Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 10 तरुण के स्वप्न Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 10 तरुण के स्वप्न Question Answer
तरुण के स्वप्न Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 8 Question Answer – Class 8 Hindi तरुण के स्वप्न Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
• सुभाषचंद्र बोस के लिए
• देश के तरुण वर्ग के लिए
• चित्तरंजन दास के लिए
• भारतवासियों के लिए
उत्तर:
• भारतवासियों के लिए

प्रश्न 2.
स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा ?
• आर्थिक असमानता से
• स्त्री-पुरुष के भिन्न धकारों से
• श्रम और कर्म की मर्यादा से
• जातिभेद से
उत्तर:
• श्रम और कर्म की मर्यादा से

प्रश्न 3.
” उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं। ” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
• हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
• उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है।
उत्तर:
• हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
• उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
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प्रश्न 4.
जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब-
• राष्ट्र की श्रम शक्ति बढ़ेगी
• तरुणों का साहस बढ़ेगा
• राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
• राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
उत्तर:
राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
तरुणों का साहस बढ़ेगा
राष्ट्र स्वाधीन बनेगा

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव – विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1.“ इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं। “ | 1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो । |
| 2.“जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” | 2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं। |
| 3.“उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं। “ | 3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा। |
उत्तर:
1. -2, 2.-3, 3.-1.
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1.“ इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं। “ | 2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं। |
| 2.“जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” | 3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा। |
| 3.“उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं। “ | 1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो । |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा । ”
(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो ।”
उत्तर –
अर्थ जो समझ में आया-
(क) सुभाषचंद्र बोस चाहते थे कि एक ऐसा समाज बने, जिसमें सभी के पास पर्याप्त धन हो, ताकि सभी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें।
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(ख) महान स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वप्न देखा था उसी से उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति और आनंद मिलता रहा। इसी की प्रेरणा से वे राष्ट्र को स्वतंत्र कराने का कार्य करते रहे।
(ग) नेताजी चाहते थे कि स्वाधीन राष्ट्र में ऐसा समाज होगा, जिसमें व्यक्तियों को समान अधिकार होंगे, किसी प्रकार का जातिभेद नहीं होगा तथा सभी आर्थिक दृष्टि से समान होंगे।
सोच-विचार के लिए
अब आप इस पाठ को पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए-
(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
उत्तर:
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने ऐसे राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था, जिसमें पुरुष और महिला के अधिकार समान हों, सभी को समान अधिकार मिलें, जातीय आधार पर कोई छोटा या बड़ा नहीं होगा तथा आर्थिक समानता होगी।
(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा ?
उत्तर-
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देश को गुलामी से मुक्ति दिलाकर स्वाधीनता की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा ।
( ग ) ” आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा ” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर-
“आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” ऐसा इसलिए कहा होगा, क्योंकि ऐसे लोग समाज के उत्थान में अपना योगदान नहीं देते हैं। वे खुद काम नहीं करके दूसरों का मनोबल गिराते हैं। ऐसे लोगों के सहारे देश की स्वाधीनता का सपना पूरा नहीं किया जा सकता है।
(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
उत्तर –
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी कई काम कर सकती है;
जैसे-
- जाति-धर्म के नाम पर संप्रदायों में न बँटे ।
- लोगों में एकजुटता बनाए रखने का प्रयास करें।
- सभी धर्मों का समान आदर करें।
- अफवाहों पर ध्यान न दें तथा धर्म के नाम पर गुमराह न हों।
- राष्ट्रविरोधी ताकतों के बहकावे में न आएँ।
- देश के लिए तन, मन और धन देने के लिए तैयार रहें।
अनुमान और कल्पना से
(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी ?
उत्तर:
- सुभाषचंद्र बोस ने –
- आर्थिक असमानता
- अधिकारों में भिन्नता
- शिक्षा के अवसरों की असमानता
- आलस्य और अकर्मण्यता आदि दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी।
(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान ‘अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
उत्तर-
” उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात इसलिए कहनी पड़ी क्योंकि उस समय समाज में पुरुष और महिला के अधिकारों में असमानता थी। महिलाओं को घर की चार दीवारी तक सीमित कर दिया गया था। इससे वे समाज की उन्नति में अपना योगदान नहीं दे पा रही थीं।
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(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर:
हमारे समाज में उन लोगों को विशेष अधिकार देने की आवश्यकता है जो-
- शिक्षा से वंचित हैं।
- आर्थिक अभावों में जी रहे हैं।
- समाज में अछूत समझे जाते हैं।
- अपमानित जीवन जीने को विवश हैं।
(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं- “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं- “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही इसलिए सीमित रहा होगा, क्योंकि उस भीड़ को जिसे नेताजी संबोधित कर रहे थे, उसमें तरुण वर्ग की संख्या बहुत अधिक रही होगी महिलाओं की संख्या बहुत कम रही होगी।
(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ- स्वीकार करो। ” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं ( युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
उत्तर:
” यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ-स्वीकार करो। ” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही होगी। श्रोताओं की रगों में स्वाधीनता की भावना दौड़ गई होगी। वे जोश, उमंग तथा कर्तव्यनिष्ठा से भर उठे होंगे। वे अपनी स्वाधीनता पाने के लिए लालायित हो गए होंगे।
शीर्षक
(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर-
यह शीर्षक इसलिए दिया गया होगा, क्योंकि तरुण वर्ग इस देश का भविष्य है। वह आजादी में जीने का सपना देखता होगा, जिसे पूरा करने के लिए त्याग और बलिदान करने का जोश आवश्यक था।
नोट- छात्र अपने समूह में इस बारे में स्वयं चर्चा करें।
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(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो, तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर:
यदि मुझे भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो, तो मैं नाम दूँगा- ‘जागो युवाओ’। इसका कारण यह है कि युवा वर्ग में जागरूकता बढ़े। वह देश एवं समाज के लोगों की पहली जरूरत (स्वाधीनता) महसूस करे और इसे पाने के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार हो जाए ।
(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले, तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो मैं- ऊँची शिक्षा पाने, जाति-धर्म के विवादों से दूर रहने, सपनों की दुनिया में न खोए रहने, देशप्रेम की भावना बनाए रखने, आलस्य और अकर्मण्यता का त्याग करने तथा ऊँच-नीच की भावना त्यागने जैसे विषयों को संबोधित करूँगा।
मैं इसका शीर्षक रखूँगा – ‘देश को युवाओं से अपेक्षा’ ।
भाषा की बात
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए-

