Daily practice of Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 1 स्वदेश कविता Question Answer builds a strong language foundation over time.
Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश Question Answer
स्वदेश Class 8 Question Answer
Class 8 Malhar Chapter 1 Question Answer – Class 8 Hindi स्वदेश Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

प्रश्न 1.
“ वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-
• सामाजिकता से
• संवेदनहीनता से
• कठोरता से
• नैतिकता से
उत्तर:
• संवेदनहीनता से*
प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
• देश की प्रगति
• देश के प्रति प्रेम
• देश की सुरक्षा
• देश की स्वतंत्रता
उत्तर:
• देश के प्रति प्रेम * • देश की स्वतंत्रता *
प्रश्न 3.
“हम हैं जिसके राजा-रानी” – इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

• देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
• देश की शासन व्यवस्था के लिए
• देश के समस्त नागरिकों के लिए
• देश के सभी प्राणियों के लिए
उत्तर:
• देश के समस्त नागरिकों के लिए *
प्रश्न 4.
कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
• जिसमें साहस की कमी है।
• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है।
• जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है।
• जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है।
उत्तर:
• जिसमें स्नेह का भाव नहीं है * • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है। *
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(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
उत्तर चुनने के कारण-
हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि-
- संवेदनहीन हृदय किसी प्रकार के सुख-दुख या भावना का अनुभव नहीं कर पाता है। उसमें प्रेम, सद्भाव, लगाव, अपनापन आदि भावनाएँ न जन्म लेती हैं और न विकसित होती हैं। अतः ‘वह हृदय नहीं है पत्थर है’ में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य न होकर संवेदनहीनता है।
- ‘देशप्रेम’ कविता का मुख्य विषय ‘देश के प्रति प्रेम’ और ‘देश की स्वतंत्रता’ है। कविता के शीर्षक से भी यह बात स्पष्ट हो जाती है। इसके अलावा पूरी कविता में इन्हीं भावों की अभिव्यक्ति है न कि देश की प्रगति और उसकी सुरक्षा की।
- हम हैं जिसके राजा-रानी – पंक्ति में ‘हम’ शब्द देश के समस्त देशवासियों के लिए आया है। इसका कारण है कि देश ने यहाँ रहने वालों को अनेकानेक सुख-सुविधाएँ प्रदान की हैं। देशवासी इनका उपभोग कर रहे हैं। इसका प्रयोग प्राकृतिक संसाधनों, शासन व्यवस्था या प्राणियों के लिए नहीं हुआ है।
- कविता के अनुसार वह हृदय पत्थर के समान है जिसमें स्नेह और देशप्रेम का भाव नहीं है, क्योंकि इन भावनाओं के अभाव में संवेदनशील होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसके अलावा ऐसा हृदय अपने देश से प्रेम नहीं कर सकता है। नोट – छात्र इन उत्तरों पर स्वयं चर्चा करें।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया. वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 1. जिस देश की ज्ञान संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
उत्तर:
1 – 3; 2 – 4; 3 – 1; 4 – 2.
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया. वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 1. जिस देश की ज्ञान संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “ निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।।”.
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”.
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं हैं, पत्थर है.
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”
उत्तर:
– अर्थ जो समझ में आया-
(क) शरीर की नश्वरता की ओर संकेत करते हुए कवि का कहना है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि मृत्यु निश्चित है। एक न एक दिन सभी को मरना है। काल रूपी दीपक हर समय जल रहा है। मनुष्य को इसी लौ में एक दिन जल जाना है। अतः मौका मिलने पर देश के लिए प्राणों का त्याग करके सुमृत्यु का अवसर नहीं खोना चाहिए।
(ख) कवि मनुष्य से कहता है कि अपने हाथों में तोप भी है, तलवार भी है; बस देश के लिए कुछ कर जाने का साहस और उत्साह होना चाहिए, जिससे देश के लिए हम काम आ सकें। जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह पत्थर के समान है।
(ग) जिस हृदय में देशप्रेम, देशभक्ति, त्याग, बलिदान आदि भाव नहीं हैं और देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना की धार नहीं बहती है, वह हृदय पत्थर के समान संवेदनहीन है।.
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सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) “हम हैं जिसके राजा- -रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर:
