भारति, जय, विजयकरे Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 10

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Class 9 Hindi भारति, जय, विजयकरे Extra Question Answer

Class 9 Hindi Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे Extra Question Answer

भारति, जय, विजयकरे Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
‘भारति, जय, विजयकरें’ कविता के रचयिता कौन है। इस कविता की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तरः
‘भारति, जय, विजयकरें’ कविता के रचयिता प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला है।
यह कविता देश-प्रेम की भावना से ओत-प्रोत है। इस कविता में भारत के भूमि को भारतमाता के रूप में चित्रित किया गया है। इस कविता में कवि न भारत की विजय की कामना की है, क्योंकि उन दिनों भारत गुलामी की अवस्था में था।

प्रश्न 2.
इस कविता में भारत माता के सौंदर्य का गुणगान किन-किन माध्यमों से किया गया है?
उत्तर:
इस कविता में भारतमाता के सौंदर्य का बखान अनेक माध्यमों से किया गया है-

  1. भारतमाता को शतदल सिंहासन पर विराजमान बताया गया है। वह सरस्वती के रूप में है।
  2. भारतमाता के चरणों को विशालसागर का जल निरंतर धोता रहता है।
  3. भारतमाता के वस्त्र हरियाली से परिपूर्ण हैं। वन, लता, वृक्ष, तृण आदि उसी भारतमाता के वस्त्र है।
  4. हिमालय ककी बर्फीली चोटियाँ भारतमाता का मुकुट है।

प्रश्न 3.
गंगा नदी भारतमाता के लिए क्या करती है?
उत्तर:
गंगा नदी भारतमाता के गले में सफेद हार पहनाती है। गंगा नदी का प्रकाशवान जल की बूँदे मोती का काम करती है। इन्हीं सफेद मोतियों से भारतमाता के गले का हार बनता है।

भारति, जय, विजयकरे Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 10

Class 9 Hindi Chapter 10 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता ‘भारति, जय, विजयकरे!’ का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कविता भारत माता की महानता, सुंदरता और गौरव का वर्णन करती है। कवि भारत को एक देवी के रूप में प्रस्तुत करता है, जो प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है। समुद्र उसके चरणों को धोता है, हिमालय उसका मुकुट है और गंगा उसके गले का हार है। पूरे वातावरण में श्ओंकार‍ की ध्वनि गूंजती है, जो उसकी आध्यात्मिकता को दर्शाती है। कवि भारत की विजय और समृद्धि की कामना करता है।

प्रश्न 2.
इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस कविता से हमें अपने देश के प्रति प्रेम, सम्मान और गर्व की भावना रखने की शिक्षा मिलती है। हमें भारत की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना चाहिए। साथ ही, यह कविता हमें एकता, देशभक्ति और राष्ट्र के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
नीचे लिखे संस्कृत के तत्सम शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए। शुभु, तुषार, प्रणव, ज्योतिर्जल, स्तव शतदल।
उत्तर:
शुभु – सफेद
तुषार – बर्फ
प्रणव – ओंकार
ज्योतिर्जल – प्राकश युक्त जल
स्तव – स्तुति प्रशंसा
शतदल – कमल

प्रश्न 2.
नीचे लिखे शब्दों से प्रत्यय अलग करो।
खचित, ध्वनि, मुखरे
उत्तर:
खचित – इत (प्रत्यय)
ध्वनित – इत (प्रत्यय)
मुखरे – ए (प्रत्यय)

प्रश्न 3.
कविता में कई स्थलों पर अलंकारों का प्रयोग किया गया है। आप भी उन अलंकारों का एक-एक उदाहरण अपनी ओर से लिखिए।
उत्तरः

  • अनुप्रास अलंकार – तट, कमल, तरुवर, बहुछाए (‘त’ वर्ण की आवृत्ति)
  • रूपक अलंकार – चरण कमल बंदौ हरिराई दोनों में अभेद आरोप
  • उपमा अलंकार – पीपरपात सरिस मन डोला (मन पीपल के पत्ते समान डोल गया)

प्रश्न 4.
दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
गंगा, सुमन, जल
उत्तर:
गंगा – भागीरथी, सुरसरि
सुमन – पुष्प, कुसुम
जल – नीर, पानी

अनुच्छेद-लेखन

प्रश्न 1.
स्वयं को हिमालय पर्वत मानकर एक अनुच्छेद लिखिए-
भारत की शान : हिमालय
भारति, जय, विजयकरे Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 10 1
उत्तर:
ऐसे शुरु करें

  • मैं हिमालय हूँ।
  • मैं भारत के उत्तर में अवस्थित हूँ।
  • मैं भारत का रक्षक, प्रहरी हूँ।
  • मुझे भारत माता का मुकुट कहा जाता हैं।
  • मेरी चोटियाँ सदैव बर्फ से ढंकी रहती है।
  • मेरी बर्फ पिघलकर नदियों को जान प्रदान करती है।
  • मेरी सबसे ऊँची चोटी ऐवरेस्ट के नाम से जानी जाती है।
  • मैं भारत का गौरव हूँ।

भारति, जय, विजयकरे Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 10

Class 9 Ganga Chapter 1 Extra Question Answer अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

कविता-भारति, जय विजय करे!

भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलंधरे!

लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!

तरु-तृण-वन-लता वसन,
अंचल में खचित सुमन;
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल धार हार गले।

मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!’

प्रसंग – प्रस्तुत कविता ‘भारति, जय, विजय करे’ कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित है। इस कविता में कवि भारत को विजय श्री प्राप्त करने की कामना करता है, क्योंकि उन दिनों भारत परतंत्र था।

व्याख्या – कवि भारतमाता को संबोधित करते हुए कहता है कि आपकी जय हो। आप सदा विजयी रहें। कवि भारत भूमि को भारतमाता के रूप में चित्रित करते हुए कहता है कि भारत की धरती कनक (सोने) के समान सुंदर है। यह अत्यंत उपजाऊ है। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतमाता कमल के सिंहासन पर विराजमान है, इसके पैरों तले लंका है। चरणों के नीचे शतदल कमल है। इसके चारों ओर गर्जना करता हुआ समुद्र का जल है। यही जल भारतमाता के चरणों को धोता रहता है और उनकी महिमा का गुणगान करता जान पड़ता है।

कवि भारत भूमि की सुंदरता की प्रशंसा करते हुए कहता है कि पेड़, घास के तिनके, वन, लताएँ आदि इस भारतमाता के वस्त्र है अर्थात् प्राकृतिक हरियाली भारतमाता के वस्त्रों को रेखांकित करती जान पड़ती है। इसी भारतमाता के आँचल फूलों से सज्जित है। गंगा नदी जिसके प्रकाशवान जल के कण मोती बनकर भारतमाता के गले का सफेद हार का रूप ले लेते हैं। इनसे निर्मित हार भारतमाता को गले में शोभायमान है।

कवि हिमालय को भारतमाता का मुकुट बताता है। इसकी सफेद बर्फ से ढकी चोटियाँ मुकुट के समान चमकती हैं। भारतमाता को जीवन देने वाली शक्ति है।

– ओंकार ध्वनि! इसकी पहचान बनकर ब्राह्मांडीय ध्वनि से जुड़ी हुई है। यह ध्वनि चारों दिशाओं में व्याप्त है। इस ध्वनि को सुनकर ऐसा प्रतीत होता है कि चारों दिशाऐं सौ-सौ मुख बनकर भारतामाता की जय-जयकार कर रहे हैं। यहीं शब्द सभी दिशाओं में गुजायमान हो रहा है।

विशेष-
1. कवि ने भारतभूमि को भारतमाता के रूप में चित्रण करने में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया है।
2. पूरी कविता में तत्सम शब्दों की बहुलता है।
3. भारत के सौंदर्य का मनोहारी चित्रण किया गया है।
4. प्राण-प्रणव में अनुप्रास अलंकार की छटा है।

भारति, जय, विजयकरे!
लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
इस कविता में किसका गुणगान किया गया है?
उत्तर:
इस कविता में भारत और भारत माता का गुणगान किया गया है।

प्रश्न 2.
इस कविता में कवि क्या कामना करता है?
उत्तर:
इस कविता में कवि यह कामना करता है कि भारत को विजयश्री मिले। स्मरण रहे उन दिनों भारत परतंत्र था। अतः कवि की यह इच्छा है कि भारतामाता को शीघ्र ही स्वतंत्रता मिल जाए।

प्रश्न 3.
कवि भारतभूमि को क्या कहकर संबोधित करता है?
उत्तर:
कवि भारतभूमि को “कनक शस्य कमल घरे” कहकर संबोधित करता है। इस कथन का तात्पर्य है। सोना उगलने वाली धरती धन-धान्य से सम्पन्न होकर सर्वत्र हरियाली का वातावरण उपस्थिति करे।

प्रश्न 4.
कवि भारतभूमि का मानवीकरण किस प्रकार करता है?
उत्तर:
कवि भारतभूमि को भारतमाता के रूप में मानवीकरण करता है। यह भारतमाता कमल के फूल की पंखुडियों के सिहांसन पर विराजमान है, चरणों में लंका है। नीचे सागर के जल की उत्तम लहरें इनके चरण धोती हैं। ये लहरें आवाज करके भारतामाता का स्तुतिगान करती हैं।”

भारति, जय, विजयकरे Class 9 Extra Question Answer Hindi Chapter 10

Class 9 Hindi Chapter 10 Extra Question Answer for Practice

प्रश्न 1.
कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता को कैसे प्रस्तुत किया गया है?

प्रश्न 2.
‘ओंकार’ की ध्वनि से क्या अभिप्राय है?

प्रश्न 3.
कवि ने गंगा को किस रूप में चित्रित किया है?

प्रश्न 4.
कविता में निहित देशभक्ति की भावना को स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 5.
कविता में भारत की भौगोलिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 6.
कवि ने भारत को ‘चेतन सत्ता’ क्यों कहा है?