Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 7 मत बाँधो कविता Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 7 मत बाँधो Question Answer
मत बाँधो Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 7 Question Answer – Class 8 Hindi मत बाँधो Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
• सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
• सपनों को भूल जाना चाहिए
• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
सपने देखना अच्छी बात है
उत्तर:
सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए *

प्रश्न 2.
‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
प्रेम की
सपनों की
शिक्षा की
अधिकारों की
उत्तर:
• शिक्षा की *
• सपनों की *
• अधिकारों की*
प्रश्न 3.
“इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
• सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
• सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
• सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं।
उत्तर:
• सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते *
• सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं *
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प्रश्न 4.
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?
• जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
• जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो
• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
उत्तर:
• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो *
• जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों *
प्रश्न 5.
यदि बीज धूल में गिर जाए, तो क्या हो सकता है?
• वह बहुत तेजी से उड़ सकता है।
• वह और गहरा हो सकता है
• उसकी उड़ान रुक सकती है।
• वह बढ़कर पौधा बन सकता है
उत्तर:
• उसकी उड़ान रुक सकती है *
• वह बढ़कर पौधा बन सकता है *
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
उत्तर चुनने के कारण-
- पूरी कविता में सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने की बात कही गई है। यह स्वतंत्रता बनी रहने पर सपनों को उड़ान भरने और सच्चाई में बदलने का अवसर मिलता है।
- ‘मत बाँधो’ कविता शिक्षा, सपने और अधिकारों की बात करती है, क्योंकि इनके बिना व्यक्ति और समाज को सुंदर बनाने की कल्पना साकार नहीं हो सकती है।
- सपनों के पंख होने की बात इसलिए कही गई है, क्योंकि जिस तरह पंख पक्षियों को उड़ान भरने की शक्ति देते हैं, उसी तरह सपने मनुष्य को सफलता की नई ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं।
- “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से मैं ऐसा स्थान समझता हूँ, जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो तथा प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों, क्योंकि इनके बिना स्वर्ग की कल्पना करना भी बेकार है।
- यदि बीज धूल में गिर जाए तो उसकी उड़ान रुक सकती है और उचित परिस्थितियाँ पाकर वह पौधा तो बन सकता है। परंतु वह न तो उड़ सकता है और न अधिक गहरा हो सकता है। नोट – छात्र अपने उत्तरों पर स्वयं चर्चा करें।
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?”

(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा । ”

