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Class 9 Hindi Chapter 11 MCQ झाँसी की रानी
Class 9 Hindi झाँसी की रानी MCQ
झाँसी की रानी MCQ Questions – Class 9 Hindi Chapter 11 MCQ Online Test
दिए गए गद्यांशों और उन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरों को पढ़िए।
काव्यांश (1)
सिहांसन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फ़िरगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में
वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – भृकुटी – भौंह, बूढ़े भारत – शक्तिहीन भारत, गुमी – गायब, फ़िरगी – अंग्रेज, मर्दानी – मर्द जैसी बहादुर महिला।
प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित कविता ‘झाँसी की रानी’ से अवतरित है।
व्याख्या – कवयित्री बताती है कि रानी लक्ष्मीबाई के मैदान में आते ही अनेक देशी राजाओं के सिहांसनों में भी खलबली मच जाती थी। उन्होंने भी अंग्रेज़ों के प्रति अपनी भृकुटियाँ तान ली थीं। उनमें में भी क्रोध बढ़ता जा रहा था। इससे तो भारत अभी तक शक्तिहीन बना हुआ था, अब उसमें जवानी की नई लहर दौड़ गई। लोग अंग्रेजी शासन के विरोध करने के लिए एक जुट होने लगे। अभी तक तो आज़ादी गुम हो चुकी थी। अब लोगों ने उसकी कीमत को पहचान लिया था। सभी ने मिलकर अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने की बात अपने मन में ठान ली थी।
सन् 1857 में वह तलवार पुनः चमक उठी जो अभी तक पुरानी पड़ चुकी थी। अर्थात् लोगों में क्रांति करने का भाव संचार हो गया था। कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बुंदेलखंड के हरबोलो समुदाय के लोकगायकों के गीतों में सुनी थी। उन्होंने ने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई मर्द बनकर अंग्रेज़ों से बहुत खूब लड़ी थी। यह पद्यांश पूरे संघर्ष का आरंभ और उत्साह दर्शाता है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
भारत को बूढ़ा क्यों बताया गया है?
(क) भारत के लोगों की मनःस्थिति, बूढ़ों जैसी सुस्त बन गई थी।
(ख) भारत में बूढ़े लोगों का बहुलता था।
(ग) लोगों में परतंत्रता को स्वीकार कर लिया था।
(घ) उनमें जोश का अभाव था।
उत्तर:
(क) भारत के लोगों की मनःस्थिति, बूढ़ों जैसी सुस्त बन गई थी।
प्रश्न 2.
उस समय लोगों को अपने मन में क्या ठान लिया था?
(क) अंग्रेजों को भारत से बाहर भगाना है।
(ख) हमें आज़ादी लेनी ही होगी।
(ग) रानी को अपना सेनापति बनाना है।
(घ) हमें डरकर रहना है।
उत्तर:
(क) अंग्रेजों को भारत से बाहर भगाना है।
प्रश्न 3.
तलवार को पुरानी क्यों कही गई है?
(क) तलवार अपनी चमक दमक खो बैठी थी।
(ख) तलवार काफी समय से काम में नहीं आई थी।
(ग) तलवार में जंग लग चुका था।
(घ) यह तलवार सुस्त पड़े राजाओं की थी।
उत्तर:
(क) तलवार अपनी चमक दमक खो बैठी थी।
प्रश्न 4.
रानी को मर्दानी क्यों कहा गया है?
(क) रानी की पुरुषोचित वीरता को देखकर
(ख) रानी मर्द की वेश-भूषा पहनने लगी थी।
(ग) वह मर्द बन चुकी थी।
(घ) यह मर्द का स्त्रीलिंग रूप है।
उत्तर:
(क) रानी की पुरुषोचित वीरता को देखकर
प्रश्न 5.
कवयित्री ने यह गाथा किनसे सुनी थी?
(क) लोगों से
(ख) हरबोलो के गीतों के माध्यम से
(ग) बुदेलों से
(घ) अंग्रेज़ों से
उत्तर:
(ख) हरबोलो के गीतों के माध्यम से
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काव्यांश (2)
कानपूर के नाना की मुंहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ
उसको याद ज़बानी थीं।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – संतान – औलाद, कृपाण – तलवार, संग – साथ।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम मनू था, पर कानपुर के नाना धुधूपंत उन्हें छबीली के नाम से पुकारते थे। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मीबाई था और वह अपने पिता मोरोपंत की अकेली संतान थीं। वह नाना धुधूपंत के साथ पढ़ती थी और उन्हीं के साथ खेलती थीं। उनकी सहेलियाँ लड़कियाँ न होकर बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी ही उनकी सहेलियाँ थीं। वे उन्हीं के साथ रहती थी। उन्हें वीर शिवाजी की गाथाएँ मुँह ज़बानी याद थी। ये सब बातें लक्ष्मीबाई के बारे में कवयित्री को बुंदेलखंड के हरबोलो समुदाय के लोकगायकों के गीतों के माध्यम से पता चली थी। रानी लक्ष्मीबाई तो मर्द के रूप ‘मर्दानी’ बनकर अंग्रेजों के विरुद्ध डटकर लड़ी थी। वह झाँसी की रानी ही थीं।
बहुविकल्पी प्रान
प्रश्न 1.
कानपुर के नाना मनू को क्या कहकर बुलाते थे?
(क) बहन
(ख) छबीली
(ग) बहन छबीली
(घ) मनू
उत्तर:
(ग) बहन छबीली
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई अपने पिताजी की कौन-सी संतान थी?
(क) पहली
(ख) दूसरी
(ग) अकेली
(घ) चौथी
उत्तर:
(ग) अकेली
प्रश्न 3.
