विश्व में अत्यधिक जनसंख्या पर निबंध – Overpopulation in World Essay in Hindi

Overpopulation in World Essay in Hindi

विश्व में अत्यधिक जनसंख्या पर छोटे-बड़े निबंध (Essay on Overpopulation in World in Hindi)

जनसंख्या विस्फोट : कारण और निवारण – अन्य सम्बन्धित शीर्षक– जनसंख्या नियन्त्रण।। (Population Explosion: Causes And Prevention – Other Related Titles – Population Control)

रूपरेखा–

  • प्रस्तावना (जनसंख्या विस्फोट)
  • भारत में जनसंख्या विस्फोट की वर्तमान स्थिति,
  • जनसंख्या विस्फोट/वृद्धि के कारण,
  • जनसंख्या वृद्धि के परिणाम,
  • जनसंख्या वृद्धि नियन्त्रण/निवारण के उपाय,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना (जनसंख्या विस्फोट)–
भारत प्राकृतिक वैभव सम्पन्न देश है। यहाँ की शस्यश्यामला धरती हर एक को अपनी ओर आकर्षित करती है। देश की स्वतन्त्रता और विभाजन के पश्चात् सन् 1951 में हुई प्रथम जनगणना में हमारी जनसंख्या 36,10,88,400 थी, जो आज बढ़कर 121 करोड़ (2011 की जनगणना के अनुसार) से भी अधिक हो चुकी है। जनसंख्या के इस तीव्र गति से बढ़ने को ही जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है। वर्तमान में भारत की बढ़ती जनसंख्या चिन्ता का विषय बनी हुई है।

भारत में जनसंख्या विस्फोट की वर्तमान स्थिति–
आज जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। आधुनिक भारत में जिस तीव्रता के साथ जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, आनेवाले समय में यह और भी विस्फोटक हो जाएगी। अनुमान है कि सन् 2026 ई० तक भारत की जनसंख्या बढ़कर लगभग 1.5 अरब हो जाएगी, वर्ष 2030 तक 1.53 तथा वर्ष 2060 तक यह 1.7 अरब हो जाएगी। यह जनसंख्या वृद्धि किसी विस्फोट से कम नहीं है। इसने देश के कर्णधारों को चिन्ता में डाल दिया है। आज जनसंख्या के स्तर पर भारत विश्व में दूसरे स्थान पर आता है, परन्तु सन् 2030 ई० तक इसके चीन को पछाड़कर प्रथम स्थान पर पहुँच जाने की सम्भावना है।

जनसंख्या विस्फोट/वृद्धि के कारण भारत में आज भी बच्चों का जन्म ईश्वर की देन माना जाता है। समाज का पढ़ा–लिखा वर्ग भी इस तथ्य को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं होता कि जनसंख्या वृद्धि को हमारे द्वारा रोका जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोगों का यह तर्क होता है कि जितने हाथ होंगे, उतना ही काम भी बढ़ेगा, लेकिन वह इस तथ्य को भूल जाते हैं कि दो हाथ के साथ एक पेट भी बढ़ेगा, जिसकी अपनी आवश्यकताएँ होंगी। अन्धविश्वास और अशिक्षा के अतिरिक्त जनसंख्या वृद्धि के अन्य विशेष कारण भी हैं; जैसे—बाल–विवाह, बहुविवाह, दरिद्रता, मनोरंजन के साधनों का अभाव, गर्म जलवायु, रूढ़िवादिता, ग्रामीण क्षेत्रों में सन्तति–निरोध की सुविधाओं का कम प्रचार होना, परिवार नियोजन के नवीनतम साधनों की अनभिज्ञता एवं वंशवृद्धि के लिए पुत्र की अनिवार्यता आदि।

जनसंख्या वृद्धि अथवा विस्फोट के परिणाम–
भारत की वर्तमान आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक समस्याओं का मुख्य कारण बढ़ती हुई जनसंख्या है। ‘ऋग्वेद’ में कहा गया है—“जहाँ प्रजा का आधिक्य होगा, वहाँ निश्चय ही दुःख एवं कष्ट की मात्रा अधिक होगी।” यही कारण है कि आज भारत में सर्वत्र अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, निम्न जीवन–स्तर, सामाजिक कलह, अस्वस्थता एवं खाद्यान्न–संकट आदि अनेकानेक समस्याएँ निरन्तर बढ़ रही हैं। निश्चय ही जनसंख्या का यह विस्फोट भारत के लिए अभिशाप है। यदि यह वृद्धि इसी गति से होती रही तो पाँच–सौ वर्ष पश्चात् मनुष्यों को पृथ्वी पर खड़े होने की जगह भी नहीं मिल पाएगी। इसी बात को प्रसिद्ध हास्कवि काका हाथरसी ने अपनी विनोदपूर्ण शैली में इस प्रकार लिखा है-

यदि यही रहा क्रम बच्चों के उत्पादन का,
तो कुछ सवाल आगे आएँगे बड़े–बड़े।
सोने को किंचित् जगह धरा पर मिले नहीं,
मजबूरन हम तुम सब सोएँगे खड़े–खड़े।

हमारे देशवासी जनसंख्या की वृद्धि से होनेवाली हानियों के प्रति आज भी लापरवाह हैं। निश्चित ही जनसंख्या की वृद्धि का यदि यही क्रम रहा तो मानव–जीवन अत्यधिक संघर्षपूर्ण एवं अशान्त हो जाएगा।

भूतपूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने जनसंख्या विस्फोट से होनेवाली हानि पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा था—“जनसंख्या के तीव्रगति से बढ़ते रहने पर योजनाबद्ध विकास करना, बहुत–कुछ ऐसी भूमि पर मकान खड़ा करने के समान है, जिसे बाढ़ का पानी बराबर बहाए ले जा रहा है।”

जनसंख्या आज अति संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। निरन्तर जनसंख्या–वृद्धि से मानव की आवश्यकताओं और संसाधनों की पूर्ति करना असम्भव होता जा रहा है। निरन्तर जीवन–मूल्यों में गिरावट आती जा रही है। अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। अमीर–गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। पर्यावरण विषाक्त होने में एक मुख्य कारण जनसंख्या विस्फोट भी है। इसलिए जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करना अत्यन्त आवश्यक हो गया है।

जनसंख्या वृद्धि नियन्त्रण/निवारण के उपाय–जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए भारत सरकार पूर्णतया गम्भीर है तथा अनेक प्रभावी कार्यक्रम चला रही है। यह कार्य अनेक सरकारी संस्थाओं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है। परिवार कल्याण कार्यक्रमों तथा संचार माध्यमों द्वारा लोगों को जनसंख्या वृद्धि के प्रति सचेत किया जा रहा है। प्रतिवर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है, जो जनसंख्या को नियन्त्रित रखने के लिए लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

जनसंख्या–विस्फोट रोकने के कुछ उपाय निम्नलिखित हैं–––

  1. दो बच्चों के मापदण्डों को अपनाना।
  2. लड़के–लड़कियों को देर से विवाह के लिए प्रोत्साहित करना।
  3. परिवार नियोजन कार्यक्रमों एवं साधनों का व्यापक प्रचार–प्रसार करना व अपनाना।
  4. अधिक बच्चों को जन्म देनेवाले माता–पिता को हतोत्साहित करना तथा उन्हें विभिन्न शासकीय सुविधाओं से वंचित रखने का प्रावधान करना, चाहे वह किसी भी वर्ग–जाति के क्यों न हों।
  5. बाल–विवाह एवं बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाना इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सम्बन्धी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रधानमन्त्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग नियुक्त करने का भी प्रावधान है, जिससे जनसंख्या–विस्फोट पर रोक लगाई जा सकेगी।
  6. आज यह सन्तोष का विषय है कि भारत सरकार इस दिशा में पर्याप्त सकारात्मक कदम उठा रही है।

उपसंहार–
आज भारतवर्ष में जनसंख्या–विस्फोट को रोकने के लिए नित्य नए अभियान चलाए जा रहे हैं बाल–विवाह जैसी कुप्रथा अब लगभग समाप्त हो गई है। चिकित्सा–क्षेत्र में नवीन पद्धतियाँ आ गई हैं, जनता गर्भ–निरोध के साधनों के प्रति जागरूक व भयरहित हुई है।

