Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 9 आदमी का अनुपात कविता Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 9 आदमी का अनुपात Question Answer
आदमी का अनुपात Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 9 Question Answer – Class 8 Hindi आदमी का अनुपात Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) अग्रलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है ?
• पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण
• ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
• सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा
• समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
उत्तर:
• ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
प्रश्न 2.
कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
• पृथ्वी और सूर्य
• देश और नगर
• घर और कमरा
• मानव और ब्रह्मांड
उत्तर:
• मानव और ब्रह्मांड
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प्रश्न 3.
कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
• त्याग, ज्ञान और प्रेम में
• सेवा और परोपकार में
• ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
• उदारता, धर्म और न्याय में
उत्तर:
• ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
प्रश्न 4.
कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है ?
• वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता ।
• वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
• वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।
• वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
उत्तर:
• वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।
• वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
• वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
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(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
मैंने ये उत्तर इसलिए चुनें क्योंकि-
- कविता के अनुसार मानव का स्थान ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म है, क्योंकि ब्रह्मांड कितना विराट है इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है, जबकि मानव अपने कर्मों से अपनी लघुता और अधिक बढ़ा लेता है। वास्तव में मानव अत्यंत सूक्ष्म है।
- कविता में मानव और ब्रह्मांड का अनुपात दर्शाया गया है। इसमें मानव की लघुता और ब्रह्मांड की विराटता की तुलना की गई है।
- कविता के अनुसार मानव घमंड में डूबकर ईर्ष्या, स्वार्थ, घृणा जैसे अवगुणों में लिप्त रहता है। वह सद्गुणों को नहीं अपनाता है।
- कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष यह है कि वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता है। वह अहंकारी होकर दूसरों पर शासन करना चाहता है और अपने छोटेपन को भूलकर अहंकारी हो जाता है। नोट – छात्र स्वयं चर्चा करें कि उन्होंने ये उत्तर क्यों चुने ।
पंक्तियों पर चर्चा
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। अपने समूह में इनके अर्थ पर चर्चा कीजिए और लिखिए-
(क) “ अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही । ”
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में दो दुनिया रचाता है।”

(क) “ अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही । ”
उत्तर:
इस ब्रह्मांड में सूर्य, चंद्रमा जैसे अनगिनत नक्षत्र हैं। इन करोड़ों आकाशीय पिंडों के बीच हमारी पृथ्वी बहुत ही छोटी है।
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
उत्तर:
मनुष्य अहंकार, द्वेष, ईर्ष्या के कारण आपसी भाईचारा भूलकर जाति, धर्म, भाषा, ऊँच-नीच आदि की अनेकानेक दीवारें खड़ी करता है। वह दूसरों को छोटा समझता है और खुद को दूसरों का मालिक समझने लगता है।
(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में दो दुनिया रचाता है।”
उत्तर:
आदमी अपनापन भूलकर धरती का बँटवारा देशों में ही नहीं करता, वरन एक ही कमरे में दीवार खड़ी करके अलग दुनिया बना लेता है।
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मिलकर करें मिलान
नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए ।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1.संख्यातीत शंख सी दीवारें | 1. बह्मांड की विशालता का प्रतीक |
| 2.पृथ्वी एक छोटी करोड़ों में एक | 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक |
| 3.ईर्ष्या, अहं स्वार्थ, घृणा | 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ |
| 4.दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे | 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति |
| 5.परिंधि नभ गंगा की | 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत |
| 6.एक कमरे में दो दुनिया रचाता | 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ |
उत्तर:
1. – 3, 2. – 5, 3. – 6 4. – 2. 5. – 1. 6. – 4
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1.संख्यातीत शंख सी दीवारें | 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ |
| 2.पृथ्वी एक छोटी करोड़ों में एक | 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत |
| 3.ईर्ष्या, अहं स्वार्थ, घृणा | 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ |
| 4.दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे | 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक |
| 5.परिंधि नभ गंगा की | 1. बह्मांड की विशालता का प्रतीक |
| 6.एक कमरे में दो दुनिया रचाता | 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति |
अनुपात
इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। अपने साथियों के साथ मिलकर विचार कीजिए कि मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी ? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए ।