लक्ष्मीबाई बचपन में किसके साथ पढ़ती और खेलती थी?
(क) नाना के साथ
(ख) सहेलियों के साथ
(ग) अस्त्र-शस्त्रों के साथ
(घ) किसी के साथ नहीं
उत्तर:
(क) नाना के साथ
प्रश्न 4.
लक्ष्मीबाई को किसकी गाथाएँ जबानी याद थीं?
(क) शिवाजी की
(ख) महाराणा प्रताप की
(ग) बाजीराव की
(घ) पेशवा की
उत्तर:
(क) शिवाजी की
प्रश्न 5.
कवयित्री ने रानी की वीरता के बारे में किन से जाना?
(क) बुंदेलों से
(ख) अंग्रेजों से
(ग) बुंदेले के हरबोलो से
(घ) जीवों से
उत्तर:
(ग) बुंदेले के हरबोलो से
काव्यांश (3)
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी
भी आराध्य भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – स्वयं – खुद, पुलकित – प्रसन्न, वार – हमले, व्यूह – घेरा, रचना – बनाना, सैन्य – सेना, दुर्ग – किला, आराध्य – जिसकी आराधना की जाए, भवानी – दुर्गा माँ।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व में अनेक देवियों का समावेश था। पता ही नहीं चलता था कि वह दुर्गा है या लक्ष्मी? इतना सच है कि वह स्वयं ही वीरता का अवतार थीं। उसमें वीरता पूरी तरह से उतर आई थीं। उसके प्रिय काम थे- नकली युद्ध करना, चक्रव्यूह की रचना करना तथा शिकार खेलना उनकी आराध्य देवी महाराष्ट्र की कुलदेवी भवानी थी। वह उसी की पूजा करती थी तथा उसी को मानती थी। कवयित्री ने बुंदेलों का एक समुदाय हरबोलो के मुख से लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी सुनी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
लक्ष्मीबाई को किसका अवतार बताया गया है?
(क) दुर्गा का
(ख) लक्ष्मी का
(ग) वीरता का
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) वीरता का
प्रश्न 2.
क्या देखकर कौन पुलकित होते थे?
(क) लक्ष्मीबाई की तलवारों के वार देखकर मराठे पुलकित होते थे।
(ख) उनकी सहेलियाँ पुलकित होती थीं।
(ग) उनके सैनिक प्रभावित होते थे
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) लक्ष्मीबाई की तलवारों के वार देखकर मराठे पुलकित होते थे।
प्रश्न 3.
लक्ष्मीबाई के क्या शौक थे?
(क) नकली युद्ध करना
(ख) व्यूह की रचना करना
(ग) शिकार खेलना
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 4.
लक्ष्मीबाई की कुलदेवी कौन थी?
(क) भवानी
(ख) दुर्गा
(ग) लक्ष्मी
(घ) राम
उत्तर:
(क) भवानी
प्रश्न 5.
हरबोलो ने लक्ष्मीबाई के बारे में क्या बताया?
(क) वह खूब लड़ी थी
(ख) वह मर्दानी थी
(ग) वह झाँसी की रानी थी
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
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काव्यांश (4)
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन गई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि सी वह आई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया,
शिव से मिली भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – वैभव – सम्पन्नता, ब्याह – विवाह, सुभट – रणकुशल योद्धा, विरुदावली यश का गान।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – इस भाग में रानी लक्ष्मीबाई के विवाह का वर्णन है। उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं। झाँसी में उनके आगमन से खुशियाँ छा गई। रणकुशल योद्धाओं ने इस अवसर पर यशोगान किया। इसी यशोगान के अनुरूप लक्ष्मीबाई झाँसी में आ गई। कवयित्री उन्हें अर्जुन की पत्नी चित्रा और भगवान शिव की पत्नी भवानी के समान महान और शक्तिशाली बताती हैं। यह उनके गौरवपूर्ण व्यक्तित्व को दर्शाता है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
सगाई कहाँ हुई थी?
(क) झाँसी में
(ख) कानपुर में
(ग) बिठूर में
(घ) ग्वालियर में
उत्तर:
(क) झाँसी में
प्रश्न 2.
झाँसी में लक्ष्मीबाई के आगमन पर क्या हुआ?
(क) सर्वत्र प्रसन्नता का वातावरण छा गया।
(ख) राजमहल में बधाइयाँ बजने लगीं।
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
(घ) कुछ विशेष थी
उत्तर:
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
प्रश्न 3.
‘सुभट बुंदेलों’ की विरुदावली-सी वह आई झाँसी में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) अनुप्रास
(घ) यमक
उत्तर:
(ख) उपमा
प्रश्न 4.
शिव से कौन मिली थी?
(क) भवानी
(ख) दुर्गा
(ग) लक्ष्मी
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) भवानी
प्रश्न 5.
कवयित्री ने लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी किनसे सुनी?
(क) बुंदेलों से
(ख) हरबोलो के समूहों से
(ग) लोगों से
(घ) स्वयं ही
उत्तर:
(ख) हरबोलो के समूहों से
काव्यांश (5)
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
निःसंतान मरे राजाजी,
रानी शोक-समानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – उदित होना – उग आना, मुदित – प्रसन्न, कालगति – मौत की गति, काला घटा – बुरे संकेत, विधि – विधाता भगवान का काल चक्र, निःसंतान – बिना संतान (बच्चा) के, शोक – दुख।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – रानी लक्ष्मीबाई के झाँसी के महलों में आगमन के साथ ही सभी प्रसन्न हो गए तथा राजमहलों में प्रकाश फैल गया। पर यह सौभाग्य थोड़े दिनों तक ही रहा। चुपके-चुपके काल की गति महलों के खुशी के वातावरण में दुखों की काली छाया लेकर आ गई। उनके पति की मृत्यु हो गई और वे विधवा हो गईं। रानी के हाथ तो तीर चलाने के अभ्यस्त थे, भला उन्हें चूड़ियाँ पहनना कैसे अच्छा लग सकता था। राजा गंगाधर राव बिना संतान के मरे थे। रानी पर शोक का पहाड़ टूट पड़ा था। रानी को राज्य पर खतरा मँडराता दिखाई दे रहा था। कवयित्री ने हरबोलों के मुँह से रानी के बारे में उनके लोकगीतों में यह सब हाल सुना था।
बहुविकल्पी प्रान
प्रश्न 1.
