Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 8 नए मेहमान Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 8 नए मेहमान Question Answer
नए मेहमान Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 8 Question Answer – Class 8 Hindi नए मेहमान Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
• अतिथियों की सेवा करने के कारण
• किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
• आज्ञाकारिता के भाव के कारण
• गरमी को चुपचाप सहने के कारण
उत्तर:
• अतिथियों की सेवा करने के कारण *
• आज्ञाकारिता के भाव के कारण *

प्रश्न 2.
“एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
• उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं।
• पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
• लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
• अतिथियों का अपमान करते हैं
उत्तर:
• उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं *
• पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं *
• लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं *
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प्रश्न 3.
” ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
• मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
• रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
• अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
उत्तर:
मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण *
• रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण *
• अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण *
प्रश्न 4.
“हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए ।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है ?
• पानी की कमी होने की
• पड़ोसियों के चिल्लाने की
मेहमानों के आने की
• गरमी के कारण बीमारी की
उत्तर:
• मेहमानों के आने की *

प्रश्न 5.
इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
• संवाद
• वर्णन
• कथा
• मंचन
उत्तर:
संवाद *
• कथा *
• मंचन *

(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
उत्तर चुनने के कारण-
- आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ अतिथियों की सेवा करने तथा आज्ञाकारिता के भाव के कारण कहा था, क्योंकि एक बच्चा कुर्सी उनकी ओर कर दिया था, जबकि दूसरे ने पंखा तेज कर दिया था। इसके अलावा बच्चे बरफ लाने भी चले गए थे।
- विश्वनाथ ने अपने पड़ोसियों को निर्दयी कहा है, क्योंकि उसके पड़ोसी, पड़ोसी धर्म का पालन नहीं करते हैं। वे विश्वनाथ या उसके परिवार का सहयोग नहीं करते हैं। वे लड़ते-झगड़ते हैं तथा उन्हें कष्ट में देखकर खुश होते हैं।
- रेवती के घर में मेहमानों के ठहरने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा अतिथियों के आने से घर का काम भी बढ़ जाता है, जो अस्वस्थ रेवती के लिए मुसीबत जैसा है।
- यहाँ मेहमानों के आने को मुसीबत कहा गया है, क्योंकि भीषण गरमी में न तो मेहमानों के रुकने के लिए अतिरिक्त जगह है और न अन्य सुविधाएँ हैं।
- संवाद, कथा और मंचन मुख्य रूप से रचना को नाटक का रूप देते हैं। इनके बिना नाटक पूरा नहीं हो सकता है। नोट- उत्तर चुनने के कारणों पर छात्र स्वयं चर्चा करें।
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पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए ।
• “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती। ”
” सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो। ”
• “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं। ”
• “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है। ”
उत्तर:
अर्थ जो समझ में आया-
• ऐसी भीषण गरमी है कि बार-बार पानी पीने पर भी प्यास नहीं बुझती है।
भीषण गरमी से सारा शहर तप रहा है।
• गरीबों के भाग्य में हर तरह का कष्ट सहना लिखा होता है।
अतिथि प्यासे थे। भीषण गरमी में पानी पीने पर उन्हें राहत मिली।
मिलकर करें मिलान
स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइए-
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए। | 1. भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी |
| 2. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो। | 2. पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम |
| 3. माल-मसाला तो अंटी में है न? | 3. बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है |
| 4. खाने में क्या देर-दार है। | 4. कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है |
| 5. पहले आत्मा फिर परमात्मा | 5. धनराशि सुरक्षित तो है न| |
उत्तर:

1–3; 2–4; 3–5; 4–1; 5–2.
सोच-विचार के लिए
एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) “शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
उत्तर:
नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से आशय है- इतने छोटे-छोटे और असुविधा वाले मकान, जिनमें हवा आने-जाने का भी इंतजाम नहीं है।
(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
पड़ोसी को विश्वनाथ के घर आने-जाने वाले मेहमानों के अलावा उसके व्यवहार से भी शिकायत है। मेरे विचार से पड़ोसी का व्यवहार अनुचित है, क्योंकि पड़ोसी धर्म का पालन करना हर मनुष्य का कर्तव्य होता है।
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(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
उत्तर:
विश्वनाथ सहृदय व्यक्ति है। वह अतिथि का स्वागत करना अपना कर्तव्य समझता है। उसे लगता है कि ये मेहमान सही जगह आए होंगे।