“हम हैं जिसके राजा-रानी” हम समस्त भारतवासियों को कहा गया है। इसका कारण यह है कि वे देश द्वारा दी गई सुख-सुविधाओं का लाभ उठाते हुए सुखमय जीवन जी रहे हैं।
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर:
संसार-संग चलने का अर्थ है- दुनिया के अन्य देशों के समान ही प्रगति पथ पर अग्रसर रहना तथा विभिन्न क्षेत्रों में नई उपलब्धि हासिल करते रहना। जो व्यक्ति संसार के साथ नहीं चलता, वह पिछड़ जाता है, जबकि संसार के अन्य देश आगे निकल जाते हैं। ऐसे में वह संसार से अलग पड़ जाता है।
(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
“उस पर है नहीं पसीजा जो / क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से मैं यह समझता हूँ कि जो भी व्यक्ति अपने देश से प्रेम नहीं करता, देश के लिए त्याग और बलिदान के लिए तैयार नहीं रहता है, वह पृथ्वी पर बोझ के समान है।
(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
मैं देश-प्रेम से निम्नलिखित भाव समझता हूँ-
- देश को सर्वोपरि समझना।
- देश के मान-सम्मान का सदैव ध्यान रखना।
- देश के प्रति प्रेम अपना समझना, त्याग आदि भाव बनाए रखना।
- देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहना।
(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर:
‘स्वदेश’ नामक आह्वान गीत की अन्य विशेषताएँ-
- देश के गौरव का ज्ञान कराना।
- देशप्रेम रखने की प्रेरणा देना।
- संसार के साथ चलने की प्रेरणा देना।
- मृत्यु की निश्चितता बताकर देश के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने का भाव जगाना।
- देश द्वारा दिए गए सुखों का ज्ञान कराकर कृतज्ञता का भाव जगाना।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
उत्तर:
“जिसने कि खजाने खोले हैं” इस पंक्ति में देश द्वारा उस खजाने को खोलने की बात कही गई है, जिसमें तरह-तरह के रत्न, धन-दौलत और सुख-सुविधाएँ भरी हैं। इसका लाभ भारतवासी उठाकर सुखमय जीवन जी रहे हैं।
(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर-
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ भारत में रहने वालों के लिए कहा गया होगा, क्योंकि हम भारतीय यहाँ की मिट्टी पर जन्म लेकर बड़े होते हैं। इसी मिट्टी में उपजे अनाज का सेवन करके हम बड़े होते हैं और हृष्ट-पुष्ट होते हैं।
(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
“वह हृदय नहीं है पत्थर है” का प्रयोग इसलिए किया गया होगा, क्योंकि देश की मिट्टी पर जन्म लेकर, यहाँ के अन्न, जल, वायु का सेवन करके पलने-बढ़ने के बाद भी व्यक्ति यदि अपने देश से लगाव नहीं रखता है और देश के प्रति प्रेम नहीं करता, तो वह हृदय पत्थर के समान ही होता है।
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत – पत्थर- जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।… )
उत्तर:
पत्थर द्वारा बताई गई बातें-
किसी समय मैं भी एक बड़े पहाड़ का भाग हुआ करता था। एक बार बादल फटे और मैं अपने सैकड़ों छोटे-बड़े साथियों के साथ नीचे लुढ़कने लगा। नदी की गोद में आते-आते मैं पत्थर की शिलाओं से टकराकर सुडौल बन गया । पर कितना दर्द हुआ, यह बता नहीं सकता। अपने घर से अलग होने और घिसने पिटने का दर्द। ये छोटे-बड़े जो तुम देख रहे हो, वे हमारे ही पूर्वज और भाई-बंधु हैं।
मैं- अच्छी-बुरी परिस्थितियाँ तो सभी के साथ आती रहती हैं। तुमने सुना होगा –
‘सुखरू होता है इंसा ठोकरें खाने के बाद।’ तुम्हारी यह सुडौलता और सुंदरता उन्हीं कष्टों को झेलने का परिणाम है।
(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
देश की अनेक वस्तुओं और संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता है; जैसे-
- जल के स्रोत ; जैसे नदी कुएँ, तालाब आदि।
- पेड़-पौधे और वनस्पतियाँ
- वन्य जीव
- देश की कृषि योग्य भूमि
इनके संरक्षण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इनके बिना धरती पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।
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कविता की रचना
“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें हम हैं जिसके राजा-रानी।।”
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
- शब्दों के तुक मिलाने से-
- कविता में गेयता आ जाती है।
- कविता में सरसता आ जाती है।
- सरलता से याद हो जाती है।
- कविता रुचिकर हो जाती है।
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर:
कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए-
- शब्द चयन
- सरल भाषा
- देश काल के अनुरूप विषय का चयन
- संदेशयुक्त होना
- काल्पनिकता के साथ-साथ चित्रमयता
- बिंबों का प्रयोग आदि होने चाहिए।
नोट- समूह बनाकर छात्र स्वयं चर्चा करें।
आपकी कविता
देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
__________________________
__________________________