‘उदित हुआ सौभाग्य’ कौन-सा सौभाग्य उदित हुआ?
(क) लक्ष्मीबाई सौभाग्यवती रानी बन गई थीं।
(ख) नया सूर्य निकल आया था।
(ग) चारों ओर प्रकाश छा गया था।
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) लक्ष्मीबाई सौभाग्यवती रानी बन गई थीं।
प्रश्न 2.
‘काल गति’ क्या होती है?
(क) काल की गति
(ख) मौत का काल
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
(घ) यमराज
उत्तर:
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
प्रश्न 3.
‘काली घटा घिर आई’ कौन-सी कालीघटा घिर आई?
(क) राजा की आकस्मिक मृत्यु हो जाना।
(ख) रानी का विधवा हो जाना।
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
(घ) रात काली हो जाना
उत्तर:
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
प्रश्न 4.
किसको दया नहीं आई?
(क) विधाता को
(ख) अंग्रेज़ों को
(ग) नागरिकों को
(घ) प्रजा को
उत्तर:
(क) विधाता को
प्रश्न 5.
राजा कैसे मरे थे?
(क) निःसंतान
(ख) संतान के साथ
(ग) अचानक
(घ) बीमारी से
उत्तर:
(क) निःसंतान
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काव्यांश (6)
बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा
झाँसी हुई बिरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – दीप – दीपक, हरषाया – खुश हुआ अवसर – मौका, लावारिस – बिना उत्तराधिकारी के वारिस – उत्तराधिकारी, अश्रुपूर्ण – आँसुओं से भरा, बिरानी – पूर्ववत्।
प्रसंग – पराई।
व्याख्या – झाँसी का दीपक बुझ गया अर्थात् झाँसी के राजा की मृत्यु हो गईं। इस समाचार को पाकर डलहौजी मन-ही-मन बहुत खुश हुआ। उसने तुरंत अपनी फौज भेजकर झाँसी के किले पर ब्रिटिश शासन का झंडा फहरा दिया। चूँकि राजा गंगाधराव निःसंतान मरे थे। अतः डलहौजी ब्रिटिश राज्य का प्रतिनिधि के रूप में झाँसी का उत्तराधिकारी बन बैठा। इस प्रकार झाँसी में ब्रिटिश राज का आगमन हो गया। अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ के लिए यह नियम बना रखा था कि जो भी राजा निःसंतान मरेगा, उसका राज्य ब्रिटिश शासन में मिलाया जाएगा। राजा गंगाधर राव के एक बेटा तो हुआ था, पर वह केवल तीन महीने जीवित रह सका। बाद में राजा-रानी ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया, पर ब्रिटिश शासकों ने उसे उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया।
रानी लक्ष्मीबाई ने इस सारे घटनाक्रम को आसुओं भरी आँखों से देखा। अब उसकी झाँसी पराई हो चुकी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कौन-सा दीपक बुझ गया?
(क) राजमहल का दीपक
(ख) राजा की मृत्यु हो जाना
(ग) अंग्रेजों का आगमन
(घ) रानी का शोक मग्न होना
उत्तर:
(ख) राजा की मृत्यु हो जाना
प्रश्न 2.
राजा की मृत्यु से कौन खुश हुआ?
(क) डलहौजी
(ख) नवाब
(ग) प्रजा
(घ) सेनापति
उत्तर:
(क) डलहौजी
प्रश्न 3.
डलहौजी क्यों हरषाया?
(क) उसे गंगाधर राव पसंद नहीं था।
(ख) वह स्वयं राजा बनना था।
(ग) झाँसी का उत्तराधिकारी का न होना।
(घ) रानी का विधवा होना।
उत्तर:
(ग) झाँसी का उत्तराधिकारी का न होना।
प्रश्न 4.
डलहौजी ने तुरंत क्या काम किया?
(क) झाँसी में अपनी फौज भिजवाई।
(ख) झाँसी के किले पर कब्जा कर लिया।
(ग) किले पर ब्रिटिश शासन का झंडा फहरा दिया।
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 5.
झाँसी का वारिस किसे घोषित किया गय?
(क) दामोदर राव को
(ग) डलहौजी को
(ख) ब्रिटिश राज को
(घ) रानी को
उत्तर:
(ख) ब्रिटिश राज को
काव्यांश (7)
अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट फ़िरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,
रानी दासी बनी, बनी यह
दासी अब महरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – अनुनय-विनय – प्रार्थना, फ़िरगी – अंग्रेज, पैर पसारना – अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाना।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – अंग्रेजों की यह फितरत है कि वे किसी अनुनय-विनय को मानते ही नहीं थे। अंग्रेजों की यह विचित्र माया है। ये लोग भारत में व्यापारी बनकर प्रविष्ट हुए थे और तब वे भारत से दया की याचना करते थे। मौका मिलते ही इन अंग्रेजों ने अपने तेवर बदलने शुरु कर दिए, अब ये अपने पाँव पसारते चले गए अर्थात् अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाते चले गए। डलहौजी ने भी यही काम किया। अब तो स्थिति में बहुत बदलाव आ गया। भारत से दया की भीख माँगने वाले अंग्रेज़ों ने देशी राजाओं और नवाबों को पैरों तले ठुकराना शुरू कर दिया, अर्थात् उन्हें अपमानित करने लगे। अब तो रानी लक्ष्मीबाई दासी बन चुकी थी क्योंकि उनका राज्य छीन लिया गया था। अब तो उसे रानी से भी नीचे उतार दिया गया। रानी के बारे में कवयित्री ने हरबोलो के मुख से गाए गीतों के माध्यम से जाना था।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
अनुनय-विनय कौन नहीं मानता था?