यदि भारतवासी समझदारी से काम लेकर जनसंख्या वृद्धि रोकने में सहायक रहे और सरकार इस विषय में प्रयत्नशील रहे तो निश्चित ही एक दिन जनसंख्या–विस्फोट को रोका जा सकेगा तथा हमारा देश पुनः वैभव सम्पन्न और शस्य–श्यामलावाली अनुभूति से युक्त होगा।

पर्यावरण सुरक्षा पर निबंध – Environment Protection Essay In Hindi

Environment Protection Essay In Hindi

पर्यावरण सुरक्षा पर छोटे-बड़े निबंध (Essay on Environment Protection Essay in Hindi)

पर्यावरण सुरक्षा की महत्ता – Importance Of Environmental Protection

रूपरेखा–

  • प्रस्तावना,
  • पर्यावरण सुरक्षा की समस्या,
  • पर्यावरण सुरक्षा की महत्ता,
  • पर्यावरण सुरक्षा के उपाय,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना–
पर्यावरण शब्द “परि + आवरण’ के संयोग से निर्मित है। यहाँ ‘परि’ का अर्थ है–चारों ओर तथा ‘आवरण’ का अर्थ है–घेरा। अर्थात् ऐसी चीजों का समुच्चय, जो प्राणियों को चारों ओर से घेरे हुए है, उसे पर्यावरण कहते हैं। प्रकृति ने हमारे चारों ओर ऐसी वस्तुएँ और वातावरण निर्मित किए हैं, जो सब प्रकार से हमारी उन्नति और स्वास्थ्य के अनुकूल हैं। मगर हमने प्रकृति के इस सन्तुलन अर्थात् पर्यावरण को अपने क्रिया–कलाप से विकृत कर दिया है। इसलिए आज इसकी सुरक्षा की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। आज पर्यावरण सुरक्षा सम्पूर्ण विश्व की समस्या बन गई है।

पर्यावरण सुरक्षा की समस्या–
आज मानव प्रकृति पर विजय प्राप्त करने का सपना देखने लगा है। यही कारण है कि आज प्राकृतिक सन्तुलन बिगड़ गया है। जीवनदायिनी प्रकृति कुपित होकर विनाश की ओर अग्रसर है, परन्तु मनुष्य इस असन्तुलन के प्रति अब भी सावधान नहीं हो रहा है, फलतः पर्यावरण सुरक्षा की समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं।

निरन्तर जनसंख्या–वृद्धि, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण ने तीव्रगति से प्रकृति के हरे–भरे क्षेत्रों को कंकरीट के जगलों में परिवर्तित कर दिया है। आज श्वास लेने के लिए शुद्ध वायु का अभाव होता जा रहा है, जिससे अनेक प्रकार के रोग जन्म ले रहे हैं, ओजोन परत का क्षरण घातक होता जा रहा है, फिर भी मानव अपनी अज्ञानता के कारण पर्यावरण सुरक्षा के लिए निरन्तर खतरा बढ़ा रहा है।

‘जल ही जीवन है’ का जाप करनेवाला मनुष्य स्वयं जल के लिए समस्या बन गया है। उसके द्वारा शहरभर के मल–मूत्र, कचरे तथा कारखानों से निकलनेवाले अपशिष्ट पदार्थों को नदियों के जल में प्रवाहित कर दिया जाता है, जिससे जल अशुद्ध होता है।

केन्द्रीय जल–स्वास्थ्य इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान के अनुसार भारत में प्रति 1,00,000 व्यक्तियों में से 360 व्यक्तियों की मृत्यु आन्त्रशोथ (टायफॉयड, पेचिश) के कारण होती है। वर्तमान में शुद्ध पेयजल का संकट बढ़ता जा रहा है।

परमाणु–शक्ति उत्पादन–
केन्द्रों और परमाणु परीक्षणों के परिणामस्वरूप जल, वायु तथा पृथ्वी पर रेडियोधर्मी पदार्थ छोटे–छोटे कणों के रूप में वातावरण में फैल जाते हैं, जो लोगों के लिए प्राणघातक सिद्ध होते हैं। यह रेडियोधर्मी प्रदूषण आगामी अनेक पीढ़ियों के लिए भयंकर समस्याएँ उत्पन्न करता है। स्वास्थ्य–सम्बन्धी समस्याएँ तो इन पीढ़ियों को जन्म से ही होती हैं।

इसी प्रकार पैदावार बढ़ाने के लिए किसान जिस तेजी के साथ कीटनाशक, शाकनाशक और रोगनाशक रसायनों तथा उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, वह पर्यावरण सुरक्षा के लिए समस्या ही है।

वातावरण में चहुंओर मोटरकार, बस, जेट विमान, ट्रैक्टर, लाउडस्पीकर, बाजे, सायरन तथा कल–कारखानों की मशीनों से निकलती तीव्र–ध्वनियाँ ध्वनि–प्रदूषण को जन्म देकर निरन्तर पर्यावरण सुरक्षा के लिए समस्या बनती जा रही हैं।

पर्यावरण सुरक्षा की महत्ता–
पर्यावरण और प्राणियों का घनिष्ठ सम्बन्ध है, परन्तु मानवीय महत्त्वाकांक्षाओं, भूलों, प्रतिस्पर्धाओं के चलते पर्यावरण प्रदूषण का संकट उत्पन्न हो गया है। प्रदूषण के आधिक्य से पृथ्वी के अनेक जीव और वनस्पतियाँ लुप्त हो गए हैं और अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। यदि पर्यावरण प्रदूषण इसी गति से बढ़ता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं है, जब मनुष्य का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।

इसीलिए पर्यावरण सुरक्षा से सम्बन्धित व्यापक अवधारणाएँ दिनोंदिन जन्म ले रही हैं। पर्यावरण सुरक्षा की महत्ता आज अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता का विषय बन चुकी है। जून 1972 ई० में स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एक घोषणा–पत्र जारी किया गया। तब से निरन्तर जलवायु परिवर्तन पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाते रहे हैं।

दिसम्बर 2015 ई० में पेरिस में सम्पन्न हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में 30 से 35 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कमी वर्ष 2005 को आधार मानकर की जाएगी। भारत ने भी माननीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्ष 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में 33 से 35 प्रतिशत तक की कटौती का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अन्तर्गत सन् 2030 ई० तक होनेवाले कुल बिजली उत्पादन में 40% हिस्सा कार्बनरहित ईंधन से होगा।

पर्यावरण सुरक्षा के उपाय–
पर्यावरण सुरक्षा हेतु जन जागरण, सहयोग और समर्थन अनिवार्य है। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा उठाए गए छोटे–छोटे कदमों से बहुत ही सरल ढंग से पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है; जैसे

  • कचरे की मात्रा कम करना।
  • कचरे को सही स्थान पर फेंकना।
  • पॉलीबैग का प्रयोग बन्द करना। ल पुरानी वस्तुओं को नए ढंग से पुनः प्रयोग में लाना।
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग द्वारा वर्षा–जल का संरक्षण करना।
  • पानी की बर्बादी को रोकना।
  • ऊर्जा संरक्षण करना, बिजली के दुरुपयोग को समाप्त करके उसका कम–से–कम प्रयोग करना।
  • रिचार्जेबल बैटरी या अक्षय एल्कलाइन बैटरी का उपयोग करना।
  • वायु–प्रदूषण एवं ध्वनि प्रदूषण पर नियन्त्रण रखना।
  • कृत्रिम उर्वरकों के स्थान पर जैव उर्वरकों का प्रयोग करना।
  • अधिकाधिक संख्या में वृक्षारोपण करना।
  • भारी मात्रा में हो रहे वृक्ष–कटान को रोकना।

इनके अतिरिक्त संचार माध्यमों के द्वारा प्रचार–प्रसार करके, अच्छे प्रशासकों, सजग नीति–निर्माताओं और प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है।