उत्तर:
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें भाव – विचार नहीं।
जो डूबा रहता सदा स्वार्थ में,
जिसमें त्याग और उपकार नहीं।
जो सुख लेता इसी देश का,
पर कुछ करने को तैयार नहीं।
देशप्रेम का भाव जगा लो,
इतने तो लाचार नहीं।
नोट – छात्र स्वयं कविता की पंक्तियाँ जोड़ने का प्रयास करें।
भाषा की बात
(क) शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर
अपनी सूची बढ़ाइए-

उत्तर:

(ख) विराम चिह्नों को समझें
“जो चल न सका संसार-संग”
“बहती जिसमें रस धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी”
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी”
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”


कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत- ‘जो चल न सका संसार के संग’)
उत्तर:
“बहती जिसमें रस की धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना और पानी”
“हैं माता और पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा और रानी”
“जिससे न जाति का उद्धार हुआ”
(ग) शब्द – मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल – दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है।’
‘काल – दीप हरदम जलता है।’
• अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।
उत्तर:
• जो भरा नहीं है भावों से
जो भावों से नहीं भरा है।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
माता-पिता बंधु जिनमें हैं।
हम हैं जिसके राजा-रानी,
हम जिसके राजा-रानी हैं।
नवरत्न दिए हैं लासानी,
लासानी नवरत्न दिए हैं।
जिस पर है दुनिया दीवानी,
जिस पर दुनिया दीवानी है।
उस पर है नहीं पसीजा जो,
जो उस पर पसीजा नहीं है।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
निस्संशय निश्चित हैं।
सब कुछ है अपने हाथों में,
अपने हाथों में सब कुछ है।
• अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।
“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।।”
उत्तर:
• हैं जिस पर ज्ञानी भी मरते,
है जिस पर दुनिया दीवानी।
• इन पंक्तियों में क्रियापद पहले आ गया है।
• लयात्मकता में अंतर आ गया है।
नोट – छात्र अपने साथियों से स्वयं चर्चा करें।
(घ) समानार्थी शब्द
कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

