Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 6 Question Answer – Class 8 Hindi एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
जमींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
• झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी
• झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी
• वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
• वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
उत्तर:
• वह अहाते का विस्तार करना चाहता था *
प्रश्न 2.
वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी ?
• क्रोध और झगड़ा करके
• अदालत से अनुमति लेकर
• विनती और नम्रता से
• चुपचाप उठाकर ले गई
उत्तर:
• विनती और नम्रता से *
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प्रश्न 3.
वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
• दया
• लगाव
• गुस्सा
• डर
उत्तर:
• लगाव *

प्रश्न 4.
कहानी का अंत कैसा है?
• दुखद
• सुखद
• प्रेरणादायक
• सकारात्मक
उत्तर:
• सुखद *
• प्रेरणादायक *
• सकारात्मक *
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
उत्तर चुनने का कारण-
- बुढ़िया की झोंपड़ी महल के पास ही थी। जमींदार महल का अहाता बढ़ाना चाहता था। अहाता बढ़ाने के लिए झोंपड़ी हटाना आवश्यक था।
- वृद्धा दीन-हीन, अनाथ थी। वह कमजोर हो चुकी थी। उसने विनती और नम्रता से मिट्टी ले जाने की अनुमति माँगी।
- वृद्धा जब से अपनी पोती के साथ किसी अन्य स्थान पर रहने गई थी, तब से उसने खाना-पीना छोड़ दिया था । वृद्धा की पोती का यह व्यवहार उसका लगाव दर्शाता है।
- कहानी का अंत सुखद, प्रेरणादायक और सकारात्मक था, क्योंकि जमींदार को अपनी गलती का ज्ञान हो गया और बुढ़िया को झोंपड़ी मिल गई थी।
नोट – छात्र इन उत्तरों के कारणों पर स्वयं चर्चा करें।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षो से मिलाइए।

उत्तर:

(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर:
नोट – छात्र अपने मिलान पर स्वयं चर्चा करें।
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पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
उत्तर:
अर्थ जो समझ में आया-
बुढ़िया ने जमींदार से मिट्टी न उठा पाने की बात कहकर अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी को प्रतीक बनाकर उसके अन्याय का एहसास कराना चाहती थी कि यह तो तुम्हारे छोटे से अन्याय का फल है। ऐसे तो तुमने बहुत से अन्याय किए हैं। उनके भार से कैसे जी सकोगे?
(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
उत्तर:
बुढ़िया द्वारा विनती करने पर जमींदार टोकरी उठाने के लिए तैयार हो गया, परंतु मिट्टी भरी टोकरी अर्थात् उसके अन्याय उसे लज्जित कर रहे थे। उस अन्याय के बोझ और लज्जा के कारण उससे टोकरी नहीं उठाई जा रही थी।
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?

उत्तर:
मेरे विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। वह अनाथ, गरीब लाचार होकर भी हार नहीं मानती । वह अपनी बुद्धि और योजना से जमींदार को अपने ऊपर किए गए अन्याय की अनुभूति करा देती है। इससे जमींदार से हारकर भी बुढ़िया अंत में उसे हारने के लिए विवश कर देती है।
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर:
वृद्धा की पोती ने खाना इसलिए छोड़ दिया था, क्योंकि उसी झोंपड़ी में पैदा होने, पलने और बढ़ने के कारण उसे झोंपड़ी से गहरा लगाव हो गया था।
(ग) जमींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
उत्तर:
जमींदार ने रुपये-पैसे के बल पर वकीलों को मिला लिया। उन्होंने रिश्वत के बल पर अपने पक्ष में फैसला करवा लिया। अदालत के इसी फैसले के बल पर जमींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।
(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा…।” यहाँ जमींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
उत्तर:
यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का अर्थ है – बुढ़िया उससे अपनी बात कह सकती है। वह फैसला सुनने के लिए तैयार है।
(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले जमींदार का व्यवहार कैसा था ? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
पहले ज़मींदार का व्यवहार अन्यायपूर्ण था। उसने पैसों के बल पर अन्यायपूर्वक बुढ़िया की झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया था।
मिट्टी भरी टोकरी उठाने की घटना के बाद ज़मींदार का हृदय परिवर्तन हो चुका था । उसने बुढ़िया को उसकी झोंपड़ी लौटा दी।
(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” जमींदार ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर:
ज़मींदार ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि उसे अपने अन्याय और भूल का पता चल चुका था। वह खुद अन्याय के बोझ से दबकर दुख महसूस करने लगा था, इसलिए उसने झोंपड़ी वापस कर दी।
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अनुमान और कल्पना से
(क) यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?