(क) अंग्रेज़
(ख) राजा
(ग) रानी
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) अंग्रेज़
प्रश्न 2.
पहले अंग्रेज़ किस रूप में भारत में आए थे?
(क) व्यापारी के रूप में
(ख) शासक के रूप में
(ग) चालाक के रूप में
(घ) सैनिक के रूप में
उत्तर:
(क) व्यापारी के रूप में
प्रश्न 3.
पैर किसने पसारे?
(क) डलहौजी ने
(ख) रानी लक्ष्मीबाई ने
(घ) सभी ने
(ग) राजाओं ने
उत्तर:
(क) डलहौजी ने
प्रश्न 4.
किसने किसको ठुकराया?
(क) देशी राजाओं ने अंग्रेजों को
(ख) अंग्रेज़ों ने राजाओं को
(ग) अंग्रेजों ने नवाबों ने
(घ) ‘ख’ और ‘ग’ दोनों
उत्तर:
(घ) ‘ख’ और ‘ग’ दोनों
प्रश्न 5.
अब रानी क्या बन गई?
(क) महारानी
(ख) दासी
(ग) सेविका
(घ) भिखारी
उत्तर:
(ख) दासी
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काव्यांश (8)
छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,
जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,
बंगाले, मद्रास आदि की
भी तो वही कहानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – कैद – बंदी, बिसात – औकात, वज्र-निपात – पत्थर गिरना, भारी अघात।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – झाँसी पर कब्जा जमाने के बाद अंग्रेजों ने राजधानी दिल्ली को भी छीन लिया। बातों ही बातों में लखनऊ पर भी कब्ज़ा जमा लिया। पेशवा को बिठूर में कैद कर लिया गया। नागपुर पर भी हमला किया गया। उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की तब भला क्या औकात थी कि वे स्वतंत्र राज्य बनकर रह सकें। वहाँ भी अंग्रेजों ने अपना कब्जा जमा लिया। इन पर अंग्रेज़ों ने वज्रपात कर दिया था। बंगाल, मद्रास की दशा भी कुछ-कुछ ऐसी ही था, अर्थात् ये सभी राज्य अंग्रेजी शासन के अंतर्गत आ गए थे।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
अंग्रेजों ने हमसे क्या छीन लिया?
(क) राजधानी दिल्ली को
(ख) लखनऊ को
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
(घ) किसी को नहीं
उत्तर:
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
प्रश्न 2.
किसको, कहाँ कैद कर लिया गया?
(क) पेशवा को बिठूर
(ख) रानी को झाँसी में
(ग) राजाओं को उनके राज्य में
(घ) सभी को
उत्तर:
(क) पेशवा को बिठूर
प्रश्न 3.
किन-किन राज्यों पर अंग्रेजों ने वज्र गिराया?
(क) सिंध
(ख) पंजाब
(ग) बर्मा
(घ) इन सभी पर
उत्तर:
(घ) इन सभी पर
प्रश्न 4.
किन अन्य राज्यों की कहानी भी ऐसी ही थी?
(क) बंगाल की
(ख) मद्रास की (अब तमिलनाडु)
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
(घ) कर्नाटक की
उत्तर:
(ग) ‘क’ और ‘ख’ दोनों
प्रश्न 5.
कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी किनसे सुनी थी?
(क) अंग्रेज़ों से
(ख) हरबोलो से
(ग) बुंदेलखंड से
(घ) प्रजा से
उत्तर:
(ख) हरबोलो से
काव्यांश (9)
रानी रोई रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेजार,
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाजार,
सरेआम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपूर के जेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नौलख हार’,
यों परदे की इज्जत पर-
देशी के हाथ बिकानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – रनिवास – रानी के रहने का महल, गुम – दुख, बेजार – विवश, दुखी, सरेआम – खुले रूप में।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – यहाँ भारतीय रानियों और बेगमों की दयनीय स्थिति का वर्णन किया गया है। नौबत यहाँ तक आ पहुँची थी कि अंग्रेजों ने रानियों, बेगमों के कीमती कपड़े और जेवर कलकत्ते के बाजारों में नीलाम कर दिए। अंग्रेज उनके कपड़े जेवरों को नीलाम करने के विज्ञापन अंग्रेजी के अखबारों में छपवा रहे थे ताकि सम्पन्न वर्ग के लोग उन्हें खरीद सकें। उन विज्ञापनों में लिखा जाता था ‘नागपुर के जेवर ले लो’, ‘लखनऊ का नौलख हार’ भी बिकाऊ है। इस प्रकार उन्हें बेइज्जत किया जा रहा था। अब तक जो इज्जत परदे की ओट में छिपी थी, वही इज्जत विदेशी अंग्रेजों हाथों बेची जा रही थी। कवयित्री ने इस प्रकार की कहानी हरबोलो के मुँह से गाए लोकगीतों में सुनी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कौन अपने दुखों से बेजार थीं?