उत्तर:
अर्थ जो समझ में आया-
(क) सौरभ अर्थात् पराग हवा के साथ उड़कर अपनी महक बिखराता हुआ आकाश में चला जाता है। इसके विपरीत बीज धूल में गिरकर मिट्टी में दब जाता है, फिर वह आकाश में नहीं उड़ पाता है ।
(ख) सपनों को कल्पना की उन्मुक्त उड़ान भरने के अवसर पर यह आकाश में तारों से मिलकर चमकदार बनता है। फिर यह बादलों से रंग-रूपी रचनात्मकता और किरणों से चमक रूपी सुंदर विचार बनकर धरती पर आता है।
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मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा
संदर्भ से मिलाइए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो ! |
1. सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। |
| 2. सपनों में दोनों ही गति हैं उड़कर आँखों में आता है ! |
2. सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो| |
| 3. इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो ! | 3. किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही अगर हम किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। |
| 4. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो! | 4. रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। |
| 5. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा ! | 5. सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। |
उत्तर:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो ! |
3. किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही अगर हम किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। |
| 2. सपनों में दोनों ही गति हैं उड़कर आँखों में आता है ! |
5. सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। |
| 3. इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो ! | 1. सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। |
| 4. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो! | 2. सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो| |
| 5. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा ! | 4. रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। |
1. -3. 2. – 5, 3. -1, 4. -2, 5. – 4.
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
उत्तर:
कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन उन लोगों के लिए किए गए होंगे, जो दूसरों का शोषण करते हैं, उनका अधिकार छीनकर आगे बढ़ने का अवसर नहीं देते हैं।
(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
उत्तर:
कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात इसलिए कही गई होगी, क्योंकि इससे सपनों की गतिशीलता और कल्पनाशीलता समाप्त हो जाती है।
(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?
उत्तर:
सपनों की अन्य विशेषताएँ-
सपने मनुष्य और समाज को सुंदर बनाते हैं।
सपने हमें कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं।
(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा ?
उत्तर:
मैंने देश की रक्षा करने के लिए सैनिकों के कदमों का सार्थक आरोहण देखा है।
पर्वतों की ऊँची जगहों पर विजय पाकर सैनिकों के कदमों का अवरोहण देखा है।
(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है / उड़कर आँखों में आता है!” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हाँ, सपने आँखों में उतरकर वास्तविकता बन जाते हैं।
मैंने देखा है कि किसान बीज बोते समय अच्छी फसल होने का सपना देखता है। वही फसल जब तैयार होकर घर आ जाती है, उसका सपना वास्तविकता का रूप ले लेता है।
शीर्षक
कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’ यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए ।
उत्तर:
मैं कविता को नया नाम दूँगा- ‘आओ सपने साकार करें।’
यह नाम इसलिए दूँगा ताकि लोग सपने साकार करने के लिए प्रेरित हों।
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अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं । उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए |
उत्तर:
मैं अपने नए संसार में प्रेम, सद्भाव, अवसरों की समानता आदि रखना चाहूँगा, जबकि शोषण, छुआछूत, ऊँच-नीच की भावना आदि नहीं रखना चाहूँगा, क्योंकि ये सब व्यक्ति तथा समाज की उन्नति में बाधक हैं।
(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा? अनुमान करके बताइए ।
उत्तर:
मैं अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए चित्रकला, मूर्तिकला आदि सीखना चाहूँगा, क्योंकि इससे रचनात्मकता बढ़ती है, समय का सदुपयोग होता है और समाज की सुंदरता बढ़ती है।
(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे बीते हुए समय में जाने का अवसर मिले, तो मैं कई बदलाव करना चाहूँगा; जैसे-
- सबको शिक्षा का अवसर
- सबको समानता का अवसर
- सबको शोषण से मुक्ति
- गरीबी से मुक्ति
- सामाजिक समरसता में वृद्धि।
(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी ? (संकेत- धूप अर्थात् मेहनत, पानी अर्थात् लगन आदि ।)
उत्तर:
यदि सपने बीज की तरह हों, तो उन्हें उगने के लिए परिश्रम, दृढ़ मेहनत, लगन, आर्थिक मदद आदि की आवश्यकता होगी।
(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा !” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर:
बुरे सपनों या बुरे विचारों से समाज बदहाल हो जाएगा। वहाँ जंगलराज हो जाएगा ऐसे सपनों से बचने के लिए-
- सभी को मनुष्यमात्र मानकर समानता का व्यवहार किया जाए।
- सद्भाव का प्रचार-प्रसार किया जाए।
- शोषणमुक्त समाज बनाया जाए । मानवीय गुणों को अपनाया जाए।
(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो !” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?
उत्तर:
सपने पूरे करने का अवसर मिलने पर दुनिया की सुंदरता बढ़ जाएगी और सर्वत्र शांति होगी।
उस दुनिया में समानता, खुशहाली, समरसता आदि होने से सबका विकास होने जैसी महत्वपूर्ण बातें होंगी।
(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो !” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है ? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?
उत्तर:
मेरे विचार से यह एक सुझाव है।
यह बात उन लोगों से कही जाए जो अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं तथा सदैव अपने हित की बातें करते हैं।
कविता की रचना
“सौरभ उड़ जाता है नभ में… ”
“ बीज धूलि में गिर जाता जो…’
“ अग्नि सदा धरती पर जलती… ”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द-चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता में भी ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
कविता की विशेषताओं की सूची-
- तुकांत युक्त है।
- तत्सम शब्दों का प्रयोग है।
- प्रश्न पूछने का भाव है।
- और की जगह औ’ का प्रयोग
- परस्पर विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग
- सपनों को साकार करने की प्रेरणा
- प्रतीकों का प्रयोग,
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(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
| 1. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 1. वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| 2. एक ही शब्द का प्रयोग | 2. इसका आरोहण मत बार-बार किया गया है। रोको इसका अवरोहण मत बाँधो| |
| 3. समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा | |
| 4. प्रश्न पूछा गया है। | 4. इन सपनों के पंख न काटो |
| 5. संबोधन का प्रयोग किया गया है। | 5. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो | |
| 6. सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है। | 6. दीप्ति लिए भू पर आयेगा। स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा | |
उत्तर:
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
| 1. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 2. इसका आरोहण मत बार-बार किया गया है। रोको इसका अवरोहण मत बाँधो| |
| 2. एक ही शब्द का प्रयोग | 5. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो | |
| 3. समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 6. दीप्ति लिए भू पर आयेगा। स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा | |
| 4. प्रश्न पूछा गया है। | 1. वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| 5. संबोधन का प्रयोग किया गया है। | 4. इन सपनों के पंख न काटो |
| 6. सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है। | 3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा | |
1. – 2, 2. – 5, 3.- 6, 4.- 1, 5.- 4, 6. – 3.
शब्दों की बात
” इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो ! ”
उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण का अर्थ है- नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना और अवरोहण का अर्थ है- ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना ।
(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए ।
पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर …………………….. कर विजय प्राप्त की।
नदियाँ विशाल पर्वतों से ……………………………… करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया …………………………….. क्रम कहलाती है।