उपसंहार–
हमें भविष्य में सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन की सम्भावना सुनिश्चित करने के लिए न केवल पर्यावरण की महत्ता समझनी होगी, अपितु उसे सुरक्षित रखने का भी उत्तरदायित्व निभाना होगा।

यह याद रखना आवश्यक है कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए उठा पहला कदम व्यक्तिगत स्तर पर हम से ही आरम्भ होता है। पर्यावरण की सुरक्षा करना पृथ्वी पर रहनेवाले समस्त व्यक्तियों का कर्तव्य है। इस कर्त्तव्यपालन के द्वारा ही पर्यावरण सुरक्षित हो सकेगा।

भ्रष्टाचार पर निबंध – Corruption Essay in Hindi

Corruption Essay in Hindi

भ्रष्टाचार पर छोटे-बड़े निबंध (Essay on Corruption in Hindi)

भ्रष्टाचार : कारण और निवारण अथवा भारत का राष्ट्रीय चरित्र और भ्रष्टाचार – (Corruption: Causes And Prevention Or National Character And Corruption Of India)

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • भ्रष्टाचार क्या है?
  • भ्रष्टाचार के विविध रूप,
  • भ्रष्टाचार की व्यापकता,
  • भ्रष्ट राजनीतिज्ञ,
  • सरकार की जन-विरोधी नीतियाँ,
  • निवारण के उपाय,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
‘आचारः परमोधर्मः’ भारतीय संस्कृति का सर्वमान्य सन्देश रहा है। सदाचरण को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन का आधार मानने के कारण ही भारतभूमि ने विश्व में प्रतिष्ठा पाई थी। आज देश के सामने उपस्थित समस्याएँ और संकट, भ्रष्ट आचरण के ही परिणाम हैं।

भ्रष्टाचार क्या है? What is the Corruption

सत्य, प्रेम, अहिंसा, धैर्य, क्षमा, अक्रोध, विनय, दया, अस्तेय (चोरी न करना), शूरता आदि ऐसे गुण हैं जो प्रत्येक समाज में सम्मान की दृष्टि से देखे जाते हैं। इन गुणों की उपेक्षा करना या इनके विरोधी दुर्गुणों को अपनाना ही आचरण से भ्रष्ट होना या भ्रष्टाचार है, किन्तु आज भ्रष्टाचार से हमारा तात्पर्य अनैतिक आचरण द्वारा जनता के धन की लूट से है।

भ्रष्टाचार के विविध रूप-
आज भ्रष्टाचार देश के हर वर्ग और क्षेत्र में छाया हुआ है। चाहे शिक्षा हो, चाहे धर्म, चाहे व्यवसाय हो, चाहे राजनीति, यहाँ तक कि कला और विज्ञान भी इस घृणित व्याधि से मुक्त नहीं हैं। सरकारी कार्यालयों में जाइए तो बिना सुविधा शुल्क के आपका काम. नहीं होगा।

भ्रष्टाचार की व्यापकता-
भारत में भ्रष्टाचार का कारण वह औपनिवेशिक जनविरोधी केन्द्रीयकृत प्रशासनिक ढाँचा है, जो देश को अंग्रेजी साम्राज्य से विरासत में मिला है। नेतृत्व की कमजोरी के कारण इसको जनोपयोगी बनाने का प्रयास ही नहीं हो सका है।

भ्रष्टाचार निरन्तर फैलता गया है। जब से भारत में वैश्वीकरण, निजीकरण, उदारीकरण, बाजारीकरण की नीतियाँ बनी हैं, तब से घोटालों की बाढ़ आ गयी है। राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला, एंट्रेक्स-इसरो घोटाला, अवैध खनन घोटाला, आईपीएल घोटाला, नोट के बदले वोट घोटाला, पिछली केन्द्रीय सरकार के खनन तथा ‘टूजी’ घोटाले भ्रष्टाचार की अटूट परंपरा का स्मरण कराते हैं।

भ्रष्ट राजनीतिज्ञ-यथा राजा तथा प्रजा की कहावत के अनुसार भ्रष्टाचार शासकों से जनता की ओर फैल रहा है। अकेले टू जी घोटाले में सरकारी धन की जो लूट हुई है, उससे सभी भारतीय परिवारों को भोजन दिया जा सकता है शिक्षा के कानूनी अधिकार को हकीकत में बदला जा सकता है।

सरकार की जनविरोधी नीतियाँ-
पिछली सरकारों की आर्थिक नीतियाँ, जिनको उदारवाद या आर्थिक सुधार का ‘शुगर कोटेड’ रूप देकर पेश किया गया, जन विरोधी थीं। इनके द्वारा जनता के धन को कानूनी वैध रूप देकर लूटा गया है।

जैसे सट्टा गैर-कानूनी है पर शेयर बाजार तथा वायदा बाजार का सट्टा पूरी तरह कानूनी है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी निजीकरण ने भी भ्रष्टाचार में वृद्धि की है।

जल, जंगल, जमीन, खनिज, प्राकृतिक संसाधन आदि को कानून बदलकर कम्पनियों तथा पूँजीपतियों को लुटाया जाना। किसानों, मजदूरों, गरीबों, आदिवासियों के शोषण का दुष्परिणाम नक्सलवाद के रूप में सामने आ चुका है। टू जी घोटाले में टाटा, रिलायन्स आदि के नाम भी हैं। इन कम्पनियों ने सरकार से सस्ते आवंटन प्राप्त कर विदेशी कम्पनियों को बेचकर करोड़ों रुपयों का लाभ कमाया है।

निवारण के उपाय-
भ्रष्टाचार की इस बाढ़ से जनजीवन की रक्षा केवल चारित्रिक दृढ़ता ही कर सकती है। समाज और देश के व्यापक हित में जब व्यक्ति अपने नैतिक उत्तरदायित्व का अनुभव करे और उसका पालन करे तभी भ्रष्टाचार का विनाश हो सकता है।

भ्रष्टाचार का अन्त करने के लिए वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था को बदलना भी जरूरी है। इसके लिए आई.ए.एस. अधिकारियों को प्राप्त शक्तियों में कमी करना आवश्यक है। निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की योग्यता, आयु तथा कर्त्तव्य परायणता तय होनी चाहिए। अयोग्य जन प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार जनता को होना चाहिए।

चुनाव में खड़े होने वाले व्यक्ति की सम्पत्ति तथा आचरण की जाँच होनी चाहिए। राजनीति में अपराधियों का प्रवेश रुकना चाहिए। पूँजीवादी आर्थिक नीतियाँ जो विदेशी पूँजी पर आधारित हैं, बदलकर जनवादी स्वदेशी अर्थनीति को अपनाया जाना चाहिए। प्रशासन में शुचिता और पारदर्शिता होनी चाहिए।

उपसंहार-
भारत में भ्रष्टाचार की दशा अत्यन्त भयावह है। बड़े-बड़े पूँजीपति, राजनेता तथा प्रशासनिक अधिकारियों का गठजोड़ इसके लिए जिम्मेदार है। इससे मुक्ति के लिए निरन्तर सजग रहकर प्रयास करना जरूरी है।

सौभाग्य से जनता को सजग रहकर उनका समर्थन और सहयोग करना चाहिए। वर्तमान केन्द्रीय सरकार ने एक सीमा तक उच्चस्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का प्रयास किया है। पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया है।

नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर निबंध – Rights And Responsibilities Of Citizens Essay In Hindi

Rights And Responsibilities Of Citizens Essay In Hindi

नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर छोटे तथा बड़े निबंध (Essay on Rights and Responsibilities of Citizens in Hindi)

वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएँ – Problems of senior citizens

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • वरिष्ठ नागरिक का आशय,
  • वरिष्ठ होने की स्थिति,
  • समस्याएँ,
  • समाधान,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
आयु का बढ़ते रहना प्रकृति का अटल नियम है। सभी को एक दिन वृद्ध होना पड़ता है। हमारी संस्कृति वृद्धजनों के प्रति विनम्र और सेवाभावी होने की शिक्षा देती है। आज वृद्धजनों को वरिष्ठ नागरिक कहा जाता है।