(क) रानी
(ख) बेगमें
(ग) क और ख दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 2.
उनके कपड़े-जेवर कहाँ बिक रहे थे?
(क) दिल्ली के बाजारों मे
(ख) कलकत्ते के बाज़ारों में
(ग) मुंबई के बाजारों में
(घ) मद्रास के बाज़ारों में
उत्तर:
(ख) कलकत्ते के बाज़ारों में
प्रश्न 3.
इन चीजों की नीलामी की खबर कौन छाप रहे थे?
(क) अंग्रेजों के अखबार
(ख) हिंदी के अखबार
(ग) बांग्ला के अखबार
(घ) उर्दू के अखबार
उत्तर:
(क) अंग्रेजों के अखबार
प्रश्न 4.
नौलख हार कहाँ का था?
(क) नागपुर का
(ख) लखनऊ का
(ग) आगरा का
(घ) मुंबई का
उत्तर:
(ख) लखनऊ का
प्रश्न 5.
अब तक परदे के पीछे क्या था?
(क) इज्जत
(ख) आज़ादी
(ग) रुलाई
(घ) जेवरों की चमक
उत्तर:
(क) इज्जत
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काव्यांश (10)
कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आह्वान।
हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो
सोई ज्योति जगानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – विषम – टेढ़ी, वेदना – तकलीफ, आहत – घायल, अपमान – बेइज्जती, रण-चंडी – युद्ध की देवी, आह्वान – बुलावा।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – अंग्रेज़ों के अन्याय और अत्याचार के कारण कुटियों से लेकर महलों तक में अर्थात् सर्वत्र दुखों की छाया व्याप्त थी। यह वेदना बड़ी ही विषम थी इसे सहना कठिन था। सभी लोग इस वेदना से आहत थे तथा वे स्वयं को अपमानित अनुभव कर रहे थे। उन दिनों वीर सैनिकों के मन में अपने पूर्वजों के प्रति गौरव की भावना थी। वे उन पर अभिमान करते थे, उन्हीं दिनों नाना धुंधूपंत, पेशवा मिलकर क्रांति के लिए आवश्यक सामान जुटा रहे थे। नाना की मुँहबोली बहन छबीली (लक्ष्मीबाई) ने भी रणचंडी का रूप धारण करके युद्ध का आह्वान कर दिया था। अब आजादी का यज्ञ शुरू हो चुका था। उन लोगों को तो आलस्य में पड़े लोगों में चेतना भरने का काम करना था ताकि वे सक्रिय हो जाएँ।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
विषम वेदना कहाँ-कहाँ थी?
(क) कुटियों में
(ख) महलों में
(ग) सैनिकों के मन में
(घ) इन सभी में
उत्तर:
(ग) सैनिकों के मन में
प्रश्न 2.
सैनिकों के मन में किनके प्रति अभिमान का भाव था?
(क) अपने पुरखों के प्रति
(ख) देश के प्रति
(ग) सेना के प्रति
(घ) अपने प्रति
उत्तर:
(क) अपने पुरखों के प्रति
प्रश्न 3.
आवश्यक सामान कौन जुटा रहा था?
(क) नाना धुंधूपंत
(ख) पेशवा
(ग) क और ख दोनों
(घ) रानी
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 4.
छबीली अब किस रूप में आ गई थी?
(क) रण-चंडी के रूप में
(ख) योद्धा के रूप में
(ग) सैनिक के रूप में
(घ) लड़ाकू के रूप में
उत्तर:
(क) रण-चंडी के रूप में
प्रश्न 5.
‘ज्योति जगाने’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) यमक
(घ) श्लेष
उत्तर:
(ख) अनुप्रास
काव्यांश (11)
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपूर, कोल्हापूर में भी
कुछ हलचल उकसानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – अंतरतम – हृदय के भीतर से।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – क्रांति की ज्वाला जलाने और सुलगाने में महलों तथा झोंपड़ियों इन दोनों में रहने वाले लोगों की यह महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। अब स्वतंत्रता की यह चिनगारी लोगों के हृदयों के बीच से आई थी, यह कोई बाह्य दबाव नहीं था। अब प्रमुख नगरों को चेतना की बारी की। पहले झाँसी में चेतना आई, फिर दिल्ली में आई फिर लखनऊ में भी क्रांति की लपटें दिखाई देने लगी। इसके बाद तो मेरठ, कानपुर, पटना आदि में भी क्रांति की भारी धूम मच गई। अभी जबलपुर तथा कोल्हापुर में भी इस आग को उकसाना बाकी था। वहाँ भी प्रयास चल रहे थे। कवयित्री ने यह कहानी हरबोलो के मुँह से सुनी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
क्रांति की ज्वाला किसने सुलगाई थी?
(क) महलों ने
(ख) झोंपड़ियों ने
(ग) क और ख दोनों
(घ) जनता ने
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 2.
स्वतंत्रता की चिनगारी कहाँ से आई थी?
(क) ऊपर से
(ख) लोगों के हृदयों के ऊपर से
(ग) अंग्रेज़ों से
(घ) रानी से
उत्तर:
(ख) लोगों के हृदयों के ऊपर से
प्रश्न 3.
किस-किसने धूम मचाई थी?
(क) मेरठ
(ख) कानपुर
(ग) पटना
(घ) इन सभी ने
उत्तर:
(घ) इन सभी ने
प्रश्न 4.
स्वतंत्रता की चिनगारी से क्या आशय है?
(क) स्वतंत्रता पाने का लालच
(ख) आग की चिनगारी
(ग) लोगों की भावना
(घ) स्वतंत्रता की चाह
उत्तर:
(क) स्वतंत्रता पाने का लालच
प्रश्न 5.