(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
उत्तर:
दोनों मेहमान विश्वनाथ से अपरिचित हैं, इसकी पुष्टि करने वाले संवाद-
- क्षमा कीजिए. आप कहाँ से पधारे हैं?
- कौन संपतराम ?
- मैं संपतराम को नहीं जानता।
- आप कहाँ से आए हैं?
- तो आप कोई चिट्ठी- विट्ठी लाए हैं?
(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर:
गरमी की भीषणता प्रकट करने वाले वाक्य-
- पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।
- प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।
- चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।
- सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?
उत्तर:
विश्वनाथ घर से बाहर दिनभर काम करता है, जबकि उसकी पत्नी घरेलू काम करती है। इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के हिस्से में घर के काम सौंप दिए गए हैं। इसी सोच के कारण विश्वनाथ ऐसा कहता है।

(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
उत्तर:
प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व इसलिए दिए गए होंगे, ताकि उसमें जिम्मेदारी की भावना का अभी से ही विकास होता जाए।
(ग) “कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ” भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?
उत्तर:
दोनों अपरिचित मेहमानों के जाने के बाद अब आने वाला नया मेहमान उसका सगा भाई था। उससे उसका विशेष रिश्ता था । इसी तरह भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए तैयार हो गई होगी।
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(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने वाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए-

उत्तर:
| गरमी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ | सर्दी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ | वर्षा की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ |
| 1. यह गरमी में भुन रहा है। | यह सर्दी में जम गया। | यह वर्षा में भीग रहा है। |
| 2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए । | कई बार चाय-कॉफी पी गया। | जहाँ देखो वहीं पानी भर गया है। |
| 3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो। | हड्डियाँ तक काँप रही हैं। | आज तो बादल ही फट पड़े हैं। |
| 4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती। | बरफ है या पानी पता नहीं चल रहा है। | पता नहीं इतना पानी कहाँ से आ रहा है। |
| 5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं। | सरदी में नाखून भी गला जा रहा है। | पानी तो बाढ़ लाकर ही रहेगा। |
| 6. ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं। | हीटर जलाओ, कलेजा तक काँप रहा है। | चाय-पकौड़े बना लो ऐसी बरसात में। |
| 7. सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है| | ऐसी सरदी में सूरज की याद आ गई। | अब तो नहाने का मन हो रहा है। |
| 8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं। | हाय! ये सरदी जान लेकर ही मानेगी। | ऐसी बारिश में बाहर भी नहीं जा सकते हैं। |
| 9. फिर भी पसीने से नहा गया हूँ। | लगता है हड्डियाँ जम गई हैं। | बाढ़ ने खेत-खलिहान डुबो दिए हैं। |
एकांकी की रचना
इस एकांकी के आरंभ में पात्र – परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि-
“गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय। कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…”
विश्वनाथ- उफ्फ, बड़ी गरमी है (पंखा जोर-जोर से करने लगता है) इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है। मकान है कि भट्टी! (पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है)
रेवती- (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई) पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।
एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच-निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये ‘नए मेहमान’ एकांकी का एक अंश है।
एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे- इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र-परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि)

(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए ।
उत्त:
एकांकी की विशेषताएँ-
- पूरी घटना एक अंक में मंचन के योग्य
- पात्रों का परिचय
- संवाद
- अभिनय निर्देश
- उचित हावभाव
- देशकाल का चित्रण
(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ लिखिए। जो वाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।
| वाक्य | हाँ/नहीं |
| 1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। | |
| 2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। | |
| 3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। | |
| 4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। | |
| 5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। | |
| 6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। | |
| 7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। |
उत्तर:
| वाक्य | हाँ / नहीं |
| 1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। | हाँ |
| 2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। | नहीं |
| 3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। | नहीं |
| 4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। | नहीं |
| 5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। | नहीं |
| 6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। | हाँ |
| 7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। | नहीं |
अभिनय की बारी
(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है ? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए इस एकांकी में आप क्या क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे?)
उत्तर:
एकांकी के मंचन की तैयारियाँ-
- घर का दृश्य प्रस्तुत करता मंच
- कमरे का दृश्य
- कमरे में सामान
- गरमी की वेशभूषा
- पात्रानुकूल संवाद
(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को इसके लिए आपको प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट)। आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा।
सुझाव
• आप एकांकी को जैसा दिया गया है, बिलकुल वैसा भी प्रस्तुत कर सकते हैं या इसमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन भी कर सकते हैं।
• एकांकी के लिए आस-पास की वस्तुओं का ही उपयोग कर लेना है, जैसे- कुर्सी, मेज आदि ।
• स्थान की कमी हो तो अभिनेता बच्चे अपने स्थान पर खड़े-खड़े भी संवाद बोल सकते हैं।
• आप चाहें तो अपने अभिनय को अपने शिक्षक की सहायता से रिकॉर्ड करके उसे अपने परिवार या संबंधियों के साथ साझा भी कर सकते हैं।
उत्तर:
नोट-छात्र उचित तैयारी के साथ एकांकी स्वयं प्रस्तुत करें।
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भाषा की बात
” सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो। ” “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं। ”
“यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं। ”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।
एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है, उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
गरमी की प्रचंडता दर्शाने वाले वाक्य-
- मकान है कि भट्ठी ।
- कब तक जेलखाने में सड़ना होगा ।
- पत्ता तक नहीं हिल रहा है।
- गरमी में भुन रहा है।
- गरमी क्या कम है |