वरिष्ठ नागरिक का आशय-
वरिष्ठ नागरिक का आशय क्या है? मनुष्य की वरिष्ठता के अनेक आधार हो सकते हैं किन्तु यहाँ वरिष्ठता का तात्पर्य आयु की परिपक्वता से है। सामान्यतः साठ वर्ष की आयु का व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक माना जाता है।

यह आयु प्राप्त होते ही उसे सरकारी और निजी सेवाओं से मुक्त कर दिया जाता है। मान लिया जाता है कि वह काम करने लायक नहीं रहा। अभी सरकार ने 55 वर्ष की उम्र प्राप्त होने पर महिलाओं को वरिष्ठता के लाभ देने का निश्चय कर लिया है।

वरिष्ठ होने की स्थिति-जब कोई महिला या पुरुष वरिष्ठ होने की अवस्था में पहुँचता है तो समाज, सरकार तथा परिवार के लोग उसे काम करने के अयोग्य मान लेते हैं। सरकार या नियोजक उसे अपनी सेवा से रिटायर कर देते हैं।

घर में भी प्रायः पुत्र उसकी जिम्मेदारियाँ अपने कंधों पर उठा लेते हैं। लड़कों की शादी हो जाती है, घर में बहू आ जाती है तो सास को कार्य-मुक्त कर देती है। इस प्रकार यह अवस्था सत्ता या अधिकार परिवर्तन की द्योतक है।

वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएँ-

(i) फालतू और अकेलेपन की समस्या-
वरिष्ठ नागरिक को फालतू समझा जाता है। माना जाता है कि वह किसी काम का नहीं रहा। नौकरी, व्यापार या अन्य जो काम वह करता था, उससे मुक्त होने के कारण वह खाली ही रहता है। काम के सिलसिले में अनेक लोग उसके पास आते थे, अब कोई नहीं आता। फलतः वह अकेलेपन की समस्या से जूझता रहता है। घर में पत्नी हो तो ठीक है। अगर कहीं उसने पहले ही भगवान से प्यार का नाता जोड़ लिया हो, तब तो यह अकेलापन उसे कहीं का नहीं रहने देता। पैसे तथा शारीरिक शक्ति के चुक जाने से कहीं घूमने-फिरने नहीं जा सकता।

(ii) अपमान की समस्या-
शरीर निर्बल है, जेब खाली है, काम कर नहीं सकते। ऐसी दशा में समाज तथा परिवार से सम्मान की अपेक्षा बढ़ जाती है परन्तु वह मिलता नहीं। सर्वत्र उपेक्षा उसे त्रस्त कर देती है। प्रेमचन्द के ‘गोदान’ का होरी जब अन्न की राशि से एक कटोरा भरकर भिखारी को देना चाहता है, तो उसका पुत्र उसको झटक देता है। इस अपमान से आहत होरी अशक्त शरीर से ही खेतों में काम करने चल पड़ता है। वह बताता है कि वह बेकार नहीं है। अतः अपनी कमाई को अपनी इच्छानुसार खर्च कर सकता है।

(iii) सुरक्षा की समस्या-
शारीरिक शक्ति चुकने तथा समाज और परिवार की उपेक्षा के कारण वरिष्ठ नागरिकों के सामने अपनी सुरक्षा की समस्या भी उठ खड़ी होती है। धन के लालच में बहुत बार उनके नौकर ही उनकी हत्या कर देते हैं।

समाधान-
वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का समाधान सरकार तथा समाज दोनों को मिलकर करना चाहिए। परिवार में उनको सम्मान दिया जाना चाहिए तथा उनको बोझ नहीं समझा जाना चाहिए। आज के व्यस्त जीवन में उनके लिए ‘वृद्धाश्रम’ बनाये जाने चाहिए। पश्चिमी देशों में ऐसे आश्रम हैं।

जब भारत पाश्चात्य सभ्यता को अपना रहा है और उसके दोष भारतीय जीवन में प्रवेश कर रहे हैं तो पश्चिम की जीवन-शैली की अच्छाइयों को अपनाना अनुचित नहीं है। वयस्क नागरिक स्वयं को भी फालतू न मानें तथा किसी उपयोगी कार्य से स्वयं को जोड़ें।।

उपसंहार-
वरिष्ठता या आयु से वृद्धता कोई दोष या अपराध नहीं है। बहुत प्राचीनकाल से हमारे देश में सौ वर्ष जीवित रहने का आदर्श मान्य रहा है। भारतीयों ने सदा प्रार्थना की है-‘जीवेम शरदः शतम्। भारतीय संस्कृति में वृद्धों का सम्मान तथा सेवा करने की शिक्षा दी गई है-

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।

एक्सीलेण्ट हिन्दी अनिवार्य कक्षा-12471 इसी आचरण में वरिष्ठ नागरिकों की समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। यदि आज का भारतीय युवा इन सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील बन सके।

महिलाओं की समाज में भूमिका पर निबंध – Women’s Role In Society Essay In Hindi

Women's Role In Society Essay In Hindi

महिलाओं की समाज में भूमिका पर छोटे तथा बड़े निबंध (Essay on Role of Women Society in Hindi)

कामकाजी महिलाओं की समस्याएँ – राष्ट्रीय विकास में महिलाओं का योगदान – (Problems Of Working Women Or Contribution Of Women In National Development)

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • वर्तमान भारत में महिलाओं की स्थिति,
  • राष्ट्र के विकास में योगदान,
  • कामकाजी महिलाओं की समस्याएँ,
  • समस्याओं का समाधान,
  • उपसंहार।।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
नारी और पुरुष गृहस्थ जीवन के दो पहिये हैं। अब तक सारे संसार में नारी के प्रति दृष्टिकोण में उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं हुआ है। उसे शारीरिक रूप से अक्षम माना जाता रहा है। अत: किसी प्रकार के श्रमसाध्य कार्य (मजदूरी को छोड़कर) में उसे लगाने में संकोच किया जाता रहा है।

लेकिन महिलाओं की शिक्षा में वृद्धि तथा अवसरों के मिलने से इस दिशा में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुआ है। आज महिलाएँ भी पुरुष के समान ही हर क्षेत्र में आगे बढ़कर काम कर रही हैं, यह एक सुखद स्थिति है।

वर्तमान में महिलाओं की स्थिति-
आज महिलाओं द्वारा उच्च से उच्च शिक्षा ग्रहण कर पुरुष के बराबर अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया जा रहा है। चिकित्सा, इन्जीनियरिंग, कम्प्यूटर, प्रौद्योगिकी तथा उच्च प्रशासनिक एवं पुलिस सेवाओं में उनका पुरुषों के समान ही सम्मानजनक स्थान है।

पुलिस सेवा में किरण बेदी जैसी अनेक महिलाएँ अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवा चुकी हैं। आज केन्द्रीय राजधानी दिल्ली और राज्यों की राजधानियों के उच्चपदस्थ स्थानों पर महिलाओं ने अपनी योग्यता स्थापित की है।

योरोप और अमेरिका ही नहीं आज इजरायल, मिस्र और छोटे-छोटे अरब देशों एवं अफ्रीका जैसे -छोटे देशों की अनेक महिलाओं ने वायुयान संचालन एवं सेना, पुलिस और परिवहन के क्षेत्रों में भी कार्य करके पुरुषों की बराबरी का साहस दिखाया है।

भारतीय सेना ने तो देश की युवा महिलाओं पर प्रशंसनीय भरोसा जताया है। अब महिलाओं को भी सेना में लड़ाकू विमानों के संचालन जैसी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी जा रही हैं।

राष्ट्र-विकास में योगदान-
संसार के विकसित देशों और विकासशील देशों में नारी का अपने राष्ट्र-निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान है। चीन और भारत जैसे विशाल आबादी वाले देशों को छोड़कर विश्व के अन्य देशों में बहुत तेजी से औद्योगिक विकास हुआ है।

कुशल और उच्च प्रशिक्षण युक्त पुरुषों के समान ही वहाँ की नारी शक्ति भी उनके विकास में सहयोगिनी हुई है। भारत और चीन में भी कुशल और उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है।

