चुनाव स्थल के दृश्य का वर्णन निबन्ध – An Election Booth Essay In Hindi

An Election Booth Essay In Hindi

चुनाव स्थल के दृश्य का वर्णन निबन्ध – Essay On An Election Booth In Hindi

संकेत बिंदु:

  • भारत एक लोकतांत्रिक देश
  • दिल्ली नगर निगम का चुनाव 2012
  • मतदान केंद्र का वर्णन
  • दो पार्टियों ।
  • में झगड़ा
  • पुलिस द्वारा बीच-बचाव।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

मतदान केंद्र का आँखों देखा वर्णन (Matdan Kendra Ka Aankhon Dekha Varnan) – Polling station eyes seen description

स्वतंत्रता के बाद भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुई। भारत एक लोकतांत्रिक देश बना। लोकतांत्रिक सरकार के गठन में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य निष्पक्ष मतदान का प्रावधान किया गया। जनता अपना बहुमूल्य मत देकर अपने प्रतिनिधि चुनकर राज्य की विधानसभाओं और संसद में भेजती है।

अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोग मतदान करते वर्तमान में दिल्ली को राज्य का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसकी विधानसभा और नगर निगम के लिए प्रत्येक पाँच वर्ष पर चुनाव होते हैं। 2012 में हुए नगर निगम के चुनाव के एक मतदान केंद्र पर मुझे पिता जी के साथ जाने का अवसर मिला, जहाँ मुझे यह विशेष अनुभव प्राप्त हुआ।

मैं चुनाव के दिन लगभग 11 बजे मतदान केंद्र पहुँचा। यह केंद्र द्वारका में स्थित था। मतदान केंद्र के बाहर सड़क पर बहुत से लोग और विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता जमा थे। वे अपनी-अपनी पार्टी के झंडे और बैनर टाँगे थे। कुछ तख्त पर यूँ बैठे थे, मानो दुकानदार हों। वे लोगों को पर्चियों देने का प्रयास कर रहे थे, जिन पर पता, मतदाता क्रमांक, बूध संख्या आदि लिखे थे। मैंने उत्साहपूर्वक पिता जी के नाम की पर्ची ले ली।

मतदान केंद्र के बड़े से द्वार पर सशस्त्र जवान तैनात थे। वे गहन तलाशी के बाद ही अंदर प्रवेश की अनुमति दे रहे थे। उन्होंने पिता जी के अनुरोध पर मुझे भी अंदर जाने दिया। अंदर कई-कई कतारें लगी थीं। सभी कतारों के लिए अलग-अलग बूथ बने थे।

धूप थी, पर मन में उमंग थी, सो मैं भी पिता जी के साथ लाइन में लग गया। इतने में एक बूथ पर अंदर कुछ लोगों के झगड़ने की आवाजें आने लगीं। बाद में पता चला कि किसी पार्टी का एजेंट किसी को विशेष चुनाव-चिहून का बटन दबाने को कह गया था, जिस पर दूसरे लोगों ने आपत्ति की।

मैंने देखा कि सभी कतारों में युवा, प्रौढ़ और वृद्ध उत्साहपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे।

करीब बीस मिनट बाद मैं भी पिता जी के साथ अंदर गया। वहाँ आवश्यक कार्यवाही के बाद कोने में रखी ई.वी.एम. का बटन दबाते ही विप बज उठी और मतदान हो गया। मैं पिता जी के साथ हर्षोल्लास के साथ बाहर आ गया। अभी कैंपस के बाहर निकल ही रहा था कि कुछ कार्यकर्ता अपने नेता के समर्थन में नारे लगाने लगे।

अपने नेता को देख वे जोश में होश खोकर दूसरी पार्टी के नेता को अपशब्द कह बैठे, जिसका उस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी अपशब्दों से ही जवाब दिया। अब तक झगड़ा शुरू हो गया। वे मारपीट पर उतारू हो गए, पर सतर्क पुलिस के जवानों ने स्थिति सँभाल ली और उनके नेता को वहाँ से हटाया, तब स्थिति सामान्य हो सकी। मतदान केंद्र का एक नया अनुभव लिए मैं घर वापस आ गया।

विज्ञापन के प्रभाव – Paragraph Speech On Vigyapan Ke Prabhav Essay In Hindi

Paragraph Speech On Vigyapan Ke Prabhav Essay In Hindi

विज्ञापन के प्रभाव – Paragraph Speech On Vigyapan Ke Prabhav Essay In Hindi

संकेत बिंदु :

  • विज्ञापन का अर्थ
  • विज्ञापन का प्रभाव
  • विज्ञापन से लाभ
  • विज्ञापन भारतीय
  • संस्कृति के लिए घातक।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

विज्ञापन-कितने सच्चे कितने झूठे (Vigyapan Kitne Sache Kitne Jhoothe)- Advertisement – How True How False

मनुष्य अपने जीवन को सुख-सुविधामय बनाने के लिए विभिन्न वस्तुओं का उपयोग और उपभोग करता है। उसे लगने लगा है कि उपभोग ही सुख है। उस पर पाश्चात्य उपभोक्तावाद का असर हो रहा है, इसी का फायदा उठाकर उत्पादक अपनी वस्तुओं को बढ़ा-चढ़ाकर उसके सामने प्रस्तुत करते हैं। इसे ही विज्ञापन कहा जाता है। आजकल इसका प्रचार-प्रसार इतना अधिक हो गया है कि वर्तमान को विज्ञापन का युग कहा जाने लगा है।