उत्तर:
यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह कहती कि हमारे पास रहने की कोई जगह नहीं है। तुम झोंपड़ी छीन लोगे तो हम कहाँ रहेंगे। यदि हमारी झोंपड़ी छीनोगे, तो हम मर जाएँगे ।
(ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?
उत्तर:
यदि मैं ज़मींदार की जगह होता, तो बुढ़िया की विवशता महसूस करता और उसकी झोंपड़ी न छीनता ।
(ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
उत्तर:
ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता इसलिए नहीं मिली होगी, क्योंकि अपने किए हुए अन्याय के कारण वह लज्जित हो गया होगा। उसे अपनी भूल का ज्ञान हो चुका था, जिससे वह असमर्थ महसूस करने लगा था।
(घ) “झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है….।” यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेत- मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है ? )
उत्तर:
“झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है…।” यहाँ मिट्टी के बहाने कुछ और ही बात कही जा रही है। मिट्टी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार के अन्याय की बात कही जा रही है कि तुमने इस तरह के बहुत सारे अन्याय किए हैं।
(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
उत्तर:
कहानी से पता चलता है कि भारत में उस समय . स्त्रियों को अन्याय, शोषण, विवशता, गरीबी, अशिक्षा आदि का सामना करना पड़ता रहा होगा।
बदली कहानी
कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती-
• यदि जमींदार टोकरी उठाने से मना कर देता
• यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता
• यदि जमींदार मिट्टी देने से मना कर देता
• यदि जमींदार एक स्त्री होती
• यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती
अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।

उत्तर:
यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती-
एक दिन ज़मींदार कुछ लोगों के साथ झोंपड़ी के आसपास टहल रहा था। वह सबको काम बता रहा था कि किसे क्या करना है। उसी समय जमींदार ने बुढ़िया को अपनी पोती के -साथ आते देखा। वह सजग हो उठा। उसने अपने नौकरों से कहा कि बुढ़िया को रोको, झोंपड़ी में न घुसने पाए। अब वह यहाँ क्यों आ रही है, पता नहीं। नौकरों ने बुढ़िया को तो रोक लिया, पर उसकी पोती ज़मींदार के पास आ गई। जमींदार ने ऐसा सोचा भी न था कि यह छोटी बच्ची इतनी निडरता से पास आ जाएगी। उस छोटी बच्ची ने ज़मींदार से कहा, ” आप हमारे मालिक हैं। आपका काम हमारी रक्षा करना है, पर आपने हमारी झोंपड़ी हमसे छीन ली। आपके पास रहने के लिए महल है और मैं अपनी दादी के साथ खुले आसमान के नीचे…। अपनी झोंपड़ी छोड़कर जाने का हमें बहुत दुख है। मैं तो उस दिन से कुछ खा नहीं सकी हूँ। कृपया हमारी झोंपड़ी लौटा दीजिए, वरना हम मर जाएँगे। ”
छोटी बच्ची की बातों ने जमींदार पर जादू सा काम किया। वह कहीं खो सा गया था। उसे चुप देखकर छोटी बच्ची ने कहा, ‘आप मेरी विनती सुन लीजिए। ” अब ज़मींदार को होश सा आया। उसने छोटी बच्ची का हाथ पकड़कर कहा, ” जाओ, अपनी दादी को ले आओ और दोनों अपनी झोंपड़ी में रहो।” नन्हीं बच्ची के मुँह से यह बात सुनकर बुढ़िया को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, पर तब तक ज़मींदार और उसके आदमी वहाँ से जा चुके थे। बुढ़िया की पोती उसका हाथ खींचकर झोंपड़ी में ले जा रही थी। अब इन दोनों के चेहरे की खुशी देखने लायक थी।
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‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-
| इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | यहाँ “कि” एक संयोजक के रूप में प्रयोग हुआ है। संयोजक का अर्थ होता है मिलाने वाला। संयोजक शब्दों या वाक्यों को जोड़ने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। यह हमें बताता है क्या कहा गया, क्या सोचा गया, क्या देखा गया आदि। |
| ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। | यहाँ “की” एक संबंधसूचक कारक शब्द है। इसका प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम का किसी अन्य शब्द के साथ संबंध बताने के लिए किया जाता है। अन्य संबंधकारक शब्द – हैं- का और के। |
अब नीचे दिए गए वाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए-
1. वृद्धा ने कहा ……………………… वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
2. वह अपनी पोती …………………………. चिंता में दुखी हो गई थी ।
3. वृद्धा ने प्रार्थना ………………………. ………………………… टोकरी को जरा हाथ लगाइए।
4. पोती हमेशा कहती थी ……………………… वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
5. झोंपड़ी ……………………… मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
6. उसे विश्वास था ………………………… मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
7. वृद्धा …………………. आँखों से आँसुओं ……………………… धारा बहने लगी।
8. उसने यह सोचा …………………. झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
9. वृद्धा के मन …………………… पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
10. ज़मींदार इतने लज्जित हुए …………………… टोकरी उठाने की बात मान ली।
11. उस झोंपड़ी ………………. हर दीवार वृद्धा …………………………… यादों से भरी थी ।
उत्तर:
- वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
- वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी ।
- वृद्धा ने प्रार्थना की, कि टोकरी को जरा हाथ लगाइए।
- पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
- झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
- उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
- वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।
- उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
- वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
- ज़मींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली।
- उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी ।
मुहावरे
” बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। ”
(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर:
” बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया ।

(ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए ।
• बाल बाँका न होना कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना । पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।
• बाल बराबर – बहुत सूक्ष्म । बहुत महीन या पतला।
• बाल बराबर फर्क होना ज़रा सा ही भेद होना या अत्यंत सूक्ष्म अंतर होना ।
• बाल-बाल बचना कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना ।
उत्तर:
• बाल बाँका न होना सड़क दुर्घटना में छोटे बच्चे का बाल बाँका नहीं हुआ।
• बाल बराबर – डॉक्टर ने कहा कि बाल बराबर फ्रैक्चर हुआ है।
• बाल बराबर फर्क होना- तुम दोनों की ऊँचाई में बस बाल बराबर ही फर्क है।
• बाल-बाल बचनाकार की टक्कर होने पर साइकिल वाला बाल-बाल बच गया।
काल
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
• इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी।
• इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई ।
• इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ।
यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है। क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं।

काल के तीन भेद होते हैं-
1. भूतकाल – यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
2. वर्तमान काल – यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
3. भविष्य काल – यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।
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नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल
में बदलिए-
(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली ।
(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी ।
(घ) जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
उत्तर:
(क) वह गिड़गिड़ाकर बोलती है। (वर्तमान काल )
वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी। (भविष्य काल )
(ख) श्रीमान् आज्ञा देते हैं। (वर्तमान काल )
श्रीमान् आज्ञा दे देंगे। (भविष्य काल )
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगती है। (वर्तमान काल )
उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगेगी। (भविष्य काल )
(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होती है। (वर्तमान काल )
ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी। (भविष्य काल )
(ङ) वे वृद्धा से क्षमा माँगकर उसकी झोंपड़ी वापस दे देते हैं। (वर्तमान काल )
वे वृद्धा से क्षमा माँगकर उसकी झोंपड़ी वापस दे देंगे। (भविष्य काल )
वचन की पहचान
” उनके मन में कुछ दया आ गई। ”
“उनकी आँखें खुल गई। ”
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्दों में क्या अंतर है और क्यों ? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।

उत्तर:
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्द- गई ( एकवचन ) गई (बहुवचन) है।
इसका कारण यह है कि ‘गई’ शब्द ‘दया’ के लिए आया है, जो एकवचन है तथा गई शब्द आँखों के लिए आया है, जो बहुवचन है।

आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थ में अंतर आ जाता है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर …………………….. । (गई/गईं)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर ………………………. । (बोली/ बोलीं)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया …………………………… | (है/हैं)
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा ……………………………. | (थी/थीं)
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले ………………………. | (आई/आई)
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला …………………….. | (गई/गई)
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए …………………….. । (है/हैं)
उत्तर:
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। (गई/गईं)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली। (बोली/बोलीं)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।(है/हैं)
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी। (थी/थीं)
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई। (आई/आई)
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं। (गई/गई)
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं। (है/हैं)
कहानी की रचना
यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों तो…”
इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है। बात को अधूरा छोड़ने के लिए ‘…’ का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के वाक्यों और प्रयोगों से कहानी का प्रभाव और बढ़ जाता है। अनेक बार कहानी में नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए ।
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए-
उत्तर:
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए ।
उत्तर:
कहानी की विशेषताएँ-
- कहानी एक विशेष संदेश छिपाएं हुए है।
- मुहावरों का प्रयोग हुआ है।
- भाषा में चित्रमयता है।
- प्रभावपूर्ण भाषा जो पात्रानुकूल है।
- मर्म को छू लेने वाले संवादों का प्रयोग है।
- भावनात्मकता के दर्शन होते हैं।
- वर्णनात्मक शैली का प्रयोग हुआ है।
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए-
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी से उदाहरण |
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली – कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | |
| 2. वर्णनात्मकता – लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठक दृश्य को देख सकता है। | |
| 3. भावात्मकता – कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे कृतकर्म गहरे भाव दिखते हैं। | |
| 4. संवादात्मकता – पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | |
| 5. नाटकीयता- कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। | |
| 6. चरित्र चित्रण – पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। |
उत्तर:
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी से उदाहरण |
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली – कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी हैं। उसका भार आप जन्मभर कैसे उठा सकेंगे? |
| 2. वर्णनात्मकता – लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठक दृश्य को देख सकता है। | वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी । |
| 3. भावात्मकता – कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे कृतकर्म गहरे भाव दिखते हैं। | वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। का पश्चाताप कर जमींदार ने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी। |
| 4. संवादात्मकता – पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिट्टी ले जाऊँ! |
| 5. नाटकीयता- कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। | अब मैंने यह सोचा कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। |
| 6. चरित्र चित्रण – पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। | किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। |
शब्दकोश का उपयोग
आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए-

| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थ |
| 1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए | धनी शोभायुक्त, शोभावान्, संपत्तिशाली, संपन्न, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द। |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | अविवाहित लड़की एक राशि का नाम, लड़की, बड़ी इलायची । |
| 3. जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मंकान प्रासाद, अंतःपुर, पत्नी, उतरने की जगह। |
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। | काल, (बहुत अधिक समय सौभाग्य का समय, संसार, जगत, राज्यकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर, अतिकाल| |
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा आलंबन, पात्र (नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला। |
उत्तर:

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भावों की पहचान
” कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी… ‘
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए-
| पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा |
| 1. वह लज्जित होकर कहने लगे- ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी। | ममता/स्नेह |
| 2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गई। | दुख/पीड़ा |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई। | विनम्रता/विनय |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | अहंकार/ घमंड |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | बोध/आत्मज्ञान |
| 6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | आस्था/विश्वास |
| 7. ज़मींदार साहब धन मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | जुड़ाव/मोह |
| 8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | करुणा/दया |
| 9. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | क्रूरता/अन्याय |
| 10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | लज्जा/ पछतावा |
उत्तर:
| पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा |
| 1. वह लज्जित होकर कहने लगे- ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी। | लज्जा/ पछतावा |
| 2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गई। | बोध/आत्मज्ञान |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई। | करुणा/दया |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | आस्था/विश्वास |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | विनम्रता/विनय |
| 6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | ममता/स्नेह |
| 7. ज़मींदार साहब धन मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | अहंकार/ घमंड |
| 8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | जुड़ाव/मोह |
| 9. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | दुख/पीड़ा |
| 10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | क्रूरता/अन्याय |
वाक्य विस्तार
‘वृद्धा पहुँची।’
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं-
‘वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची।’ अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे- ‘थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची ।

अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
1. एक झोंपड़ी थी।
2. श्रीमान् टहल रहे थे।
3. वह खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई।
5. आगे बढ़े।