अतः उनको राष्ट्र-निर्माण और विकास में नियोजित करना आवश्यक हो गया है। दोनों ही देशों में कामकाजी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्र के निर्माण और विकास में उनका योगदान कम महत्त्व का नहीं है।

कामकाजी महिलाओं की समस्याएँ-
भारत में शिक्षण-प्रशिक्षण और कामकाज करके योग्यता ग्रहण करने में तो महिलाओं का तेजी से योगदान बढ़ा है परन्तु पुरुष समाज का नारी के प्रति दृष्टिकोण अभी तक नहीं बदला है। आज भी पुरुष नारी को हेय दृष्टि से देखता है।

वह उसे बच्चे बनाने वाली मशीन की तरह ही बनाये रखना चाहता है। अत: उनके विकास और स्वतन्त्रता की राह में हर तरह के काँटे बिछाने के प्रयास किये जा रहे हैं। परिणामस्वरूप महिलाएँ अपनी योग्यता के अनुसार खुलकर कार्य नहीं कर पाती हैं।

भारतीय समाज तो अभी तक प्राचीन सामन्ती मानसिकता से अधिक आगे नहीं बढ़ पाया है। अतः यहाँ कामकाजी महिलाएँ बड़ी कठिनाई से अपना जीवनयापन कर पा रही हैं।

हमारे देश में आज भी अकेली महिलाएं देर रात तक घर से बाहर नहीं रह पाती हैं। यदि भूलवश ऐसा हो भी जाए तो असभ्य दरिन्दों की दरिन्दगी का उन्हें शिकार होना पड़ता है। अतः भारत में अभी भी महिलाएँ सुरक्षित नहीं कही जा सकी। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इस दिशा में कुछ प्रयोग किए जा रहे हैं। देखें क्या हो पाता है?

समस्याओं का समाधान-
सदियों से संघर्ष करते-करते महिलाओं ने बड़ी कठिनाई से इस स्थिति को प्राप्त किया है। जिसमें वह पुरुष की क्रीतदासी न होकर उसकी सहयोगिनी बन पाई है। वह पुरुष के समान ही राष्ट्र निर्माण एवं विकास में भाग ले रही है।

अत: असभ्य आचरण करने वाले थोड़े से दरिन्दों के भय से वह अपना लक्ष्य-त्याग नहीं कर सकती। सरकारी स्तर पर उनके लिए “कामकाजी महिला हॉस्टल” बनाये गये हैं, जहाँ वे सुरक्षित और सुखपूर्वक रहकर अपने राष्ट्र-निर्माण के महान योगदान में भागीदारी निभा रही हैं।

बड़े शहरों में इस प्रकार के सामूहिक फ्लैट्स बनाए गए हैं जिनमें अकेली महिलाएँ सुख-सुविधा सम्पन्न सुरक्षित जीवन-यापन कर रही हैं। कामकाज के स्थान पर भी उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा उपलब्ध है। के प्रसार ने पुरुषों के दृष्टिकोण में भी अपेक्षित परिवर्तन किया है। अतः अब कामकाजी महिलाएँ निश्चिन्त होकर राष्ट्र के विकास में सहयोगिनी बनी हुई हैं।

उपसंहार-
इस प्रकार महिलाएँ जो राष्ट्र-निर्माण में पुरुष के बराबर की ही सहभागिनी रही हैं, आज निर्भय होकर अपने दायित्व का निर्वाह कर रही हैं। पुरुष समाज के समझदार लोगों को इस कार्य में उनका पूर्ण सहयोग देकर तथा प्रोत्साहित करके राष्ट्र-निर्माण के यज्ञ में देश की आधी आबादी की प्रतिभा का विकास करना चाहिए तथा आवश्यक रूप से कार्य संयोजन करना चाहिए।

आतंकवाद पर निबंध – Terrorism Essay in hindi

Terrorism Essay in hindi

आतंकवाद पर छोटे तथा बड़े निबंध (Essay on Terrorism in Hindi)

आतंकवाद : एक विश्वव्यापी समस्या (अथवा) मानव सभ्यता का संकट : आतंकवाद – (Terrorism: A Worldwide Problem Or Crisis Of Human Civilization: Terrorism)

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • आतंकवाद क्या है?
  • आतंकवाद एक विश्वव्यापी समस्या,
  • भारत में आतंकवादी गतिविधियों का इतिहास,
  • आतंकवादी समस्या का समाधान,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना
नहीं सुरक्षित मन्दिर, मस्जिद, गिरजे या गुरुद्वारे।
निर्दोषों के खून बहाते घूम रहे हत्यारे।
पता नहीं कब कहाँ मौत का अग्नि पुंज फट जाए?
चिथड़े-चिथड़े लाशों से निर्दोष धरा पट जाए।

आतंकवाद ने आज मानव-जीवन को कितना दयनीय और असुरक्षित बना दिया है! विश्व का कोई कोना आज मौत के इन सौदागरों से सुरक्षित नहीं है।

आतंकवाद क्या है? What is the Terrorism

उपनिवेशवादी शासकों के विरुद्ध वहाँ की जनता ने कभी हथियार उठाये थे वह एक क्रान्तिकारी अभियान था। उसके पीछे स्वतन्त्रता और न्याय का आधार था। किन्तु आज तो कुकुरमुत्तों की भाँति ढेरों संगठित गिरोह संसार में फैले हुए हैं, जिनके उद्देश्य बड़े सीमित और स्वार्थपूर्ण हैं।

धन ऐंठना, निर्दोष लोगों, महिलाओं और बच्चों तक की हत्या करना तथा मादक पदार्थों एवं शस्त्रों के अवैध व्यापार आदि आज के इन तथाकथित मुक्तिमोर्चों के कुकृत्य हैं।

आतंकवाद एक विश्वव्यापी समस्या-
आज आतंकवाद एक विश्वव्यापी समस्या बन चुका है। आज ऐसे अनेक छद्म संगठन और गिरोह सक्रिय हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं। भारत तो दशकों से आतंकवाद का दंश झेलता आ रहा है किन्तु जब अमेरिकन वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर भस्मसात् हुआ और इंग्लैण्ड की ट्रेनों में धमाके हुए, इण्डोनेशिया के पर्यटन स्थलों पर तबाही हुई तो सारे विश्व को आतंकवाद की भयावहता स्वीकार करनी पड़ी।

आतंकवाद के पीछे विभिन्न देशों के आर्थिक और राजनैतिक स्वार्थ निहित हैं। मादक पदार्थों तथा अवैध शस्त्र व्यापार चलाने वाले माफिया संगठन आतंकवादियों के पोषक बने हुए हैं। कुछ देशों की सरकारें भी आतंकवादियों की संरक्षक बनी हुई हैं। ‘आई.एस.’ तो एक सुसंगठित खूख्वार और घृणित आतंकी संगठन है।

भारत में आतंकवादी गतिविधियों का इतिहास-
भारत में आतंकी गतिविधियाँ पूर्वी सीमान्त से प्रारम्भ हुईं। नागालैण्ड, त्रिपुरा, असम आदि राज्यों में आतंकवाद काफी समय तक प्रभावी रहा। इसके पश्चात् पंजाब और जम्मू-कश्मीर ने आतंकवाद की क्रूरता को झेला।

गुजरात का अक्षरधाम मन्दिर, संसद भवन, मुम्बई की लोकल ट्रेनें, बनारस का संकटमोचन मन्दिर, समझौता एक्सप्रेस, आतंकवाद का निशाना बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त छोटी-मोटी आतंकी घटनाएँ तो आए दिन होती रहती हैं।

26/11 के मुम्बई में हुए आतंकवादी प्रहार ने विश्व को झकझोरा था। कुछ ही समय पूर्व नापाक पड़ोसी द्वारा ‘उड़ी’ ऐयर-बेस में खून का खेल खेला जा चुका है।

आतंकवादी समस्या का समाधान-
आतंकवाद का कुफल अब विश्व के विकसित देश भी भोग रहे हैं। अतः इस विकट समस्या के समाधान के प्रति हर सभ्य देश चिन्तित है। आतंकवाद से छुटकारा तभी हो सकता है जब विश्व के सभी देश इसकी समाप्ति में सक्रिय सहयोग दें। इसका प्रमाण ‘आई.एस’ के विनाश में जुटे विश्व के सभी प्रमुख देशों की भूमिका से मिल रहा है।