उत्तर:

(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
उत्तर-
मैं इन शब्दों को निम्नलिखित विशेषताओं के साथ रखना चाहूँगा-

इसका कारण यह है कि ये शब्द भी उक्त शब्दों की विशेषता बता रहे हैं।
विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
(क) “ और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने- सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-

उत्तर:
1. – (iii), 2. – (v), 3. – (vi), 4. – (vii), 5. – (ii), 6. – (i), 7. – (iv).

(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे- “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है। ”
उत्तर:
- मुझे तुम्हारी दो बातें स्वीकार हैं, बाकी सब अस्वीकार हैं।
- ‘पानी-वानी’ शब्द युग्म में पानी सार्थक शब्द है, जबकि ‘वानी’ निरर्थक शब्द है।
- पहले समाज में बहुत विषमता थी, पर अब धीरे- धीरे समानता आ रही है।
- यह टीला बहुत क्षुद्र है, जबकि वह पर्वत विशाल है।
- कुछ संपन्न लोगों ने इन विपन्न लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है।
- इस समूह में अकर्मण्य व्यक्ति नहीं रहेंगे, केवल कर्मठ लोग ही रहेंगे।
- इस सृष्टि में मरण है, तो जीवन भी है।
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पाठ से आगे
आपकी बात
(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।

उत्तर:
विद्यालय के बारे में मेरे स्वप्न-
- हमारा विद्यालय साफ़-सुथरा हो।
- किसी छात्र से भेदभाव न किया जाए।
- प्रयोगशाला और पुस्तकालय सुसज्जित हों।
- हर जगह साफ़-सफ़ाई हो।
- पानी की समुचित व्यवस्था हो।
- पढ़ाई की उत्तम व्यवस्था हो।
- कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- नोट- राज्य और देश के बारे में छात्र स्वयं लिखें।
(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
बड़े संघर्षो के बाद मिली स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए मैं-
- देश विरोधी कोई कार्य नहीं करूँगा ।
- देश से जुड़ी कोई जानकारी किसी अपरिचित को नहीं दूँगा ।
- देश की आन-बान और शान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार रहूँगा ।
- लोगों से एकता बनाए रखने की प्रार्थना करूंगा।
मिलान कीजिए
(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:
1. – 6, 2. – 4, 3.- 5, 4.- 2, 5.- 1, 6. – 3.

(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए ।
उत्तर:
देशबंधु चित्तरंजन दास
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सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन’ की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए किए गए उल्लेखनीय प्रयास –
- कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए योजनाएँ बनाई गईं।
- शिक्षा प्रसार के लिए विद्यालय खोले गए ।
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया।
- रोजगार हेतु कार्यक्रम चलाए गए।
स्त्री सशक्तीकरण
(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधि कार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर:
स्त्रियों को मिले कुछ विशेषाधिकार हैं-
- मातृत्व लाभ
- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से मुक्ति
- घरेलू हिंसा से सुरक्षा
- समान काम के लिए समान वेतन
- पैतृक संपत्ति में अधिकार
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए ।
उत्तर:
1943 में सुभाषचंद्र बोस द्वारा झाँसी की रानी रेजिमेंट बनाई गई। यह आजाद हिंद फौज की महिला टुकड़ी थी। इसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध किया गया। इस युद्ध में इस महिला टुकड़ी ने बर्मा के मोर्चों पर जापानी सेना के साथ मिलकर युद्ध किया था।
आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी
आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय ( रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर:
मैं अमर शहीद भगत सिंह से प्रभावित हूँ। वे अपने आप में अनूठे स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने असेंबली में बम फेंका। उनको जॉन सांडर्स की हत्या का दोषी ठहराया गया। उन्हें 23 मार्च, 1931 को लाहौर षडयंत्र में फाँसी दे दी गई।
नोट- छात्र स्वयं बताएँ कि वे किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं।
छात्र स्वयं अभिनय करें।
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“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ नारे के माध्यम से आह्वान किया था। स्वाधीनता संग्राम के दौरान और भी बहुत से नारे दिए गए। ये नारे स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, निर्भीकता और देश-प्रेम को दर्शाते हैं। नीचे स्तंभ 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