विज्ञापन ने हमारे जीवन को अत्यंत गहराई से प्रभावित किया है। यह हमारा स्वभाव बनता जा रहा है कि दुकानों पर वस्तुओं के उन्हीं ब्रांडों की माँग करते हैं जिन्हें हम समाचार पत्र, दूरदर्शन या पत्र-पत्रिकाओं में दिए गए विज्ञापनों में देखते हैं। हमने विज्ञापन में किसी साबुन या टूथपेस्ट के गुणों की लुभावनी भाषा सुनी और हम उसे खरीदने के लिए उत्सुक हो उठते हैं।

विज्ञापनों की भ्रामक और लुभावनी भाषा बच्चों पर सर्वाधिक प्रभाव डालती है। बच्चे चाहते हैं कि वे उन्हीं वस्तुओं का प्रयोग करें जो शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन या प्रियंका चोपड़ा द्वारा विज्ञापित करते हुए बेची जा रही हैं। वास्तव में बच्चों का कोमल मन और मस्तिष्क यह नहीं जान पाता है कि इन वस्तुओं के सच्चे-झूठे बखान के लिए ही उन्होंने लाखों रुपये एडवांस में ले रखे हैं।

यह विज्ञापनों का असर है कि हम कम गुणवत्ता वाली पर बहुविज्ञापित वस्तुओं को धड़ल्ले से खरीद रहे हैं। दुकानदार भी अपने उत्पाद-लागत का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों पर खर्च कर रहे हैं और घटिया गुणवत्ता वाली वस्तुएँ भी उच्च लाभ अर्जित करते हुए बेच रहे हैं। उत्पादनकर्ता मालामाल हो रहे हैं और उपभोक्ताओं की जाने-अनजाने जेब कट रही है।

विज्ञापन का लाभ यह है कि इससे हमारे सामने चुनाव का विकल्प उपस्थित हो जाता है। किसी उत्पादक विशेष का बाज़ार से एकाधिकार खत्म हो जाता है। उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्य और गुणवत्ता का तुलनात्मक अध्ययन कर आवश्यक वस्तुएँ खरीदते हैं, परंतु इसके लिए इनकी लुभावनी भाषा से बचने की आवश्यकता रहती है।

विज्ञापन भारतीय संस्कृति के लिए हितकारी नहीं। आज कोई भी विज्ञापन हो या किसी आयुवर्ग के विज्ञापन हों, पुरुषोपयोगी वस्तुओं का विज्ञापन हो, बच्चों या महिलाओं के प्रयोग की वस्तुओं का विज्ञापन हो, नारी के नग्नदेह के बिना पूरा नहीं होता। अनेक विज्ञापन परिवार के सदस्यों के साथ नहीं देखे जा सकते हैं।
एक ओर विज्ञापनों से वस्तुओं का मूल्य बढ़ रहा हैं, तो दूसरी ओर बच्चों का कोमल मन विकृत हो रहा है और वे जिद्दी होते जा रहे हैं। विज्ञापनों में छोटे होते जा रहे नायक-नायिका के वस्त्रों को देखकर युवावर्ग में भी अधनंगानप बढ़ रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग का वजट विज्ञापनों के कारण बिगड़ रहा है। हमें बहुत सोच-समझकर ही विज्ञापनों पर विश्वास करना चाहिए।

रेलवे प्लेटफार्म का दृश्य पर निबंध – Railway Platform Ka Drishya Essay In Hindi

Railway Platform Ka Drishya Essay In Hindi

रेलवे प्लेटफार्म का दृश्य पर निबंध – Essay On Railway Platform Ka Drishya In Hindi

संकेत बिंदु :

  • भूमिका
  • पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का आँखें देखा वर्णन
  • टिकट लेने के दौरान संघर्ष
  • कोलाहलपूर्ण वातावरण
  • भीड़ देखकर वापस घर आना।

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घूमना-फिरना मनुष्य के स्वभाव का अंग है। वर्तमान की भागमभाग वाली जिंदगी में उसे कुछ ज्यादा ही घूमने-फिरने का अवसर मिल जाता है। पिछली गर्मियों में मुझे भी अपने मित्र के साथ हरिद्वार जाने का अवसर मिला, जब मैंने रेलवे स्टेशन पर ऐसा दृश्य देखा जो लंबे समय तक याद रहेगा।

रेल यात्रा द्रुतगामी और आरामदायक साधन है, यही सोचकर हम दोनों मित्रों ने रेल से हरिद्वार जाने का निर्णय लिया। जल्दी में वहाँ जाने का कार्यक्रम बनाने के कारण हमारा आरक्षण नहीं हो पाया और हमें अनारक्षित डिब्बे में यात्रा करना था। हमें रात दस बजे की ट्रेन पकड़नी थी। अतः हम आटो से साढ़े आठ बजे ही पुरानी दिल्ली स्टेशन पर पहुँच गए।