‘आई.एस.’ का सर्वनाश अब अधिक दूर नहीं लगता । अतः जनता की जागरूकता, सुरक्षा बलों को समर्थन और दलीय राजनीति से ऊपर उठकर प्रबल इच्छा-शक्ति से ही आतंकवाद का सामना किया जा सकता है।

आतंकवाद को उसी की भाषा में जबाव देकर ही उसे समाप्त किया जा सकता है। भारत द्वारा ‘सर्जीकल अटैक’ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उपसंहार-
अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति, धर्मान्धता और माफिया गिरोहों से ही आतंकवाद दाना-पानी और संरक्षण पा रहा है, किन्तु अब आतंकवाद का निर्यात करने वालों के घर भी जलने लगे हैं। अतः रोग लाइलाज हो जाय उससे पहले ही उसको समाप्त कर देना बुद्धिमानी है। इसके लिए सभी देशों का सहयोग आवश्यक है।

पर्यावरण बचाओ पर निबंध – Environment Essay In Hindi

Environment Essay In Hindi

पर्यावरण बचाओ पर छोटे तथा बड़े निबंध (Essay on Save Environment in Hindi)

प्रदूषण-वृद्धि की समस्या अथवा पर्यावरण बचाओ अभियान – (Pollution problem – Save environment campaign)

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार,
  • पर्यावरण प्रदूषण : जिम्मेदार कौन,
  • पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय,
  • उपसंहार।।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
आज की दुनिया विचित्र नवीन, प्रकृति पर सर्वत्र है विजयी पुरुष आसीन। हैं बँधे नर के करों में वारि, विद्युत, भाप, हुक्म पर चढ़ता-उतरता है पवन का ताप। वैज्ञानिक प्रगति के उन्माद से ग्रस्त मानव ने प्रकृति-माता को दासी के पद पर धकेल दिया है। वह नाना प्रकार से प्रकृति के निर्मम दोहन में व्यस्त है। उसे विरूप बना रहा है। उद्योगों का कूड़ा-कचरा और विषैले विसर्जन पर्यावरण को प्रदूषित करने की होड में लगे हए हैं। मनुष्य ने अपने ही प्रमाद से अपने भविष्य को अंधकारमय बना डाला है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार-आज सृष्टि का कोई पदार्थ, कोई कोना प्रदूषण के प्रहार से नहीं बच पाया है। प्रदूषण मानवता के अस्तित्व पर एक नंगी तलवार की भाँति लटक रहा है। प्रदूषण मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार का है-

(1) जल प्रदूषण-जल मानव जीवन के लिए परम आवश्यक पदार्थ है। जल के परम्परागत स्रोत हैं-कुएँ, तालाब, नदी तथा वर्षा का जल। प्रदूषण ने इस सभी स्रोतों को दूषित कर दिया है। औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ हानिकारक कचरा और रसायन बड़ी बेदर्दी से इन जलस्रोतों में मिल रहे हैं। महानगरों के समीप से बहने वाली नदियों की दशा तो अत्यन्त दयनीय है। गंगा, यमुना, गोमती आदि सभी नदियों की पवित्रता प्रदूषण की भेंट चढ़ गई है।

(2) वायु प्रदूषण-वायु भी जल जितना ही आवश्यक पदार्थ है। श्वास-प्रश्वास के साथ वायु निरन्तर शरीर में आती आज शद्ध वायु का मिलना भी कठिन हो गया है। वाहनों, कारखानों और सड़ते हुए औद्योगिक कचरे ने वायु में भी . जहर भर दिया है। घातक गैसों के रिसाव भी यदा-कदा प्रलय मचाते रहते हैं। गैसीय प्रदूषण ने सूर्य की घातक किरणों से रक्षा करने वाली ‘ओजोन परत’ को भी छेद डाला है।

(3) खाद्य प्रदूषण-प्रदूषित जल और वायु के बीच पनपने वाली वनस्पति या उसका सेवन करने वाले पशु-पक्षी भी आज दूषित हो रहे हैं। चाहे शाकाहारी हो या माँसाहारी कोई भी भोजन के प्रदूषण से नहीं बच सकता।

(4) ध्वनि प्रदूषण-कर्णकटु और कर्कश ध्वनियाँ मनुष्य के मानसिक सन्तुलन को बिगाड़ती हैं और उसकी कार्य-क्षमता को भी कुप्रभावित करती हैं। आकाश में वायुयानों की कानफोड़ ध्वनियाँ, धरती पर वाहनों, यन्त्रों और संगीत का मुफ्त दान करने वाले ध्वनि-विस्तारकों का शोर। सब मिलकर मनुष्य को बहरा बना देने पर तुले हुए हैं।

(5) विकिरणजनित प्रदूषण-परमाणु विस्फोटों तथा परमाणु संयन्त्रों से होते रहने वाले रिसाव आदि से विकिरणजनित प्रदूषण भी मनुष्य को भोगना पड़ रहा है। रूस के चेर्नोबिल तथा जापान के परमाणु केन्द्रों से होने वाला प्रदूषण जग विख्यात है।

पर्यावरण प्रदूषण :
जिम्मेदार कौन ?-प्रायः हर प्रकार के प्रदूषण की वृद्धि के लिए हमारी औद्योगिक और वैज्ञानिक प्रगति तथा मनुष्य का अविवेकपूर्ण आचरण ही जिम्मेदार है। वाहनों का गैस-विसर्जन, चिमनियों का धुआँ, रसायनशालाओं की विषैली गैसें मनुष्यों की साँसों में जहर फूंक रही हैं। सभी प्रकार के प्रदूषण हमारी औद्योगिक और जीवन-स्तर की प्रगति से जुड़ गये हैं। हमारी हालत साँप-छछूदर जैसी हो रही है।

पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय-प्रदूषण ऐसा रोग नहीं है कि जिसका कोई उपचार ही न हो। प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योगों को बस्तियों से सुरक्षित दूरी पर ही स्थापित किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की गन्दगी और प्रदूषित पदार्थ को नदियों और जलाशयों में छोड़ने पर कठोर दण्ड की व्यवस्था होनी चाहिए।

वायु को प्रदूषित करने वाले वाहनों पर भी नियन्त्रण आवश्यक है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने जो दीर्घगामी नीति बनाई है, भारत उसे स्वीकार कर चुका है। बहुसंख्यक देश भी इसे स्वीकार करने को तत्पर दिखते हैं। किन्तु अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति महोदय (ट्रंप) की भूमिका अत्यंत निराशाजनक है।

उपसंहार-पर्यावरण का प्रदूषण एक अदृश्य दानव की भाँति मनुष्य-समाज को निगल रहा है। यह एक विश्वव्यापी संकट है। यदि इस पर समय रहते नियन्त्रण नहीं किया गया तो आदमी शुद्ध जल, वायु, भोजन और शान्त वातावरण के लिए तरस जायेगा। प्रशासन और जनता, दोनों के गम्भीर प्रयासों से ही प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती है।

बेरोजगारी पर निबंध – Unemployment Essay in Hindi

Unemployment Essay in Hindi

बेरोजगारी पर छोटे तथा बड़े निबंध (Essay on Unemployment in Hindi)

(54) बेरोजगारी समस्या और समाधान अथवा बढ़ते बेरोजगार घटते रोजगार – (Unemployment Problem And Solution – Increasing Unemployed Decreasing Employment)

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • भारत में बेरोजगारी का स्वरूप,
  • बेरोजगारी के कारण,
  • निवारण के उपाय,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
बेरोजगारी भारतीय युवावर्ग के तन और मन में लगा हुआ एक घुन है, जो निरन्तर उसकी क्षमता, आस्था और धैर्य को खोखला कर रहा है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बढ़ते बेरोजगारों का समूह देश की अर्थव्यवस्था के दिवालियापन और देश की सरकारों के झूठे वायदों की करुण कहानी है। सच तो यह है कि ‘मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों-ज्यों दवा की आपने।’