उत्तर:
| नारा | स्वतंत्रता सेनानी |
| स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। | बाल गंगाधर तिलक |
| करो या मरो | महात्मा गांधी |
| मैं आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा और आज़ाद ही मरूँगा | चंद्रशेखर आज़ाद |
| इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद | भगतसिंह |
| पूर्ण स्वराज | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रस्ताव जो जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पारित हुआ। |
परियोजना कार्य
आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक- – दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुने।
उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 149 पर दी गई गतिविधि स्वयं पढ़ें तथा करें।
झरोखे से
आपने जो पाठ पढ़ा है उसमें सुभाषचंद्र बोस तरुणों से अपने सपनों की बात करते हैं। अब आप नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा लिखित पत्र पढ़िए जिसमें उन्होंने गृह एवं कुटीर उद्योग पर अपने विचार व्यक्त किए हैं-
गृहउद्योग के विषय में नेताजी का एक पत्र
मुझे जहाँ तक याद है (मैं मात्र एक बार ‘पॉलिटेकनीक’ में गया था), पॉलिटेकनीक के सभी कामों में एकमात्र बेंत का काम अथवा मिट्टी के खिलौने बनाने का काम हमें गृह उद्योग के रूप में चलाना होगा। अब यदि अंत में मिट्टी के खिलौने बनाने का काम चलाने का प्रस्ताव हो तो कोई भी कुछ दिनों में ही यह काम सीख सकता है। खर्च कुछ भी नहीं लगेगा और हम जब गृह उद्योग प्रारंभ करेंगे तब मात्र रंगों के लिए कुछ नकद रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा बहुत कम खर्च होगा।
एक बात मेरे मन में बार-बार उठती रहती है- पहले भी शायद इस विषय में मैंने लिखा है- सीप के बटन तैयार करना। बंगाल के बहुत-से गाँवों में यह काम घर-घर में हो रहा है। गरीब गृहस्थों के घरों में स्त्री-पुरुष अपनी फुरसत के समय में यह काम करते रहते हैं। किसी एक कार्यकर्ता को बहुत कम समय में यह काम सिखाया जा सकता है। अथवा यह काम जानने और सिखाने वाले एक नए कार्यकर्ता को आप लोग नियुक्त कर सकते हैं। मुझे लगता है कि पत्थरों के ऊपर घिसकर बटन बनाया जा सकता है— हम चाहें तो बना सकते हैं। सिर्फ पतला कोई यंत्र हो जिससे छेद किया जा सके। इसके अलावा गोल काटने के लिए एक धारदार यंत्र की आवश्यकता पड़ सकती है। समिति की ओर से कुछ यंत्र और एक बोरा सीप मँगाकर ही यह काम प्रारंभ किया जा सकता है। काम सहायता प्रार्थियों में आबद्ध रहेगा, किंतु एक बार कारगर होने पर आप देखेंगे कि गरीब परिवार अपनी आय बढ़ाने के लिए यह काम स्वयं आरंभ कर देगा। समिति सिर्फ सस्ते दामों में रॉ मैटीरियल आदि जुटा देगी और तैयार वस्तुओं को अधिक दामों में बेचने की व्यवस्था करेगी। यह काम आरंभ करना पड़ा तो पहले-पहल इसके लिए बहुत अधिक समय देना होगा।
बंगाल में बटन-निर्माण गृह-उद्योग के रूप में ही चल रहा है। बहुतों का खयाल है कि बंगाल के बटन फैक्टरी में बनते हैं किंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। गाँव-देहात के घर-घर में, फुरसत के समय, यहाँ तक कि रसोई के समय में से बचे खाली समय में भी, स्त्रियाँ यह काम करती रहती हैं इसीलिए इतने सस्ते में यह बटन मिलते हैं।
– दक्षिण कलकत्ता सेवक-समिति के उप-मंत्री, श्री अनिलचंद्र विश्वास को मांडले जेल से लिखे गए सुभाषचंद्र बोस के पत्र से।
उत्तर:
नोट- छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 149 पर दिया गया सुभाषचंद्र बोस द्वारा लिखित पत्र स्वयं पढ़ें तथा चर्चा करें।
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साझी समझ
उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
नोट- छात्र पत्र पढ़कर स्वयं चर्चा करें।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके आप सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म देख सकते हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=u_zmDD54dU4
‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर:
नोट- इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके छात्र स्वयं फिल्म देखें।