* मुहावरे
“ आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।”
” लाखों के आदमी खाक में मिल गए। ”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश ‘रात-दिन एक करना’ तथा ‘खाक में मिलना’ मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
- आग बरसना (खूब गरमी पड़ना) – आज तो आग बरस रही है।
- जान में जान आना (राहत मिलना ) कूलर के सामने बैठने से अब जान में जान आई।
- खाक में मिलना (सब नष्ट हो जाना) – बाढ़ ने सारी फसलें खाक में मिला दीं।
- अपनी ही हाँके जाना (दूसरों को बोलने का मौका न देना) – तुम तो अपनी ही हाँके जा रहे हो, कुछ मेरी भी तो सुनो।

* बात पर बल देना
” वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा ।
” उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द ‘ही’ हटाकर पढ़िए-
” वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर रहा ”
(क) दो-दो के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में ‘ही’ के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और ‘ही’ हटा देने से क्या कमी आई ?
उत्तर:
‘ही’ के प्रयोग से बात या शब्द पर बल लगता है, जबकि ही हटाने पर बल नहीं लगता है।
| ही का प्रयोग | ही के प्रयोग के बिना |
| मैं ही जानती हूँ, कैसे रोटी बनाती हूँ। | मैं जानती हूँ, कैसे रोटी बनाती हूँ। |
| गरमी ही क्या कम है| | गरमी क्या कम है| |
| यह हमारा ही भाग्य है। | यह हमारा भाग्य है। |
| गरमी में पानी ही तो जान है। | गरमी में पानी तो जान है। |
(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे-
| 1. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे | और किसी के अतिथि नहीं। |
| 2. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे | यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं। |
| 3. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे | यहाँ रुकना निश्चित है। |
“तुम नहाने तो जाओ।”
उपर्युक्त वाक्य में ‘तो’ का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें-
“तुम तो नहाने जाओ।”
“तुम नहाने जाओ तो।”
‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए ।
उत्तर:
‘ही’ और ‘तो’ के प्रयोग वाले वाक्य-
- तुम तो इधर बैठो।
तुम इधर बैठो तो। - शहर में ही आग बरस रही है।
शहर में आग ही बरस रही है। - राम तो बाजार जाएगा।
राम बाजार जाओ तो। - मेहमान ही यहाँ रहेंगे।
मेहमान यहाँ ही रहेंगे।