उत्तर:
- एक गरीब अनाथ विधवा की टूटी-फूटी झोंपड़ी
- श्रीमान् बुढ़िया की झोंपड़ी के पास धीरे-धीरे प्रसन्नता से टहल रहे थे।
- वह इस मिट्टी के चूल्हे पर बनी रोटी खाने लगेगी।
- वृद्धा हाथ में टोकरी थामे भारी मन से भीतर गई ।
- मिट्टी भरी टोकरी उठाने के लिए आगे बढ़े।
संवाद फोन पर
(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। जमींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह ज़िद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए ।
उत्तर:
जमींदार और वृद्धा की पोती का संवाद –
ज़मींदार – हैलो! मैं जमींदार बोल रहा हूँ।
पोती – कौन ज़मींदार ?
जमींदार – वही, जिसके महल के पास तुम्हारी झोंपड़ी थी।
पोती – वो तो तुमने छीन ली। अब क्या चाहिए?
ज़मींदार – मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस तुम्हें समझाना चाहता था।
पोती – तुम्हारा महल छीनकर कोई तुम्हें समझाए, तो कैसा लगेगा?
ज़मींदार – पर मुझे अपना अहाता बड़ा करना था, न!
पोती – क्यों, तुम्हारे रहने के लिए महल छोटा पड़ गया था क्या?
ज़मींदार – देखो, अच्छे बच्चें बात मानते हैं।
पोती – मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी, क्योंकि तुमने दादी के हृदय को दुख पहुँचाया है।
ज़मींदार – ठीक है, अपनी दादी से शाम को बात करवाना।
(ख) कल्पना कीजिए कि जमींदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे । उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा ( इमोजी ) के साथ लिखिए ।


उत्तर:


नोट – छात्र अपनी पसंद की इमोजी खुद भी लगा सकते हैं।
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पोती की भावनाएँ
“मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।”
(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय,
अ.ब.स. नगर
08 दिसंबर, 2025
विषय – अपनी झोंपड़ी बचाने के संबंध में।
महोदय,
विनम्र निवेदन यह है कि मैं अ.ब.स. नगर की निवासी हूँ। मैं अपनी बूढ़ी दादी के साथ एक झोंपड़ी में रहती हूँ । इस झोंपड़ी के पास ही ज़मींदार का महल है। वह ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाना चाहता है। वह चाहता है कि हम अपनी झोंपड़ी से निकलकर कहीं बाहर जाकर रहें। मैं अभी छोटी हूँ और दादी इतनी बूढ़ी हैं कि अब वे नई झोंपड़ी नहीं बना सकती हैं।
आपसे प्रार्थना है कि आप इस संबंध में हस्तक्षेप करके हमारी झोंपड़ी (घर) को बचाने की कृपा करें।
सधन्यवाद,
भवदीय,
अपनी दादी की प्यारी पोती