भारत में बेरोजगारी का स्वरूप-
देश में बेरोजगारी के कई स्वरूप देखने को मिलते हैं। एक है आंशिक या अल्पकालिक बेरोजगारी और दूसरा पूर्ण बेरोजगारी। आंशिक. बेरोजगारी गाँवों में अधिक देखने को मिलती है।

वहाँ फसल के अवसर पर श्रमिकों को काम मिलता है, शेष समय वे बेरोजगार से ही रहते हैं। निजी प्रतिष्ठानों में कर्मचारी की नियुक्ति अनिश्चितता से पूर्ण रहती है। बेरोजगारी का दूसरा स्वरूप शिक्षित बेरोजगारों तथा अशिक्षित या अकुशल बेरोजगारों के रूप में दिखाई देता है।

बढ़ती बेरोजगारी-आज प्रत्येक परिवार में कुछ व्यक्ति बेरोजगार होते हैं। इन बेरोजगारों का भार परिवार के उन एक-दो सदस्यों पर पड़ता है, जो कुछ कमाते हैं। इस प्रकार निर्धन व्यक्ति और अधिक निर्धन बनता जाता है।

यद्यपि उद्योग-धन्धों का देश में काफी विस्तार हुआ है किन्तु साथ ही कुटीर उद्योगों के विनाश के कारण बेरोजगारी की दशा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो पाया है।

प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में विद्यालयों से निकलने वाले शिक्षित बेरोजगार समस्या को चिन्ताजनक बनाते जा रहे हैं। कृषि की निरन्तर उपेक्षा के कारण गाँवों से शहरों की ओर पलायन हो रहा है। बेरोजगारी अपराधी मानसिकता की वृद्धि का कारण बन रही है।

बेरोजगारी के कारण-भारत में दिनों-दिन बढ़ती बेरोजगारी के भी कुछ कारण हैं। इन कारणों का निम्नवत् वर्गीकरण किया जा सकता है-

(क) जनसंख्या वृद्धि-यह बेरोजगारी समस्या का मुख्य कारण है। जनसंख्या के घनत्व की दृष्टि से चीन के बाद हमारे ही देश का नाम आता है। जनसंख्या तो बढ़ती है, किन्तु रोजगार के स्रोत नहीं बढ़ते। अत: ज्यों-ज्यों जनसंख्या बढ़ती है, त्यों-त्यों बेरोजगारों की संख्या में भी वृद्धि होती जा रही है।

(ख) दूषित शिक्षा प्रणाली-आज की शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक परामर्श की कोई व्यवस्था अभी संतोषजनक नहीं है। आज का बालक जो शिक्षा पाता है, वह उद्देश्यरहित होती है। आजकल अनेक रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, किन्तु अत्यन्त महँगे होने के कारण सामान्य छात्र की पहुँच से बाहर हैं। इस प्रकार वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी बेकारी की समस्या का मुख्य कारण है।

(ग) उद्योग नीति-सरकार की उद्योग नीति भी इस समस्या को विकराल बना रही है। हमारे यहाँ औद्योगिकीकरण के रूप में बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जाता रहा है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की दृष्टि से यह एक अच्छा कदम है, किन्तु मशीनीकरण के कारण बेकारी की समस्या और बढ़ गयी है। लघु अथवा कुटीर उद्योगों के विकास के लिए जो प्रयास किये जा रहे हैं, वे नितान्त अपर्याप्त हैं।

वर्तमान सरकार ने मनरेगा योजना को व्यवस्थित बनाकर, मुद्रा, स्टार्टअप, स्टेण्ड अप, जनधन खाता योजना आदि के द्वारा, बेरोजगारी की समस्या के हल के लिए सार्थक और पारदर्शी प्रयास किए गए हैं। अभी परिणाम भविष्य के गर्भ में हैं।

(घ) आरक्षण नीति-आज आरक्षण के नाम पर समाज के एक बड़े शिक्षित वर्ग की दुर्दशा हो रही है। राजनीतिक स्वार्थों के कारण शिक्षित बेरोजगारों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है।

(ङ) स्वरोजगार योजनाओं का दुरुपयोग-जवाहर रोजगार योजना, नगरीय रोजगार योजना, स्वर्ण जयन्ती योजना आदि सरकारी योजनाएँ केवल स्वार्थी और ऊपर तक पहुँच रखने वाले लोगों की जेबें भरती रही हैं। उनका लाभ वास्तविक पात्रों को मिल पाना बड़ा कठिन रहा है। अब सरकारी योजनाओं के लाभ पात्रों के खाते में सीधे पहुँचाकर इस भ्रष्ट परंपरा को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

निवारण के उपाय-किसी समस्या का कारण जान लेने के बाद निवारण का मार्ग स्वयं खुल जाता है। आज सबसे अधिक आवश्यकता सामाजिक क्रान्ति लाने की है। हम प्राचीन व्यवस्थाओं और मान्यताओं को नये युग के अनुकूल ढालें, श्रम का सम्मान करें, यह परमावश्यक है। जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण भी आज के युग की माँग है, किन्तु यह कार्य केवल प्रशासनिक स्तर से सम्भव नहीं हो सकता। सरकार को मुख्य रूप से दो बातों पर ध्यान देना चाहिए-

  • शिक्षा व्यवसाय केन्द्रित हो। शिक्षार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ उचित परामर्श भी दिया जाय।
  • लघु एवं कुटीर उद्योगों को विकसित किया जाय और सभी रोजगारपरक योजनाएँ व्यावहारिक हों।

उपसंहार-
आज प्रत्येक राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा-पत्र में बेकारी की समस्या के समाधान का आश्वासन देता है। कोई-कोई दल यह भी कहता है कि हम प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार देंगे। यदि यह सम्भव न हुआ तो प्रत्येक बेरोजगार व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता देंगे। किन्तु बेरोजगारी भत्ता देने से ही समस्या का समाधान नहीं होगा और फिर यह सब कहने की ही बातें हैं। इस समस्या का हल तब तक नहीं होगा जब तक कि कोई ठोस और सुनियोजित कार्यक्रम लागू नहीं होता।

मोबाइल फोन पर निबंध – Mobile Phone Essay In Hindi

Mobile Phone Essay In Hindi

मोबाइल फोन पर छोटे-बड़े निबंध (Essay on Mobile Phone in Hindi)

मोबाइल फोन संचार क्रान्ति में योगदान – Mobile Phone Contribution To Communication Revolution And Uses

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • मोबाइल-कार्यपद्धति,
  • एक उपयोगी यंत्र,
  • संचार क्रांति में योगदान,
  • लाभ और हानि,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
अपने परिचितों, मित्रों और घर के लोगों से बातें करना और अपने से दूर होने की दशा में उनका कुशल-क्षेम जानना प्रत्येक मनुष्य की इच्छा होती है। पहले यह कार्य संदेशवाहकों, दूतों, पत्रों आदि के माध्यम से होता था। शीघ्र सूचना देने का काम तार द्वारा होता था। फिर टेलीफोन आया और अब मोबाइल का युग चल रहा है।

मोबाइल-
कार्यपद्धति-टेलीफोन का प्रयोग बातचीत करने के लिए किया जाता था। यह तारों से जुड़ा रहता था। आज टेलीफोन का स्थान मोबाइल फोन ने ले लिया है। परस्पर बातचीत करने और सूचना देने के लिए मोबाइल एक उपयोगी यंत्र है। इसमें कोई तार नहीं होता। ध्वनि तरंगों के प्रेषण और ग्रहण द्वारा ही मोबाइल अपना काम करता है।

एक उपयोगी यंत्र-
मोबाइल एक उपयोगी यंत्र है। यह अत्यन्त छोटा होता है। इसको जेब में रखा जा सकता है अथवा हाथ में पकड़ा जा सकता है। इसमें लगी हुई सिम इस यंत्र के संचालन में मुख्य भूमिका अदा करती है। अपनी बात दूसरे तक पहुँचाने तथा उसकी बात सुनने में यह यंत्र हमारी सहायता करता है।