उत्तर:
मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए सौहार्द, संतुलन, सहअस्तित्व, समावेशिता, शांति, स्वतंत्रता, सहनशीलता जैसे गुणों को अपनाने की आवश्यकता होगी। ये गुण हमने इसलिए चुनें, क्योंकि इनसे मेलजोल, भाईचारा, अपनापन आदि की भावना जगती है, जिससे मानवता का विस्तार होता है। नोट – छात्र इन्हें स्वयं साझा करें।
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सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
उत्तर:
कविता के अनुसार मानव स्वार्थ, अहंकार, ईर्ष्या, लोभ, अविश्वास के कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है।
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे, तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों ?
उत्तर:
- मुझे प्रेरित करने वाली पंक्ति जिसे मैं दीवार पर लिखना चाहूँगा-
- यह है अनुपात
- आदमी का विराट से
- इसे मुझे हमेशा छोटेपन का एहसास होता रहेगा और मैं मानवीय कमियों से दूर रहने का प्रयास करूँगा।
(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा-व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
उत्तर:
मुझे इस कविता का भाव चिंता भरा लगा, क्योंकि कवि ने मनुष्य की लघुता और अहंकार, ईर्ष्या, विरोध आदि करते देखकर चिंता प्रकट की है।
(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए ।
उत्तर:
मेरे विचार से ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम नहीं, बल्कि लोगों के बीच जाति-धर्म, ऊँच-नीच, भाषा आदि के आधार पर अलगाव करना दीवारें उठाना है।
(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
उत्तर:
मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं परंतु गौतम बुद्ध गुरु नानक, ईसा मसीह, गांधी जी आदि की सहिष्णुता ने समाज को ही बदलकर रख दिया।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?
उत्तर:
यदि मुझे एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को बदलने की शक्ति मिल जाए, तो मैं मानव का झूठ बोलना, हिंसा करना, घमंड करना, फूट डालना, ईर्ष्या करना, दूसरों की बातों का विरोध करना आदि आदतें बदलना चाहूँगा, क्योंकि इनके कारण मनुष्य अपनी मनुष्यता खो बैठता है।
(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ, तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि ) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों ?
उत्तर:
यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाऊँ, तो अपने गाँव शहर देश को सबसे अधिक याद करूँगा, क्योंकि इनसे मेरा गहरा जुड़ाव और लगाव है।
(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है – वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
उत्तर:
नोट – छात्र अपनी कल्पना से यात्रा-वृत्तांत स्वयं लिखें।
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(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए- “ मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
उत्तर:
मैं ब्रह्मांड में एक साधारण सा आदमी हूँ। यह ब्रह्मांड अत्यंत विराट है, जबकि मैं अत्यंत लघु । ब्रह्मांड इतना विशाल है। कि इसमें अनेक पृथ्वियाँ हैं। इन्हीं में एक पृथ्वी हमारी भी है, जो अपने आप में अद्वितीय है। इस पृथ्वी पर अनेक देश, एक देश में अनेक नगर, एक नगर में अनेक मुहल्ले, इन मुहल्लों में अनेक घर तथा घर में कमरे और कमरे में मनुष्य हैं। इस तरह मनुष्य को अपनी लघुता का ज्ञान हो जाता है। अतः मनुष्य को अवगुण त्यागकर सद्गुण अपनाने चाहिए।
(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों ?
उत्तर:
यदि किसी दूसरे संसार से मेरे पास संदेश आए कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है, तो मैं वहाँ अच्छे गुण वाले व्यक्ति को भेजना चाहूँगा, ताकि वहाँ भी सद्गुणों का प्रसार हो जाए।
(च) कविता में “ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ, तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
यदि एक दिन के लिए ईर्ष्या, अहं स्वार्थ जैसी प्रवृत्तियाँ समाप्त हो जाएँ, तो समाज में अनेक बदलाव आएँगे;
जैसे-
- लोग सबको समान समझेंगे।
- लड़ाई-झगड़े नहीं करेंगे।
- लोगों में समरसता बढ़ जाएगी।
- समाज बदला-बदला सा नजर आएगा।
(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव – ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम ‘ – दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए ।
उत्तर:
इस तरह का पोस्टर बनाने के लिए मैं सागर का चित्र बनाऊँगा । उसमें गिरती हुई एक बूँद दिखाऊँगा। यह मानव का तथा सागर ब्रह्मांड का प्रतीक होगा। इससे मनुष्य की लघुता स्पष्ट हो जाएगी।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-

उत्तर:

सृजन
(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक चित्रण’
(माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए । प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ, लिखिए, जैसे- पास-पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए- “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों ?”
उत्तर:
माइंड – मैप की विशेषताएँ-

(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
उत्तर:
ब्रह्मांड में मानव
उधर धरती पर आप ये जो चलता-फिरता मनुष्य देख रहे हैं, वह अपने सद्गुण भूल गया है। उसे स्वार्थ, मोह, अहंकार, लोभ, ईर्ष्या ने घेर रखा है। वह बाहुबल, धन-दौलत आदि के कारण घमंड में डूब गया है। वह ब्रह्मांड की विराटता भूल चुका है जिसके सामने वह अणु के बराबर भी नहीं है।
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(ग) एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए | अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए, जिसमें कोई दीवार न हो, तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वह दुनिया जिसमें कोई दीवार न हो, तो वह रामराज की कल्पना साकार करने वाली होगी। उस दुनिया में सब सुखी होंगे। वहाँ वैमनस्य, लड़ाई-झगड़ा आदि का नामोनिशान नहीं होगा।
(घ) एक चित्र श्रृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे- आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
उत्तर:

कविता की रचना
‘दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे-
इन पंक्तियों में ‘-’ चिह्न पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस चिह्न को पहले कहीं देखा है? इस चिह्न को ‘निदेशक चिह्न” कहते हैं। यह एक प्रकार का विराम चिह्न है जो किसी बात को आगे बढ़ाने या स्पष्ट करने के लिए उपयोग होता है। यह किसी विषय की अतिरिक्त जानकारी, जैसे- व्याख्या, उदाहरण या उद्धरण देने के लिए उपयोग होता है। इस कविता में इस चिह्न का प्रयोग एक ठहराव, सोच का संकेत और आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है। यह संकेत देता है कि अब कुछ ऐसा कहा जाने वाला है जो पाठक को सोचने पर विवश करेगा। इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे- अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है, बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं आदि।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए-
उत्तर:
कविता की विशेषताएँ-
- छंदमुक्त
- तुकांतहीन
- वर्तमान काल की बोधक
- तत्सम शब्दों का प्रयोग
- मानव जीवन की सच्चाई का भाव
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए-
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
| 1.सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। | 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है। |
| 2.मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | 2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… |
| 3.छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। | 3. देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है` |
| 4.प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। | 4. कमरा है घर में |
| 5.अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। | 5. यह है अनुपात आदमी का विराट से |
| 6.मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। | 6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है |
उत्तर:
1. – 4, 2. – 6, 3. – 2, 4. – 3, 5. – 1, 6. – 5.
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
| 1.सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। | 4. कमरा है घर में |
| 2.मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | 6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है |
| 3.छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। | 2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… |
| 4.प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। | 3. देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है` |
| 5.अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। | 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है। |
| 6.मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। | 5. यह है अनुपात आदमी का विराट से |
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कविता का सौंदर्य
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिलकर खोजिए। इन प्रश्नों से आप कविता का आनंद और अच्छी तरह से ले सकेंगे।
(क) कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है’
“ अपने को दूजे का स्वामी बताता है’
” एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है ”
कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए ।

उत्तर:
• हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
• यह है अनुपात
आदमी का विराट से
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है’
“ अपने को दूजे का स्वामी बताता है’
” एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है ”
कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए ।
उत्तर:
- संख्यातीत शंख सी बातें बनाता है
- अपने को सर्वोपरि कहलाता है।
- एक कमरे में
- दो दुनिया करके इतराता है।
आपके शब्द
“सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की ”
आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा। लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है।
आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए ।
उत्तर:
- जल + यान = जलयान
- पौधा + शाला = पौधशाला
- विश्राम + गृह = विश्रामगृह
- दवा + खाना = दवाखाना
- बस + अड्डा = बसअड्डा
- नोट – छात्र अन्य शब्द इसी तरह लिखें।
आपके प्रश्न
“हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टियाँ ”
क्या आपके मस्तिष्क में कभी इस प्रकार के प्रश्न आते हैं? अवश्य आते होंगे। अपने समूह के साथ मिलकर अपने मन में आने वाले प्रश्नों की सूची बनाइए। अपने शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए ।

उत्तर:
मन में उठने वाले प्रश्न-
- यह पृथ्वी कहाँ से आई?
- इसे किसने बनाया ?
- पहला पेड़ कहाँ से आया?
- जीव-जंतु कहाँ से आए?
- पानी कौन बरसाता है?
- चाँद रोज क्यों नहीं चमकता है, आदि?
विशेषण और विशेष्य
“पृथ्वी एक छोटी ”
यहाँ ‘छोटी’ शब्द ‘पृथ्वी’ की विशेषता बता रहा है अर्थात् ‘छोटी’ ‘विशेषण’ है। ‘पृथ्वी’ एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है अर्थात् ‘पृथ्वी’ ‘विशेष्य’ शब्द है।

अब आप नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए-

उत्तर:

पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो- जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम । उत्तर- स्थिति जहाँ अनुपात बिगड़ गया है-
(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत- किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि )
(ग) करोड़ों में एक ही पृथ्वी’ इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे? उत्तर- अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए- पेड़-पौधों की रक्षा करेंगे।
(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने ‘ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे, ताकि आपमें ऐसा भाव न आए ?