(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए-
उत्तर:
मेरी दैनंदिनी (डायरी )
शनिवार
2 मई, 20xx
आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया कि आज का दिन हमारे लिए खास था। यह खास भी दोपहर बाद ही बना। करीब दस बजे दादी टोकरी लेकर उस झोंपड़ी के पास मिट्टी लेने गई थीं, जहाँ हम पहले रहते थे। दोपहर में उन्हें खाली हाथ आते देख मन में कई शंकाएँ हुईं, पर दादी ने दूर से ही कहा, “ज़मींदार ने हमारी झोंपड़ी वापस कर दी है।” मैं तो विश्वास ही नहीं कर पा रही थी, पर दादी ने जब यह बात दुबारा कही, तो मैं उनके गले लग गई। मैं भी अब बहुत खुश हूँ। आखिर हमारी प्यारी झोंपड़ी जो वापस मिल गई है। अरे! कब नौ बज गए पता ही न चला।
शुभरात्रि
अपनी दादी की इकलौती प्यारी पोती
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए ।
उत्तर:
हमारा घर तीन कमरे वाला दो मंजिला है। इनमें नीचे दादा-दादी और ऊपर की मंजिल में माता-पिता और हम तीन भाई-बहन रहते हैं। हम सब नीचे एक साथ खाना खाते हैं। आपस में दिनभर की बातें करते हैं। हमें हमारा घर बहुत प्यारा लगता है। हम कहीं भी रहें, पर हमारा घर शाम को हमें बुला ही लेता है।
(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो ? अपना अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर:
हाँ, मेरे जन्मदिन पर पाँच साल पहले आम का छोटा-सा पौधा मिला था। उसे मैंने घर के बगल की जमीन में लगा दिया। अब उससे मीठे-मीठे आम मिलने लगे हैं। मैं इसके नीचे अक्सर खेलता हूँ। मुझे इससे बहुत लगाव है। इसे छोड़कर अन्यत्र जाना बहुत मुश्किल लगता है।
(ग) कहानी में ज़मींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए । यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
एक बार मैं अपने चाचा के साथ मोटरसाइकिल से आ रहा था। तभी सामने से एक छोटा पिल्ला आ गया। मोटरसाइकिल की ब्रेक लगाने के बाद भी पिल्ला अगले पहिए से टकरा गया। चाचाजी को यह देखकर बहुत पछतावा हुआ। मोटरसाइकिल रोककर उन्होंने उसे उठाया और घर ले आए, देखभाल की और दूध – बिस्कुट खिलाया । वही पिल्ला अब हमारे घर का सदस्य बन गया है।
(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
उत्तर:
एक बार अहंकार के कारण मैंने अपने एक सहपाठी को घर जाने के लिए किराया नहीं दिया जिससे वह दो किलोमीटर पैदल गया। बाद में मैं बहुत पछताया, अगले ही दिन खुले पैसे न होने का बहाना करके मैंने उससे माफी माँग ली।
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न्याय और समता
कहानी में आपने पढ़ा कि एक जमींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया।
(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए ।
उत्त:
हाँ, मैंने सुना है कि कई अस्पताल के डॉक्टर मरीजों से ज्यादा कमाई करने के लिए अनावश्यक दवाएँ लिखते हैं और उनके शरीर की तरह-तरह की जाँच कराते हैं। इससे कई बार मरीज ठीक हो या न हो, कंगाल हो जाता है।
(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
ऐसी स्थिति से निपटने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। इसके लिए मैं-
- सरकारी अस्पताल में जाने की सलाह दूंगा।
- कुछ डॉक्टरों से प्रार्थना करूँगा कि वे गरीब रोगियों को मुफ्त सलाह देने के लिए समय निर्धारित करें।
- जो लोग ऐसी घटनाओं से प्रभावित हैं, वे इसकी शिकायत पुलिस से करें।
(ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
” सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” यह सच है कि दयालुता के साथ किया गया न्याय अधिक प्रभावी और न्यायसंगत होता है। इसमें सच्ची शक्ति निहित होती है।
घर – घर की कहानी
क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं।
अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए । कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए ।
उत्तर:
साक्षात्कार
मैं – पिताजी, यह मकान कितना पुराना है?
पिताजी – यह मकान लगभग 40 साल पुराना है।
मैं – क्या इसे आपने बनवाया है?
पिताजी – नहीं, इसे मेरे पिताजी और तुम्हारे दादाजी ने बनवाया है।
मैं – इससे पहले आप सब कहाँ रहते थे?
पिताजी – इससे पहले हम कच्चे मकान में रहते थे, जिसमें वर्षा में पानी टपकने लगता था ।
मैं – तब तो बहुत परेशानी होती रही होगी।
पिताजी- हाँ, तब घर के बाहर छप्पर में खाना बनाना और रहना पड़ता था ।
मैं – फिर…!
पिताजी – वर्षा ऋतु बीतते ही इसकी जगह यह नया मकान बनवाया गया है।
न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।” कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए ।
उदाहरण-
सार्वजनिक शिकायत सुविधा- भारत सरकार की इस वेबसाइट पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायतें कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
https://pgportal.gov.in
जनसुनवाई— प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभ किया हुआ है। इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
https://jansunwai.up.nic.in/
सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ- भारत सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है-
https://eshram.gov.in/hi/social-security-welfare-schemes
उत्तर:
नोट – छात्र स्वयं करें। इसके लिए पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 89 पर दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करें।
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आज की पहेली
नीचे दिए गए अक्षरों से सार्थक शब्द बनाइए-

1. ट् कर्ई ओ = टोकरी
2. य् आ द = ………………… .
3. ई ल व क् = …………………
4. झू ओ ई प ड् अं = ………………..
5. जद् आ म् ई र अं = ……………….
6. त् आ इ औ क ल् = ……………….
उत्तर:
1. ट् कर्ई ओ = टोकरी/कटोरी
2. य् आ द = दया/याद
3. ई ल व क् = वकील
4. झू ओ ई प ड् अं = झोंपड़ी
5. जद् आ म् ई र अं = ज़मींदार
6. त् आ इ औ क ल् = इकलौता
खोजबीन के लिए
हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तकें आज भी उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है जो आज भी विश्व में मनोरंजन और ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से पढ़ी-पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।

उत्तर:
नोट – छात्र हितोपदेश नामक पुस्तक पुस्तकालय से लेकर पढ़ें।