अभी कहाँ हलचल उकसाती थी?
(क) जबलपुर
(ख) कोल्हापुर
(ग) क और ख दोनों
(घ) कहीं नहीं
उत्तर:
(ख) कोल्हापुर
प्रश्न 6.
कवयित्री ने क्रांति की इस ज्वाला के बारे में कहाँ से सुना था?
(क) बुंदलेखंड वालों से
(ख) हरबोलों के मुख से
(ग) आम लोगों से
(घ) अन्य गीतों से
उत्तर:
(ख) हरबोलों के मुख से
काव्यांश (12)
इस स्वतंत्रता – महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अजीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम,
लेकिन आज जुर्म कहलाती
उनकी जो कुरबानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – महायज्ञ – बहुत बड़ा आयोजन, काम आना – बलिदान दे देना, कुरबानी – भेंट, गगन – आकाश, वीरवर – बहादुर।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – स्वतंत्रता का यज्ञ महान था। इसमें अनेक वीरों ने अपना बलिदान दिया था। इन बलिदानियों में प्रमुख नाम है- नाना धुंधूपंत ताँतिया टोपे, अजीमुल्ला अहमदशाह मौलवी ठाकुर कुँवरसिंह आदि । इन लोगों ने तब जो कुर्बानी की थी, बाद में अंग्रेजों ने उसे जुर्म करार दे दिया। उनके लिए यही आरोप मनमाफिक था। इन वीरों का नाम भारत के इतिहास रूपी आकाश में सदा अमर रहेगा। कवयित्री को हरबोलो के मुँह से इस वीरतापूर्ण कहानी के बारें में पता चला। झाँसी की रानी बनकर अंग्रेज़ों से बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कई वीरवर कहाँ काम आए?
(क) स्वतंत्रता के महायज्ञ में
(ख) लड़ाई में
(ग) विद्रोह में
(घ) संघर्ष में
उत्तर:
(क) स्वतंत्रता के महायज्ञ में
प्रश्न 2.
अजीमुल्ला खाँ को कैसा बताया गया है?
(क) चतुर
(ख) प्रसिद्ध
(ग) क और ख दोनों
(घ) योद्धा
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 3.
कुरबानी को जुर्म किसने कहा?
(क) अंग्रेज़ों ने
(ख) चापलूसों ने
(ग) जनता ने
(घ) किसी ने नहीं
उत्तर:
(क) अंग्रेज़ों ने
प्रश्न 4.
किनके नाम इतिहास में अमर रहेंगे?
(क) बलिदानियों के
(ख) वीरवरों के
(ग) क और ख दोनों के
(घ) सैनिकों के
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों के
प्रश्न 5.
‘इतिहास-गगन’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) रूपक
(ख) अनुप्रास
(ग) यमक
(घ) श्लेष
उत्तर:
(क) रूपक
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काव्यांश (13)
इनकी गाथा छोड़ चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,
जख़्मी होकर वॉकर भागा,
उसे अजब हैरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – गाथा – कहानी, मर्द – पुरुष, द्वंद्व – युद्ध, जख्मी – घायल, अजब – विचित्र, हैरानी – आश्चर्य।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – कवयित्री बताती है कि हम इन बलिदानी वीरों का कहानियाँ झाँसी के मैदान में छोड़कर अब युद्ध के मैदान की ओर चलते हैं। युद्ध के मैदान में लक्ष्मीबाई मर्द बनकर मदों (पुरुषों) के बीच साहसपूर्वक खड़ी हुई है। वह लड़ाई के लिए पूरी तरह से तत्पर है। तभी अंग्रेज़ी सेना का लेफ्टिनेंट वॉकर वहाँ आ पहुँचता है और वह सैनिकों के मध्य आगे की ओर बढ़ता है। उसे देखकर तभी लक्ष्मीबाई ने अपनी तलवार खींच ली। अब वॉकर और रानी के बीच युद्ध होने लगता है। रानी के वार से वॉकर घायल होकर भाग निकलता है। वॉकर को भी रानी की वीरता को देखकर हैरानी हो रही थी। कवयित्री ने यह वीरता भरी कहानी हरबोलों के मुँह से सुनी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
रानी लक्ष्मीबाई कहाँ खड़ी थी?
(क) मैदान में
(ख) युद्ध भूमि में
(ग) महल में
(घ) महल के आग में
उत्तर:
(ख) युद्ध भूमि में
प्रश्न 2.
रानी ने कौन-सा वेश धारण कर रखा था?
(क) मर्दानी का
(ख) लड़ाकू का
(ग) लक्ष्मी का
(घ) रण-चंडी का
उत्तर:
(क) मर्दानी का
प्रश्न 3.
तभी कौन अंग्रेज़ आया?
(क) डलहौजी
(ख) लेफ्टिनेंट वॉकर
(ग) स्मिथ
(घ) ह्यू रोज
उत्तर:
(ख) लेफ्टिनेंट वॉकर
प्रश्न 4.
वॉकर का क्या हाल हुआ?
(क) जख्मी हो गया
(ख) वह भाग गया
(ग) क और ख दोनों
(घ) लड़ता रहा
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 5.
कहानी को अजब क्यों कहा गया है?