उत्तर:
(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो- जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम ।
उत्तर:
स्थिति जहाँ अनुपात बिगड़ गया है-
- अस्पताल कम मरीज ज्यादा
- रेलगाड़ियाँ कम यात्री ज्यादा
- आमदनी कम और खर्च ज्यादा
- विद्यालय कम छात्र ज्यादा
- सामान कम रुपये ज्यादा
- नोट- ऐसे ही छात्र स्वयं बताएँ।
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(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत- किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि )
उत्तर:
परिवार में विराट दृष्टिकोण लाने के उपाय-
- सबसे हँसकर बात की जाए।
- सबकी बात सुनी जाए।
- सबकी सुविधा का ध्यान रखा जाए।
- सबकी बात मानी जाए।
- त्याग की भावना बनाए रखी जाए।
(ग) करोड़ों में एक ही पृथ्वी’ इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर:
अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए-
- पेड़-पौधों की रक्षा करेंगे।
- नए पेड़-पौधे लगाएँगे।
- वन्य जीवों का शिकार नहीं करेंगे।
- जलस्रोत दूषित नहीं करेंगे।
- प्रकृति से निकटता बढ़ाएँगे।
- पानी बचाएँगे।
- प्लास्टिक का प्रयोग कम-से-कम करेंगे।
(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने ‘ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे, ताकि आपमें ऐसा भाव न आए ?
उत्तर:
मैं त्याग, परोपकार, सहजीविता, सहनशीलता, प्रेम भाव, सहअस्तित्व आदि गुणों को प्रबल करूँगा।
(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन ‘दीवारों’ के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे-डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?
उत्तर:
स्वयं द्वारा खड़ी की गई तीन दीवारें-
- डर – साहस द्वारा भगाया जा सकता है।
- संकोच-आत्मविश्वास बढ़ाकर भगाया जा सकता है। लोभ-संतोष की भावना बढ़ाकर भगाया जा सकता है।
- समाज द्वारा बनाई गई कुछ दीवारें-
- जातिवाद – हर मनुष्य को समान समझकर
- भाषा – सभी भाषाओं को आदर देकर
- धर्मांधता – सभी धर्मों का आदर करके
- सामाजिक बुराइयाँ – शिक्षा का प्रचार करके ।
संख्यातीत शंख
“संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है”
शंख का अर्थ है- 100 पद्म की संख्या ।
भारतीय संख्या प्रणाली एक तालिका के रूप में दी गई है।



उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 136 पर दी गई तालिका को पढ़ें।
तालिका के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजिए-
1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?
3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?
4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है ?
5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?

उत्तर:
- पद्म
- उन्नीस
- एक सौ
- सबसे छोटी संख्या एक और सबसे बड़ी संख्या महाशंख
- एक अरब दस करोड़ ( एक सौ दस करोड़)
समावेशन और समानता
जैसे पृथ्वी अनगिनत नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह विशेष आवश्यकता वाला हो या न हो, समाज का एक महत्वपूर्ण भाग है। एक समूह चर्चा आयोजित करें जिसमें सभी मानवों के लिए समान अवसरों की आवश्यकता पर बल दिया जाए। ( भले ही उनका जेंडर, आय, मत, विश्वास, शारीरिक रूप, रंग या आकार-प्रकार आदि कैसा भी हो)
उत्तर:
नोट- छात्र स्वयं करें।
आज की पहेली
पता लगाइए कि कौन- न-सा अंतरिक्ष यान कौन-से ग्रह पर जाएगा-

उत्तर:
नोट – छात्र मिलान करके पहेली स्वयं हल करें।
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झरोखे से
आइए, अब पढ़ते हैं प्रसिद्ध गीत ‘ होंगे कामयाब ‘।


उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 138 पर दी गई कविता स्वयं पढ़ें और समझें।
साझ समझ
गिरिजा कुमार माथुर की अन्य रचनाएँ पुस्तकालय या इंटरनेट पर खोजकर पढ़िए और कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर:
नोट – छात्र गिरिजा कुमार माथुर की अन्य रचनाएँ इंटरनेट पर स्वयं पढ़ें और कक्षा में साझा करें।
खोजबीन के लिए
हम होंगे कामयाब एक दिन
https://www.youtube.com/watch?v=xITlzqvMa-Q
https://www.youtube.com/watch?v=dJ7BW1CgoWI
कल्पना जो सितारों में खो गई
https://www.youtube.com/watch?v=Xhv0L2frHn8
सुनीता अंतरिक्ष में
https://www.youtube.com/watch?v=11cDmCthPaA
ब्रह्माण्ड और पृथ्वी
https://www.youtube.com/watch?v=b8udjzy7zCA
हौसलों की उड़ान मंगलयान
https://www.youtube.com/watch?v=JTCk48RT1Ws
उत्तर:
नोट- छात्र पाठ्यपुस्तक में दी गई इंटरनेट कड़ियों का ‘प्रयोग करके खोजें और पढ़ें।