मैं रेलवे स्टेशन के बाहर का दृश्य देखकर चकित ह गया। भव्य एवं विशाल स्टेशन के बाहर सड़क के किनारे स्कूटर, मोटर साइकिल, आटोरिक्शा, टैक्सी की भीड़ थी। कुछ सवारियाँ ला रहे थे तो कुछ गंतव्य की ओर जा रहे थे और बाकी सवारियों के इंतजार में खड़े थे। खाली जगहों पर लोग चादर बिछाए लेटे थे। बड़ी मुश्किल से हम अंदर गए।

टिकट काउंटर पर लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। कुछ लोग खिड़की के पास बिना कतार के टिकट लेने की अनधिकृत चेष्टा कर रहे थे। हम पसीने में नहा रहे थे। ‘जेबकतरों से सावधान’ का बोर्ड पढ़कर मैं गर्मी को भूलकर सजग हो उठा। करीब चालीस मिनट बाद हमारा नंबर आया। हम टिकट लेकर प्लेटफार्म की ओर चले।

प्लेटफार्म पर कुछ लोगों के पास इतना सामान था कि दो-दो कुली उन्हें उठा रहे थे। प्लेटफार्म पर सामान और आदमियों के कारण तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी। धक्का-मुक्की के कारण बुरा हाल था। चारों ओर शोर-ही-शोर था। कहीं बेंडर्स की आवाजें तो किसी अन्य प्लेटफार्म पर आती-जाती ट्रेन का। यात्रियों का शोर इन सबसे बढ़कर था। अत्यंत कोलाहलपूर्ण वातावरण था।

प्लेटफार्म पर अत्यंत छोटे-छोटे स्टॉल थे। इन पर अखबार विभिन्न प्रकार की पत्र-पत्रिकाएँ, चाय, बिस्कुट, पान, सिगरेट, खाने की वस्तुएँ (खाना), शीतल पेय, पर्स, बेल्ट, रूमालें, सुराहियाँ, गिलास आदि बिक रहे थे। लोग पानी की बोतलें, चाय, खाने-पीने की वस्तुएँ अधिक खरीद रहे थे, पर अधिक दाम लेने के कारण दुकानदारों से लड़-झगड़ रहे थे।

इतने में दूसरी ओर पटरी पर ट्रेन आकर रुकी। ठहरी भीड़ में हलचल मच गई। धक्का-मुक्की मच गई। यात्री चढ़ने-उतरने लगे और कुली डिब्बों की ओर भागने लगे। भगदड़ जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया। इसी बीच हरिद्वार जाने वाली ट्रेन आ गई। जनरल डिब्बे की भीड़ देख हमारे पसीने छूट गए। लोग पहले से ही गेट और पायदान पर लटके थे। लाख प्रयास के बाद भी हम डिब्बे में न जा सके। मेरी जेब कट चुकी थी। मित्र के पास बचे पैसों से हम किसी तरह घर लौटकर आ सके।

पुस्तक मेला पर निबंध – Book Fair Essay In Hindi

पुस्तक मेला पर निबंध – Essay On Book Fair In Hindi

संकेत बिंदु:

  • पुस्तकें ज्ञान का भंडार
  • पुस्तक मेलों का उद्देश्य
  • बढ़ती लोकप्रियता
  • उपयोगिता
  • ज्ञान के आलोक को फैलाने में पुस्तक मेलों का योगदान।

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पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं। इनमें हर तरह का ज्ञान भरा होता है। ये मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। पुस्तकें सच्चे पथप्रदर्शक का काम करती हैं जो मनुष्य को गलत राह पर चलने से सदैव रोकती हैं। जनसाधारण तक ये सुगमता से पहुँच सकें, इसके लिए समय-समय पर पुस्तक मेलों का आयोजन किया जाता है।

लोगों की पुस्तकों से निकटता बढ़ाने के लिए, उनमें पठन की अभिरुचि पैदा करने के उद्देश्य से पुस्तक और पाठकों के मध्य दूरी कम करना आवश्यक है। इसके अलावा पुस्तकें छपकर यदि दुकानों तक सीमित रह जाती हैं या पुस्तक केंद्रों की शोभा बढ़ाती हैं तो आम आदमी उनसे अनभिज्ञ ही रह जाता है। ऐसे में पुस्तकों का प्रचार-प्रसार करना जरूरी हो जाता है। इस उद्देश्य के पूर्ति में पुस्तक मेले महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब ऐसे मेलों की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है।

पुस्तक मेले कितने उपयोगी हैं? इस पर दो राय हैं। पहली राय यह कि ये मेले दिखावा बनकर रह जाते हैं। पाठक वर्ग इन तक नहीं पहुँचता है। ये मेले वास्तविक उद्देश्य की पूर्ति में सफल नहीं हो पाते हैं। इसके विपरीत दूसरी राय यह है कि पुस्तक मेले अत्यंत उपयोगी होते हैं। जनसाधारण तक पुस्तकें पहुँचाने, पुस्तकों के विज्ञापन प्रकाशकों की बिक्री बढ़ाने का, ये सशक्त माध्यम हैं।

मेरे विचार से पुस्तक मेलों का आयोजन अत्यंत उपयोगी होता है। कई बार ऐसा होता है कि एक पुस्तक को खोजने के लिए हमें बाज़ार की कई दुकानों पर चक्कर लगाना पड़ता है। उपलब्ध न होने पर किसी अन्य बाज़ार में चक्कर लगाना पड़ता है। पुस्तक मेलों में एक ही प्रयास में विभिन्न प्रकाशकों, लेखकों, सुविख्यात विचारकों की पुस्तकें मिल जाती हैं।