(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए ।
उत्तर:
पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।
नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है।
इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए ।
उत्तर:
- प्रधानाचार्य ने ध्वजारोहण किया।
- वहाँ जाने के लिए आरोहण करना होगा।
- मंदिर से अवरोहण करते समय वह फिसल गया।
- शाम होते देख चरवाहे पठारी से अवरोहण करने लगे।
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(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए-
” वह नभ में कब उड़ पाता है?”
” धूम गगन में मँडराता है ।”
‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है?

उत्तर:
समानार्थी शब्दों का प्रयोग वाली पंक्तियाँ-
आसमान में चाँद देखकर तारे शरमा जाते हैं।
देख लालिमा पूरब में तारक सब छिप जाते हैं।
पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए-
- तुकांतता
- हर पंक्ति में शब्दों या वर्णों की समान संख्या होना आवश्यक होता है।
(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? लिखिए। (संकेत- ‘मत डरो ‘)
उत्तर:
‘मत’ के साथ क्रिया-
मत भागो मत रोओ मत घबराओ मत शरमाओ आदि ।
(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? अपने समूह में चर्चा करके लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए। (संकेत – जोड़ना)
उत्तर:
जोड़ना – उसने दोनों तारों को जोड़ दिया।
चिपकाना – उसने प्लास्टिक को गोंद से चिपकाया।
(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है ‘अँधेरा’ कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।
उत्तर:
कविता में से उलटकर लिखने पर अर्थ देने वाले
शब्द- सदा-दास|
काल परिवर्तन
” सौरभ उड़ जाता है नभ में ”
उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए इस पंक्ति की क्रिया ‘जाता है’ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम इसी पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखें तो यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी-
भूतकाल – सौरभ उड़ गया है नभ में
कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।
उत्तर:

शब्दकोश से
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प”
शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ शब्द के निम्नलिखित अर्थ हैं-
1. हाथ से कोई चीज़ बनाकर तैयार करने का काम-दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे- बरतन बनाना, कपड़े सिलना, गहने गढ़ना आदि।
2. कला संबंधी व्यवसाय ।
3. दक्षता, कौशल।
4 निर्माण, सर्जन, सृष्टि रचना।
5. आकार, आवृत्ति ।
6. अनुष्ठान, क्रिया, धार्मिक कृत्य ।
अब शब्दकोश से ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित शब्दों के अर्थ खोजकर लिखिए-
1. शिल्पकार
2. शिल्पकला
3. शिल्पकौशल
4. शिल्पगृह या शिल्पगेह
5. शिल्पविद्या
6. शिल्पशाला या शिल्पालय

