसाधारण योग्य है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कवि सावन को किस बात के लिए मना करता है?
(क) कि जेल में उनका पुत्र मौन रहता है।
(ख) जेल की वास्तविक दशा
(ग) (क)-(ख) दोनों
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(ग) (क)-(ख) दोनों
प्रश्न 2.
‘बकना’ कैसा शब्द है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर:
(ग) देशज
प्रश्न 3.
कवि सावन को कैसा बताता है?
(क) सजीला
(ख) हरा
(ग) पुण्य-पावन
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 4.
कौन न बरसें?
(क) पिता
(ख) माँ
(ग) भाई
(घ) बहनें
उत्तर:
(क) पिता
प्रश्न 5.
‘पुण्य-पावन’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) यमक
(ख) अनुप्रास
(ग) श्लेष
(घ) रूपक
उत्तर:
(ख) अनुप्रास