यहाँ देश के ही नहीं विदेश के प्रकाशक भी अपना स्टॉल लगाते हैं, जिससे दुर्लभ पुस्तकें भी मिल जाती हैं। इतना ही नहीं ग्राहकों को लुभाने और अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए वे विशेष छूट भी देते हैं। ऐसे में पाठकों और क्रेताओं को दोहरा लाभ होता है।

पुस्तक मेलों का आयोजन और भी उपयोगी एवं लोकप्रिय हो सकता है, यदि इन्हें शहर में अनेक जगहों पर आयोजित किया जाए तथा इनके आयोजन के पूर्व संचार माध्यमों से विधिवत लोगों को जानकारी दी जाए। पुस्तकों को कम-से-कम मूल्य पर बेचा जाए, जिसमें प्रकाशकों को भी घाटा भी न हो और पाठकों को लाभ भी मिल जाए।

पुस्तक मेलों की उपयोगिता निस्संदेह है। गरीब विद्यार्थियों और पाठकों के लिए इनकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। ज्ञान का आलोक फैलाने के लिए ऐसे मेलों का आयोजन किया जाना आवश्यक है।

बरसात का एक दिन पर निबंध – Barsat Ka Din Essay In Hindi

Barsat Ka Din Essay In Hindi

बरसात का एक दिन पर निबंध – Essay On Barsat Ka Din In Hindi

संकेत बिंदु :

  • भारत की ऋतुएँ
  • वर्षा का इंतजार
  • गर्मी से प्रकृति एवं व्यक्ति का बुरा हाल
  • तेज वर्षा का वर्णन
  • वर्षा का आनंद।

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वर्षा ऋतु का पहला दिन (Varsha Ritu Ka Pehla Din) – First day of rainy season

भारत में छह ऋतुएँ पाई जाती हैं-ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर और वसंत। इनमें वसंत को ऋतुराज और वर्षा को ‘ऋतुओं की रानी’ कहा जाता है। वास्तव में ‘वर्षा’ ही वह ऋतु है जिसका लोगों द्वारा सर्वाधिक इंतजार किया जाता है।

कुछ समय पूर्व तक भारतीय कृषि को ‘मानसून का जुआ’ कहा जाता था। भारतीय कृषि पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर होती थी तथा गर्मी के मारे पशु-पक्षी, मनुष्य सभी बेहाल हो जाते थे। छोटी-छोटी वनस्पतियाँ सूख जाती थीं, धरती गर्म तवा जैसी हो जाती थी, ऐसे में सभी अत्यंत उत्सुकता से वर्षा का इंतजार करते थे।

मुझे याद है-आषाढ़ माह के पंद्रह दिन यूँ ही तपते-तपते बीत चुके थे। गर्मी अपने चरम पर थी। सभी को वर्षा का इंतजार था, परंतु बादल मानो रूठ चुके थे। बच्चे कई बार टोली बनाकर जमीन पर लोट-लोटकर ‘काले मेघा पानी दे, पानी दे गुड़धानी दे’ कहकर बादलों को बुला चुके थे, पर सब बेकार सिद्ध हो रहा था।

दोपहर का समय था। अचानक बादलों के कुछ टुकड़ों ने पहले तो सूर्य को ढंक लिया, फिर वे पूरे आसमान में छा गए। देखते-ही-देखते हवा में शीतलता का अहसास होने लगा। दिन में ही शाम होने का एहसास होने लगा। अचानक बिजली चमकी, बादलों ने अपने आने की सूचना मानो सभी को दी और आसमान से शीतल बूँदें गिरने लगीं। ये बूंदें घनी और बड़ी होने लगीं। धीरे-धीरे झड़ी लगी। हवा के एक-दो तेज झोंके आए और वर्षा शुरू हो गई।

वर्षा का वेग बढ़ने के साथ-साथ हमारे मन में उत्साह एवं उल्लास बढ़ता जा रहा था। हम बच्चे कब रुकने वाले थे। हम नहाने के लिए घर से निकल आए। ग्रीष्म ऋतु ने हमें जितना तपाया था, वह सारी तपन हम वर्षा में शीतल कर लेना चाहते थे। वर्षा भी कितनी शीतल और सुखद लगती है, यह तो भीगने वालों से ही जाना जा सकता है, पर मेघ की गरजना सुनकर आम आदमी क्या सीता विहीन श्रीराम भी डरने लगे थे-

“घन घमंड गरजत नभ घोरा।
प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।”

दो घंटे की लगातार वर्षा में सब कुछ जलाशमय हो गया। खेत, बाग, गलियाँ नीची जगहें तालाब का रूप धारण कर चुकी थीं। पेड़-पौधे नहाए-धोए प्रसन्नचित्त लगने लगे थे। लोगों के चेहरों पर छायी मायूसी गायब हो चुकी थी। जंगल की ओर से मयूरों की कर्णप्रिय आवाज़ अब भी आ रही थी। किसान खेत की ओर चल पड़े। ऐसे में हम बच्चे कहाँ शांत बैठने वाले थे, हम भी कागज की नावें लिए तालाब की ओर चल पड़े क्योंकि हमें भी जल-क्रीड़ा का आनंद लेना था।