पाठ से आगे
आपकी बात
(क) “रेवती- ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।
विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।”
उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर:
हाँ, एक बार मेरे सामने भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई थी। मेरा चयन नवोदय विद्यालय में छठी कक्षा में पढ़ने के लिए हो गया। उधर गाँव के ही एक क्रिकेट अकादमी में बारह साल से कम उम्र वालों में मेरा चयन हो गया था। मैं तीन-चार दिन दुविधा में रहा फिर नवोदय विद्यालय में पढ़ने चला गया।
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(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
उत्तर:
- मेरे अच्छे मित्र हैं- वैभव और सागर ।
- वे मुझे प्रिय लगते हैं, क्योंकि-
- मुझे गलत सलाह नहीं देते हैं।
- पढ़ाई में मदद करते हैं।
- वे अध्यापक/अध्यापिकाओं का कहना मानते हैं।
(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर:
- मैं अपने किसी मित्र या संबंधी के घर जाने से पहले-
- उन्हें सूचित कर देता हूँ।
- उपहार ले जाता हूँ।
- अपने आने-जाने के खर्च की व्यवस्था कर लेता हूँ।
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर:
मैं अपने पड़ोसियों का सहयोग कई तरह से करता हूँ-
- आवश्यकता पड़ने पर रुपये-पैसे दे देता हूँ।
- बाज़ार से उनके लिए भी फल, दूध दवाएँ ला देता हूँ।
- उनके फूल-पौधे और गमलों को हाथ नहीं लगाता हूँ ।
- साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखता हूँ तथा कूड़ा नहीं फैलाता ।
- उनके मेहमानों को उनके आने तक चाय-नाश्ता करा देता हूँ।
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
सामान्य अतिथियों का व्यवहार-
- असमय नहीं जाना चाहिए।
- अनावश्यक और अनुचित माँग नहीं करनी चाहिए।
- मेजबान की असुविधा का ध्यान रखना चाहिए ।
- बिना पूछे कोई काम नहीं करना चाहिए।
सावधानी और सुरक्षा
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर:
यदि मैं विश्वनाथ की जगह होता तो-
- उनसे विनम्रता से पूछता कि आप कहाँ से आए हैं?
- किससे मिलना है?
- किसने भेजा है आपको?
(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर:
माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो मैं-
- विनम्रता से उनका निवास स्थान पूछूंगा ।
- आने का उद्देश्य पूछूंगा।
- पिताजी या मम्मी से उनकी बात कराऊँगा, फिर अंदर आने के लिए कहूँगा।
सृजन
(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। (जैसे- एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए… )
उत्तर:
एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए। गरमी अपने चरम पर थी । पसीना सूखने का नाम नहीं ले रहा था। बार-बार पानी पीने से प्यास नहीं बुझ रही थी। पंखा भी गरम हवा फेंक रहा था। मैंने कुर्सी मेहमान की ओर बढ़ा दी। दूसरे मेहमान चारपाई पर बैठ गए। आते ही उन्होंने अपनी-अपनी परेशानी बतानी शुरू कर दी। एक मेहमान ने मुझसे ठंडा पानी लाने को कहा। घड़े का पानी उनकी प्यास न बुझा सका तो उन्होंने बरफ लाने के लिए कहा। पिताजी ने उनसे पूछा कि वे कहाँ से आए हैं? तो उन्होंने कहा बिजनौर से हममें से उनको कोई पहचानता न था।
वे भूख लगने की बात कहकर नहाने चले गए। मम्मी खाना बनाने को तैयार न थीं। इधर हमारे पड़ोसी लड़ने आ गए, क्योंकि मेहमानों ने उनकी छत पर पैर धो लिए थे। पिताजी के माफी माँगने पर ही वे वापस गए। पिताजी के पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें कविराज के घर जाना था। संयोग से मैं उन्हें अपनी गली में रहने वाले कविराज रामलाल वैद्य के घर छोड़ आया। इधर हमारे मामा एक नए आगंतुक बनकर आ चुके थे। उन्हें देखते ही मम्मी खुश होकर खाना बनाने चली गई, जबकि मामा उन्हें रोकते ही रह गए ।
गरमी का प्रकोप

” तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है। ”
एकांकी में भीषण गरमी का वर्णन किया गया है। आप गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या सावधानी बरतेंगे? पाँच-पाँच के समूह में चर्चा करें। मुख्य बिंदुओं को चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और इन्हें व्यवहार में लाएँ ।
उत्तर:
गरमी के प्रकोप से बचने के लिए मैं-
- तेज धूप में बाहर नहीं जाऊँगा ।
- घड़े या फ्रिज़ का पानी पिऊँगा ।
- बाहर जाने पर सिर ढँक लूँगा ।
- ठंडी लस्सी, दही आदि का सेवन करूँगा।
- नोट – छात्र इन्हें चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ।
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तार से संदेश