भू, दीप, हृदय, तलवार, दुनिया, पत्थर ।
उत्तर:
भू-धरा, पृथ्वी दीप-दीपक, प्रदीप; हृदय-दिल, जी; तलवार-असि कृपाण दुनिया-संसार, जग; पत्थर-पाहन, पाषाण।
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कविता का शीर्षक
“वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
उत्तर:
कविता के शीर्षक के लिए पंक्ति-
जिस पर है दुनिया दीवानी ।
इसका कारण यह है कि भारत की प्राकृतिक सुंदरता, यहाँ की समृद्धि, इसकी संस्कृति, अतिथि सत्कार की भावना आदि के कारण विश्व के लोग भारत के दीवाने हैं।
पाठ से आगे
आपकी बात
(कं) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए, जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?
उत्तर:




(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
उत्तर:
जिन चित्रों पर (✓) का चिह्न लगा है, उन्हें हम स्वदेश प्रेम की श्रेणी में रखना चाहेंगे, क्योंकि इन कार्यों से देश के प्रति प्रेम प्रकट होता है। इसके अलावा
- रेलगाड़ी में कूड़ा फेंकना
- इमारतों को गंदा करना
- बिना कारण बिजली का अपव्यय करना
- पानी बर्बाद होने देना आदि को स्वदेश प्रेम की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।
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हमारे अस्त्र-शस्त्र
“सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।

आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
• विद्यार्थी- _________________________________
• अध्यापक- _________________________________
• कृषक- _________________________________
• चिकित्सक – _________________________________
• वैज्ञानिक- _________________________________
• श्रमिक – _________________________________
• पत्रकार- _________________________________
उत्तर:
• विद्यार्थी- पुस्तकें, कॉपियाँ, कलम, पेंसिलें, ज्योमेट्री बॉक्स आदि।
• अध्यापक- कलम, पुस्तक, डस्टर, मानचित्र आदि।
• कृषक- खुरपा, फावड़ा, कुदाल, ट्रैक्टर, स्प्रेयर आदि।
• चिकित्सक – दवाएँ, इंजेक्शन, थर्मामीटर, कैंची, पट्टी, स्टेथोस्कोप आदि।
• वैज्ञानिक- उपकरणों से प्रयोगशाला तथा रसायन आदि।
• श्रमिक – फावड़ा, टोकरी, कस्सी करनी, बसूली आदि।
• पत्रकार- कैमरा, कलम, मोबाइल फोन, रिकॉर्डर आदि।
अपनी भाषा अपने गीत
(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
उत्तर:
पुष्प की अभिलाषा
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ देना वनमाली !
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक। – माखनलाल चतुर्वेदी
नोट – छात्र ऐसे ही गीतों और कविताओं का संकलन स्वयं करें।
(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
नोट – छात्र किसी एक गीत की प्रस्तुति स्वयं भी दें।
तिरंगा झंडा – कब प्रसन्न और कब उदास
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा ) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
उत्तर:
जब तिरंगा प्रसन्न हुआ होगा-
- टिकट लेकर बस द्वारा स्कूल पहुँचना
- सावधान मुद्रा में राष्ट्रगान में शामिल होना
- भारतमाता की जय बोलना
- अनुशासन में रहकर पढ़ाई करना
- साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना
- कूड़ा-करकट न फैलाना
- अन्य भाषा-भाषी भिन्न प्रांतों के सहपाठियों तथा अन्य धर्मावलंबी छात्रों के साथ मिल-जुलकर रहना।
जब तिरंगा उदास हुआ होगा-
- राष्ट्रगान के समय सावधान न खड़ा होना
- तिरंगे झंडे को सलूट न करना
- धर्म के नाम पर लड़ना-झगड़ना
- अपने देश की बुराई करना
झरोखे से
आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।

उत्तर:
नोट – छात्र पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 12 पर दिया गया गीत स्वयं पढ़ें।
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साझ समझ
आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर:
नोट – छात्र ‘खादी गीत’ नामक कविता इंटरनेट से ढूँढ़कर स्वयं पढ़ें।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं-
• सारे जहाँ से अच्छा
• दीवानों की हस्ती
• झाँसी की रानी
उत्तर:
नीचे ( पाठ्यपुस्तक में) दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ स्वयं पढ़ें।