मेरा प्रिय खेल-क्रिकेट पर निबंध – My Favorite Game Cricket Essay In Hindi

My Favorite Game Cricket Essay In Hindi

मेरा प्रिय खेल-क्रिकेट पर निबंध – Essay On My Favorite Game Cricket In Hindi

सकेत बिंदु:

  • खेलों का महत्त्व
  • सर्वाधिक लोकप्रिय खेल क्रिकेट
  • खेल के नियम
  • क्रिकेट के प्रकार
  • प्रमुख खिलाड़ी।

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खेल का नाम आते ही मन उत्साह एवं उल्लास से भर उठता है। खेलना-कूदना सभी को अच्छा लगता है, विशेषतः बच्चों द्वारा अपनी रुचि, आयु, पंसद आदि के आधार पर खेलों को पसंद किया जाता है और खेला जाता है। हालाँकि मुझे क्रिकेट सर्वाधिक पसंद है।

क्रिकेट को आउटडोर खेलों की श्रेणी में रखा जाता है। यह विश्व के कुछ ही देशों में खेला जाता है, परंतु इसे देखने और पसंद करने वाले बहुत से देश हैं। युवावर्ग इस खेल को पागलपन की हद तक पसंद करता है। जब यह खेल विश्व के दो देशों के बीच खेला जाता है तो स्टेडियम में मैच न देख पाने वाले लोग टेलीविजन और रेडियो से चिपके होते हैं।

क्रिकेट एक बड़े-से मैदान में खेला जाता है। मैदान के बीचोबीच बाईस गज लंबी पिच होती है। इसके निर्धारण के लिए दोनों किनारों पर तीन तीन विकेट खड़े किए जाते हैं। यह दो टीमों के बीच खेला जाता है। प्रत्येक टीम में ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। इस खेल में निर्णय देने के लिए दो अंपायर भी होते हैं। मैदान के बाहर एक तीसरा अंपायर होता है जो टीवी पर रिप्ले देखकर जटिल मामलों में फैसले देता है। एक टीम के खिलाड़ी मैदान में फैलकर गेंद को बाहर जाने से रोकते हैं और दूसरी टीम के दो खिलाड़ी बल्लेबाजी करते हैं।

क्रिकेट में हार-जीत का फैसला बनाए गए रनों के आधार पर होता है। जो टीम अधिक रन बनाती है या जिस टीम के कम खिलाडी आउट होते हैं, वही विजयी घोषित कर दी जाती है। बल्लेबाज दुवारा गेंद को हिट करने पर यदि वह निर्धारित सीमा रेखा छू जाती है तो चार रन और उसके ऊपर से होकर सीमा रेखा से बाहर गिरने पर छह रन माने जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट को आजकल तीन प्रारूपों में खेला जाता है-टेस्ट मैच, यह पाँच दिनों तक खेला जाता है। प्रत्येक दिन 90 ओवर अर्थात् 540 गेंदें फेंकनी होती हैं। इसमें हार-जीत का फैसला कम हो पाता है। अतः आजकल इसकी लोकप्रियता घटती जा रही है। इसका दूसरा प्रारूप एक दिवसीय मैच है, जिसमें प्रत्येक टीम पचास-पचास ओवर खेलती है।

इसमें हार-जीत का फैसला हो जाता है जो बहुत ही लोकप्रिय है। इसका तीसरा प्रारूप टी-20 नाम से प्रसिद्ध है। इसमें प्रत्येक टीम 20-20 ओवर खेलती है। आजकल यह बहुत ही लोकप्रिय है। इसे फटाफट क्रिकेट भी कहा जाता है। भारत में खेले जाने वाला आई.पी. एल., जिसमें विश्व के प्रमुख देशों के मुख्य खिलाड़ी खेलते हैं, दुनियाभर में बहुत ही लोकप्रिय हो रहा है। अब तक आई.पी.एल. का 6 बार सफल आयोजन किया जा चुका है।

सचिन तेंदुलकर, महेंद्रसिंह धोनी, वीरेंदर सहवाग, जहीर खान, सुरेश रैना आदि प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं।

मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध नंबर – My Aim In Life Essay In Hindi

My Aim In Life Essay In Hindi

मेरे जीवन का लक्ष्य पर निबंध नंबर – Essay On My Aim In Life In Hindi

संकेत बिंदु:

  • लक्ष्य का निर्धारण
  • लक्ष्य अध्यापक बनना
  • लक्ष्य प्राप्ति हेतु किए गए संघर्ष का वर्णन
  • अध्यापक बनने का उपत्य
  • संकल्प।

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निरुद्देश्य घूमना सफलता की राह से हमें दूर ले जाता है, इसलिए व्यक्ति को कोई-न-कोई लक्ष्य अवश्य निर्धारित कर लेना चाहिए। जिस प्रकार पथिक घर से निकलने से पूर्व ही अपनी मंजिल तय कर लेता है कि उसे कहाँ जाना है, और वह मंजिल की ओर कदम बढ़ा देता है। उसी प्रकार मनुष्य को भी लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने की ओर कदम बढ़ा देना चाहिए। मैंने अपने जीवन में अध्यापक बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मैंने बचपन में ही अपने अध्यापक को संत कबीर का यह दोहा पढ़ाते हुए देखा-सुना था

