Reviewing the Class 9 Hindi MCQ and Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे MCQ Online Test with Answers before exams can boost your confidence.
Class 9 Hindi Chapter 10 MCQ भारति, जय, विजयकरे
Class 9 Hindi भारति, जय, विजयकरे MCQ
भारति, जय, विजयकरे MCQ Questions – Class 9 Hindi Chapter 10 MCQ Online Test
दिए गए गद्यांशों और उन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरों को पढ़िए।
कविता-भारति, जय विजय करे!
भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलंधरे!
लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!
तरु-तृण-वन-लता वसन,
अंचल में खचित सुमन;
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल धार हार गले।
मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!’
प्रसंग – प्रस्तुत कविता ‘भारति, जय, विजय करे’ कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित है। इस कविता में कवि भारत को विजय श्री प्राप्त करने की कामना करता है, क्योंकि उन दिनों भारत परतंत्र था।
व्याख्या – कवि भारतमाता को संबोधित करते हुए कहता है कि आपकी जय हो। आप सदा विजयी रहें। कवि भारत भूमि को भारतमाता के रूप में चित्रित करते हुए कहता है कि भारत की धरती कनक (सोने) के समान सुंदर है। यह अत्यंत उपजाऊ है। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतमाता कमल के सिंहासन पर विराजमान है, इसके पैरों तले लंका है। चरणों के नीचे शतदल कमल है। इसके चारों ओर गर्जना करता हुआ समुद्र का जल है। यही जल भारतमाता के चरणों को धोता रहता है और उनकी महिमा का गुणगान करता जान पड़ता है।
कवि भारत भूमि की सुंदरता की प्रशंसा करते हुए कहता है कि पेड़, घास के तिनके, वन, लताएँ आदि इस भारतमाता के वस्त्र है अर्थात् प्राकृतिक हरियाली भारतमाता के वस्त्रों को रेखांकित करती जान पड़ती है। इसी भारतमाता के आँचल फूलों से सज्जित है। गंगा नदी जिसके प्रकाशवान जल के कण मोती बनकर भारतमाता के गले का सफेद हार का रूप ले लेते हैं। इनसे निर्मित हार भारतमाता को गले में शोभायमान है।
कवि हिमालय को भारतमाता का मुकुट बताता है। इसकी सफेद बर्फ से ढकी चोटियाँ मुकुट के समान चमकती हैं। भारतमाता को जीवन देने वाली शक्ति है।
ओंकार ध्वनि! इसकी पहचान बनकर ब्राह्मांडीय ध्वनि से जुड़ी हुई है। यह ध्वनि चारों दिशाओं में व्याप्त है। इस ध्वनि को सुनकर ऐसा प्रतीत होता है कि चारों दिशाऐं सौ-सौ मुख बनकर भारतामाता की जय-जयकार कर रहे हैं। यहीं शब्द सभी दिशाओं में गुजायमान हो रहा है।
विशेष-
1. कवि ने भारतभूमि को भारतमाता के रूप में चित्रण करने में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया है।
2. पूरी कविता में तत्सम शब्दों की बहुलता है।
3. भारत के सौंदर्य का मनोहारी चित्रण किया गया है।
4. प्राण-प्रणव में अनुप्रास अलंकार की छटा है।
बहुविकल्पी प्रश्न
प्रश्न 1.
कवि ने भारत-भूमि को कैसा बताया?
(क) स्वर्णिम
(ख) उपजाऊ
(ग) (क) और (ख) दानों
(घ) नवीन
उत्तर:
(ग) (क) और (ख) दानों
प्रश्न 2.
भारत के पदतल में क्या है?
(क) लंका
(ख) समुद्र की गुजरती लहरें (तरंगे)
(ग) शतदल कमल
(घ) उपयुक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपयुक्त सभी
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प्रश्न 3.
भारतमाता के वस्त्र क्या है?
(क) वृक्ष
(ख) लताएँ
(ग) वन
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी
प्रश्न 4.
गंगा नदी भारत को क्या देती है?
(क) प्रकाश
(ख) जल-कण रूपी मोती
(ग) जल
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी
प्रश्न 5.
कौन-सी ध्वनि भारत की जय-जयकार करती जान पड़ती है?
(क) ओंकार ध्वनि
(ख) प्रणव ध्वनि
(ग) (क) (ख) दानों
(घ) शतरव ध्वनि
उत्तर:
(ग) (क) (ख) दानों