“क्या मेरा तार नहीं मिला?”
रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। ‘तार’ संदेश भेजने का एक माध्यम था। जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।
टेलीग्राफ
किसी भौतिक वस्तु के विनिमय के बिना ही संदेश को दूर तक संप्रेषित करना टेलीग्राफी कहलाता है। विद्यु धारा की सहायता से, पूर्व निर्धारित संकेतों द्वारा, संवाद एवं समाचारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजनेवाला तथा प्राप्त करने वाला यंत्र तारयंत्र (टेलीग्राफ) कहलाता है। वर्तमान में यह प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गई है।
(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर:
यह एकांकी लगभग 50-60 साल पहले लिखी गई होगी।
(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर:
आजकल पोस्टकार्ड, अंतरदेशीय पत्र लिफ़ाफ़े, टेलीफ़ोन, फैक्स, मोबाइल फ़ोन आदि संचार के अनेक साधन हैं।
(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर:
मैं किसी को संदेश भेजने के लिए मोबाइल फ़ोन का सर्वाधिक उपयोग करता हूँ।
(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए ।
नोट – छात्र अपने प्रिय व्यक्ति को स्वयं पत्र लिखकर भारतीय डाक से भेजें।
नाप तौल और मुद्राएँ
” जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गंज बिक रही थी।”
उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। रेखांकित शब्द ‘साढ़े नौ’, ‘आने’, ‘गज’ में ‘साढ़े नौ’ भारतीय भाषा में अंतरराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है तो वहीं ‘आने’ शब्द भारतीय मुद्रा और ‘गज’ शब्द लंबाई नापने का मापक है।

(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर:
एक रुपये में सोलह आने होते हैं।
(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?
उत्तर:
चार आने में पच्चीस पैसे होते हैं।
(ग) आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए ।
उत्तर:
गज का प्रयोग ज़मीन नापने के लिए किया जाता है।

(घ) बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती हैं?
उत्तर:
एक गज में 3 फीट होते हैं।
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झरोखे से
कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन सादगी भरा था, परंतु वे अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते थे। उनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो वे उसके सत्कार के लिए जी-जान से जुट जाते थे। महादेवी वर्मा की पुस्तक पथ के साथी से निराला के आतिथ्य भाव का एक छोटा-सा अंश पढ़िए-
….. ऐसे अवसरों की कमी नहीं जब वे अकस्मात पहुँच कर कहने लगे…… “मेरे इक्के पर कुछ लकड़ियाँ, थोड़ा घी आदि रखवा दो। अतिथि आए हैं, घर में सामान नहीं है।”
उनके अतिथि यहाँ भोजन करने आ जावें, सुनकर उनकी दृष्टि में बालकों जैसा विस्मय छलक आता है। जो अपना घर समझकर आए हैं, उनसे यह कैसे कहा जाए कि उन्हें भोजन के लिए दूसरे घर जाना होगा।
भोजन बनाने से लेकर जूठे बर्तन माँजने तक का काम वे अपने अतिथि देवता के लिए सहर्ष करते हैं। तैंतीस कोटि देवताओं के देश में इस वर्ग के देवताओं की संख्या कम नहीं, पर आधुनिक युग ने उनकी पूजा विधि में बहुत कुछ सुधार कर लिया है। अब अतिथि-पूजा के अवसर वैसे कम ही आते हैं और यदि आ भी पड़े तो देवता के और अभिषेक, शृंगार आदि संस्कार बेयरा, नौकर आदि ही संपन्न करा देते हैं। पुजारी गृहपति को तो भोग लगाने की मेज पर उपस्थित रहने भर का कर्तव्य सँभालना पड़ता है। कुछ देवता इस कर्तव्य से भी उसे मुक्ति दे देते हैं।
ऐसे युग में आतिथ्य की दृष्टि से निराला जी में वही पुरातन संस्कार है जो इस देश के ग्रामीण किसान मिलता है।
उनके भाव की अतल गहराई और अबाध वेग भी आधुनिक सभ्यता के छिछले और बँधे भाव-व्यापार से भिन्न हैं।
उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ संख्या 125 पर दी गई जानकारी स्वयं पढ़ें और समझें ।
साझी समझ
भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं, तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं, अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।
उत्तर:
जब मेरे घर अतिथि आते हैं, तो मैं उनके चरण स्पर्श करके उनका अभिवादन करता हूँ। मैं अतिथि को पराँठे, पूड़ी, सब्जी, दाल, पुलाव, अचार, पापड़ आदि खिलाना चाहूँगा ।
नोट – छात्र स्वयं भी बताएँ ।
खोजबीन के लिए
इस एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए। इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं?
उत्तर:
आने- एक आने में छह पैसे होते हैं। सोलह आने का एक रुपया बन जाता है।
गज मीटर के प्रचलन से पहले गज से कपड़े नापकर बेचे जाते थे।
तार- यह शीघ्र संदेश भेजने का साधन था। यह काफी महँगा हुआ करता था। तार डाकखाने के माध्यम से भेजा जाता था।