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोबिंद दियो बताया।”

इस दोहे का भावार्थ यह है कि गुरु ने ही भगवान से परिचय कराया अतः उसका स्थान ईश्वर से भी ऊँचा है। बस तभी से मेरे मन में अध्यापक बनने की धुन सवार हो गई।

अध्यापक बनने के लिए मैंने अभी से सभी विषयों की गहन पढ़ाई शुरू कर दी है। मैं बारहवीं परीक्षा ‘ए’ ग्रेड में उत्तीर्ण करना चाहता हूँ। मैं ग्रेड के साथ-साथ विषयों का गहन अध्ययन करूँगा ताकि चाहे अंकों के आधार पर चयन हो या प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम में अवश्य प्रवेश ले सकूँ और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर चयन के लिए होने वाली परीक्षा उत्तीर्ण कर अध्यापक बन सकूँ।

अध्यापक को राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है। ऐसे में उसका कार्य और दायित्व दोनों ही महत्त्वपूर्ण बन जाते हैं। वह अपने व्यक्तित्व को आदर्श बनाकर छात्रों को उच्च चरित्र निर्माण और अच्छे संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। मैं विद्यार्थियों को उच्चकोटि के साहित्यकारों और विचारकों की रचनाएँ और लेख पढ़ने के लिए प्रेरित करूँगा ताकि वे भी चरित्रवान बन सकें, उनमें देश-प्रेम, देशभक्ति की उत्कट भावना विकसित हो और वे सुयोग्य नागरिक बन सकें।

अध्यापक बनकर भी मैं पढ़ने से अपना नाता बनाए रखूगा ताकि स्वयं को नित नए परिवर्तनों से अवगत रख सकूँ और अपने छात्रों को अवगत कर सकूँ। मैं उनके स्तर पर उतरकर उनको रुचिकर पद्धति से पढ़ाऊँगा ताकि वे पढ़ाई में रुचि लें। मैं कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देकर उनकी समस्याओं पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दूंगा। मैं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की यथासंभव सहायता करके आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहूँगा।

एक आदर्श अध्यापक के रूप में मेरा लक्ष्य धन कमाना न होकर राष्ट्र-सेवा तथा निष्ठा एवं ईमानदारीपूर्वक अपने कर्तव्य का निर्वाह करना होगा। मैं ऐसा करके एक सफल एवं योग्य अध्यापक बनने का प्रयास करूँगा।

नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर निबंध – Responsibilities And Rights of Citizens Essay In Hindi

Responsibilities And Rights of Citizens Essay In Hindi

नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर निबंध – Essay on Rights and Responsibilities of Citizens in Hindi

संकेत बिंदु :

  • भूमिका
  • जनसंख्या वृद्धि प्रगति में बाधक
  • आतंकवाद
  • देश को खंडित करने की कुचालें
  • असमानता
  • निराकरण।

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भारत एक विशाल राष्ट्र है। स्वतंत्रता से पूर्व यहाँ की सबसे बड़ी समस्या थी-परतंत्रता या गुलामी। हज़ारों-लाखों शहीदों और राष्ट्रभक्तों के बलिदान और प्रयास से हमें आजादी मिली। ऐसा नहीं है कि आजादी मिलते ही सारी समस्याएँ समाप्त हो गईं। आधुनिक भारत में अनेक समस्याएँ हैं जो उसकी प्रगति की राह में बाधा बनी हुई हैं।

वर्तमान भारत की सबसे मुख्य समस्या जनसंख्या की वृद्धि है। इसका असर हर शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र में देखा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि बँटते-बँटते अब घर बनाने भर के लिए भी नहीं बची है।

शहरी क्षेत्र में यह जनसंख्या बहुत सी समस्याओं की जड़ बन चुकी है। भोजन, आवास, परिवहन, चिकित्सा सेवा, शिक्षा आदि क्षेत्रों में भयंकर भीड़ है। वस्तुतः ये सुविधाएँ हर साल कम पड़ती जा रही हैं। सरकार इनकी पूर्ति करने का जितना प्रयास करती है, बढ़ती जनसंख्या उस प्रयास को विफल कर देती है।

वर्तमान भारत को आतंकवाद की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कभी यह घरेलू होता है तो कभी विदेशी। यह अपने साथ जान-माल की भयंकर क्षति साथ लेकर आता है। बहुत से निर्दोष लोगों को अकारण अपनी जान गंवानी पड़ती है। सेना और पुलिस के जवान अकारण कुर्बान होते हैं। पंजाब, जम्मू-कश्मीर, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल आदि में आतंकी समय-समय पर यह घृणित काम कर जाते हैं।

आज भारत को खंडित करने की कुचाल चली जा रही है। पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान इस पर नज़र गड़ाए बैठे हैं। ये भारत की एकता और अखंडता को तार-तार करना चाहते हैं। इसके अलावा अपने देश के कुछ तथाकथित राष्ट्रसेवक (नेतागण) क्षेत्रीयता, धार्मिकता, सांप्रदायिकता, भाषागत और जातीय आधार पर लोगों को उकसाकर, क्षेत्रीय पार्टियाँ बनाकर राज्यों के और टुकड़ेकर देश की एकता, अखंडता पर प्रहार कर रहे हैं। केंद्र सरकार की तुष्टीकरण की नीति भी इस काम में सहायक हो रही है।

कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहे जाने वाले देश की बहुसंख्यक जनता की आज भी अपनी ज़रूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। इसका कारण गरीबी है। देश का सारा धन कुछ मुट्ठी भर लोगों के कब्जे में है जिस पर वे कुंडली मारे बैठे हैं। गरीब भूख से मर रहा है और ये रईस बदहज़मी से।

आम व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो रहा है और ये मोटपे का। सरकार की योजनाएँ भी भ्रष्ट अधिकारियों के कारण उन तक नहीं पहुँच पा रही हैं। वे गरीबों की भलाई की जगह अपना ही भला करने में लगे हैं। नेतागण भी इस काम में पीछे नहीं हैं। वे जनता की गरीबी हटाने के बजाए अपनी अमीरी बढ़ाने में लगे हैं।

इन समस्याओं से देश को मुक्त करने के लिए सरकार को निष्ठा से प्रयास करना चाहिए।

मेरे सपनों का भारत पर निबंध – India Of My Dreams Essay In Hindi

India Of My Dreams Essay In Hindi

मेरे सपनों का भारत पर निबंध – Essay On India Of My Dreams In Hindi

संकेत बिंदु:

  • त गौरवशाली बने
  • भारत का गौरवशाली अतीत
  • सोने की चिड़िया
  • भारत की वर्तमान समस्या
  • उपाय।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

मैं जिस राष्ट्र की सुंदर और पावन जमीं पर रहता हूँ, विश्व उसे भारत के नाम से जानता है। प्राचीन काल में यह अत्यंत संपन्न और गौरवशाली देश था। काल के थपेड़ों को सहते-सहते इस देश को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वर्तमान में इसे अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मैं अपने सपनों के भारत को एक विकसित गौरवशाली और महान राष्ट्र के रूप में देखना चाहता हूँ।

भारत सदा से अहिंसा का पुजारी रहा है। यहाँ जन्मे विभिन्न महापुरुषों-गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, सम्राट अशोक गुरुनानक, महात्मा गाँधी आदि ने अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया को दिया। ये लोग मारकाट में विश्वास नहीं करते थे। मेरे सपनों का भारत ऐसा होगा, जिसमें हिंसा आतंकवाद आदि के लिए कोई स्थान नहीं होगा। सब परस्पर शांति और प्रेम से रहेंगे।

भारत सदा से ही ज्ञान का केंद्र रहा है। इसने पूरी दुनिया में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विश्व में ज्ञान का आलोक फैलाया। गणित के क्षेत्र में शून्य भारत की ही देन है। प्राचीन काल में यहाँ तक्षशिला, नालंदा जैसे सुप्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे, जहाँ भारतीय ही नहीं विदेशी भी ज्ञानार्जन करने आते थे। दुर्भाग्य से आज हमें उच्चशिक्षा हेतु विदेशों में जाना पड़ता है। मेरे सपनों का भारत पुनः शिक्षा के विषय में विश्व के विकसित देशों जैसा ही होगा।

प्राचीन काल में भारत आर्थिक दृष्टि से अत्यंत समृद्धशाली था। इसे ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। इसकी धन-संपदा देख विदेशियों को लालच आया। उन्होंने कई बार इस देश पर आक्रमण किए। आज भारत को निर्धनता का सामना करना पड़ रहा है। मेरे सपनों का भारत पुनः पहले से अधिक धनी और समृद्ध होगा।

वर्तमान में शोषण की समस्या उठ खड़ी हुई है। पूँजीपति मजदूरों का, नेता भोली भाली जनता का, दुकानदार ग्राहकों का शोषण कर रहे हैं। ठेकेदारी-प्रथा में शोषण और भी बढ़ गया है। सभी को अवसर की समानता न उपलब्ध होने के कारण वर्ग विशेष का शोषण किया जा रहा है। मेरे सपनों के भारत में सभी शोषणमुक्त होंगे और सभी को समान अवसर मिलेंगे।

वर्तमान भारत में अनेक सामाजिक रूढ़ियाँ और कुरीतियाँ फैली हैं जो विकास में बाधक सिद्ध होती हैं। इनमें दहेज-प्रथा, छुआछूत, ऊँच-नीच की भावना आदि हैं। मेरे सपनों का भारत इन कुरीतियों से मुक्त हो प्रगति के पथ पर उत्तरोत्तर बढ़ता रहेगा।

मेरे सपनों के भारत में वास्तविक लोकतंत्र होगा, जहाँ नेता दल बदलते, वोट खरीदते, जनता को चुनावी झाँसे देते, वोट के बदले नोट बाँटते नजर नहीं आएँगे। वे माननीय होकर अमाननीयों जैसा अमर्यादित व्यवहार नहीं करेंगे। ये नेतागण सच्चे राष्ट्र-भक्त होंगे।

किसी खेल (मैच) का आँखों देखा वर्णन पर निबंध – Kisi Match Ka Aankhon Dekha Varnan Essay In Hindi