उत्तर:
1. शिल्पकार – शिल्पी शिल्पजीवी शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी ।
2. शिल्पकला – दस्तकारी का कौशल
3. शिल्पकौशल दस्तकारी करने का गुण या हुनर
4. शिल्पगृह या शिल्पगेह – शिल्प का कार्य स्थल
5. शिल्पविद्या – शिल्प की कला
6. शिल्पशाला या शिल्पालय – शिल्प सिखाने का स्थान या पाठशाला
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पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत- गाँठ बाँधना )
उत्तर:
मैं बाँधने के लिए गाँठ लगाना, चिपकाना, गाँठ जोड़ना, मिलाना आदि का प्रयोग करता हूँ।
(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’ अर्थात् वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए ।
उत्तर:
अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए मैं कई प्रयास करूँगा; जैसे-
- लड़ाई-झगड़ा न करना ।
- अफवाह न फैलाना ।
- अपना काम स्वयं करना ।
- बड़ों की बातें मानना ।
- साफ़-सफ़ाई रखना ।
(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन – सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए ।
उत्तर:
मेरा ऐसा सपना है- धरती को हरा-भरा बनाना । इस सपने के पूरा होने से सब स्वस्थ रहेंगे।
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चर्चा-परिचर्चा
“सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है । ” किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत से लोगों का सपना भी बन जाता है, जैसे- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीयों का सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।

उत्तर:
वे सपने जिन्हें पूरा करने के लिए मैं दूसरों को जोड़ना चाहूँगा-
- भाईचारा फैलाना
- सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाना
- महँगाई कम करना
- रोजगार उपलब्ध कराना
- नोट-छात्र इन पर स्वयं चर्चा करें।

सृजन
(क) विराम चिह्न का फेरबदल-
रोको मत, जाने दो
रोको, मत जाने दो
लेखन में विराम चिह्नों का विशेष महत्व होता है।
विराम चिह्नों के प्रयोग से वाक्य या पंक्ति का अर्थ स्पष्ट हो जाता है और परिवर्तित भी हो जाता है, जैसे- ‘रोको मत, जाने दो’ में रोको मत के बाद अल्पविराम चिह्न (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि बिना रोके जाने दिया जाए। वहीं ‘रोको, मत जाने दो’ में रोको के बाद अल्पविराम (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि जाने से रोका जाए। नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों को शीर्षक भी दीजिए।

उत्तर:

शीर्षक- रुकें अथवा जाएँ ?
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(ख) कविता आगे बढ़ाएँ
नीचे दी गई पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक
कविता तैयार कीजिए ।
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो ।
……………………………
………………………….

उत्तर:
कविता की पंक्तियाँ-
- इस पट को तुम अभी तोड़ दो,
- इनको अब बाहर जाने दो।
- बंधन में हैं यहाँ पड़े थे,
- अपनो से मिल जाने दो।
- क्यों छीनी है इनकी आज़ादी,
- दास बना रखा तुमने। पराधीन थे हम भी कभी,
- सुना ‘प्रमोद’ से ऐसा हमने
(ग) खोया-पाया
मान लीजिए आपका सपना कहीं खो गया है। उसके खो जाने की रिपोर्ट तैयार करें। आपको स्कूल प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजनी है। इसके लिए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र लिखिए।
नोट – छात्र अपने खोए सपने के बारे में सोचें और रिपोर्ट तैयार करें।
उत्तर:
स्कूल प्रशासन को भेजने हेतु पत्र
सेवा में,
स्कूल प्रशासन,
वैभव पब्लिक स्कूल,
दिल्ली।
08 सितंबर 20xx
विषय – खोए सपने के संबंध में।
महोदय,
विनम्र निवेदन यह है कि मैं आठवीं कक्षा के हिंदी माध्यम वर्ग का छात्र हूँ। मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता हूँ। इस वर्ग में विज्ञान, गणित मेरी समझ में नहीं आ रहे हैं। इससे मैं आगे विज्ञान की पढ़ाई नहीं कर सकूँगा । मुझे लगता है कि मेरा सपना कहीं खो गया है।
कृपया मेरा वर्ग बदलकर अंग्रेजी माध्यम में स्थानांतरित कर दें और मेरे खोए सपने ढूँढ़ने में मेरी मदद करें।
सधन्यवाद,
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
प्रतीक
वाद-विवाद
(क) कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है- “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।”
एक समूह विषय के विपक्ष में और दूसरा समूह विषय के पक्ष में अपना तर्क देगा। जैसे—
समूह 1 – व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है।
समूह 2 – स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