(क) युद्ध में हारने की यह कहानी बड़ी विचित्र थी।
(ख) वॉकर इस घटना पर स्वयं चकित था।
(ग) क और ख दोनों
(घ) टेढ़ी थी।
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
काव्यांश (14)
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार,
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया
ने छोड़ी राजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – निरंतर – लगातार, भूमि – धरती, तत्काल – तुरंत, स्वर्ग सिधारना – मर जाना, विजयी – जीती हुई।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – लेफ्टिनेंट वॉकर को हराकर रानी आगे की दिशा में बढ़ी। वह सौ मील का सफर तय करके कालपी जा पहुँची। इस लंबी यात्रा में रानी का घोड़ा बुरी तरह थक गया था। अतः वह धरती पर गिर पड़ा और मर गया।
इसके बावजूद यमुना नदी के तट पर अंग्रेजों ने रानी से फिर से हार खाई थी। अब रानी विजयी बनकर आगे की ओर चल दी और उसने ग्वालियर पहुँचकर उस पर अपना अधिकार जमा लिया। ग्वालियर में अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया का शासन था। रानी की जीत के उपरांत वह राजधानी छोड़कर भाग गया। कवयित्री ने हरबोलों के मुँह से यह कहानी गीतों में सुनी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
रानी सौ मील की यात्रा करके कहाँ जा पहुँची?
(क) कालपी
(ख) ग्वालियर
(ग) मेरा
(घ) सिंधिया
उत्तर:
(क) कालपी
प्रश्न 2.
वहाँ क्या दुर्घटना घटी?
(क) रानी का घोड़ा थककर भूमि पर गिर पड़ा।
(ख) घोड़ा तत्काल मर गया।
(ग) क और ख दोनों
(घ) कुछ विशेष नहीं
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 3.
रानी से अंग्रेजों ने कहाँ हार खाई थी?
(क) यमुना तट पर
(ख) ग्वालियर में
(ग) मेरठ में
(घ) झाँसी में
उत्तर:
(क) यमुना तट पर
प्रश्न 4.
रानी ने किस पर अपना अधिकार जमा लिया?
(क) ग्वालियर पर
(ख) झाँसी पर
(ग) कालपी पर
(घ) सिंधिया पर
उत्तर:
(क) ग्वालियर पर
प्रश्न 5.
कौन, कहाँ से भाग गया?
(क) सिंधिया अपनी राजधानी से
(ख) सिंधिया युद्ध भूमि से
(ग) अंग्रेज़ ग्वालियर से
(घ) कोई कहीं से नहीं
उत्तर:
(क) सिंधिया अपनी राजधानी से
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काव्यांश (15)
विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के सँग आई थीं,
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,
पर पीछे ह्यू रोज आ गया,
हाय! घिरी अब रानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – विजय = जीत, सन्मुख = सामने, मुँह की खाना = हार जाना, सँग = साथ।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – रानी को युद्ध में निरंतर जीत मिलती जा रही थी। पर अंग्रेजों की सेना एक बार फिर से घिर आई थी। अबकी बार रानी के सामने जनरल स्मिथ था। उसने भी रानी से युद्ध में हार का मजा चखा था। उस समय रानी के साथ उसकी दो सखियाँ काना और मंदरा भी थी। वे रानी के साथ-साथ आई थी। वे दोनों भी वीरांगना थी। अंत उन दोनों ने युद्ध में काफी मार-काट की थी। तभी पीछे से ह्यू रोज आ गया। हाय! तब रानी बुरी तरह घिर चुकी थी। ह्यू रोज ने रानी को घेर लिया था। कवयित्री ने हरबोलो के मुँह से रानी की वीरता की कहानी सुनी थी। रानी मर्द बनकर बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
विजयी किसको मिली?
(क) रानी को
(ख) अंग्रेज़ों को
(ग) सेना को
(घ) लोगों को
उत्तर:
(क) रानी को
प्रश्न 2.
अबकी बार रानी का सामना किससे था?
(क) जनरल स्मिथ से
(ख) डलहौजी से
(ग) वॉकर से
(घ) किसी से नहीं
उत्तर:
(क) जनरल स्मिथ से
प्रश्न 3.
युद्ध क्षेत्र में किसने भारी मार मचाई थी?
(क) काना ने
(ख) मंदरा ने
(ग) काना-मंदरा दोनों ने
(घ) अंग्रेजों ने
उत्तर:
(ग) काना-मंदरा दोनों ने
प्रश्न 4.
‘मार मचाई थी’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) यमक
(घ) श्लेष
उत्तर:
(ख) अनुप्रास
प्रश्न 5.
ह्यू रोज कहाँ से आ गया?
(क) पीछे से
(ख) आगे से
(ग) साइड से
(घ) बीच से
उत्तर:
(क) पीछे से
काव्यांश (16)
तो भी रानी मार-काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे होने लगे वार-पर-वार,
घायल होकर गिरी सिंहनी
उसे वीर गति पानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – सैन्य = सेना, विषम = टेढ़ा, अपार = जिसका पार न पाया जा सके, सिंहनी = शेरनी, वीरगति = बलिदान।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या- युद्ध भूमि में ह्यू रोज के आ जाने के उपरांत भी रानी काफी मार-काट मचाती हुई सेना के पार तक चली गई। वह घोड़े पर सवार थी। घोड़ा नया था। सामने एक नाला आ गया तो एक विकट संकट उपस्थित हो गया। नया घोड़ा अनजाना था। अतः वह नाले पर अड़ गया और पार नहीं जा पाया। इतने में अंग्रेज सैनिक आ
गए। उन्होंने रानी को बुरी तरह घेर लिया। रानी अकेली थी और उसके शत्रु बहुत अधिक मात्रा में थे। रानी पर अनेक वार होने लगे। रानी उन वारों से घायल हो गई। वह तो शेरनी थी पर वह घायल होकर नीचे गिर पड़ी। उसे तो देश के लिए बलिदान जो होना था और वह वीरगति पा गई। हरबोलो के मुँह से कवयित्री ने रानी की वीरता की कहानी सुनी थी।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
समाने क्या संकट आ गया?