अत्यन्त छोटा और कम भार का होने के कारण इसको अपने पास रखना और एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाना-ले जाना बहुत आसान है। अब तो मोबाइल अनेक भूमिकाएँ निभा रहा है। नित्य नए ‘एप्स’ की सहायता से मोबाइल सहस्रभुजी रूप मिल गया है। ई-बैंकिंग, ई-व्यापार, फोटो लेना–भेजना और डिजिटल इंडिया के स्वप्न को साकार करने में मोबाइल एक विश्वसनीय सहायक बनता जा रहा है।

संचार क्रांति में योगदान-
यह संचार क्रान्ति का युग है। इस क्रान्ति में मोबाइल का महत्त्वपूर्ण योगदान है। आज हम किसी दूरस्थ व्यक्ति से बहुत कम समय में सम्पर्क कर सकते हैं। कुछ समय पूर्व तक मोबाइल का उपयोग करने वालों की संख्या बहुत कम थी।

अब एक बड़ी संख्या में लोग इसका प्रयोग करते हैं। संचार उपग्रहों के अंतरिक्ष में स्थापित होने से इस क्षेत्र में कार्य-कुशलता की बहुत वृद्धि हुई है। संचार के क्षेत्र में कार्यरत कम्पनियों की सेवाएँ भी सुधरी हैं। मोबाइल हमारी एक जरूरत बन गया है।

लाभ और हानि-
प्रत्येक वस्तु से कुछ लाभ होता है तो कुछ हानि भी होती है। एक-दूसरे को परस्पर जोड़ना मोबाइल का सबसे बड़ा लाभ है। मोबाइल का अधिक समय तक प्रयोग करने से यह हमारा स्वास्थ्य तथा समय नष्ट करता है। मोबाइल गेम तथा चेटिंग में समय तथा धन दोनों ही नष्ट होते हैं। मोबाइल अनेक प्रकार के अपराधों का जनक और सहायक भी बन गया है।

उपसंहार-
मोबाइल का प्रयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए। इस यंत्र की उपयोगिता आपस में बातचीत करने में ही है। मोबाइल पर संगीत सुनना, फिल्म देखना, चेटिंग करना आदि किसी भी प्रकार प्रशंसनीय नहीं है। यदि इनसे बचा जाये तो मोबाइल एक उपयोगी उपकरण है।

भारत में लोकतंत्र पर निबंध – Democracy in India Essay in Hindi

Democracy in India Essay in Hindi

भारत में लोकतंत्र पर बड़े तथा छोटे निबंध (Essay on Democracy in India in Hindi)

जनतंत्र का आधार चुनाव – Democracy’s Base Election

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • जनता और चुनाव,
  • राजनैतिक दल और नेता,
  • चुनाव प्रचार,
  • चुनाव का दिन,
  • मतगणना,
  • उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना-
चुनाव लोकतंत्र का आधार है। एक निश्चित समय के लिए जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है। ये लोग मिलकर देश की व्यवस्था चलाने के लिए सरकार का गठन करते हैं। संविधान द्वारा अधिकार प्राप्त आयोग चुनाव कराने की व्यवस्था करता है। उसका दायित्व स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना होता है। लोकतंत्र के लिए चुनाव आवश्यक है। उसके बिना लोकतंत्र नहीं चल सकता।

जनता और चुनाव-
चुनाव का अधिकार जनता को होता है। भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक वयस्क स्त्री-पुरुष को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। पच्चीस वर्ष का होने के बाद प्रत्येक स्त्री-पुरुष को चुनाव में खड़ा होने का अपि कार है। हमारे देश में अनेक राजनैतिक दल हैं। ये दल चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा करते हैं। जनता जिसको पसन्द करती है उसको वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुनती है। इस प्रकार निर्वाचन में जनता बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। उसके बिना निर्वाचन का कार्य हो ही नहीं सकता।

राजनैतिक दल और नेता-
भारत में अनेक राजनैतिक दल हैं। इनमें दो-चार राष्ट्रीय स्तर के तथा शेष सभी क्षेत्रीय दल हैं। ये चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारते हैं। कुछ लोग निर्दलीय रूप से भी चुनाव लड़ते हैं। चुनाव की घोषणा होने पर राजनैतिक दल किसी क्षेत्र से एक उम्मीदवार को टिकट देता है।

टिकट पाने के लिए भीषण मारामारी होती है। उससे आपसी सद्भाव टूटता है, जातिवाद तथा सम्प्रदायवाद बढ़ता है, एक-दूसरे के विरुद्ध आरोप-प्रत्यारोप लगाये जाते हैं। इस प्रकार चुनाव शांति और गम्भीरता के साथ नहीं हो पाता।

चुनाव प्रचार-
नामांकन पूरा होने के साथ ही प्रत्याशी तथा दल अपना प्रचार आरम्भ कर देते हैं। इसके लिए अखबारों तथा दूरदर्शन पर विज्ञापन दिए जाते हैं, जनसभाएँ होती हैं, झण्डा-बैनर आदि का प्रयोग होता है, जुलूस निकाले जाते. अन्त में प्रत्याशी अपने मतदाताओं से व्यक्तिगत सम्पर्क करता है।

उस समय वह विनम्रता की साकार मूर्ति बन जाता है। जनता के लिए यह समय बड़ा महत्त्वपूर्ण होता है। वैसे कोई उसे पूछे या न पूछे, इस समय नेतागण उसके घर की धूल ले लेते है। चुनाव प्रचार का समय बड़ा कठिन होता है।

इस समय दंगे तथा झगड़े होने का भय सदा बना रहता है। चुनाव से पूर्व प्रचार बन्द हो जाता है। कुछ स्वार्थी नेता रात के अंधेरे में वोटरों को नकद रुपया तथा शराब देकर उनको अपने पक्ष में वोट देने के लिए तैयार करते हैं।

चुनाव का दिन निर्वाचन आयोग चुनाव की व्यवस्था करता है। मतदान केन्द्र पर मतदान अधिकारी उपस्थित रहते हैं जो मतदान कराते हैं। अपने मतदान केन्द्र पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदाता मतदान करता है।

आजकल ई. वी. एम. का बटन दबाकर मतदान कराया जाता है। इस मशीन में प्रत्येक प्रत्याशी का नाम तथा चुनाव-चिह्न अंकित होता है। उसके एक्सीलेण्ट सामने लगा बटन दबाने से उसको वोट मिल जाता है। अब सबसे नीचे एक बटन नोटा अर्थात् इनमें से कोई नहीं का भी होता है।

जिस मतदाता को कोई उम्मीदवार पसंद नहीं होता वह नोटा का बटन दबाता है। चुनाव शांतिपूर्वक कराने की कठोर व्यवस्था की जाती है तथा पुलिस और सुरक्षा बलों की ड्यूटी लगाई जाती है। किन्तु कुछ स्थानों पर मारपीट, बूथ कैप्चरिंग, गोलीबारी आदि की घटनाएँ होती हैं।

मतगणना-
मतदान का काम समाप्त होने के पश्चात् मतगणना की जाती है। गणना में जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा मत मिलते हैं उसे विजयी घोषित किया जाता है। जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, उसके विजयी उम्मीदवार अपना एक नेता चुनते हैं।

वही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है और शासन-व्यवस्था सँभालता है।

उपसंहार-
चुनाव में भाग लेने वाले मतदाता को जाति, धर्म अथवा अन्य दबाव से मुक्त होकर वोट करना चाहिए। उसे निष्पक्ष होकर सुयोग्य उम्मीदवार का ही चयन करना चाहिए। इधर ई. वी. एम. मशीन की प्रामाणिकता को लेकर, उत्तर-प्रदेश आदि राज्यों के चुनाव परिणामों के पश्चात्, शंका युक्त सवाल भी उठे हैं। किन्तु ये शंकाएँ वास्तविक कम और पराजय की पीड़ा को व्यक्त करने वाली ही अधिक प्रतीत होती हैं। कुल मिलाकर हमारा निर्वाचन आयोग अपनी सुव्यवस्था के लिए बधाई का पात्र सिद्ध होता है। निष्पक्ष और त्रुटिरहित मतदान ही लोकतंत्र का मूलाधार है।