(ख) विद्यार्थी वाद-विवाद के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।
उत्तर:
नोट- छात्र वाद-विवाद का आयोजन स्वयं करें।
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देखना-सुनना-समझना….
(क) “धूम गगन में मँडराता है ।”
सुगंध का अनुभव सूँघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो ।
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं-
वर्षा की बूँदों का
धुएँ के उड़ने का
खेल के रोमांच का

उत्तर:
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें-
- वर्षा की बूँदों का उन्हें बाहर ले जाकर।
- धुएँ के उड़ने का – धुएँ की गंध सूँघने को कहकर।
- खेल के रोमांच का खेल का आँखों देखा हाल सुनाकर अनुभव करा सकते हैं।
(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव विद्यार्थियों के बराबर-बराबर की संख्या में दो दल (टीम) बनाइए । दलों के नाम रखें- कल्पना और आकांक्षा। ‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय ( हाव-भाव या संकेत) के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करें। ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है। पहचानने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए । निर्धारित समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दिए जा सकते हैं। इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।
उत्तर:
नोट – छात्र स्वयं करें।
आपदा प्रबंधन
” अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मँडराता है!”
आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाव संभव हो जाता है।
(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि –
• कहीं अचानक आग लग जाए
• आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए
• भूकंप आ जाए
उत्तर:
अचानक आग लगने पर-
- पुलिस और फायर ब्रिगेड को बुलाना।
- मदद के लिए आवाज लगाना ।
- आग में फँसे लोगों की यथासंभव मदद करके अस्पताल ले जाना।
बाढ़ आने पर –
- सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने में मदद करना ।
- दैनिकोपयोगी वस्तुओं को उन तक पहुँचाना।
- दवाएँ, कपड़े आदि की व्यवस्था करना।
भूकंप आ जाने पर-
- आपदा प्रबंधन टीम को फ़ोन करना।
- फँसे लोगों को निकालना ।
- प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुँचाना।
- आवश्यक सामान उपलब्ध कराना।
(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूंगा या करूंगी?” एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।
उत्तर:
नोट – छात्र चित्र आधारित योजना स्वयं बनाएँ।
शिल्प
” स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा |”
हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए-