Kisi Match Ka Aankhon Dekha Varnan Essay In Hindi

किसी खेल (मैच) का आँखों देखा वर्णन पर निबंध – Essay On Kisi Match Ka Aankhon Dekha Varnan In Hindi

संकेत बिंदु :

  • क्रिकेट मैच
  • मैच का आयोजन कहाँ और किसके-किसके बीच
  • मैच का वर्णन
  • रोमांच
  • हार-जीत
  • सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

अन्य बच्चों की भाँति मुझे भी क्रिकेट देखना और खेलना पसंद है। मेरी अभिलाषा थी कि मैं किसी स्टेडियम जाकर मैच देखू। आखिर 13 मई, 2013 को मुझे यह सुअवसर मिल ही गया।

विद्यालय में छुट्टियाँ पड़ गई थीं। मैं परिवार के साथ मुंबई गया हुआ था। वहाँ के वानखेड़े स्टेडियम में आई.पी.एल-6 का लीग मैच देखने का अवसर प्राप्त हुआ। यह मैच सनराइजर्स हैदाराबाद और मुंबई इंडियन के बीच रात 8 बजे से खेला जाना था। स्टेडियम के गेट पर टिकट दिखाकर हम अंदर गए और सीटों पर बैठ गए।

सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पार्थिव पटेल और शिखर धवन बल्लेबाजी के लिए उतरे। दोनों ही बल्लेबाज कुछ विशेष करने की सोच कर आए थे। दोनों ने शानदार बल्लेबाजी शुरू की। मिशेल जानसन और लसिथ मलिंगा की गेंदबाजी उन्हें रन बनाने से नहीं रोक पा रही थी। मलिंगा ने सबसे पहले पार्थिव पटेल को आउट किया, जिन्होंने 26 रन बनाए।

अब धवन का साथ देने आए युवा बल्लेबाज हनुमा विहारी। उन्होंने शानदार 41 रन बनाए। इसी बीच धवन ने अपना अर्धशतक पूरा किया और 59 रन बनाकर आउट हुए। केमरून ह्वाइट 43 और तिसारा परेरा 02 रन बनाकर अविजित रहे। इस प्रकार टीम ने तीन विकेट पर 178 रन का अपना सर्वोच्च स्कोर बनाकर मुंबई इंडियन के सामने 179 रन का लक्ष्य रखा।

जीत के लिए 179 रनों का लक्ष्य लेकर मुंबई इंडियन के बल्लेबाज ड्वेन स्मिथ और सचिन तेंदुलकर उतरे, जिन्हें देख सारा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दोनों संभलकर बल्लेबाजी कर रहे थे, पर शुरूआती दो ओवर ड्वेन ही बल्लेबाजी करते रहे। सब ठीक-ठाक चल रहा था कि चौथे ओवर में इशांत शर्मा की एक सीधी गेंद स्मिथ का मिडल स्टंप ले उड़ी। उन्होंने 26 रन बनाए। तेंदुलकर का साथ देने अब दिनेश कार्तिक आए, जिन्होंने तेंदुलकर का अच्छा साथ दिया।

तेंदुलकर अपनी लय में थे। उन्होंने युवा लेग स्पिनर करन शर्मा की गेंद पर चौका और छक्का जड़ा, परंतु इसके बाद उनके हाथ में तकलीफ हुई और वे रिटायर्ड हर्ट होकर वापस चले गए। उनका यूँ जाना हमें तनिक भी अच्छा न लगा। हमें उनके वापस आने और बल्लेबाजी करने की उम्मीद थी। अब दिनेश कार्तिक का साथ देने स्वयं कप्तान रोहित शर्मा आए।

इसी ओवर में करन शर्मा ने दिनेश कार्तिक को ह्वाइट के हाथों कैच आउट करा दिया। उन्होंने 30 रन बनाए। इसी युवा स्पिनर ने नए बल्लेबाज अंबाती रायडू को भी स्टंप करा दिया। अब मुंबई का स्कोर 3 विकेट पर 99 रन हो चुका था। अंतिम छह ओवर में मुबंई इंडियंस को जीत के लिए 79 रन चाहिए थे जो काफी मुश्किल लक्ष्य था। मुझे तो हार की संभावना दिखने लगी। दो ओवर में यह हार और निकट आती दिख रही थी।

अब टीम को 24 गेंद में 64 बनाने थे। सत्रहवाँ ओवर लेकर तिसारा परेरा आए और सामने थे बल्लेबाज कीरोन पोलार्ड। उन्होंने इसी ओवर में लगातार तीन छक्के ठोककर सारा समीकरण बिगाड़ दिया। इस ओवर में कुल उनतीस रन बने। अमित मिश्रा के अगले ओवर में पोलार्ड ने फिर

तीन छक्के ठोक दिए। इन दो ओवरों में 50 रन बनते ही लक्ष्य पास आ गया। अंतिम ओवर में जीत के लिए 7 रन चाहिए थे, जिन्हें पोलार्ड ने दो छक्के लगाकर बनाया और मैच मुंबई इंडियंस की झोली में डाल दिया। उन्होंने 27 गेदों में 66 रन की धमाकेदार पारी खेली।

मैच समाप्त होते ही स्टेडियम नीले झंडों में नहा उठा और हम घर वापस आ गए। मुझे यह रोमांचक मैच याद रहेगा।