(क) सामने एक विषम नाला आ गया।
(ख) उसे पार करना कठिन था।
(ग) घोड़ा अड़ गया।
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 2.
घोड़ा क्यों अड़ गया?
(क) घोड़ा नया अनजाना था।
(ख) उसे नाला पार करना नहीं आता था।
(ग) नाला गहरा था।
(घ) घोड़ा कमजोर था।
उत्तर:
(क) घोड़ा नया अनजाना था।
प्रश्न 3.
इतने में कौन आ गए?
(क) ढेर सारे सवार
(ख) सैनिक
(ग) घोड़े
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(क) ढेर सारे सवार
प्रश्न 4.
रानी को क्या बताया गया है?
(क) सिंहनी
(ख) घायल
(ग) घुड़सवार
(घ) सम्मान
उत्तर:
(क) सिंहनी
प्रश्न 5.
रानी को क्या प्राप्त हुआ?
(क) वीरगति
(ख) जीत
(ग) हार
(घ) मृत्यु
उत्तर:
(क) वीरगति
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काव्यांश (17)
रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता- नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई
हमको जो सीख सिखानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – सिधारना = चले जाना, दिव्य = महान, उम्र = आयु, मनुज = मनुष्य, अवतारी = महान आत्मा जीवित = जिंदा, पथ = रास्ता, सीख = शिक्षा।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – यहाँ रानी के बलिदान और महानता का वर्णन है। वे केवल 23 वर्ष की थीं, लेकिन उन्होंने जो कार्य किया, वह असाधारण था। उनका जीवन और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता है। वे स्वतंत्रता की प्रतीक बन गई। वह अपना बलिदान देकर हमें देशभक्ति का रास्ता दिखा गई और हमें जो भी शिक्षा देनी थी, उसे वह अपने वीरतापूर्ण कार्यों से दे गई।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
रानी का क्या हुआ?
(क) वह स्वर्ग सिधार गई।
(ख) वह घायल हो गई।
(ग) वह अमर हो गई।
(घ) क और ग दोनों
उत्तर:
(घ) क और ग दोनों
प्रश्न 2.
रानी किसकी अधिकारी थी?
(क) तेज की
(ख) तेज में मिलने की
(ग) क और ख दोनों
(घ) बलिदान का
उत्तर:
(क) तेज की
प्रश्न 3.
बलिदान देते समय रानी की उम्र कितनी थी?
(क) 22 वर्ष
(ख) 23 वर्ष
(ग) 24 वर्ष
(घ) 25 वर्ष
उत्तर:
(ख) 23 वर्ष
प्रश्न 4.
रानी वास्तव में क्या थीं?
(क) स्वतंत्रता की नारी
(ख) अवतारी
(ग) क और ख दोनों
(घ) योद्धा
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
प्रश्न 5.
रानी हमारे लिए क्या कार्य कर गई?
(क) हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ा गई।
(ख) उन्हें जो शिक्षा हमें देनी थी, वह दे गई।
(ग) क और ख दोनों
(घ) कुछ विशेष नहीं
उत्तर:
(ग) क और ख दोनों
काव्यांश (18)
जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारत वासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,
तेरा स्मारक तू ही होगी,
तू खुद अमिट निशानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥
शब्दार्थ – कृतज्ञ = अहसान मानने वाले, अविनाशी = जो नष्ट न हो, मदमाती = मस्ती भरी, विजय = जीत, अमिट = जो न मिटे, खुद = स्वयं।
प्रसंग – पूर्ववत्।
व्याख्या – अंतिम पद्यांश में कवयित्री रानी को श्रद्धांजलि देती हैं। वे कहती हैं कि रानी का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा और भारतवासी उन्हें हमेशा याद रखेंगे। उनकी वीरता ही उनका सच्चा स्मारक है, जो हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि देश की रक्षा के लिए हर बाधा को पार करना चाहिए चाहे हम स्त्री हों या पुरुष, युवा हों या वृद्ध । रानी लक्ष्मीबाई का जीवन हमें सिखाता है कि साहस, दृढ़ निश्चय और देशप्रेम से हम बड़ी से बड़ी शक्ति को भी चुनौती दे सकते हैं। हमें अपने देश की स्वतंत्रता का मूल्य समझना चाहिए और उन वीरों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने अपना जीवन बलिदान किया। एकता, वीरता और बलिदान ही किसी राष्ट्र को महान बनाते हैं। हमें यह भी सीखना चाहिए कि परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों, हमें हार नहीं माननी चाहिए। रानी की वीरता अमिट है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
भारतवासी कैसे हैं?
(क) कृतज्ञ
(ख) कृतघ्न
(ग) सामान्य
(घ) स्वार्थी
उत्तर:
(क) कृतज्ञ
प्रश्न 2.
रानी का बलिदान का क्या होगा?
(क) व्यर्थ जाएगा
(ख) व्यर्थ नहीं जाएगा
(ग) याद रखा जाएगा
(घ) ख और ग दोनों
उत्तर:
(घ) ख और ग दोनों
प्रश्न 3.
रानी का स्मारक क्या है?
(क) रानी स्वयं
(ख) रानी की शिक्षाएँ
(ग) रानी का बलिदान
(घ) रानी का त्याग
उत्तर:
(क) रानी स्वयं
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प्रश्न 4.
रानी कैसी निशानी है?
(क) अमिट
(ख) मिटने वाली
(ग) पक्की
(घ) कच्ची
उत्तर:
(क) अमिट
प्रश्न 5.
कवयित्री ने रानी की गाथा किनसे सुनी?
(क) बुदेलों से
(ख) हरबोलो से
(ग) जनता से
(घ) स्वयं
उत्तर:
(ख) हरबोलो से