उत्तर:
| शिल्प-कार्य | अर्थ या व्याख्या |
| 1. काष्ठ शिल्प | 4. लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना |
| 2. मृत्तिका शिल्प | 5. मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना |
| 3. धातु शिल्प | 6. ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ आदि बनाना |
| 4. काँच शिल्प | 1. काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन खिड़कियाँ आदि बनाना |
| 5. वस्त्र शिल्प | 2. कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य |
| 6. कागज शिल्प | 3. कागज से खिलौने, सजावट, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना |
| 7. पत्थर शिल्प | 13. संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना, मंदिरों की सजावट करना आदि |
| 8. चमड़ा शिल्प | 12. चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाना |
| 9. बाँस और बेंत शिल्प | 11. बाँस और बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे आदि बनाना |
| 10. मोती एवं आभूषण शिल्प | 14. रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके आदि गहने बनाना |
| 11. लाख शिल्प | 9. लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे और अन्य सजावटी वस्तुएँ बनाना |
| 12. शीशा शिल्प | 8. कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जोड़ना या जड़ाई करना |
| 13. चित्रकला शिल्प | 7. पारंपरिक चित्रकलाओं, जैसे- मधुबनी, गोंड, वरली आदि से कलाकृतियाँ बनाना |
| 14. नक्काशी शिल्प | 10. लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना |
1. – 4, 2. – 5, 3.- 6, 4.- 1, 5.- 2, 6. – 3, 7. – 13, 8. – 12, 9. – 11, 10. – 14, 11. – 9, 12. – 8, 13. – 7, 14. – 10.
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(ख) अपने विद्यालय या परिवार के साथ हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान या कार्यशाला का भ्रमण कीजिए और उस हस्तशिल्प के बारे में एक रिपोर्ट बनाइए ।
उत्तर:
रिपोर्ट
आज मैंने अपने परिवार के साथ किंग्सवे कैंप स्थित गांधी आश्रम में लगी हस्तशिल्प कार्यशाला का भ्रमण किया। यहाँ आकर हमने अनेक नई तथा अद्भुत वस्तुएँ देखीं। यहाँ के खादी के कपड़े। क्या सुंदर बुनाई और सिलाई थी उनकी। इसके अलावा वहाँ हाथ से बने साबुन, कुर्सियाँ, तेल और न जाने क्या-क्या । वस्तुओं की नक्काशी इतनी अच्छी कि निगाहें नहीं हट पा रही थीं। मैंने अपने माता-पिता से कहकर एक कुरता-पाजामा, अचार, मुरब्बा तथा पापड़ खरीदे। इनके दाम पर छूट भी मिली। यह प्रदर्शनी हमें अत्यंत सुंदर तथा उपयोगी लगी ।
अथवा
राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की नीचे दी गई वेबसाइट में आपको कौन-सा हस्तशिल्प या कलाकृति सबसे अच्छी लगी और क्यों, उसके विषय में लिखिए।
https://nationalcraftsmuseum.nic .ini
नोट – छात्र यह कार्य स्वयं करें।
झरोखे से
अभी आपने जो कविता पढ़ी उसे लिखा है महादेवी वर्मा ने । अब पढ़िए इन्हीं के द्वारा लिखी एक कहानी ‘गिल्लू’ का अंश-
मेरे पास बहुत से पशु-पक्षी हैं और उनका मुझसे लगाव भी कम नहीं है, परंतु उनमें से किसी को मेरे साथ मेरी थाली में खाने की हिम्मत हुई है, ऐसा मुझे स्मरण नहीं आता।
गिल्लू इनमें अपवाद था। मैं जैसे ही खाने के कमरे में पहुँचती, वह खिड़की से निकलकर आँगन की दीवार, बरामदा पार करके मेज पर पहुँच जाता और मेरी थाली में बैठ जाना चाहता। बड़ी कठिनाई से मैंने उसे थाली के पास बैठना सिखाया जहाँ बैठकर वह मेरी थाली में से एक-एक चावल उठाकर बड़ी सफाई से खाता रहता। काजू उसका प्रिय खाद्य था और कई दिन काजू न मिलने पर वह अन्य खाने की चीजें या तो लेना बंद कर देता या झूले से नीचे फेंक देता था।
उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 103 पर दी गई कहानी का अंश स्वयं पढ़ें।
साझी समझ
‘गिल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरी पढ़िए और अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
नोट – छात्र पुस्तकालय से पूरी कहानी स्वयं पढ़ें।

खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों के माध्यम से आप महादेवी वर्मा और उनकी रचनाओं के विषय में जान, समझ सकते हैं-
महादेवी वर्मा | कवयित्री | जीवन और लेखन | हिंदी |
भाग – 1
महादेवी वर्मा | कवयित्री | जीवन और लेखन | हिंदी |
भाग – 2
https://www.youtube.com/watch?v=_uqB5M9ZX60
कविता मंजरी, बारहमासा
गिल्लू – महादेवी वर्मा
https://www.youtube.com/watch?v=uxpOlfd05K8
महादेवी वर्मा, भारतीय कवयित्री
उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 103 पर दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करें तथा समझें।